Culture & Tourism
इंडिया सिने हब
फ़िल्म-शूटिंग परमिट के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाना
Posted On:
22 SEP 2026 1:54PM
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इंडिया सिने हब (आईसीएच) सिंगल-विंडो डिजिटल पोर्टल है। यह देश-विदेश के क्रिएटर्स के लिए फ़िल्म परमिट, वीज़ा प्रोसेसिंग और वेंडर तक पहुँच को आसान बनाता है। इस पोर्टल का प्रबंधन भारतीय राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) कर रहा है। यह पोर्टल, राज्य की मंज़ूरी, पुलिस क्लीयरेंस और सह-निर्माण आवेदनों को एक ही केंद्रीय प्रणाली में लाकर कई राज्यों से जुड़ी अफ़सरशाही वाली मुश्किलों को खत्म करता है। यह आसान तरीका पूरे भारत में फ़िल्म शूटिंग को तेज़ और ज़्यादा सुलभ बनाता है, जिससे देश की तेज़ी से बढ़ती मनोरंजन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
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भारत में फ़िल्म बनाना आसान बनाना
भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक कलाओं और शानदार फ़िल्मों के लिए प्रसिद्ध है। यह फ़िल्म, टेलीविज़न और ऑनलाइन कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में तेज़ी से वैश्विक महाशक्ति के तौर पर उभर रहा है। इस इकलौते क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024 में 13.1 बिलियन अमरीकी डॉलर का राजस्व कमाया, जो 2019 की तुलना में 18 प्रतिशत ज़्यादा है। आने वाले वर्षों में यह वृद्धि 6-10 प्रतिशत की दर से जारी रहने की आशा है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2029 तक कुल राजस्व लगभग 17.5-19.7 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुँच जाएगा। युवा आबादी, तेज़ी से फैलते 5G नेटवर्क और बहुत सस्ते डेटा के कारण भारत अपने कंटेंट इकोसिस्टम का तेज़ी से विस्तार कर रहा है।
भारत सिर्फ़ फ़िल्में और डिजिटल कंटेंट ही नहीं बना रहा है; यह देश-विदेश के फ़िल्म निर्माताओं के लिए शूटिंग की बेहतरीन जगह भी है। इसकी विविधतापूर्ण भौगोलिक स्थिति में सुंदर हिमालय से लेकर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के सफ़ेद रेत वाले बीच शामिल हैं। राजस्थान के किलों और महलों जैसी यूनेस्को विश्व विरासत स्थलों के साथ, भारत फ़िल्म निर्माताओं और पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थान के तौर पर उभरा है।
सरकार भारत में फ़िल्म निर्माण को और बढ़ावा देने के लिए कई सुधार कर रही है। सरकार ने ऐसा ही एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है जिसका नाम इंडिया सिने हब (आईसीएच) है। इसका उद्देश्य भारत में अलग-अलग स्थानों पर फ़िल्मों और लाइव इवेंट्स के लिए शूटिंग परमिट की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
इंडिया सिने हब (आईसीएच) डिजिटल, सिंगल-विंडो प्लेटफ़ॉर्म है। इसे देशभर में फ़िल्म परमिट लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाकर और संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल को आसान बनाकर, यह कारोबार करना सुगम बनाने ('ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस') को बढ़ावा देता है और शूटिंग के लिए आकर्षक वैश्विक देश के तौर पर भारत की स्थिति को मज़बूत करता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर, यह प्लेटफ़ॉर्म उन्हें अपनी अलग-अलग तरह की फ़िल्म शूटिंग लोकेशन्स, अवसंरचना और संसाधनों को दिखाने का अवसर देता है, जिससे पर्यटन और स्थानीय आर्थिक विकास के अवसर पैदा होते हैं। फ़िल्म निर्माण की प्रक्रिया में ज़्यादा दक्षता, पारदर्शिता और आसान पहुँच लाकर, 'इंडिया सिने हब' फ़िल्म निर्माताओं के लिए बेहतर माहौल बना रहा है और फ़िल्म प्रोडक्शन के लिए भारत को पसंदीदा स्थल के तौर पर उभरने में सहायता कर रहा है।
फ़िल्म परमिट के अलावा, यह प्लेटफ़ॉर्म 'लाइव इवेंट्स डेवलपमेंट सेल' (एलईडीसी) के लिए मुख्य डिजिटल अवसंरचना के तौर पर लाइव इवेंट की मंज़ूरी में भी सहायता करने के लिए अपना दायरा बढ़ा रहा है। वेन्यू-मैपिंग के ज़रिए, इवेंट के प्रस्तावों को केंद्रीय स्तर पर समन्वय के लिए संबंधित स्थानीय अधिकारियों और नोडल अधिकारियों तक पहुँचाया जाता है—जिसमें पहले से ही 9 प्रमुख वेन्यू शामिल हो चुके हैं।
इंडिया सिने हब: फ़िल्म परमिट के लिए सिंगल पोर्टल
इंडिया सिने हब का संचालन भारतीय राष्ट्रीय नेशनल फ़िल्म विकास निगम (एनएफडीसी) करता है। आईसीएच फ़िल्म निर्माण के परमिट के लिए डिजिटल सिंगल-विंडो पोर्टल के तौर पर काम करता है। एनएफडीसी का कार्य भारतीय सिनेमा को बढ़ावा देना है। उसके साथ ही, यह भारत सरकार के अंतर्गत एक संगठन के तौर पर काम करता है।

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एनएफडीसी: भारतीय फ़िल्म उद्योग को प्रोत्साहन
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सरकार ने 1975 में एनएफडीसी की स्थापना सरकार की थी। इसे भारतीय फ़िल्म उद्योग को बढ़ावा देने और उसके विकास की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। समय के साथ, इसने फ़िल्म फ़ाइनेंस कॉरपोरेशन, इंडियन मोशन पिक्चर एक्सपोर्ट कॉरपोरेशन और 2020 के सरकारी आदेश के बाद फ़िल्म्स डिवीज़न, फ़िल्म समारोह निदेशालय, नेशनल फ़िल्म आर्काइव ऑफ़ इंडिया और चिल्ड्रन्स फ़िल्म सोसाइटी, इंडिया को अपने साथ मिलाकर विस्तार किया। आज, यह सभी भारतीय भाषाओं में फ़िल्म विकास, प्रोडक्शन, प्रमोशन और संरक्षण के लिए पूरी तरह से एकीकृत संस्था के तौर पर काम करता है।
मुख्य फ़ोकस:
1. सार्वजनिक-निजी साझेदारी के ज़रिए फ़िल्म परियोजनाओं का सह- निर्माण करना।
2. भारत में विदेशी शूट के लिए लाइन प्रोडक्शन और विदेशों में एनिमेशन सर्विस देना।
3. गोवा में भारतीय अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव (इफ्फी) के साथ-साथ 'फ़िल्म बाज़ार इंडिया' आयोजित करना, जो दक्षिण एशिया का बड़ा सह- निर्माण और वितरण बाज़ार है।
मुख्य सिद्धांत:
मिशन: बहुभाषी भारतीय फ़िल्मों को समर्थन देकर सिनेमाई उत्कृष्टता और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना।
विज़न: स्वतंत्र भारतीय सिनेमा के लिए देश और दुनिया में सराहना बढ़ाना।
उद्देश्य:
a. पटकथा विकास, कार्यशाला और सह- निर्माण के ज़रिए प्रतिभा को बढ़ावा देना।
b. सिनेमा के ज़रिए दुनिया भर में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देना।
c. उद्योग की ज़रूरतों के हिसाब से तेज़ी से काम करने वाला संगठन बनाए रखना।
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इंडिया सिने हब की विशेषताएँ
इंडिया सिने हब, भारत में कंटेंट की फ़िल्मिंग या लाइव इवेंट आयोजित करने के इच्छुक क्रिएटर्स को ये सुविधाएँ देता है:
- देश-विदेश के क्रिएटर्स को फ़िल्मिंग की अनुमति के आवेदन करने के लिए एकीकृत पोर्टल उपलब्ध कराता है। यह राज्य-स्तरीय सिस्टम को एकीकृत करता है और उन राज्यों के लिए कॉमन एप्लीकेशन फ़ॉर्म उपलब्ध कराता है जहाँ ऑनलाइन प्रोसेसिंग की सुविधा नहीं है।
- इंटरनेशनल क्रिएटर्स आईसीएच के ज़रिए फ़िल्मिंग की अनुमति के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे फ़िल्म वीज़ा मिलना आसान हो जाता है।
- सह- निर्माण उपक्रम शुरू करने की अनुमति के लिए आवेदनों को प्रोसेस करता है और ऐसे समझौतों के बारे में विस्तृत दिशानिर्देश उपलब्ध कराता है।

- इसमें फ़िल्म वीज़ा, विनियमों, हवाई फ़िल्मांकन, जानवरों के फ़िल्मांकन, वनों और स्मारकों पर फ़िल्मांकन के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
- यह शूटिंग लोकेशन, संबंधित परमिट अधिकारियों और भारत के फ़िल्म निर्माण हब के बारे में जानकारी और जीआईएस-आधारित लोकेशन डायरेक्टरी उपलब्ध कराता है।
भारत के फ़िल्म शहर
भारत में कई बड़े प्रोडक्शन हब हैं, जिनमें 1.6 लाख से ज़्यादा लोग काम करते हैं। ऐसे हब वाले शहरों में मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, तिरुवनंतपुरम/कोच्चि, गुवाहाटी, भुवनेश्वर और दिल्ली शामिल हैं। इनमें से तीन स्थापित और प्रमुख फ़िल्म शहर हैं: मुंबई (महाराष्ट्र) में फ़िल्म सिटी, हैदराबाद (तेलंगाना) में रामोजी फ़िल्म सिटी और नोएडा (उत्तर प्रदेश) में नोएडा फ़िल्म सिटी। ये शहर दुनिया भर के फ़िल्म निर्माताओं को आकर्षित करके मीडिया और मनोरंजन सेवाओं के लिए भारत को 'वन-स्टॉप डेस्टिनेशन' के तौर पर उभारने में योगदान दे रहे हैं।
मुंबई फ़िल्म सिटी
मुंबई के गोरेगांव में स्थित मुंबई फ़िल्म सिटी दुनिया के सबसे बड़े स्टूडियो कॉम्प्लेक्स में से एक है। यहाँ फ़िल्म निर्माताओं की ज़रूरत की सभी सुविधाएँ मौजूद हैं। यह 520 एकड़ से ज़्यादा क्षेत्र में फैली है और यहाँ लगभग 42 आउटडोर शूटिंग लोकेशन हैं। फ़िल्म सिटी में पहाड़ियाँ, घाटियाँ और खड्ड, समतल खुली जगहें, प्राकृतिक जंगल, झाड़ियाँ और जलाशय जैसी विविध प्राकृतिक बनावटें मौजूद हैं। फ़िल्म सिटी की स्थापना 1977 में महाराष्ट्र सरकार ने की थी और भारतीय फ़िल्म उद्योग के संस्थापक की याद में 2001 में इसका नाम बदलकर 'दादा साहब फाल्के चित्रनगरी' कर दिया गया।
रामोजी फ़िल्म सिटी (हैदराबाद)
रामोजी फ़िल्म सिटी की स्थापना 1996 में रामोजी ग्रुप ने की थी। इसे गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया का सबसे बड़ा फ़िल्म स्टूडियो कॉम्प्लेक्स प्रमाणित किया है। यह दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत फ़िल्म सिटी और भारत का एकमात्र थीम-आधारित हॉलिडे डेस्टिनेशन भी है। इस कॉम्प्लेक्स में एक साथ लगभग 40 भारतीय फ़िल्मों का निर्माण किया जा सकता है और यहाँ 6,000 लोग कार्य करते हैं। यह 2,000 एकड़ में फैला है, यहाँ 500 से ज़्यादा लोकेशन उपलब्ध हैं और यहाँ एक साथ 20 अंतरराष्ट्रीय फ़िल्मों की शूटिंग हो सकती है।
नोएडा फ़िल्म सिटी
नोएडा फ़िल्म सिटी में कई फ़िल्म स्टूडियो और मीडिया हाउस हैं। यहाँ सैटेलाइट चैनल, मल्टीप्लेक्स ऑफ़िस, प्रकाशन कंपनियाँ, रेडियो ब्रॉडकास्टिंग, ऑडियो इंडस्ट्री की बड़ी कंपनियाँ और फ़िल्म कंपनियाँ मौजूद हैं। यह 100 एकड़ में फैला है। इसमें 16 स्टूडियो और 350 चैनल हैं जो 162 देशों में प्रसारण करते हैं। यह टेलीविज़न और मीडिया बिज़नेस का केंद्र है। फ़िल्म सिटी में लगभग 17,000 मीडिया प्रोफ़ेशनल काम करते हैं, जिससे जुड़े और सहयोगी क्षेत्रों में लगभग 1.5 लाख लोगों को रोज़गार और आजीविका के अवसर मिलते हैं और व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है।
नई फ़िल्म सिटी का विकास
डिजिटल कंटेंट और मीडिया अब भारत में मीडिया के सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक हैं। भारत में डिजिटल कंटेंट के सबसे युवा (15-29 वर्ष) उपभोक्ता भी हैं और कंटेंट बनाने वालों का बड़ा समूह भी है। यह पीढ़ी न केवल ग्लोबल कंटेंट की मांग बढ़ा रही है, बल्कि शॉर्ट-फ़ॉर्म वीडियो, गेमिंग, लाइव स्ट्रीमिंग और स्थानीय भाषा के कंटेंट प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए ट्रेंड्स को भी सक्रिय रूप से आकार दे रही है। भारत में इंटरनेट का दायरा भी बढ़ रहा है। इंटरनेट सब्सक्राइबर 2014 में 25.15 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 के अंत तक 109.2 करोड़ से ज़्यादा हो गए। वायरलेस डेटा की लागत 2014 में ₹308/GB से घटकर 2026 में ₹7.51/GB हो गई, जिससे डिजिटल सेवाएं ज़्यादा सस्ती हो गईं। अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 99.9% ज़िलों में 5G सेवाएं उपलब्ध हैं।
डिजिटल रूप से जागरूक उपभोक्ताओं और सस्ते वायरलेस डेटा के साथ बढ़ते इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण डिजिटल कंटेंट की मांग बढ़ रही है, जिससे इस क्षेत्र में ज़बरदस्त तेज़ी आने की आशा है। इसके साथ तालमेल बिठाने के लिए, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार जैसे राज्य प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर फ़िल्म सिटी की अवसंरचना बना रहे हैं। क्षेत्रीय सिनेमा और राज्यों से मिलने वाले फ़िल्मिंग इंसेंटिव के कारण, इस क्षेत्र में रोज़गार लगभग 3.2% की दर से बढ़ सकता है, जिससे 2030 तक देश भर में लगभग 2,00,000 लोगों को रोज़गार मिल सकता है। भारत तेज़ी से डिजिटल कंटेंट के लिए दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता आधार से कंटेंट बनाने, नवाचार और वितरण के क्षेत्र में मज़बूत वैश्विक महाशक्ति बनने की ओर बढ़ रहा है।
- इसमें अलग-अलग राज्यों के लोकल वेंडर्स की जानकारी देने वाली सत्यापित फ़िल्म और नॉन-फ़िल्म रिसोर्स डायरेक्टरीज़ शामिल हैं, जैसे:
a. पोस्ट-प्रोडक्शन कंपनियाँ
b. प्रॉपर्टी रेंटल
c. फ़िल्ममेकर्स और टैलेंट
d. फ़िल्म स्टूडियो
e. इक्विपमेंट रेंटल
f. कास्टिंग एजेंसियाँ
g. कैटरिंग यूनिट्स
h. होटल और रहने की जगह
i. मेडिकल सुविधाएँ
j. सुरक्षा सेवाएं
k. ट्रैवल ऑपरेटर्स
'मेड इन इंडिया' फ़िल्मों के ज़रिए भारतीय पर्यटन को प्रोत्साहन
भारतीय फ़िल्मों की वजह से अक्सर पर्यटन में बढ़ोतरी हुई है। भारतीय फ़िल्म उद्योग को बढ़ावा देने वाली ऐसी ही कई फ़िल्मों में से एक है '3 इडियट्स'। EY-FICCI की रिपोर्ट के अनुसार, इस फ़िल्म के बाद लद्दाख में पर्यटकों की संख्या 2.4 गुना बढ़ गई। इसी तरह, सिंगापुर टूरिज़्म बोर्ड के साथ मिलकर सिंगापुर में शूट की गई फ़िल्म 'कृष' ने देश में भारतीय पर्यटकों की संख्या को 60 लाख से बढ़ाकर 70 लाख कर दिया। घरेलू हिट और राजस्थान जैसी पसंदीदा जगहों के अलावा, भारत की विज़ुअल विविधता और कम लागत वाला प्रोडक्शन माहौल बड़ी वैश्विक परियोजनाओं को आकर्षित करता रहता है। इनमें 'स्लमडॉग मिलियनेयर' और 'लाइफ़ ऑफ़ पाई' जैसी ऑस्कर-विजेता फ़िल्मों से लेकर नेटफ़्लिक्स और अमेज़न प्राइम जैसे ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म के ओरिजिनल प्रोडक्शन तक शामिल हैं।
मध्य प्रदेश ने अपने समावेशी टूरिज़्म इकोसिस्टम के लिए 68वें नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड्स में सर्वाधिक फिल्म अनुकूल राज्य ("मोस्ट फ़िल्म फ़्रेंडली स्टेट") का अवॉर्ड जीता। वहीं, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, केरलम और उत्तराखंड जैसे राज्य अवसंरचना से जुड़े फ़ायदे, सरकारी लोकेशन फ़ीस माफ़ी और 2 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी देकर फ़िल्म निर्माताओं को आकर्षित करते हैं। फ़िल्म टूरिज़्म से स्थानीय रोज़गार मिलता है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फ़ायदा होता है, इसके साथ ही भारत की सांस्कृतिक विरासत को दिखाया और संरक्षित किया जाता है।
- मज़बूत एन्क्रिप्शन के साथ बनाया गया यह पोर्टल बड़ी संख्या में एप्लीकेशन और यूज़र ट्रैफ़िक को संभालने में सक्षम है।

इसके अतिरिक्त, डैशबोर्ड से कुल एप्लीकेशन की निगरानी की जाती है और राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंज़ूरी का विवरण उपलब्ध कराता है।

भारत को प्रमुख फ़िल्मिंग हब के तौर पर स्थापित करना
दुनिया के सबसे बड़े फ़िल्म उद्योग में से एक, भारत का फ़िल्म उद्योग फ़िल्म पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कम जानी-पहचानी जगहों को लोगों की नज़र में लाता है और फ़िल्मिंग लोकेशन को ऐसे पर्यटन आकर्षण में बदल देता है जो देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को दिखाते हैं। इस क्षमता का समर्थन करते हुए, 'इंडिया सिने हब' (आईसीएच) केंद्रीय, सिंगल-विंडो प्लेटफ़ॉर्म के तौर पर काम करता है जो फ़िल्म प्रोडक्शन से जुड़ी नियामक प्रक्रियाओं को आसान बनाता है। फ़िल्म निर्माता शूटिंग परमिट के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन को संबंधित मंत्रालयों और राज्य नोडल अधिकारियों के पास डिजिटल रूप से भेजा जाता है। इससे आसान प्रक्रिया के ज़रिए मल्टी-एजेंसी मंज़ूरी, लोकेशन परमिशन और फ़िल्म वीज़ा के लिए तालमेल बिठाना आसान हो जाता है।
संदर्भ
सूचना और प्रसारण मंत्रालय
https://indiacinehub.gov.in/
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2279150®=48&lang=1
https://nfdcindia.com/company-profile/en
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
https://www.investindia.gov.in/team-india-blogs/exploring-potential-film-tourism-india-catalyst-economic-growth-and-cultural
PIB Backgrounders
https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?Id=150840®=3&lang=2
Deloitte
https://www.deloitte.com/in/en/Industries/telecom-media-entertainment/perspectives/economic-impact-of-the-film-television-and-online-curated-content.html
EY
https://www.ey.com/content/dam/ey-unified-site/ey-com/en-in/insights/media-entertainment/documents/ey-a-studio-called-india-v1.pdf
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