Rural Prosperity
वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम
समावेशी विकास के माध्यम से भारत की सीमाओं का सुदृढ़ीकरण
Posted On:
06 SEP 2026 10:52AM
वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम (VVP) ने भारत के सीमावर्ती गांवों की भूमिका को पुनर्परिभाषित किया है। अब वे सुदूर चौकियां नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास में रणनीतिक साझेदार बन चुके हैं। यह कार्यक्रम VVP-I और VVP-II के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसका कुल परिव्यय 11,639 करोड़ रुपये है। इसके तहत भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं पर स्थित गांवों में सड़क संपर्क, बिजली, दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और आजीविका के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है। VVP का उद्देश्य जीवंत, सशक्त और समृद्ध सीमावर्ती समुदायों का निर्माण करना है। यह जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है और सतत आर्थिक अवसर पैदा करता है। ऐसा करके, यह सीमाओं पर फलते-फूलते समुदायों को बनाए रखकर भारत की सीमा सुरक्षा को मजबूत करता है।
सीमावर्ती गांव क्यों महत्वपूर्ण हैं

भारत सात पड़ोसी देशों के साथ 15,000 किलोमीटर (किमी) से अधिक की अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा साझा करता है। सबसे लंबा विस्तार बांग्लादेश के साथ 4,096.7 किमी का है। इसके बाद चीन के साथ 3,488 किमी और पाकिस्तान के साथ 3,323 किमी की सीमा लगती है। शेष सीमा नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान के साथ है। दशकों तक, कई सीमावर्ती गांव दुर्गम भूभाग, कमजोर कनेक्टिविटी, सीमित अवसंरचना और आजीविका के कम अवसरों के कारण अलग-थलग रहे। इन चुनौतियों ने पलायन को बढ़ावा दिया, जिससे सीमा के कई क्षेत्र कम आबादी वाले हो गए इन पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए 2023 में वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम (VVP) शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य भारत की सीमाओं पर चयनित गांवों के समग्र विकास में तेजी लाना है। सीमावर्ती निवासियों को सीमा सुरक्षा बलों की आंख और कान मानते हुए, इसका लक्ष्य जीवंत, सुरक्षित और समृद्ध सीमावर्ती समुदायों का निर्माण करना है। यह कार्यक्रम इन बस्तियों को देश के अंतिम गांव के बजाय पहले गांव मानकर दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव का भी प्रतीक है। उत्तरी सीमा के गांवों से शुरुआत करके, सरकार ने चरणों में पूरे स्थलीय सीमा क्षेत्र में इस कार्यक्रम का विस्तार किया है। सशक्त सीमावर्ती समुदाय सुरक्षित और मजबूत विकसित भारत@2047 की नींव हैं।

क्या आप जानते हैं? 1999 के करगिल घुसपैठ की पहली चेतावनी किसी रडार या गश्ती दल से नहीं मिली थी। 3 मई 1999 को स्थानीय निवासियों ने ही सबसे पहले करगिल सेक्टर में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दी थी। यह देश की रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में सीमावर्ती समुदायों के महत्व को रेखांकित करता है।
दो चरण,एक सीमावर्ती मिशन
सरकार वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम को दो चरणों में लागू कर रही है, जो मिलकर भारत की पूरी अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमा को कवर करते हैं। VVP-I उत्तरी सीमा के गांवों को कवर करता है। VVP-II इसी दृष्टिकोण को अन्य अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं तक बढ़ाता है।7 दोनों चरणों का कुल लक्ष्य 11,639 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय से 2,616 से अधिक गांवों को कवर करना है। प्रारूप में भिन्न होते हुए भी दोनों चरणों का उद्देश्य एक ही है। VVP-I एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसे राज्यों के साथ मिलकर लागू किया गया है, जबकि VVP-II एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जो पूरी तरह से केंद्र द्वारा वित्तपोषित है। दोनों चरणों का उद्देश्य जीवन स्थितियों में सुधार करना, स्थानीय आजीविका पैदा करना और सीमावर्ती समुदायों को सशक्त बनाना है। ये "पहले गांवों" को विकास के जीवंत केंद्रों के रूप में विकसित करके देश की सीमा सुरक्षा को मजबूत करने का कार्य करते हैं।

VVP-I: उत्तरी सीमा समुदायों को मजबूत करना
VVP के पहले चरण की घोषणा केंद्रीय बजट 2022-23 में उत्तरी सीमा के गांवों के लिए की गई थी। इसे 10 अप्रैल 2023 को अरुणाचल प्रदेश के अंजाव ज़िले के किबिथू में लॉन्च किया गया था। इसमें 4 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश के 19 ज़िलों में उत्तरी सीमा से सटे 46 ब्लॉक के गांवों की पहचान की गई; इनमें से लगभग 1.42 लाख आबादी वाले 662 रणनीतिक गांवों को व्यापक विकास के लिए प्राथमिकता दी गई। ये राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख हैं। इस योजना को 4,800 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई थी, जो वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक के लिए है। इस राशि में से 2,500 करोड़ रुपये सड़क संपर्क के लिए निर्धारित किए गए थे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दूरदराज के सीमावर्ती गांवों में विकास की खाई को पाटना है। यह उन्हें देश के अन्य हिस्सों की तरह गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा और आवश्यक सेवाएं प्रदान करने का प्रयास करता है।

क्या आप जानते हैं? किबिथू को इसके रणनीतिक स्थान, इतिहास और विकास की जरूरतों के कारण VVP लॉन्च करने के लिए चुना गया था। अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित यह भारत के सबसे पूर्वी बसे हुए गांवों में से एक है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में भीषण लड़ाई देखी गई थी। दुर्गम भूभाग, विरल कनेक्टिविटी और पलायन ने लंबे समय से इसके विकास को बाधित किया था। किबिथू से कार्यक्रम का शुभारंभ देश की सीमा पर सबसे पहले विकास पहुंचाने के सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
VVP-I के तहत प्रमुख पहल
_________________________________________________________________________________
यह कार्यक्रम सभी मौसमों के अनुकूल सड़कों, पेयजल, भरोसेमंद बिजली, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा आवश्यक स्वास्थ्य व शिक्षा के अवसंरचना का समर्थन करता है। यह आजीविका और समग्र जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए पर्यटन सुविधाओं और बहुउद्देशीय सामुदायिक केंद्रों को भी बढ़ावा देता है।
आजीविका सहायता 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल पर व्यवस्थित है। यह सामाजिक उद्यमिता, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण, पर्यटन व स्थानीय संस्कृति के संवर्धन और 'वन-ब्लॉक-वन-प्रोडक्ट' उद्यमों को प्रोत्साहित करती है। विभिन्न योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) के माध्यम से, VVP-I ने वह वितरण मॉडल स्थापित किया जिसे दूसरा चरण अब उत्तरी सीमा के अलावा बाकी बची स्थलीय सीमाओं पर आगे बढ़ा रहा है।

क्या आप जानते हैं? भारत लगभग चार दशकों से सीमावर्ती गांवों का समर्थन कर रहा है। सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) 1986-87 में पश्चिमी सीमा पर शुरू किया गया था। बाद में इसका विस्तार अंतरराष्ट्रीय सीमा की पहली बस्ती से 10 किमी के भीतर के गांवों तक किया गया। इसने 16 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 111 जिलों को कवर किया और 2004-05 से अब तक 39,000 से अधिक विकास कार्यों को मंजूरी दी। यह कार्यक्रम अब अपने अंतिम चरण में है। इसी आधार पर आगे बढ़ते हुए, VVP चयनित सीमावर्ती गांवों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि उन्हें प्रत्येक लागू सरकारी योजना का लाभ मिले, जिससे लोगों को अपने गांवों में रहने और सीमा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिले।
VVP-II: सभी स्थलीय सीमाओं तक मॉडल का विस्तार
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2 अप्रैल 2025 को VVP-II को मंजूरी दी। पहले चरण के विपरीत, VVP-II पूरी तरह से केंद्र द्वारा वित्तपोषित है और गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है। इसे औपचारिक रूप से 20 फरवरी 2026 को असम के कछार जिले के नाथनपुर गांव से लॉन्च किया गया था। इस योजना के लिए 2028-29 तक के वित्तीय वर्षों के लिए 6,839 करोड़ रुपये का परिव्यय रखा गया है।
इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्थलीय सीमाओं से सटे 334 ब्लॉकों में 1,954 गांवों को व्यापक विकास के लिए चिह्नित किया गया है। ये ब्लॉक 15 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित हैं। ये राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, जम्मू और कश्मीर (UT) और लद्दाख (UT) हैं। उत्तरी सीमा पर मौजूद ब्लॉक, जो पहले से ही VVP-I के अंतर्गत आते हैं, उन्हें प्रयासों के दोहराव से बचने के लिए बाहर रखा गया है ।
VVP-II के तहत पहल
________________________________________________________________________________
भारत सरकार ने सीमावर्ती गांवों को मजबूत करने के लिए VVP-II के तहत एक व्यापक पैकेज को मंजूरी दी। यह योजना अवसंरचना, सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से मूल्य श्रृंखलाओं, स्मार्ट क्लासरूम, पर्यटन सर्किट और सतत आजीविका का समर्थन करती है। यह सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवा, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और दूरसंचार कनेक्टिविटी को भी बढ़ावा देती है। इसका उद्देश्य जीवन स्थितियों में सुधार करना, आजीविका सृजित करना और लोगों को सीमावर्ती गांवों में रहने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह एक एकीकृत विकास ढांचे के तहत वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम को भारत की पूरी स्थलीय सीमा तक विस्तारित करता है।

क्या आप जानते हैं? VVP-II समृद्ध और सुरक्षित सीमावर्ती क्षेत्रों के निर्माण का प्रयास करता है। यह मजबूत सीमावर्ती समुदायों के माध्यम से सीमा पार अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण पर विशेष बल देता है।
योजनाओं को एक जगह लाने से विकास
VVP का कार्यान्वयन गांव कार्य योजनाओं द्वारा निर्देशित होता है। इसे स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर सीमा-विशिष्ट, राज्य-विशिष्ट और गांव-विशिष्ट सुधारों के माध्यम से प्राप्त किया जाना है। यह कार्यक्रम मौजूदा मानदंडों के तहत योजनाओं को एक जगह सुनिश्चित करते हुए एक परिपूर्णता-आधारित दृष्टिकोण का पालन करता है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)-IV के तहत सभी मौसमों के अनुकूल सड़कों का विकास किया जा रहा है।
चूंकि सीमावर्ती गांवों को अनूठी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति उनके समाधान के लिए योजना के दिशानिर्देशों में ढील देने की सिफारिश कर सकती है। गृह मंत्रालय इसका नोडल मंत्रालय है। यह समन्वित योजना और कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों और सीमा सुरक्षा बलों के साथ मिलकर काम करता है।
जमीनी स्तर पर प्रभाव
अपनी शुरुआत के बाद से, वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम-I ने उत्तरी सीमावर्ती गांवों में समावेशी और सतत विकास की नींव रखी है।

जुलाई 2026 तक, गृह मंत्रालय ने 3,020.32 करोड़ रुपये परिव्यय वाली 1,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों द्वारा 1,655 अतिरिक्त परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 953.47 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है, जबकि उनके द्वारा 283 परियोजनाओं के पूरा होने की सूचना दी गई है। स्वीकृत परियोजनाओं का राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार विवरण नीचे दिया गया है।
|
क्र सं
|
राज्य या केंद्र शासित प्रदेश
|
MHA द्वारा स्वीकृत परियोजनाएं
|
|
1.
|
अरुणाचल प्रदेश
|
832
|
|
2.
|
हिमाचल प्रदेश
|
98
|
|
3.
|
लद्दाख (UT)
|
79
|
|
4.
|
सिक्किम
|
87
|
|
5.
|
उत्तराखंड
|
152
|
|
|
कुल
|
1,248
|
कनेक्टिविटी: सड़कें और लंबी दूरी वाले पुल
कुल मिलाकर, 2,481.93 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली 111 सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। ये सड़कें ऐसे
134 गांवों को जोड़ेंगी जहां पहले कोई सड़क संपर्क नहीं था। इन परियोजनाओं के तहत कुल 35 लंबे दूरी वाले पुलों को भी मंजूरी दी गई। बेहतर सड़कों से यात्रा आसान होने, स्थानीय बाजारों का विस्तार होने और इन गांवों में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आय के नए स्रोत के रूप में पर्यटन
_________________________________________________________________________________
जमीन पर पर्यटन इस कार्यक्रम के सबसे प्रमुख घटकों में से एक बनकर उभरा है। VVP-I के तहत 145 करोड़ रुपये परिव्यय वाली 327 पर्यटन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें व्यूप्वाइंट्स, साहसिक पर्यटन, इको-टूरिज्म, इको-रिसॉर्ट्स, ट्रेक रूट्स और पर्यटक केंद्र शामिल हैं।
आउटरीच और सेवा वितरण
_______________________________________________________________________________
31 जुलाई 2026 तक 8,800 से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें जागरूकता अभियान, सेवा वितरण शिविर, स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा शिविर तथा कौशल प्रशिक्षण शामिल हैं। अरुणाचल प्रदेश में 2,990 गतिविधियां और लद्दाख में 2,221 गतिविधियां दर्ज की गईं। उत्तराखंड में 2,038, हिमाचल प्रदेश में 1,037 और सिक्किम में 530 गतिविधियां आयोजित की गईं।
क्या आप जानते हैं? विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम सीमावर्ती गांवों को भारत के युवाओं के लिए 'जीवंत कक्षाओं' में बदल देता है। 2026 में, प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के 400 से अधिक स्वयंसेवकों ने लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 सीमावर्ती गांवों में एक सप्ताह बिताया। उन्होंने सामुदायिक सेवा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जमीनी स्तर के विकास में भाग लिया।

VVP:अवसंरचना से परे प्रभाव
वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम का प्रभाव बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर सुरक्षा, आजीविका, शासन और सामुदायिक सुदृढ़ता को मजबूत करने तक फैला हुआ है।
सुरक्षा: एक घनी आबादी वाला और आत्मविश्वास से भरा सीमावर्ती क्षेत्र सीमा सुरक्षा बलों के कार्यों में सहयोग करता है। दोनों चरणों का उद्देश्य एक मजबूत सीमावर्ती आबादी तैयार करना है जो राष्ट्र के लिए एक रणनीतिक संपत्ति के रूप में कार्य करे।
जनसांख्यिकी और रिवर्स माइग्रेशन): आजीविका के अवसरों और बेहतर कनेक्टिविटी से परिवारों को सीमावर्ती गांवों में रहने की वजह मिलती है। अरुणाचल प्रदेश में कुरुंग कुमे, दिबांग घाटी और शी-योमी जिलों के सीमावर्ती गांवों के लोग अपने गांवों में लौट रहे हैं। यह कार्यक्रम के प्रभाव को दर्शाता है।
अर्थव्यवस्था: सीमावर्ती पर्यटन, सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह (SHGs) और किसान उत्पादक संगठन उन क्षेत्रों में एक स्थानीय आय का आधार बना रहे हैं जहां पहले आर्थिक अवसर सीमित थे। सीमा सुरक्षा बलों द्वारा स्थानीय खरीद से गांव के भीतर ही एक सुनिश्चित बाजार मिल जाता है।
गवर्नेंस: परिपूर्णता दृष्टिकोण इन गांवों के प्रत्येक पात्र परिवार को मौजूदा केंद्रीय और राज्य योजनाओं के दायरे में
लाता है। ग्राम कार्य योजनाएं जिला प्रशासन को कई विभागों में उस कार्य को क्रमबद्ध रूप से लागू करने के लिए एक एकल साधन प्रदान करती हैं।
सामूहिक रूप से, ये चारों पहलू एक ही विचार को दर्शाते हैं: सीमा पर विकास और सुरक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे एक-दूसरे को सुदृढ़ करते हैं।
क्या आप जानते हैं? अरुणाचल प्रदेश में, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) सीधे वाइब्रेंट गांवों से दूध, सब्जियां, अंडे और अनाज खरीदती है। इस प्रकार एक सीमा चौकी अपने पास के खेतों के लिए एक भरोसेमंद ग्राहक बन जाती है।
कनेक्टड और आत्मनिर्भर सीमावर्ती क्षेत्र
वाइब्रेंट विलेजेस प्रोग्राम एक वादा है कि भारत के सीमावर्ती समुदाय देश की प्रगति में पूरी तरह भागीदार होंगे। बेहतर वसंरचना, सतत आजीविका और सरकारी योजनाओं का एक ही जगह पर आना गांवों के पास ही अवसर पैदा कर रहे हैं। साथ ही, सीमावर्ती पर्यटन और स्थानीय उद्यम इस क्षेत्र की क्षमताओं को उजागर कर रहे हैं। जैसे-जैसे ये गांव अधिक जीवंत, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनेंगे, वे भारत की सीमाओं को मजबूत करते रहेंगे और 2047 तक एक सुरक्षित, समावेशी और विकसित भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएंगे।
संदर्भ
प्रधान मंत्री कार्यालय
केबिनेट
गृह मंत्रालय
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय
पात्र सूचना कार्यालय (रिसर्च यूनिट)
संसद टीवी
पीडीएफ में देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
पीआईबी रिसर्च
पीके/केसी/जेएस
(Explainer ID: 159862)
आगंतुक पटल : 351
Provide suggestions / comments