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Social Welfare

सोमनाथः भारत की शाश्वत ज्योति

विश्वास, शौर्य और सांस्कृतिक निरंतरता के 75 वर्ष का उत्सव

Posted On: 08 MAY 2026 6:05PM

सोमनाथ भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में इसका स्थान प्रथम है। वर्ष 1026 से बार-बार आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ विश्वास, दृढ़ता और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक बना हुआ है। इसका 1951 में राष्ट्रीय नेतृत्व के अधीन पुनर्निर्माण किया गया। मंदिर को फिर से खोले जाने के साथ ही भारतीय सभ्यता के पुनरोदय का आरंभ हुआ। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व इस मंदिर पर 1026 में हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष का समारोह है। इसके साथ ही इसे मई 1951 में खोले जाने के 75 वर्ष भी पूरे हो गए हैं। यह पर्व इस मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसकी चिरस्थाई विरासत का उत्सव है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में भाग लेने के लिए 11 मई को सोमनाथ मंदिर की यात्रा करेंगे।

सोमनाथ का पावन तट

गुजरात के सौराष्ट्र में समुद्र तट के निकट प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। शिव पुराण में वर्णित सबसे पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक इस मंदिर में स्थापित है। इसे भगवान शिव, भगवान कृष्ण और शक्ति की आराधना के लिए श्रद्धेय माना जाता है।

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंगों में अग्रणी माना गया है। यह भारत की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत में इसके अग्रणी स्थान को प्रतिबिंबित करता है।

आक्रांताओं ने सदियों तक सोमनाथ मंदिर को बार-बार तहस-नहस किया और लूटा। लेकिन हर बार श्रद्धालुओं और शासकों ने मंदिर का पुनर्निर्माण कर इसके खोए हुए गौरव को बहाल किया। इस तरह, सोमनाथ भारत के उस अटूट विश्वास का प्रमाण है जिसने सदियों तक बार-बार आक्रमणों पर विजय प्राप्त की। यह हमारी सभ्यता की निरंतरता, हमारे विश्वास की गहराई और सामूहिक संकल्प की शक्ति को प्रतिबिंबित करता है।

 

शाश्वत ज्योतिः समय और संघर्षों से आगे सोमनाथ

सोमनाथ का जन्म प्राचीन भारतीय परंपरा में गहराई से अंतर्निहित है। यह स्थल भगवान शिव और चंद्र देवता की आराधना से निकटता से जुड़ा है।

सदियों तक सोमनाथ ने निर्माण के कई चरण देखे। प्राचीन परंपराओं के अनुसार मंदिर को अनेक बार अलग-अलग सामग्रियों के उपयोग से बनाया गया जो नवीकरण और निरंतरता का प्रतीक है।

सोमनाथ के इतिहास का सबसे उथल-पुथल भरा दौर 11वीं सदी में आरंभ हुआ। इस मंदिर पर आक्रांताओं का पहला ज्ञात हमला जनवरी 1026 में किया गया। इसके साथ ही एक लंबे काल की शुरुआत हुई जिस दौरान 11वीं और 18वीं सदी के बीच मंदिर का बार-बार विध्वंस किया गया।

लेकिन जब भी मंदिर को तोड़ा गया, श्रद्धालुओं और राजाओं ने आगे आकर उसका पुनर्निर्माण किया। इनमें राजा कुमारपाल प्रमुख रहे जिन्होंने 12वीं सदी के मंदिर को फिर से बनवाया। जूनागढ़ के महाराज ने 13वीं सदी में इसका पुनर्निर्माण कराया। एक और विध्वंस के बाद 18वीं सदी में इंदौर की मराठा साम्राज्ञी लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने सोमनाथ में एक नए मंदिर को प्रतिस्थापित किया। इस तरह, बार-बार विध्वंस के बावजूद सोमनाथ का भारतीयों की सामूहिक चेतना से कभी भी लोप नहीं हुआ।

स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1947 में सोमनाथ के अवशेषों की यात्रा करते हुए मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प व्यक्त किया। उनका विश्वास था कि भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास की पुनस्र्थापना के लिए सोमनाथ का पुनर्निर्माण अनिवार्य है। जनभागीदारी और राष्ट्रीय संकल्प के सहयोग से वर्तमान मंदिर का निर्माण कैलाश महामेरू प्रसाद स्थापत्य शैली में किया गया।

11 मई, 1951 को राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का समारोह पूर्वक प्रतिष्ठापन किया। इसके 75 वर्ष बाद सोमनाथ राष्ट्रीय गौरव और आध्यात्मिक दृढ़ता के प्रतीक के रूप में खड़ा है।

वीर हमीरजी गोहिलः ऐतिहासिक वृत्तांतों से आगे स्मृति

सोमनाथ की गाथा को साहसी व्यक्तियों ने गढ़ा है जिनका शौर्य हमारी स्मृतियों में अंकित है।वीर हमीरजी गोहिल भी ऐसा ही एक व्यक्तित्व हैं। वह एक क्षेत्रीय योद्धा थे। परंपराओं में उन्हें इसलिए स्मरण किया जाता है कि उन्होंने 1299 में जफर खान के आक्रमण के दौरान सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने जीवन की आहुति दी।

उन्हें आधिकारिक रिकार्डों के बजाय स्थानीय परंपरा और सामूहिक स्मृति के माध्यम से स्मरण किया जाता है।

उनका जीवन राजधर्म के सिद्धांत को प्रतिबिंबित करता है। यहां राजधर्म से तात्पर्य विजय अनिश्चित और समर्थन सीमित होने के बावजूद पवित्र स्थलों, समाज और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने के दायित्व से है।

 

 सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सोमनाथ मंदिर की चिरस्थायी विरासत का सम्मान करता है। यह 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले दर्ज हमले के एक हजार साल पूरे होने का प्रतीक है। 11 मई, 2026 को 1951 में सोमनाथ मंदिर के फिर से खुलने की 75वीं वर्षगांठ भी है, उस समय इसे भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था। उन्होंने सोमनाथ को भारत की आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक के रूप में वर्णित किया था। मंदिर का फिर से खुलना, केवल एक मंदिर के जीर्णोद्धार से कहीं बढ़कर था। यह सदियों के संघर्ष के बाद भारत के सभ्यतागत विश्वास को फिर से जगाने का का प्रतिनिधित्व करता है।

इसलिए, सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत के इतिहास के दो महत्वपूर्ण पड़ावों को एक साथ प्रस्तुत करता है। जहाँ पहला पड़ाव विनाश का प्रतीक है, वहीं दूसरा पड़ाव विनाश पर विजयी होने में देश की अगाध श्रद्धा और जीवंतता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, मंदिर के पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 11 मई को सोमनाथ मंदिर का दर्शन करेंगे। अपनी यात्रा से पूर्व, प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इसके विनाश से पुनरुद्धार तक की यात्रा का वर्णन करते हुए इसे 'भारत की अजेय भावना' का प्रतीक बताया। उन्होंने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने सदियों से मंदिर को संरक्षित किया और इसका पुनर्निर्माण कराया।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से "विकास भी, विरासत भी" के दृष्टिकोण पर जोर दिया, जो विरासत के संरक्षण के साथ-साथ विकास पर केंद्रित है। उन्होंने सोमनाथ में अगले 1,000 दिनों के लिए विशेष पूजा की भी घोषणा की, जो इसके इतिहास के सम्मान में की जाएगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने लोगों से इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान सोमनाथ आने का आग्रह किया।

इससे पहले, जनवरी 2026 में, प्रधानमंत्री मोदी ने 10-11 जनवरी को मंदिर में आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' समारोह में भाग लिया था। इस कार्यक्रम में 72 घंटे का निरंतर 'ओंकार मंत्र' का जाप किया गया, जिसके साथ ही राष्ट्र के कल्याण और समृद्धि के लिए पवित्र अनुष्ठान और प्रार्थनाएँ की गईं थी। प्रभास पाटन में एक भव्य 'शौर्य यात्रा' का भी आयोजन किया गया था, जिसमें सदियों तक सोमनाथ की रक्षा करने वाले योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 108 घोड़ों की एक प्रतीकात्मक शोभायात्रा निकाली गई थी।

 

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा 

"चलो चलें सोमनाथ" अभियान के तहत आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा को 30 अप्रैल, 2026 को दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 1,300 से अधिक श्रद्धालुओं को लेकर यह विशेष ट्रेन सोमनाथ के लिए रवाना हुई। यह यात्रा मंदिर की आस्था और जीवंतता के 1,000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले उत्सव का एक हिस्सा है।

यह यात्रा 1 मई को सोमनाथ पहुँची, जिसके बाद अगले कुछ दिनों तक कई भक्तिपूर्ण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए; इनमें आरती, मंदिर दर्शन और एक 'लाइट एंड साउंड शो' शामिल थे।

 

सोमनाथ मंदिर: भव्यता, भक्ति और जीवंत विरासत

सोमनाथ भगवान शिव के बारह आदि ज्योतिर्लिंगों में प्रथम के रूप में एक अत्यंत पवित्र स्थान रखता है। मंदिर परिसर में गर्भगृह, सभा मंडप और नृत्य मंडप शामिल हैं। यह अरब सागर के तट पर भव्यता के साथ खड़ा है।

इस मंदिर के शिखर की ऊँचाई 150 फुट है, जिसके शीर्ष पर 10 टन का एक कलश सुशोभित है। इसका 27 फुट ऊँचा ध्वजदंड मंदिर की शाश्वत आध्यात्मिक उपस्थिति का प्रतीक है। इस परिसर में 1,666 स्वर्ण-मंडित कलश और 14,200 ध्वज हैं, जो सदियों की भक्ति और शिल्प-कौशल को दर्शाते हैं।
सोमनाथ पूजा और तीर्थयात्रा का एक जीवंत केंद्र बना हुआ है। यहाँ प्रतिवर्ष 92 से 97 लाख श्रद्धालु पहुँचते हैं। बिल्व पूजा जैसे अनुष्ठान हर साल 13.77 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

 

 

 

सांस्कृतिक पहलकदमियों ने सोमनाथ की विरासत के साथ लोगों के जुड़ाव को और गहरा किया है। यहाँ 'लाइट एंड साउंड शो' की शुरुआत 2003 में हुई थी और 2017 में इसे आधुनिक बनाया गया। आज इसमें प्रभावी कथा वर्णन और 3डी लेजर तकनीक का उपयोग किया जाता है।

'वंदे सोमनाथ कला महोत्सव' जैसे कार्यक्रमों ने 1,500 साल पुरानी नृत्य परंपराओं को पुनर्जीवित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सोमनाथ में सांस्कृतिक विकास का एक नया दौर देखने को मिला है। शासन सुधारों और विरासत संरक्षण ने इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और अधिक सुदृढ़ किया है।

श्री सोमनाथ ट्रस्ट की सामाजिक एवं कल्याणकारी गतिविधियाँ

शैक्षिक विकास एवं कौशल प्रशिक्षण

ट्रस्ट सक्रिय रूप से शिक्षा और रोजगार-केंद्रित कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है। व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आसपास के क्षेत्रों के युवाओं और महिलाओं के लिए अवसरों को बेहतर बनाते हैं। इन पाठ्यक्रमों में कंप्यूटर शिक्षा, सिलाई, सौंदर्य सम्बन्धी सेवाएं और डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण शामिल हैं। इसके साथ ही, कक्षा 10वीं और 12वीं के बाद शिक्षा जारी रखने वाले छात्रों को छात्रवृत्ति देकर सहायता प्रदान की जाती है।

"स्कूल ऑन व्हील्स" पहल गाँवों में मोबाइल डिजिटल शिक्षा प्रदान करती है। ग्रामीण छात्रों को कंप्यूटर का व्यावहारिक प्रशिक्षण और बुनियादी डिजिटल साक्षरता प्रदान की जाती है। शैक्षिक प्रतियोगिताएँ स्वच्छता और जल संरक्षण के उपायों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देती हैं। छात्रों और स्थानीय समुदायों के लिए पर्यावरण के प्रति समाज की ज़िम्मेदारी पर भी नियमित रूप से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

भोजन दान और सामुदायिक कल्याण

ट्रस्ट नियमित रूप से भक्तों और जरूरतमंद व्यक्तियों को भोजन खिलाता है। सामुदायिक सहायता प्राप्त भोजन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिदिन निःशुल्क भोजन परोसा जाता है।

दानकर्ताओं की भागीदारी से इन कल्याणकारी कार्यक्रमों को पूरे वर्ष जारी रखने में मदद मिलती है। आपात स्थिति के दौरान, ट्रस्ट प्रभावित समुदायों को मानवीय सहायता प्रदान करता है। राहत गतिविधियों में भोजन वितरण, चिकित्सा सहायता और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जाती है। इसके अतिरिक्त, सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब परिवारों को भी कल्याणकारी सहायता पहुँचाई जाती है।

स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक कल्याण कार्य

श्री सोमनाथ ट्रस्ट स्वास्थ्य सेवा और सामुदायिक कल्याण से जुड़े कार्यों में लगातार सहयोग दे रहा है। चिकित्सा सहायता कार्यक्रमों में सोमनाथ-प्रभास पाटन के आस-पास रहने वाले आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की मदद की जाती है। स्थानीय निवासियों को किफायती दरों पर फिजियोथेरेपी की सुविधाएँ दी जाती हैं और ठीक होने में उन्हें सहायता प्रदान करती हैं। आस-पास के समुदायों के लिए नियमित रूप से दाँत और आँखों के मुफ़्त इलाज के शिविर आयोजित किए जाते हैं।

दिव्यांग व्यक्तियों के लिए भी कल्याणकारी कार्य चिकित्सा सहायता शिविरों के माध्यम से जारी है। इन सहायता कार्यक्रमों के दौरान व्हीलचेयर, हियरिंग ऐड (श्रवण यंत्र) और बैसाखियों का वितरण किया जाता है।

श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा कोविड-19 के दौरान सहायता

कोविड-19 महामारी के दौरान, श्री सोमनाथ ट्रस्ट ने प्रभावित लोगों को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता, भोजन वितरण, चिकित्सा सुविधाएँ और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सहित राहत सहायता प्रदान की। महामारी की दोनों लहरों के दौरान कार्यकर्ताओं, प्रवासी मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता पहुंचाई गई थी।

 

  • पहली लहर में 8.73 करोड़ रुपये की सहायता
  • दूसरी लहर में 2.21 करोड़ रुपये की सहायता
  • मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये का दान
  • ऑक्सीजन प्लांट और कंसंट्रेटर के लिए सहायता

 

पर्यावरण एवं जन कल्याण कार्य

पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट के लिए एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। बड़े पैमाने पर चलाए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान आस-पास के क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त, बिल्व वृक्षारोपण के कार्य सोमनाथ के निकट पर्यावरण के प्रति जागरूकता को भी बढ़ावा देते हैं।

पर्यावरण के अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से मंदिर के जैविक अपशिष्ट का जिम्मेदारीपूर्वक पुनर्चक्रण किया जाता है। जैविक अपशिष्ट को खाद और प्राकृतिक गोबर में परिवर्तित किया जाता है ताकि इसका संवहनीय उपयोग हो सके। सार्वजनिक स्वच्छता पहल सोमनाथ को एक स्वच्छ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तीर्थ स्थल बनाए रखने में सहयोग करती है।

श्री सोमनाथ ट्रस्ट की कल्याणकारी पहल केवल नियमित सामाजिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य सेवाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार आपातकालीन प्रतिक्रिया और आपदा राहत कार्यों तक भी है। समुदाय के कल्याण के लिए निरंतर विकास कार्यों के साथ-साथ, प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट के समय भी ट्रस्ट सक्रिय रूप से आगे आकर अपना सहयोग प्रदान करता है।

 सोमनाथ में महिला सशक्तिकरण और संवहनीयता 

2018 में "स्वच्छ आइकॉनिक प्लेस" (प्रतिष्ठित स्थल) घोषित होने के बाद, सोमनाथ ने संवहनीयता के लिए कई नए तरीके अपनाए हैं। मंदिर के फूलों को वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) में बदल दिया जाता है, जिससे 1,700 बिल्व वृक्षों का पोषण होता है। 'मिशन लाइफ' के तहत, प्लास्टिक कचरे को पेवर ब्लॉक में बदला जा रहा है, जहाँ हर महीने 4,700 ब्लॉक बनाए जाते हैं। साथ ही, वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ और सीवेज उपचार संयंत्र प्रति माह लगभग 30 लाख लीटर गंदे पानी को शोधित करते हैं।

72,000 वर्ग फुट में फैला, 7,200 पेड़ों वाला एक मियावाकी वन हर साल लगभग 93,000 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड सोख लेता है। शुद्ध किए गए अभिषेक जल को 'सोमगंगा जल' के रूप में बोतलों में भरा जाता है, जिससे दिसंबर 2024 तक 1.13 लाख से अधिक परिवारों को लाभ पहुँचा है।

सोमनाथ महिलाओं के सशक्तिकरण में भी एक मज़बूत केंद्र के रूप में उभरा है। सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के 906 कर्मचारियों में से 262 महिलाएँ हैं। 'बिल्व वन' का पूरा प्रबंधन महिलाओं द्वारा ही किया जाता है। 65 महिलाएँ प्रसाद वितरण के कार्य में लगी हैं, जबकि 30 महिलाएँ मंदिर की भोजन सेवाओं में कार्यरत हैं। कुल मिलाकर, 363 महिलाओं को प्रत्यक्ष रोज़गार प्राप्त है, जिससे वे सालाना लगभग 9 करोड़ रुपये की आय अर्जित करती हैं; यह स्थिति उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और गरिमा को दर्शाती है।

सोमनाथ: वह आस्था जो समय की कसौटी पर खरी उतरी

सोमनाथ भारत की आस्था, जुझारूपन और सभ्यतागत निरंतरता के एक शाश्वत प्रतीक के रूप में खड़ा है। इसने बार-बार विनाश और पुनर्निर्माण को सहा है, जो सदियों से चली आ रही भक्ति की अटूट शक्ति को दर्शाता है।

पौराणिक महत्व से लेकर 1951 में इसके ऐतिहासिक पुनर्निर्माण तक, सोमनाथ न केवल एक पवित्र मंदिर है, बल्कि यह सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय पुनरुत्थान की एक सामूहिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। इसके पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ, इसकी आधुनिक विरासत में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो भारत की साझा विरासत में इसके स्थान को और भी दृढ़ता प्रदान करती है।

सोमनाथ पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक पुनरुद्धार, निरंतरता और समावेशी विकास के एक जीवंत केंद्र के रूप में लगातार विकसित हो रहा है। यह इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि सच्ची विरासत केवल संरक्षण से ही नहीं, बल्कि निरंतर नवीनीकरण और सामूहिक आस्था से जीवित रहती है।

संदर्भ

पीएम इंडिया

https://www.pmindia.gov.in/en/news_updates/pm-writes-an-oped-on-forthcoming-visit-to-somnath/?comment=disable

https://www.pmindia.gov.in/en/image-gallery/#gallery16769128-15

https://www.pmindia.gov.in/en/image-gallery/#gallery16769128-21

संस्कृति मंत्रालय

Somnath Swabhiman Parv Yatra from Delhi Flagged Off by Union Minister of Culture Shri Gajendra Singh Shekhawat and Delhi CM Smt. Rekha Gupta | Ministry of Culture

https://amritkaal.nic.in/somnath-swabhiman-parv

https://amritkaal.nic.in/flip-book/somnath-history-english-booklet.html

https://culture.gov.in/events/somnath-swabhiman-parv-yatra-delhi-flagged-union-minister-culture-shri-gajendra-singh

https://culture.gov.in/events/honble-prime-minister-shri-narendra-modi-attends-somnath-swabhiman-parv-and-leads-shaurya

https://amritkaal.nic.in/event-campaign-detail?2831

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

https://indiacinehub.gov.in/location/somnath

आकाशवाणी

https://www.newsonair.gov.in/pm-modi-leads-shaurya-yatra-at-somnath-pays-tribute-to-temples-defenders/

https://www.newsonair.gov.in/somnath-temples-survival-reflects-countrys-indomitable-civilisational-spirit-pm-modi/

https://www.facebook.com/reel/1212231374334173

अन्य

https://www.facebook.com/photo?fbid=1301080755386653&set=pcb.1301081125386616

https://www.facebook.com/photo?fbid=1301080755386653&set=pcb.1301081125386616

https://somnath.org/social-activities/

https://www.narendramodi.in/somnath-and-bharat-s-unconquerable-spirit-605118

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