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Social Welfare

युवा संगम

युवा सहभागिता के माध्यम से भारत का परिचय

Posted On: 04 APR 2026 4:46PM

मुख्य बिंदु

  • युवा संगम के छठे के अंतर्गत 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करने वाले युग्मित क्षेत्रों के बीच संस्थान-आधारित एक्सपोजर टूर के लिए पंजीकरण 2 मार्च से 25 मार्च तक आयोजित किए गए।
  • वर्ष 2023 से इस कार्यक्रम का विस्तार विभिन्न चरणों में हुआ है, जिसके तहत 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया गया है। इस पहल ने 5 से 7 दिनों के एक्सचेंज टूर के माध्यम से हजारों युवाओं को सक्रिय रूप से जोड़ा है।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप, यह कार्यक्रम कक्षा के ज्ञान को विभिन्न क्षेत्रों के वास्तविक अनुभवों के साथ जोड़कर प्रायोगिक शिक्षा को बढ़ावा देता है।

 

एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्प के साथ जुड़ता युवा वर्ग

भारत केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि अनुभव की अनुभूति है। हमारे राष्ट्र को वास्तव में समझने का अर्थ है—यहाँ के लोगों, यहाँ के परिदृश्य और परंपराओं के विविध ताने-बाने से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ना। 'युवा संगम' भारतीय युवाओं के लिए उसी अनुभव के अवसर उपलब्ध कराता है। यह कार्यक्रम 'अनुभव-आधारित शिक्षा' और 'राष्ट्रीय एकता' को युवा विकास के पूरक स्तंभों के रूप में क्रियान्वित करता है।

भारत सरकार की 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' (ईबीएसबी) पहल के तहत शुरू किया गया 'युवा संगम' एक अनूठा युवा विनिमय कार्यक्रम है, जो देश के विभिन्न हिस्सों के युवाओं को एक मंच पर लाता है। यह कार्यक्रम 18 से 30 वर्ष की आयु के युवाओं के लिए तैयार किया गया है, जिसमें छात्र, राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) और नेहरू युवा केंद्र संगठन (एनवायकेएस) के स्वयंसेवक तथा युवा पेशेवर शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय की देखरेख में और उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से क्रियान्वित यह पहल, विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के जुड़ाव के लिए एक व्यवस्थित मंच प्रदान करती है।

एक भारत श्रेष्ठ भारत – सांस्कृतिक जुड़ाव की वैचारिक पृष्ठभूमि

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के अवसर पर 31 अक्टूबर 2015 को 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' (ईबीएसबी) की शुरुआत की गई थी। इस पहल की परिकल्पना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच संबंधों को गहरा कर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई थी। यह इस तथ्य को मान्यता देता है कि भारत की विविधता को केवल सिद्धांतों में नहीं, बल्कि साझा अनुभवों के माध्यम से ही सबसे बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

अपने मूल स्वरूप में, एक भारत श्रेष्ठ भारत (ईबीएसबी) एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करता है, जहाँ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक-दूसरे के साथ जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य भाषा सीखने, संस्कृति, परंपरा एवं संगीत, पर्यटन एवं खान-पान, खेल और बेहतरीन अनुभवों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतरता है। यह केवल एक बार आयोजित होने वाले आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के बीच दीर्घकालिक और वर्षभर चलने वाले जुड़ाव का निर्माण करता है। यह युवाओं को समय के साथ एक-दूसरे के साथ संवाद करने, सीखने और परस्पर सहयोग करने में सक्षम बनाता है।

यह कार्यक्रम 'संपूर्ण सरकार' के दृष्टिकोण का अनुसरण करता है, जिसमें कई मंत्रालय और संस्थान सम्मिलित हैं। यह सुनिश्चित करता है कि जुड़ाव के अवसर केवल कक्षाओं और परिसरों तक सीमित न रहकर, सामुदायिक स्तर और सांस्कृतिक मंचों तक—यानी बहु-स्तरीय रूप में—उपलब्ध हों।

अनिवार्य रूप से, एक भारत श्रेष्ठ भारत (ईबीएसबी) एक राष्ट्रीय शिक्षण इकोसिस्टम का निर्माण करता है। यह लोगों को उनके तात्कालिक परिवेश से बाहर निकलकर भारत का अनुभव करने का अवसर प्रदान करता है। 'युवा संगम' जैसी पहल इसी विजन को आगे बढ़ाती हैं, जो 'एक भारत' के विचार को एक जीवंत और साझा वास्तविकता में बदल देती हैं।

प्रतिभागी सुनियोजित दौरों के लिए के लिए अपने संबद्ध राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की यात्रा करते हैं। इस दौरान वे नए सांस्कृतिक परिवेश में कदम रखते हैं, अपरिचित भाषाओं को सुनते हैं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों के साथ भोजन, विचार और अपने अनुभव साझा करते हैं। वे प्रमुख संस्थानों, विकास परियोजनाओं और नवाचार केंद्रों का अवलोकन करते हैं। इन संवादों और गतिविधियों के माध्यम से, वे यह समझने लगते हैं कि कैसे विभिन्न क्षेत्र एक साझा राष्ट्रीय विकास यात्रा में अपना योगदान दे रहे हैं।यह कार्यक्रम 'पांच पी' (Five P’s) के व्यापक ढांचे के आधार पर संचालित है।

"युवा संगम" एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के 'अनुभव-आधारित शिक्षण' के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जहाँ सीखने की प्रक्रिया कक्षाओं की सीमाओं से निकलकर वास्तविक दुनिया के व्यावहारिक संदर्भों तक विस्तृत होती है।

युवा संगम चरण-VI (2026): राज्यों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी का विस्तार

युवा संगम" का छठा संस्करण वर्तमान में अपनी प्रक्रिया में है, जो भारतीय युवाओं को एक सुव्यवस्थित राष्ट्रीय संवाद और जुड़ाव का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान कर रहा है। इस वर्ष भागीदारी के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की गई थी, जिसके तहत पंजीकरण प्रक्रिया 2 मार्च 2026 से 25 मार्च 2026 तक आयोजित की गई।

छठे चरण के अंतर्गत 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है, जो अंतर-राज्यीय युग्मित यात्राओं के मॉडल को निरंतरता प्रदान करता है। चयनित प्रतिभागियों को मेजबान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पाँच से सात दिवसीय सुव्यवस्थित एक्सपोजर टूर पर भेजा जाएगा। इस दौरान वे स्थानीय संस्कृति, प्रमुख संस्थानों और समुदायों के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगे।

इस कार्यक्रम के सफल संचालन का केंद्र 22 उच्च शिक्षण संस्थान (एचईआई) हैं, जो इसके कार्यान्वयन के लिए नोडल केंद्रों के रूप में कार्य करते हैं। ये संस्थान अपने संबद्ध क्षेत्रों के भागीदार संस्थानों के साथ समन्वय करते हैं और उनके साथ मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

  • विश्वविद्यालय और महाविद्यालय
  • सरकारी संस्थान और जिला प्रशासन
  • सामुदायिक संगठन और सांस्कृतिक समूह
  • नवाचार केंद्र, स्टार्टअप और अनुसंधान केंद्र  

प्रेषक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

नोडल संस्थानों की सूची

संबद्ध राज्य / केंद्र शासित प्रदेश

युग्मित संस्था

आंध्र प्रदेश

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुपति

महाराष्ट्र

आईआईएसईआर पुणे

दिल्ली

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली

छत्तीसगढ़

आईआईटी भिलाई

कर्नाटक

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान धारवाड़

राजस्थान

एमएनआईटी जयपुर

पंजाब

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़

बिहार

आईआईटी पटना

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख

भारतीय प्रबंधन संस्थान जम्मू

केरल और लक्षद्वीप

आईआईएम कोझिकोड

मेघालय

भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग

तेलंगाना

एनआईटी वारंगल

मध्य प्रदेश

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर

झारखंड

आईआईटी धनबाद

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय

पुडुचेरी

एनआईटी पुडुचेरी

अरुणाचल प्रदेश

उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान

उत्तर प्रदेश

आईआईएम लखनऊ

हरियाणा

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र

त्रिपुरा

एनआईटी अगरतला

गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश

भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद

ओडिशा

एनआईटी राउरकेला

यह सुनिश्चित करता है कि प्रतिभागी केवल विभिन्न स्थानों का भ्रमण ही न करें, बल्कि उन प्रणालियों और संस्थानों के साथ भी सीधा संवाद करें जो धरातल पर विकास को आकार देते हैं।

इस कार्यक्रम के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ-साथ वे युवा भी आवेदन करने के पात्र हैं जो वर्तमान में किसी शैक्षणिक संस्थान का हिस्सा नहीं हैं। चयन की प्रक्रिया नोडल उच्च शिक्षण संस्थानों द्वारा संचालित की जाती है, जिसमें लैंगिक समानता, शैक्षणिक विषयों और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर विशेष बल दिया जाता है। इसमें ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों के युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जाती है।

प्रतिभागियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ हों, अनुशासन बनाए रखें, समूह के दिशा-निर्देशों का पालन करें और मेजबान राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की सांस्कृतिक संवेदनाओं का सम्मान करें।

प्रतिभागी सांस्कृतिक विरासत को समझते  हैं, स्थानीय समुदायों के साथ सीधा संवाद करते हैं और गवर्नेंस, नवाचार तथा उद्यमिता से जुड़े संस्थानों का दौरा करते हैं। यह एक इमर्सिव और संवादात्मक अनुभव है, जो युवाओं को उनके द्वारा सीखे गए ज्ञान को वास्तविक दृश्यों और अनुभवों के साथ जोड़ने का अवसर प्रदान करता है।

इस दृष्टि से, युवा संगम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उस दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जो अनुभव-आधारित शिक्षा और बहु-विषयक अनुभव पर विशेष बल देता है। यह कक्षाओं की सीमाओं से परे सीखने को प्रोत्साहित करता है और भारत की ज्ञान प्रणालियों, विविधता तथा विकास के पथों की गहरी समझ को बढ़ावा देता है। युवा संगम जैसे कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक दुनिया के शिक्षण के अवसर उत्पन्न कर इस विजन को धरातल पर क्रियान्वित करते हैं।

पिछले चरणों की उपलब्धियां: राष्ट्रीय एकता के प्रति युवाओं का बढ़ता प्रभाव और भागीदारी

2023 की शुरुआत में शुरू हुआ 'युवा संगम' आज एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन चुका है। जो पहल सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान के साथ शुरू हुई थी, वह अब विभिन्न चरणों की सफलता के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवाओं को जोड़ने वाला एक सुनियोजित और स्थायी मंच बन गई है।

इस पहल को एक अंतर-मंत्रालयी प्रयास के माध्यम से क्रियान्वित किया गया है, जिसमें संस्कृति, पर्यटन, शिक्षा, युवा मामले और क्षेत्रीय विकास जैसे विभिन्न क्षेत्रों को एक साथ लाया गया है। इस समन्वय ने प्रत्येक दौरे को केवल एक विषय तक सीमित न रखकर, प्रतिभागियों को मेजबान राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की बहुआयामी समझ विकसित करने का अवसर प्रदान किया है।


 प्रत्येक चरण ने इस विस्तृत होते हुए आदान-प्रदान के नेटवर्क में एक नया आयाम जोड़ा है:

चरण I (2023): राष्ट्रव्यापी जुड़ाव की नींव

इस यात्रा की शुरुआत एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ हुई—पूर्वोत्तर क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना। प्रथम चरण में पूर्वोत्तर को इस आदान-प्रदान के केंद्र में रखा गया, जिसके माध्यम से देश भर से युवाओं को पूर्वोत्तर राज्यों में 5-8 दिन बिताने का अवसर मिला, वहीं इस क्षेत्र के प्रतिभागियों ने देश के अन्य हिस्सों की यात्रा की। इस इस परस्पर आवाजाही ने यह सुनिश्चित किया कि यह अनुभव केवल एकतरफा न होकर, साझा और समावेशी हो।

भागीदारी में संतुलन बनाए रखने का एक सचेत प्रयास किया गया, जिसमें पूर्वोत्तर और अन्य राज्यों के युवाओं के बीच लगभग 40:60 का अनुपात रखा गया। 20 फरवरी से 7 अप्रैल 2023 के बीच संचालित इस चरण में 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 29 दौरों का आयोजन किया गया, जिसमें 1,178 प्रतिनिधियों (1,057 युवा और 121 समन्वयक) ने भाग लिया। शिक्षा मंत्रालय से लेकर उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय तक, विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय के साथ, प्रथम चरण ने "युवा संगम" के भविष्य के स्वरूप के लिए एक कार्य-योजना तैयार की।

चरण-II (2023): व्यापक प्रसार और गहन अनुभव एवं संवाद

पहले चरण की सफल आधारशिला के उपरांत, दूसरे चरण ने भौगोलिक विस्तार और अनुभवों की व्यापकता—दोनों को नया आयाम दिया। 15 अप्रैल से 25 जून 2023 के बीच संचालित इस चरण में 20 उच्च शिक्षण संस्थानों के नेतृत्व में 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हुए 20 यात्राएं आयोजित की गईं। इस दौरान 900 से अधिक युवाओं और 83 संकाय सदस्यों एवं समन्वयकों ने हिस्सा लिया।

इस चरण की सबसे उल्लेखनीय विशेषता प्रतिभागियों को निर्धारित यात्रा कार्यक्रम से परे जाकर जुड़ने का अवसर मिलना था। माननीय प्रधानमंत्री, राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों सहित राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के नेतृत्व के साथ संवाद ने इस कार्यक्रम में एक नया आयाम जोड़ दिया। इसके साथ ही, यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक परिचय से आगे बढ़कर संस्थागत जुड़ाव और शीर्ष नेतृत्व के साथ सक्रिय संवाद की दिशा में अग्रसर हुआ।

चरण-III (नवंबर 2023 – जनवरी 2024): बढ़ती लोकप्रियता के अनुरूप व्यापक विस्तार

तीसरे चरण तक 'युवा संगम' युवाओं की पहली पसंद बन चुका था। अक्टूबर 2023 में आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही देश भर से करीब 30,000 युवाओं ने पंजीकरण कराया। भारी मांग को देखते हुए चयन प्रक्रिया को और अधिक पेशेवर और प्रतिस्पर्धी बनाया गया, जिसके माध्यम से अंततः 1,000 मेधावी प्रतिभागियों को इस यात्रा का हिस्सा बनने का अवसर मिला।

इस चरण में 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 20 उच्च शिक्षण संस्थानों को एक साथ लाया गया, जिसके अंतर्गत 20 यात्राएं आयोजित की गईं। इनमें 912 युवाओं और 91 समन्वयकों ने सक्रिय भागीदारी की। इस पड़ाव तक पहुँचते-पहुँचते कार्यक्रम ने अपनी गति प्राप्त कर ली थी। अब इसका ढांचा अधिक स्पष्ट, कार्यान्वयन अधिक निरंतर और विभिन्न क्षेत्रों के बीच अनुभवों का स्वरूप अधिक परिष्कृत हो चुका था।

चरण IV (फरवरी–मई 2024): निरंतरता, विस्तार और पूर्णता

चौथे चरण में रुचि और भागीदारी—दोनों में ही उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। 25 जनवरी से 4 फरवरी 2024 के पंजीकरण की अवधि के दौरान मात्र 10 दिनों के भीतर लगभग 45,000 आवेदन प्राप्त हुए, जो पहले चरण की तुलना में 267 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि को दर्शाते हैं।

इस चरण को 22 नोडल उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से क्रियान्वित किया गया, जिन्होंने 25 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया। यह न केवल कार्यक्रम के व्यापक पैमाने को, बल्कि संस्थानों के साथ इसके गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है। कुल मिलाकर 21 यात्राएं आयोजित की गईं, जिनमें 938 युवाओं और 100 समन्वयकों ने भाग लिया, जिससे यह इस कार्यक्रम के अब तक के सबसे व्यापक चरणों में से एक बन गया।

इस चरण तक, "युवा संगम" अब केवल एक नई पहल नहीं, बल्कि राष्ट्र की एक सुदृढ़ पहचान बन चुका था। अपने शुरुआती दौर को पार कर यह एक ऐसे सक्रिय राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित हुआ, जहाँ विशाल जन-भागीदारी और सीखने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया का अनूठा संगम देखने को मिला। इसने देश के कोने-कोने से आने वाले युवाओं को एक समान और गुणवत्तापूर्ण अनुभव प्रदान करने में सफलता हासिल की।

चरण V (नवंबर–दिसंबर 2024): निरंतरता की ओर अग्रसर

पाँचवें चरण ने इसी विकास क्रम को जारी रखा, जो इसके सामयिक क्रियान्वयन से एक निरंतर चलने वाले राष्ट्रीय प्रयास में परिवर्तन का संकेत है। 31 दिसंबर 2024 तक, 15 यात्राएं पूर्ण की जा चुकी थीं, जिनमें 686 युवाओं और 67 समन्वयकों ने भाग लिया तथा इसके उपरांत और अधिक दौरों की योजना बनाई गई।

इस पड़ाव तक कार्यक्रम का ढांचा पूरी तरह स्थिर हो चुका था, जिसमें संस्थानों की निरंतर भागीदारी और युवाओं के बढ़ते जुड़ाव का स्पष्ट समावेश था। जो कार्य एक पहल के रूप में शुरू हुआ था, वह अब विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के बीच आपसी संवाद के लिए एक सतत और सुव्यवस्थित मंच के रूप में विकसित हो चुका है।

इन विभिन्न चरणों के माध्यम से प्राप्त संख्यात्मक आंकड़े केवल एक पक्ष को उजागर करते हैं। वास्तविक और महत्वपूर्ण परिवर्तन इन आदान-प्रदानों के अनुभव के स्वरूप में आया है, जो प्रतिभागियों के दृष्टिकोण को व्यापक बना रहा है।


 समय के साथ, "युवा संगम" ने उन युवा प्रतिभागियों का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार किया है, जिन्होंने अपने क्षेत्रों से परे जाकर भारत का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। इस कार्यक्रम ने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें सांस्कृतिक अनुभव, राष्ट्रव्यापी भ्रमण और आपसी मेल-मिलाप ही युवाओं के राष्ट्र निर्माण में जुड़ाव का मुख्य आधार बन गए हैं।

युवा संगम के स्वर: अविस्मरणीय अनुभवों की एक यात्रा

विभिन्न चरणों के दौरान, प्रतिभागियों के अनुभवों में एक निरंतर भाव उभरकर सामने आता है। डेलीगेट अक्सर अपरिचित संस्कृतियों में कदम रखने, अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के साथ संवाद करने और पाठ्यपुस्तकों से परे भारत का प्रत्यक्ष अनुभव करने की बात करते हैं। स्थानीय परंपराओं, संस्थानों और समुदायों के साथ यह परिचय एक ऐसा जुड़ाव पैदा करता है जो व्यक्तिगत भी है और चिरस्थायी भी।

युवा संगम के हर चरण के विशिष्ट क्षणों ने इन अनुभवों को और अधिक समृद्ध किया है। दूसरे चरण के युवाओं के लिए देश के शीर्ष नेतृत्व से मिलना सबसे यादगार पल रहा, जिससे उन्हें किताबों से बाहर निकलकर देश चलाने की व्यवस्था को समझने का मौका मिला। चौथे चरण तक आते-आते यह अनुभव और भी गहरा हो गया जहाँ सांस्कृतिक मेल-मिलाप और समुदायों के बीच बिताए गए वक्त ने सीखने के पारंपरिक तरीके को एक जीवंत और सक्रिय भागीदारी में बदल दिया।

 

भूमि चतुर्वेदी, डेलीगेट, चरण-III (राजस्थान)

"तमिलनाडु से लौटते समय, मैं अपने साथ केवल स्मृति-चिह्न ही नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी का अहसास भी लेकर आई हूँ। 'युवा संगम' के प्रतिनिधि के रूप में, हमारे पास संस्कृतियों को जोड़ने, अपनी विविधता पर गर्व करने और एक भारत की अटूट भावना को और भी मजबूत करने की शक्ति है।"

 

रितिक भारद्वाज, युवा संगम प्रतिनिधि, द्वितीय चरण
युवा संगम के माध्यम से, मुझे मणिपुर में नीति-निर्माताओं के साथ संवाद करने का अवसर प्राप्त हुआ। यह एक अद्वितीय और अमूल्य अनुभव था। मैं इस यात्रा को इतना सार्थक और यादगार बनाने के लिए शिक्षा मंत्रालय और युवा संगम की पूरी टीम का अत्यंत आभारी हूँ।

मनीष, डेलीगेट, चरण III, आईआईआईटी कोटा

"राजस्थान की मरूभूमि से तमिलनाडु के सांस्कृतिक वैभव तक का यह सफर एक यादगार अनुभव रहा। "युवा संगम" ने हमें सिखाया कि असली भारत किताबों के पन्नों में नहीं, बल्कि यहाँ की विविध परंपराओं और लोगों के मेल-मिलाप में बसता है। यह यात्रा दिलों को जोड़ने और नए विचारों को जन्म देने का एक जीवंत माध्यम बन गई है।"

 

 

ताबिया तेगी, युवा संगम प्रतिनिधि, चरण II

युवा संगम के दौरान, मुझे उत्तर प्रदेश के भ्रमण का अवसर मिला, जिसमें मैंने फतेहपुर सीकरी और ताजमहल जैसे ऐतिहासिक स्थलों को देखा। यह वास्तव में एक अत्यंत समृद्ध अनुभव था—मुझे अपने देश की संपन्नता और विविधता को साक्षात देखने और समझने का सौभाग्य मिला। मैं इस अनूठी पहल का हिस्सा बनकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता हूँ।

 

 शिक्षा और युवा सशक्तिकरण: केंद्रीय बजट 2026-27 में ऐतिहासिक वृद्धि 

केंद्रीय बजट 2026-27 ने युवाओं को भारत की विकास गाथा के केंद्र में रखा है। 'युवा शक्ति-प्रेरित बजट' के रूप में वर्णित, यह आकांक्षाओं को क्षमता विकास से जोड़ता है और युवाओं को 'विकसित भारत' की यात्रा में सक्रिय भागीदार के रूप में देखता है। इस व्यापक संदर्भ में, 'युवा संगम' केवल एक साधारण यात्रा कार्यक्रम मात्र नहीं रह जाता, बल्कि यह एक ऐसा सार्थक मंच बन जाता है जहाँ शिक्षा, अनुभवों और राष्ट्रीय एकता का संगम होता है।


 बजट की कुछ प्रमुख घोषणाएं इस संबंध को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती हैं:

 

शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को मिटाने के लिए सरकार ने पाँच नई 'यूनिवर्सिटी टाउनशिप' की आधारशिला रखने का संकल्प लिया है। ये टाउनशिप देश के बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब के पास बसाई जाएंगी, जहाँ एक ही परिसर में शिक्षा, रिसर्च और स्किल ट्रेनिंग की सुविधा होगी। यह पहल हमारे युवाओं के लिए क्लासरूम से करियर तक का सीधा रास्ता तैयार करेगी, जहाँ उन्हें उद्योग की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाएगा।

  • शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के मध्य समन्वय को सुदृढ़ करना

एक उल्लेखनीय प्रस्ताव 'एजुकेशन टू एम्प्लॉयमेंट एंड एंटरप्राइज' नामक एक उच्च-स्तरीय स्थायी समिति के गठन का है। इसका कार्यक्षेत्र केवल नौकरियों तक सीमित नहीं है। यह आर्थिक विकास, रोजगार, निर्यात, और नौकरियों एवं कौशल की आवश्यकताओं पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रभाव की समीक्षा करेगी। साथ ही, यह अपस्किलिंग और रीस्किलिंग के उपायों का भी निर्धारण करेगी।

बजट में एवीजीसी (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को स्वीकार किया गया है और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज, मुंबई के माध्यम से 15,000 माध्यमिक स्कूलों तथा 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब्स स्थापित करने का प्रस्ताव है। यह कोई सामान्य शैक्षणिक उपाय नहीं है, बल्कि यह भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल, डिजिटल रचनात्मकता और उन उभरते क्षेत्रों की ओर एक सशक्त कदम है जहाँ युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खुलेंगे।

बजट में एस्ट्रोफ़िज़िक्स और एस्ट्रोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए चार टेलीस्कोप इंफ़्रास्ट्रक्चर सुविधाओं की स्थापना या उन्हें अपग्रेड करने का प्रस्ताव है। एक  इमर्सिव अनुभव इस व्यापक समझ को दर्शाता है कि सीखना तब और गहरा हो जाता है जब उसे अनुभव किया जाता है। यह पहल न केवल नई शिक्षा नीति (एनईपी) के लक्ष्यों को पूरा करता है, बल्कि 'युवा संगम' जैसे अभियानों की प्रासंगिकता को भी बढ़ाता है, जहाँ युवा भ्रमण और प्रत्यक्ष अवलोकन के जरिए राष्ट्र और विज्ञान को समझते हैं।

बजट का लक्ष्य केवल डिग्री धारक तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे राष्ट्र-निर्माता बनाना है जो भारत के सामाजिक-आर्थिक बदलाव के सारथी बनें। इस मिशन में 'युवा संगम' एक अहम कड़ी है। यह हमारे युवाओं को देश के  अलग-अलग क्षेत्रों, संस्कृतियों और व्यवस्थाओं से रूबरू कराकर उनकी सोच को विस्तार देता है। यह कार्यक्रम सिखाता है कि सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ सही नजरिया होना भी जरूरी है। विविधताओं से भरे भारत में, अपनी जड़ों और अपनी विरासत को करीब से जानना भी कौशल विकास निर्माण का ही एक सशक्त हिस्सा है।

निष्कर्ष: भारत के अनुभव से भविष्य के निर्माण तक

"युवा संगम" ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब अनुभव सार्थक होता है, तो वह केवल जानकारी नहीं देता, बल्कि दृष्टिकोण को नया आकार देता है। जैसे-जैसे यह कार्यक्रम अपने नए और अधिक सशक्त चरणों में प्रवेश कर रहा है, यह केवल एक आदान-प्रदान मात्र नहीं रह गया है बल्कि यह भौगोलिक सीमाओं के पार युवाओं के जुड़ाव के लिए एक स्थायी और सुदृढ़ ढांचा बन चुका है।

छठा चरण युवा संगम की एक नई और भव्य तस्वीर पेश करता है। देश के कोने-कोने तक फैली इसकी पहुँच और विश्वविद्यालयों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि यह अभियान अब एक स्थायी मिशन बन चुका है। नए शिक्षण संस्थानों के जुड़ने और आपसी तालमेल बढ़ने से, युवा संगम अब केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि देश के युवाओं को एक राज्य से दूसरे राज्य तक जोड़ने वाला एक औपचारिक और सशक्त राष्ट्रीय सेतु बनने की ओर अग्रसर है।

भविष्य की दृष्टि से, यह नई संभावनाओं के द्वार खोलता है। अब एक्सपोजर टूर्स सीखने की यात्रा का एक निरंतर और अनिवार्य हिस्सा बन सकते हैं। संस्थानों के बीच बढ़ता सहयोग अकादमिक और क्षेत्रीय संबंधों को और अधिक सुदृढ़ कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके माध्यम से अधिक से अधिक युवा अपने सीमित परिवेश से बाहर निकलकर वास्तविक भारत का अनुभव कर सकेंगे।

जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत @2047' की ओर कदम बढ़ा रहा है, शिक्षा, कौशल और जनशक्ति पर ध्यान निरंतर बढ़ता जाएगा। इस परिप्रेक्ष्य में, 'युवा संगम' एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम जोड़ता है।

वह पीढ़ी, जिसने देश को केवल मानचित्रों पर नहीं, बल्कि अपनी यात्राओं और संवादों के माध्यम से जिया है, वह एक अधिक एकजुट, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील भारत के निर्माण के लिए कहीं अधिक सक्षम और तत्पर है। 'युवा संगम' के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों और संस्कृतियों को आत्मसात करने वाला यह युवा ही 'विकसित भारत @2047' के स्वप्न को धरातल पर उतारने का सामर्थ्य रखता है।

 

संदर्भ

https://ebsb.aicte-india.org/
https://www.ekbharat.gov.in/
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2234587&reg=3&lang=1

https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_Speech.pdf?utm{

https://ebsb.aicte-india.org/social-board/index.php?page=1पिछले संस्करणों की तस्वीरें

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1979688&reg=3&lang=2

https://www.education.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/document-reports/MoE_AR_En.pdf

https://www.education.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/document-reports/AR_2023-24_en.pdf

पीआईबी रिसर्च

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