Farmer's Welfare
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त
9.32 करोड़ किसानों को 18,640 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण
Posted On:
19 MAR 2026 11:08AM
मुख्य बिंदु
- प्रधानमंत्री ने 13 मार्च, 2026 को असम, गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त में 18,640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की।
- इस किस्त में 9.32 करोड़ से अधिक किसानों को वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इनमें से 2.15 करोड़ महिला किसान हैं।
- इसकी शुरुआत से अब तक 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है, जो 'पीएम-किसान' को दुनिया की सबसे बड़ी डीबीटी पहलों में से एक बनाती है।
- इस योजना को 'आधार'-आधारित प्रमाणीकरण और डिजिटलीकृत भूमि अभिलेखों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है, जिससे सत्यापित लाभार्थियों को पारदर्शी और कुशल प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण सुनिश्चित होता है।
- अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान और नीति आयोग के प्रभाव मूल्यांकन से पता चलता है कि किसानों की कृषि आय में वृद्धि हुई और अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम हुई है।
परिचय
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 22वीं किस्त 13 मार्च 2026 को गुवाहाटी, असम में जारी की गई। इस किस्त के तहत, लगभग 9.32 करोड़ किसानों को, जिनमें 2.15 करोड़ से अधिक महिला लाभार्थी भी शामिल हैं। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से लगभग 18,640 करोड़ रूपए की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता जारी की गई है जो बिचौलियों को हटाकर किसानों को मिलने वाले लाभ की पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। इस योजना को 'अन्नदाता सम्मान' सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। किसानों की आय सुरक्षा को मजबूत करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, केंद्रीय बजट 2026-27 में ‘पीएम-किसान’ योजना के लिए 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
पीएम-किसान सहायता से किसानों में बढ़ता आत्मविश्वास
केरल के एडक्कारा की रहने वाली एक किसान, भामिनी, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की महिला लाभार्थियों में से एक हैं। 21वीं किस्त प्राप्त करने के बाद, उन्होंने अनुभव साझा किया कि समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता उन्हें खेती के तरीकों को बेहतर बनाने और उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
लघु और हाशिये पर रह रहे किसानों के लिए प्रत्यक्ष आय सहायता: पीएम-किसान

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) 24 फरवरी 2019 को शुरू की गई एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका उद्देश्य देश भर के खेती योग्य भूमि वाले भूमिधारक किसान परिवारों को सुनिश्चित आय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत, प्रत्येक पात्र किसान परिवार को साल में 6,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से ‘आधार’-लिंक्ड बैंक खातों में 2,000 रुपये की तीन समान किस्तों में दिया जाता है।
अब तक, 21 किस्तों के माध्यम से देश के पात्र किसान परिवारों को 4.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। इस योजना का लाभ किसानों को पीएम-किसान पोर्टल पर भूमि अभिलेखों की फीडिंग, बैंक खातों को आधार से जोड़ने और ई-केवाईसी सत्यापन पूरा करने के बाद प्रदान किया जाता है।
इस योजना का उद्देश्य कृषि सम्बंधित सामग्री जैसे बीज, खाद आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके लघु और हाशिये के किसानों की आय में वृद्धि करना है, जिससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार हो सके। प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करने से किसानों की अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलती है और कृषि गतिविधियों की निरंतरता बनी रहती है। ‘पीएम-किसान’ विश्व की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण पहलों में से एक है, जो सीधे किसानों को वित्तीय सहायता पहुँचाने के इसके महत्वपूर्ण संस्थागत तंत्र को रेखांकित करती है। इसकी विशेषता यह है कि इसके लाभार्थियों में 25 प्रतिशत से अधिक महिलाएँ हैं, जो इसके समावेशी दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है।
किसानों की राय: कृषि उत्पादकता का सुदृढ़ीकरण
देश के विभिन्न क्षेत्रों में, प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) ने किसानों को अपने खेतों में निवेश करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद की है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दुर्गापुर के किसान अनिल हलदर को, कृषि गतिविधियों के लिए 6,000 रुपये की वार्षिक सहायता समय पर प्राप्त हुई। अगस्त 2025 में एक किस्त मिलने के बाद, उन्होंने आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने के लिए धन का उपयोग करते हुए, तरबूज की खेती शुरू की। वित्तीय सहायता ने उन्हें अपनी फसल में विविधता लाने और अपने खेती कार्यों का विस्तार करने में सक्षम बनाया।
इसी तरह, जम्मू-कश्मीर, कुपवाड़ा के किसान दीपक सिंह नेगी, योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि से बीज, उर्वरक और कीटनाशक जैसी खेती के इस्तेमाल में आने वाली सामग्री खरीदते हैं। इस निवेश ने उनकी फसलों की गुणवत्ता और उपज दोनों में सुधार किया है, जिससे पता चलता है कि कैसे प्रत्यक्ष आय सहायता किसानों को उत्पादकता को बढ़ाने और उनकी आजीविका को बनाए रखने में मदद करती है।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, विवेकानंदपुर के अमिताभ मंडल ने अपने खेत के लिए जैविक उर्वरक खरीदने के लिए ‘पीएम-किसान’ के तहत प्राप्त सहायता का उपयोग किया। उनके अनुसार, वित्तीय सहायता से खेती से सम्बंधित सामग्री की लागत कम हुई जिससे उत्पादकता बढ़ी, कृषि लाभ में सुधार हुआ और अधिक टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने में आसानी हुई है।
पीएम-किसान का संस्थागत ढांचा और डिजिटल प्रशासन
पीएम-किसान योजना को केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और तकनीक-सक्षम डिजिटल अवसंरचना से जुड़े एक समन्वित संस्थागत ढांचे के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। इस प्रणाली से कार्यक्रम के कार्यान्वयन में बेहतर तरीके से लाभ हस्तांतरण करने, प्रभावी निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सत्यापित लाभार्थी डेटाबेस, ‘आधार’-आधारित प्रमाणीकरण और विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों को एकीकृत किया जाता है।
लक्ष्यीकरण, लाभार्थी पहचान और डेटाबेस प्रबंधन
राज्य सरकारें पात्र किसान परिवारों की पहचान करके और लाभार्थियों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार करके, 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' को लागू करने में एक केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। इस डेटाबेस में नाम, आयु, श्रेणी, आधार संख्या, बैंक खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर जैसे महत्वपूर्ण विवरण शामिल होते हैं। इन रिकॉर्ड्स की सटीकता सुनिश्चित करना, भुगतान के दोहराव को रोकना और बैंक खाते से जुड़ी समस्याओं का तुरंत समाधान करना राज्यों की ज़िम्मेदारी है। लाभार्थियों की पहचान मुख्य रूप से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रखे गए भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड्स पर आधारित होती है। इन रिकॉर्ड्स को नियमित रूप से अपडेट किया जाना, उनका डिजिटलीकरण करना और उन्हें ‘आधार’ तथा बैंक खाते की जानकारी से जोड़ना अनिवार्य है, ताकि योजना की राशि का प्रत्यक्ष हस्तांतरण बिना किसी रुकावट के किया जा सके।
'पीएम-किसान' के तहत, पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए पात्र लाभार्थियों की सूची ग्राम स्तर पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती है। इससे उन किसानों को, जिन्हें अनजाने में योजना से बाहर रखा गया हो, उपयुक्त शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से अपना नाम शामिल कराने का अवसर मिलता है। इसके अतिरिक्त, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए उन मामलों में वसूली की कार्रवाई शुरू करना अनिवार्य है जहां आयकर दाताओं, सरकारी कर्मचारियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मियों और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों सहित अपात्र व्यक्तियों को लाभ वितरित किया गया है। 2 दिसंबर 2025 तक, देश भर में अपात्र लाभार्थियों से कुल 416.75 करोड़ रुपये की राशि वसूल की गई है।
प्रौद्योगिकी-समर्थित सेवा वितरण प्रणाली
'पीएम-किसान' एक किसान-केंद्रित डिजिटल अवसंरचना द्वारा समर्थित है, जो लाभ वितरण में पहुंच को सुव्यवस्थित करता है और पारदर्शिता को बढ़ाता है। 'आधार'-आधारित प्रमाणीकरण इस प्रणाली का एक मुख्य स्तंभ है, जो ई-केवाईसी तंत्र के माध्यम से सुरक्षित लाभार्थी पहचान और भुगतान सत्यापन की सुविधा प्रदान करता है। किसान निम्नलिखित तरीकों का उपयोग करके ई-केवाईसी पूरा कर सकते हैं:
- ओटीपी-आधारित प्रमाणीकरण
- बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण
- चेहरा प्रमाणीकरण
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि वेब पोर्टल, लाभार्थियों के पंजीकरण, सत्यापन और डेटा प्रबंधन के लिए एक केंद्रीय डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है। यह किसानों का एक एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस रखता है, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के साथ एकीकरण के माध्यम से धनराशि के हस्तांतरण को सुगम बनाता है और पूरे देश में वित्तीय लेन-देन की वास्तविक समय पर निगरानी को सक्षम बनाता है। यह पोर्टल लाभार्थी किसानों की स्थान-वार सूची भी उपलब्ध कराता है, जिससे कार्यक्रम के कार्यान्वयन में पारदर्शिता बढ़ती है।
पोर्टल के पूरक के रूप में, 2020 में शुरू किया गया पीएम-किसान मोबाइल ऐप, इन सेवाओं को मोबाइल उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाता है। यह ऐप किसानों को स्वयं-पंजीकरण करने, राशि के हस्तांतरण की स्थिति को ट्रैक करने और ई-केवाईसी सत्यापन पूरा करने में सक्षम बनाता है। 2023 में, इस ऐप को फेस ऑथेंटिकेशन (चेहरा प्रमाणीकरण) सुविधा के साथ अपग्रेड किया गया, जिससे किसान अपने चेहरे को स्कैन करके ई-केवाईसी पूरा कर सकते हैं। इससे ओटीपी या फिंगरप्रिंट-आधारित सत्यापन की आवश्यकता समाप्त हो गई है और पहुँच में सुधार हुआ है।

कृत्रिम मेधा (एआई) सहायता प्रणाली: किसान-ईमित्र
सितंबर 2023 में, सरकार ने 'किसान-ईमित्र' की शुरुआत की, जो 'पीएम-किसान' डिजिटल तंत्र के साथ एकीकृत एक एआई-सक्षम चैटबॉट है। 'एकस्टेप फाउंडेशन' और 'भाषिणी' के तकनीकी सहयोग से विकसित यह चैटबॉट, किसानों को कई भारतीय भाषाओं में भुगतान, पंजीकरण और योजना के तहत पात्रता के बारे में वास्तविक समय पर जानकारी प्रदान करता है।
यह प्लेटफ़ॉर्म 11 मुख्य भाषाओं—हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल, बंगाली, ओडिया, मलयालम, गुजराती, पंजाबी, तेलुगु, मराठी और कन्नड़ में 24 घंटे और सातों दिन सहायता प्रदान करता है, जिससे विविध उपयोगकर्ता के लिए इसकी पहुँच बेहतर होती है। वॉइस (आवाज़)-आधारित और लिखित प्रश्नों के माध्यम से, किसान अपने आवेदनों की स्थिति की जाँच कर सकते हैं, भुगतान संबंधी अपडेट्स को ट्रैक कर सकते हैं और योजनाओं से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं; इससे सेवाओं तक पहुँच में पारदर्शिता और सुगमता बढ़ती है।
बहु-स्तरीय निगरानी और शिकायत निवारण ढाँचा
'पीएम-किसान' की निगरानी राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर संचालित एक बहु-स्तरीय संस्थागत ढांचे के माध्यम से की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर, समीक्षा तंत्र की अध्यक्षता कैबिनेट सचिव द्वारा की जाती है, जबकि राज्य और जिला निगरानी समितियाँ अपने संबंधित अधिकार क्षेत्रों में कार्यान्वयन की देखरेख करती हैं। किसान 'पीएम-किसान पोर्टल' और केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं, जिससे समय पर समाधान और शिकायत प्रबंधन में पारदर्शिता दिखती है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, ‘पीएम-किसान पोर्टल’ पर कुल 24,605 शिकायतें दर्ज की गईं।
किसान-केंद्रित सेवाओं के लिए संस्थागत एकीकरण
सरकार ने एक मानकीकृत उद्यम संसाधन योजना (इआरपी) प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को 'पीएम-किसान' और कई अन्य केंद्रीय योजनाओं के साथ एकीकृत किया गया है। यह एकीकरण पीएसीएस को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों, सामान्य सेवा केंद्रों, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों, एलपीजी वितरकों, ईंधन खुदरा केंद्रों, ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों और किसान-उत्पादक संगठनों जैसे कार्यक्रमों से जोड़ता है। इस एकीकरण का उद्देश्य पीएसीएस के कार्यात्मक दायरे को विस्तृत करना, जमीनी स्तर पर सेवा अभिसरण को बढ़ावा देना और इसकी दीर्घकालिक वित्तीय व्यवहार्यता को बढ़ाना है।
पीएम-किसान के प्रभाव मूल्यांकन से प्राप्त साक्ष्य
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) के कई प्रभाव मूल्यांकन इस बात के प्रमाण देते हैं कि यह योजना किसानों की आय को मज़बूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। ये सभी अध्ययन मिलकर यह संकेत देते हैं कि इस योजना के तहत सीधे तौर पर दी जाने वाली आय सहायता ने छोटे और सीमांत किसानों को नकदी की कमी की समस्या से राहत दिलाने में मदद की है और साथ ही उत्पादक कृषि निवेशों को भी बढ़ावा दिया है।
2019 में अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान द्वारा किए गए एक स्वतंत्र मूल्यांकन में इस योजना के तहत नकद हस्तांतरण के उपयोग की जाँच की गई। अध्ययन में पाया गया कि 'पीएम-किसान' के माध्यम से प्रदान की गई वित्तीय सहायता ने ग्रामीण क्षेत्रों में अल्पकालिक ऋण बाधाओं को दूर करने में मदद की है, जिससे किसान कृषि सम्बंधित सामग्री जैसे बीज, खाद आदि में निवेश बढ़ाने में सक्षम हुए हैं। निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि सुनिश्चित आय सहायता किसानों की उत्पादक, लेकिन तुलनात्मक रूप से जोखिम भरे कृषि निवेश करने की क्षमता को बढ़ाती है, जिससे व्यापक ग्रामीण आर्थिक गतिविधि में योगदान मिलता है। इन निष्कर्षों के पूरक के रूप में, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने किसान कॉल सेंटरों के माध्यम से एक व्यवस्थित लाभार्थी फीडबैक तंत्र स्थापित किया है। इस तंत्र के माध्यम से किए गए सर्वेक्षणों में लाभार्थियों की संतुष्टि का उच्च स्तर दिखाई देता है, जिसमें 92 प्रतिशत से अधिक किसानों ने योजना के प्रति संतोष व्यक्त किया है और 93 प्रतिशत से अधिक ने बताया है कि मिलने वाली वित्तीय सहायता का मुख्य रूप से खेती के लिए उपयोग किया जाता है।
नीति आयोग के विकास निगरानी और मूल्यांकन कार्यालय द्वारा किए गए एक प्रभाव मूल्यांकन से अतिरिक्त अनुभवजन्य साक्ष्य सामने आए हैं। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, 92 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी किसानों ने इस वित्तीय सहायता का उपयोग बीज, उर्वरक और कीटनाशकों जैसी आवश्यक कृषि सामग्री खरीदने के लिए किया, ये ऐसी सामग्री है जो बढ़ती लागत और जलवायु संबंधी अनिश्चितताओं के बीच काफी महत्वपूर्ण कही जा सकती है। इसके अतिरिक्त, लगभग 85 प्रतिशत लाभार्थियों ने कृषि आय में सुधार और फसल हानि या घरेलू आपात स्थिति के दौरान अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता में कमी की बात कही है। ये निष्कर्ष गरीबी उन्मूलन, खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समावेश और संस्थागत पारदर्शिता से संबंधित 'संवहनीय विकास लक्ष्यों' के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने में इस योजना के व्यापक योगदान को रेखांकित करते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) एक पारंपरिक आय-सहायता कार्यक्रम से कहीं अधिक है और यह किसान-केंद्रित और समावेशी कृषि विकास की ओर एक व्यापक नीतिगत झुकाव को दर्शाता है। पात्रता-आधारित सहायता से सशक्तिकरण-उन्मुख सहायता की ओर बदलाव को सक्षम करके, यह योजना सार्वजनिक संस्थानों और कृषक समुदाय के बीच संबंधों को पुनर्गठित करने में योगदान देती है। अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान और नीति आयोग जैसे संस्थानों द्वारा किए गए प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन संकेत देते हैं कि बड़ी संख्या में लाभार्थी इस वित्तीय सहायता का उपयोग कृषि सम्बंधित सामग्री खरीदने के लिए करते हैं। ये अध्ययन कृषि आय में सुधार और अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर किसानों की निर्भरता में कमी की भी पुष्टि करते हैं।
भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की आकांक्षा के संदर्भ में, 'पीएम-किसान' जैसी पहल समावेशी और व्यापक आर्थिक प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। उन्नत प्रौद्योगिकियों के निरंतर एकीकरण और अस्थिर जलवायु , संवहनीयता और सटीक कृषि पर बढ़ते नीतिगत जोर के साथ, इस योजना से किसानों की आजीविका को मजबूत करने और कृषि अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका की उम्मीद है।
संदर्भ
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
https://x.com/pmkisanofficial/status/1951491151024075168
https://x.com/pmkisanofficial/status/1951494242661974315
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https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2238588®=3&lang=2
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https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU358_FPeZsZ.pdf?source=pqals
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU305_QjnVDu.pdf?source=pqals
https://www.facebook.com/agriGoI/videos/i-received-the-21st-pm-kisan-installment-this-continued-support-encourages-me-to/826512120010995/?locale=hi_IN
वित्त मंत्रालय
https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/sbe1.xlsx
पीआईबी
https://blogs.pib.gov.in/blogsdescr.aspx?feaaid=287
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पीआईबी शोध
पीके/केसी/एसके
(Explainer ID: 157883)
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