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Social Welfare

पी एम ई – विद्या

हर जगह, हर शिक्षार्थी को सशक्त बनाने की दिशा में।

Posted On: 10 MAR 2026 3:07PM

मुख्य बिन्दु

 

  • पीएम ई-विद्या के एक प्रमुख घटक दीक्षा पर मार्च 2026 तक 2.00 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।
  • भारत के स्वदेशी एम ओ ओ सी प्लेटफॉर्म स्वयं पर जनवरी 2026 तक 5.80 करोड़ से अधिक नामांकन दर्ज किए जा चुके हैं।
  • स्वयं प्रभा के अंतर्गत 48 डीटीएच चैनल संचालित हो रहे हैं, जो 24×7 शैक्षिक सामग्री प्रसारित करते हैं और जिन्हें विभिन्न भारतीय भाषाओं में देखा जा सकता है।
  • साथी पोर्टल को शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर के सहयोग से शुरू किया है। यह पोर्टल विशेष रूप से उच्च शिक्षा और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए समर्पित है और इसे वेबसाइट तथा स्वयं प्रभा के 7 डीटीएच चैनलों के माध्यम से भी देखा जा सकता है।

 

परिचय

शिक्षा और ज्ञान का प्रसार विद्यार्थियों के बौद्धिक और सामाजिक बुनियाद को मजबूत बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसके मध्य से विद्यार्थी तेजी से बदलती दुनिया में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार हो पाते हैं। विविध शिक्षार्थियों के लिए संवेदनशील, समावेशी और भविषयोन्मुखी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अपनी इस दृष्टि को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन ई पी) 2020 के माध्यम से स्पष्ट किया। NEP 2020 भारत की शिक्षा प्रणाली के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान और न्यायसंगत पहुँच सुनिश्चित करना तथा समग्र और बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) शिक्षा को बढ़ावा देना है। एन ई पी आलोचनात्मक चिंतन (क्रिटिकल थिंकिंग) और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ शिक्षण और अधिगम के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग पर भी बल देती है। भारत में लगभग 24.8 करोड़ स्कूली बच्चे­­­­ और 4.33 करोड़ उच्च शिक्षा में नामांकित विद्यार्थी (AISHE 2021–22) ­हैं। हालांकि इनमें से अनेक विद्यार्थी दूरदराज़ क्षेत्रों में रहते हैं, जहाँ शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँच सीमित है। इसके अलावा, अनेकों विद्यार्थियों के लिए घरेलू जिम्मेदारियों और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों जैसी सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित होना भी कठिन हो जाता है।

यह चुनौतियों कई क्षेत्रों में प्रशिक्षित शिक्षकों की लगातार कमी के कारण और भी बढ़ जाती हैं, जिससे सीखने के परिणामों में असमानता देखने को मिलती है। इसके अतिरिक्त कोविड -19 महामारी ने पारंपरिक कक्षा आधारित शिक्षा में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुआ, जिससे लगभग 25 करोड़ स्कूली बच्चे प्रभावित हुए और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार समाधानों की त्वरित आवश्यकता अनुभव की गई। इसी संदर्भ में डिजिटल शिक्षा को लचीलेपन और समावेशन सुनिश्चित करने वाले एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा गया। जो विद्यार्थी कक्षाओं तक नहीं पहुँच सकते, कक्षाओं को ही उनके पास पहुँचाने की परिकल्पना की गई। इसी उद्देश्य से भारत सरकार ने पी एम ई विद्या पहल शुरू की, जो ऑनलाइन माध्यम से निरंतरता शिक्षण सुनिश्चित करने का एक व्यापक डिजिटल शिक्षा कार्यक्रम है। “एक राष्ट्र, एक डिजिटल शिक्षा बुनियादी ढांचाके सिद्धांत पर आधारित पी एम ई विद्या के अंतर्गत कई प्लेटफ़ॉर्म—जैसे दीक्षा, स्वयं, स्वयं प्रभा टीवी चैनल, रेडियो, पॉडकास्ट तथा सामुदायिक स्तर पर उपलब्ध डिजिटल संसाधनों—को एकीकृत किया गया है। इसके माध्यम से देशभर के शिक्षार्थियों तक समावेशी, सुलभ और प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है, जो दीर्घकालिक रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है।

पीएम ई-विद्या का विकासक्रम: डिजिटल माध्यम से शिक्षा का विस्तार

पीएम ई-विद्या का सबसे पहले शुभारंभ हुआ देशव्यापी कोविड -19 महामारी के दौरान 17 मई 2020 को। जब देश में लॉकडाउन लगा हुआ था तब एक आपातकालीन बहु-माध्यम (मल्टी मोड़) डिजिटल शिक्षा पहल के रूप में इसए शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य टेलीविजन, रेडियो और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से शिक्षा की निरंतरता बनाए रखना था। बाद में 7 अगस्त 2020 को इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत औपचारिक रूप से इसे एक ढांचागत स्वरूप प्रदान किया गया और मौजूदा डिजिटल संसाधनों को एकीकृत कर एक समग्र ढांचे में शामिल किया गया।

यह पहल डिजिटल इंडिया, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा मिशन (एन एम ई आई सी टी), स्वयं प्लेटफ़ॉर्म, समग्र शिक्षा तथा निष्ठा के माध्यम से शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के प्रयास जैसी पहले से संचालित विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और पहलों पर आधारित हैइस कार्यक्रम के प्रमुख संचालन स्तंभों में एक कक्षा, एक टी वी चैनल” पहल शामिल है, जो स्वयं प्रभा के अंतर्गत संचालित होती है। इसके साथ ही “एक राष्ट्र, एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म” की अवधारणा को दीक्षा और स्वयं पोर्टल के माध्यम से साकार किया गया है, जिससे पूरे देश में डिजिटल माध्यम से शिक्षा को व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जा सके।

पी एम ई विद्या : प्रमुख स्तम्भ

पीएम ई-विद्या छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जो ऑनलाइन, प्रसारण और ऑफलाइन माध्यमों को एकीकृत करते हुए समावेशी और समान डिजिटल शिक्षा तक सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करते हैं। इनमें शामिल हैं युवा एवं आकांक्षी विद्यार्थियों के लिए सक्रिय अधिगम को प्रोत्साहित करने वाला अध्ययन मंच – स्वयं, शैक्षिक सामग्री प्रसारित करने वाले दूरदर्शन आधारित चैनलों की व्यवस्था - स्वयं प्रभा, ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए डिजिटल अवसंरचना प्रदान करने वाला मंच – दीक्षा, रेडियो, सामुदायिक रेडियो और पॉडकास्ट का व्यापक उपयोग, विभिन्न माध्यमों से शिक्षा सामग्री का प्रसार, विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए विशेष ई-सामग्री, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था।

युवा एवं आकांक्षी विद्यार्थियों के लिए सक्रिय अधिगम को प्रोत्साहित करने वाला अध्ययन मंच – स्वयं

स्वयं एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल है, जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के सहयोग से शुरू किया गया। “कोई भी, कहीं भी और कभी भी सीखने का अवसर” की परिकल्पना के अनुरूप शिक्षार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली शैक्षिक सामग्री तक निःशुल्क पहुँच उपलब्ध कराना इसका मूल उद्देश्य है। यह मंच विभिन्न विषयों में अनेक प्रकार के पाठ्यक्रम प्रदान करता है, जिन्हें देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों द्वारा तैयार किया गया है, ताकि शिक्षार्थियों को समग्र और संतुलित शिक्षा प्राप्त हो सके। जनवरी 2026 तक स्वयं मंच पर दस राष्ट्रीय समन्वयकों—राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संवर्धित अधिगम कार्यक्रम, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, शैक्षिक संचार संघ, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान बेंगलुरु, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद तथा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान—द्वारा 4,400 से अधिक विशिष्ट पाठ्यक्रम विकसित किए जा चुके हैं। इसके आरंभ से अब तक स्वयं मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में लगभग 5.80 करोड़ शिक्षार्थियों का संचयी नामांकन दर्ज किया गया है और 52.88 लाख प्रमाणपत्र प्रदान किए जा चुके हैं।

 

ऑनलाइन शिक्षण को औपचारिक उच्च शिक्षा प्रणाली में सुगमता से एकीकृत करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने वर्ष 2021 में स्वयं के माध्यम से ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के लिए क्रेडिट ढाँचा विनियम अधिसूचित किए। इन विनियमों के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थान किसी सेमेस्टर में किसी कार्यक्रम के कुल पाठ्यक्रमों का अधिकतम 40 प्रतिशत तक भाग स्वयं मंच के माध्यम से प्रदान कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, शैक्षणिक सुगमता और शिक्षार्थियों की सुविधा को बढ़ाने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विश्वविद्यालयों द्वारा स्वयं पाठ्यक्रमों की परीक्षाएँ आयोजित करने के लिए भी एक ढाँचा अधिसूचित किया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत वे विश्वविद्यालय, जिन्होंने इन विनियमों को अपनाया है, स्वयं पाठ्यक्रमों की परीक्षाएँ आयोजित कर सकते हैं। इससे संस्थागत भागीदारी और ऑनलाइन शिक्षण के विद्यार्थी-केंद्रित क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

स्वयं मंच पर उपलब्ध पाठ्यक्रम चार प्रमुख घटकों पर आधारित होते हैं— (1) वीडियो व्याख्यान, (2) डाउनलोड और प्रिंट किए जा सकने वाली अध्ययन सामग्री, (3) प्रश्नोत्तरी और परीक्षाओं के माध्यम से स्व-मूल्यांकन परीक्षण, तथा (4) शंकाओं के समाधान के लिए ऑनलाइन चर्चा मंच। अधिगम प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें ऑडियो-वीडियो तत्वों, मल्टीमीडिया तथा उन्नत शिक्षण और प्रौद्योगिकी आधारित तरीकों का उपयोग किया जाता है।

स्वयं मंच के माध्यम से उपलब्ध सभी पाठ्यक्रम शिक्षार्थियों के लिए निःशुल्क होते हैं। हालांकि, जो शिक्षार्थी आधिकारिक स्वयं प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें निर्धारित शुल्क के साथ निगरानी युक्त फाइनल परीक्षा के लिए पंजीकरण करना होता है और निर्धारित तिथियों पर निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर उपस्थित होकर परीक्षा देनी होती है। प्रमाणपत्र प्राप्त करने की पात्रता से संबंधित विवरण प्रत्येक पाठ्यक्रम के पृष्ठ पर दिए जाते हैं, और सभी आवश्यक शर्तें पूरी करने के बाद ही प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। जो विश्वविद्यालय और महाविद्यालय क्रेडिट अंतरण को स्वीकृति देते हैं, वे इन पाठ्यक्रमों के प्राप्त अंकों या प्रमाणपत्रों को विद्यार्थियों के शैक्षणिक अभिलेखों में शामिल कर सकते हैं।

स्वयं प्रभा

स्वयं प्रभा 48 डीटीएच चैनलों का एक समूह है, जो उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रसारण के लिए समर्पित है। इसका उद्देश्य शिक्षा को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाना है। ये सभी चैनल देशभर के शिक्षार्थियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध हैं और इनका प्रसारण डीडी फ्री डिश तथा इंटरनेट अनुप्रयोगों के माध्यम से किया जाता है।

दिसंबर 2024 में भारत सरकार ने डीटीएच प्लेटफ़ॉर्म पर चैनल 31 की शुरुआत की, जो भारतीय सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण के लिए समर्पित हैं। यह चैनल विशेष रूप से सुनने में अक्षम विद्यार्थियों, विशेष शिक्षकों, दुभाषियों तथा संबंधित संस्थाओं के लिए तैयार किया गया है।

साथी

शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के सहयोग से नवंबर 2023 में स्व-मूल्यांकन, परीक्षण और प्रवेश परीक्षा सहायता मंच (साथी) की शुरुआत की।

यह मंच शिक्षार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली अध्ययन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराता है, जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविदों द्वारा तैयार किया गया है। यह सामग्री विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं—जैसे संयुक्त प्रवेश परीक्षा, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा, कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाएँ, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से संबंधित परीक्षाएँ, सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा तथा बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान की परीक्षाएँ—की तैयारी में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित की गई है।

साथी मंच की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा रिकॉर्ड किए गए तथा लाइव व्याख्यान।
  • प्रतिदिन अभ्यास प्रश्न, अभ्यास परीक्षाएँ और स्व-मूल्यांकन उपकरण, जिनके माध्यम से विद्यार्थी अपनी प्रगति का निरंतर आकलन कर उसे बेहतर बना सकते हैं।
  • प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ मार्गदर्शकों द्वारा प्रेरक सत्र और मार्गदर्शन।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं के मानकों के अनुरूप 80,000 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले प्रश्नों के विस्तृत भंडार तक पहुँच।
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित संवादात्मक शंका-समाधान सत्र।
  • परीक्षाओं से पहले इंटेनसिव क्रैश कोर्स, जिनमें वास्तविक परीक्षा के अनुभव के लिए अखिल भारतीय अभ्यास परीक्षा श्रृंखला भी शामिल है।
  • बहुभाषी सामग्री, जो हिंदी, अंग्रेज़ी तथा कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उन्नत सुविधाएँ, जिनके माध्यम से व्यक्तिगत अध्ययन योजना, प्रदर्शन विश्लेषण तथा खेल-आधारित अधिगम अनुभव प्रदान किए जाते हैं, ताकि विद्यार्थियों की भागीदारी और रुचि को बढ़ावा दिया जा सके।

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री तक परीक्षार्थियों की व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने और उन्हें प्रभावी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सात समर्पित डायरेक्ट-टू-होम चैनलों को संचालित किया गया है। इसके अतिरिक्त, पहुँच को और अधिक सरल बनाने तथा विभिन्न उपकरणों पर सुगम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए आईओएस और एंड्रॉयड मंचों के लिए मोबाइल अनुप्रयोग भी प्रारम्भ किए गए हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थी और शिक्षार्थी कभी भी और कहीं भी अध्ययन सामग्री तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रौद्योगिकी आधारित समान शिक्षा और कौशल विकास पर दिए गए विशेष बल के अनुरूप, साथी मंच ने लाखों अभ्यर्थियों को आँकड़ों पर आधारित तैयारी रणनीतियाँ, वास्तविक समय में प्रगति की निगरानी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के शिक्षकों तथा सफल विद्यार्थियों से मार्गदर्शन उपलब्ध कराया है। इसके माध्यम से उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आकांक्षा और उपलब्धि के बीच की दूरी को प्रभावी रूप से कम करने में सहायता मिली है।

ज्ञान साझा करने हेतु डिजिटल अवसंरचना (दीक्षा)

दीक्षा (ज्ञान साझा करने हेतु डिजिटल अवसंरचना) पोर्टल और मोबाइल अनुप्रयोग भारत में स्कूली शिक्षा के लिए प्रमुख राष्ट्रीय डिजिटल पारितंत्र के रूप में कार्य करते हैं। इसका विकास भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के संरक्षण में किया गया है। इस मंच का संचालन राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान के सहयोग से किया जाता है। वर्ष 2017 में प्रारम्भ किया गया दीक्षा मंच एक खुला मंच है, जो देशभर के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षा जगत के प्रशासकों को उच्च गुणवत्ता वाली तथा पाठ्यक्रम से संबद्ध डिजिटल अध्ययन सामग्री तक सरल पहुँच प्रदान करता है। यह मंच अनुकूलन योग्य है और संघीय व्यवस्था के अनुरूप कार्य करता है, जिससे विभिन्न राज्यों और उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं के अनुसार इसे सहज रूप से ढाला जा सकता है।

दीक्षा मंच राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा बोर्डों के अंतर्गत कक्षा एक से कक्षा बारह तक की संपूर्ण डिजिटल शिक्षा को सक्षम बनाता है। यह बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा को समाहित करता है। यह मंच मानकीकृत तथा पाठ्यक्रम के अनुरूप डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराकर देशभर के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा में समान अवसर को बढ़ावा देता है। इसमें मल्टीमीडिया आधारित और संवादात्मक अध्ययन संसाधन उपलब्ध हैं, जैसे द्वि-आयामी (2 डी) और त्रि-आयामी (3 डी) एनीमेशन, संवर्धित वास्तविकता आधारित अनुभव (ए आर), अनुकरणात्मक गतिविधियाँ, आभासी प्रयोगशालाएँ तथा सांकेतिक भाषा के वीडियो। ये संसाधन विषयों की अवधारणा को लेकर स्पष्टता बढ़ाने और सीखने की विभिन्न शैलियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। यह मंच मुद्रित और डिजिटल सामग्री के बीच की दूरी को भी कम करता है। इसके अंतर्गत क्यूआर कोड युक्त ऊर्जित पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की मुद्रित पुस्तकों को वीडियो, संवादात्मक सामग्री और शिक्षक मार्गदर्शिकाओं से जोड़ा गया है, जिससे कक्षा में अध्ययन और अधिक प्रभावी बनता है। इसके अतिरिक्त, दिव्यांग शिक्षार्थियों के लिए समावेशी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं, जैसे डिजिटल सुलभ सूचना प्रणाली प्रारूप, पाठ को यदि ऑडियो में परिवर्तित करने की सुविधा तथा भारतीय सांकेतिक भाषा के वीडियो।

दीक्षा मंच असीमित अभ्यास प्रश्नों, विस्तृत समाधान, अनुकूलनशील मूल्यांकन तथा दक्षता-आधारित प्रश्न भंडार के माध्यम से व्यक्तिगत अधिगम को सशक्त बनाता है। इससे विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया में मौजूद कमियों की पहचान संभव होती है और समय पर सुधारात्मक सहायता प्रदान की जा सकती है। यह मंच निष्ठा कार्यक्रम और राज्यों के विशेष शिक्षक व्यावसायिक विकास मॉड्यूलों के माध्यम से शिक्षकों के पेशेवर विकास का भी समर्थन करता है। इसके अंतर्गत शिक्षकों को स्व-गति से पूर्ण किए जा सकने वाले प्रमाणित प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे देशभर में शिक्षकों की दक्षता और कौशल में वृद्धि होती है। सामग्री के निर्माण, संकलन, उपयोग और विश्लेषण को एकीकृत करने वाला यह समग्र डिजिटल पारितंत्र समावेशी, आँकड़ा-आधारित और आनंददायक अधिगम को बढ़ावा देता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है।

आकाशवाणी के माध्यम से शिक्षा: मुक्त विद्या वाणी और शिक्षा वाणी

पीएम ई-विद्या पहल के अंतर्गत मुक्त विद्या वाणी, जिसे राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान संचालित करता है, भारत का अग्रणी शैक्षिक वेब रेडियो है। यह माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के शिक्षार्थियों के लिए प्रत्यक्ष और संवादात्मक ऑडियो कार्यक्रम उपलब्ध कराता है। पाँच वर्षों से अधिक समय से प्रभावी सेवा प्रदान करते हुए यह मंच शैक्षणिक विषयों पर आयोजित प्रत्यक्ष व्यक्तिगत संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से दो-तरफ़ा संवाद की सुविधा देता है। इन कार्यक्रमों का प्रसारण वेब माध्यम से किया जाता है तथा व्यापक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए इन्हें रेडियो वाहिनी (एफएम 91.2 मेगाहर्ट्ज़) पर पुनः प्रसारित भी किया जाता है, ताकि डिजिटल माध्यमों तक सीमित पहुँच रखने वाले श्रोता भी लाभान्वित हो सकें। इन सभी सत्रों का संग्रह राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के मंच पर चौबीसों घंटे उपलब्ध रहता है। साथ ही इनका प्रसार यूट्यूब और फेसबुक जैसे मंचों के माध्यम से भी किया जाता है, जिससे मुक्त विद्यालय के शिक्षार्थियों को कभी भी और कहीं भी अध्ययन सामग्री तक पहुँच प्राप्त हो सके। इसके साथ-साथ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा प्रस्तुत शिक्षा वाणी पॉडकास्ट कक्षा  9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 400 से अधिक पाठ्यक्रम-अनुरूप ध्वनि मॉड्यूल उपलब्ध कराता है। इनमें राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के विषयों को संक्षिप्त और रोचक रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह सामग्री शिक्षा वाणी मोबाइल अनुप्रयोग के माध्यम से गूगल प्ले पर निःशुल्क उपलब्ध है।

डिजिटल और प्रसारण माध्यमों को पूरक बनाते हुए दूरदर्शन और आकाशवाणी के माध्यम से भी पीएम ई-विद्या के अंतर्गत देशव्यापी शैक्षिक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। इनके माध्यम से प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक स्तर तक पाठ्यक्रम आधारित आभासी कक्षाएँ, बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी (जिसमें मॉडल प्रश्न पत्र भी शामिल हैं), संयुक्त प्रवेश परीक्षा और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से संबंधित मार्गदर्शन, तथा कहानी, प्रश्नोत्तरी जैसे समृद्ध कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों का प्रसारण अधिकतम लोगों तक पहुंचे इसके लिए सुबह और दोपहर का समय में निर्धारित किया जाता है। टेलीविजन, रेडियो और यूट्यूब जैसे माध्यमों का उपयोग करके यह पहल दूरदराज़ और वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी शैक्षिक सामग्री उपलब्ध कराती है, जहाँ इंटरनेट की सुविधा सीमित है या उपलब्ध नहीं होती।

सार्वभौमिक रूपांकन और प्रारम्भिक समावेशन: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए डिजिटल अधिगम

पीएम ई-विद्या पहल के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी डिजिटल शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए दीक्षा मंच तथा राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की प्रणालियों पर विशेष रूप से अनुकूलित अध्ययन संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। डिजिटल सुलभ सूचना प्रणाली प्रारूप में ऑडियो पुस्तकें तथा भारतीय सांकेतिक भाषा शब्दकोश आसानी से उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से दृष्टिबाधित और श्रवण बाधित शिक्षार्थी पाठ्यक्रम के अनुरूप अध्ययन सामग्री तक स्वतंत्र रूप से पहुँच प्राप्त कर सकते हैं।

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान ने भारतीय सांकेतिक भाषा में 270 से अधिक वीडियो तैयार किए हैं, जो माध्यमिक स्तर के सात विषयों और योग­ से संबंधित हैं। ये वीडियो यूट्यूब पर उपलब्ध हैं तथा डीवीडी के माध्यम से भी वितरित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने पाठ्यपुस्तकों को डिजिटल ई-पुस्तकों में परिवर्तित किया है, जो यूनिकोड प्रारूप में उपलब्ध हैं और पाठ को ऑडियो में परिवर्तित करने वाले उपकरणों के साथ संगत हैं। साथ ही, स्पर्श आधारित मानचित्र और कम लागत वाले ई-अधिगम मॉड्यूल भी विकसित किए गए हैं, ताकि गंभीर दिव्यांगता वाले विद्यार्थियों के लिए घर पर ही रहकर शिक्षा को संभव बनाया जा सके। इन प्रयासों के माध्यम से सीखने की निरंतरता सुनिश्चित की जा रही है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के समान और बाधा-रहित शिक्षा के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

प्रारम्भिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में ‘बरखा: सबके लिए पाठन श्रृंखला’ को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा विकसित किया गया है। यह पहल अधिगम के लिए सार्वभौमिक रूपांकन की अवधारणा को प्रस्तुत करती है। इसके अंतर्गत 40 बहुभाषी कहानी पुस्तिकाएँ तैयार की गई हैं, जो मुद्रित और डिजिटल दोनों प्रारूपों में उपलब्ध हैं। इन पुस्तिकाओं में स्पर्श आधारित चित्र, हाई कन्ट्रैस्ट वाले चित्रांकन, सुलभ लिपि तथा भारतीय सांकेतिक भाषा और बोली जाने वाली भाषा में ध्वनि-वीडियो परिचय शामिल हैं। इसके माध्यम से विविध प्रकार के शिक्षार्थियों—विशेषकर दृष्टि, बौद्धिक या शारीरिक चुनौतियों वाले बच्चों—में मूलभूत साक्षरता को प्रोत्साहित किया जाता है। इस श्रृंखला का डिजिटल संस्करण राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की वेबसाइट तथा ई-पाठशाला मंच पर उपलब्ध है। इससे शिक्षार्थी किसी भी उपकरण पर व्यक्तिगत और स्व-गति से पठन कर सकते हैं, जिससे अध्ययन में गोपनीयता, आत्मनिर्भरता और आनंद को बढ़ावा मिलता है। मूलभूत स्तर से ही भारतीय सांकेतिक भाषा को नियमित संप्रेषण माध्यम के रूप में शामिल करके यह पहल न केवल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अध्ययन में सहायता करती है, बल्कि सभी बच्चों को समावेशी व्यवहार के प्रति संवेदनशील भी बनाती है। इस प्रकार बरखा पठन श्रृंखला सभी शैक्षिक स्तरों पर सुलभ पाठ्यपुस्तकों और अध्ययन सामग्री के विकास के लिए एक प्रभावी और विस्तार योग्य मॉडल के रूप में सामने आती है।

निष्कर्ष

कोविड-19 महामारी के दौरान एक आपातकालीन शैक्षिक व्यवस्था के रूप में आरम्भ पीएम ई-विद्या ने आज एक मजबूत, विस्तार योग्य और शिक्षा जगत की समावेशी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का रूप ले लिया है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिवर्तनकारी दृष्टिकोण को साकार करती है। यह पहल ऑनलाइन, प्रसारण माध्यम और ऑफलाइन—इन तीनों माध्यमों के जरिए उच्च गुणवत्ता वाली, पाठ्यक्रम के अनुरूप और बहुभाषी अध्ययन सामग्री तक पहुँच सुनिश्चित करती है। इससे शहरी और ग्रामीण भारत के 24.8 करोड़ से अधिक स्कूली विद्यार्थियों, शिक्षकों, वयस्क शिक्षार्थियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को अध्ययन के व्यापक अवसर उपलब्ध हुए हैं। इस पहल ने डिजिटल अंतर को कम करने के साथ-साथ मूलभूत साक्षरता, शिक्षक सशक्तिकरण और जीवन के किसी भी पड़ाव पर अधिगम (शिक्षार्जन) को भी प्रोत्साहित किया है।

भारत जैसे-जैसे 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, पीएम ई-विद्या एक प्रौद्योगिकी-सक्षम, समान और अनुकूलनशील शिक्षा प्रणाली के वैश्विक मानक के रूप में उभर रहा है। समावेशन और अंतिम छोर तक पहुँच को प्राथमिकता देते हुए यह पहल स्थान, भाषा या क्षमता की परवाह किए बिना प्रत्येक शिक्षार्थी को अपनी पूर्ण क्षमता तक पहुँचने के लिए सशक्त बनाती है। निरंतर निवेश, विभिन्न हितधारकों के सहयोग और सतत नवाचार के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पीएम ई-विद्या न केवल भारत की शिक्षा यात्रा को जारी रखे, बल्कि सार्वभौमिक, आनंददायक और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा की दिशा में इसे और अधिक गति प्रदान करे।

संदर्भ:

प्रेस सूचना ब्यूरो।

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2097864

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1900797

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1997882

 

पीएम ई विद्या :

https://pmevidya.education.gov.in/radio.html
https://pmevidya.education.gov.in/cwsn.html
https://pmevidya.education.gov.in/swayam-portal.html

 

केन्द्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान:

 

https://ciet.ncert.gov.in/barkhaa

https://ciet.ncert.gov.in/initiative/nistha

 

स्वयं:

https://swayam.gov.in/

 

स्वयं प्रभा:

https://www.swayamprabha.gov.in/about/competitive

https://www.swayamprabha.gov.in/about

 

शिक्षा मंत्रालय :
 

https://www.nios.ac.in/departmentsunits/media-unittelecast/mukta-vidya-vani-and-community-radio.aspx

https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s3kv04a78efe4184c43df899cc8ec2e7bd/uploads/2024/08/2024081655-1.pdf

https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/1714/AU210.pdf?source=pqals#:~:text=ANNPURNA%20DEVI),teacher%20educators%20across%20the%20country.

https://diksha.gov.in/

https://www.onos.gov.in/

https://dsel.education.gov.in/en/nep-overview

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पीआईबी, शोध इकाई

पीके/केसी/डीटी

(Explainer ID: 157769) आगंतुक पटल : 133
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