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Energy & Environment

ऊर्जा स्रोतों का बदलता स्वरूप

Posted On: 28 FEB 2026 11:08AM

हर दिन जब घरों, स्कूलों, खेतों, कारखानों और अस्पतालों में बत्ती जलती है, तो हम शायद ही सोचते हैं कि यह बिजली कहां से आती है। क्लास को ठंडा करने वाला पंखा, खेत को पानी देने वाला पंप और यात्रियों को ले जाने वाली ट्रेन-ये सभी एक विशाल और सावधानी से संचालित ऊर्जा व्यवस्था पर निर्भर करते हैं, जो चुपचाप पर्दे के पीछे काम करती रहती है।

आज भारत में यह व्यवस्था बदल रही है। जैसे-जैसे देश आगे बढ़ रहा है, हर घर और हर कामकाज के लिए भरोसेमंद, किफायती, स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

लगातार सुधारों का एक महत्वपूर्ण परिणाम बिजली की उपलब्धता में बढ़ोतरी रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन बिजली उपलब्धता 2014 में 12.5 घंटे से बढ़कर 22.6 घंटे हो गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में अब 2014 के 22.1 घंटे के मुकाबले लगभग 23.4 घंटे बिजली मिल रही है। ये सुधार पूरे देश में बिजली सेवाओं की भरोसेमंदी और पहुंच में हुए बड़े बदलाव को दर्शाते हैं।

आज भारत दुनिया के शीर्ष तीन ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है, और बिजली की मांग हर साल बढ़ती जा रही है। कुल बिजली उत्पादन 2023–24 के 1,739.09 बिलियन यूनिट (BU) से बढ़कर 2024–25 में 1,829.69 BU हो गया, जो 5.21% की वृद्धि दर्शाता है। 2025–26 के लिए उत्पादन लक्ष्य 2,000.4 BU तय किया गया है।

नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की शुरुआत से लेकर सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) अधिनियम, 2025 के माध्यम से परमाणु कानूनों के आधुनिकीकरण, ऊर्जा दक्षता को मजबूत करने, बिजली वितरण सुधारने और डिजिटल ऊर्जा अवसंरचना बनाने तक यह बदलाव स्पष्ट सरकारी पहलों से आकार ले रहा है।

भारत का विकसित होता ऊर्जा परिदृश्य पुराने स्रोतों को अचानक छोड़ने के बारे में नहीं है। यह नए विकल्पों को सावधानीपूर्वक और चरणबद्ध तरीके से अपनाने की प्रक्रिया है, ताकि देश विकास को गति दे सके, आजीविका में सुधार ला सके और 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन हासिल करने की अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की ओर आगे बढ़ सके।

नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार: विस्तार से वैश्विक नेतृत्व तक

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार एक नीतिगत बदलाव को दर्शाता है, जिसमें बड़े पैमाने, तेज़ गति, मजबूत विनिर्माण क्षमता और वैश्विक सहयोग का मेल है। वहीं, इंटरनेशनलल रिन्यूबल एनर्जी एजेंसी (IRENA) की रिन्यूबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स  2025 रिपोर्ट के अनुसार, कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है।

खासकर सौर ऊर्जा में तेज़ वृद्धि देखी गई है; स्थापित सौर क्षमता 2014 के 3 गीगावाट से बढ़कर जनवरी 2026 में 140 गीगावाट हो गई। इस बढ़ोतरी ने कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत से अधिक करने में मदद की है।

पवन ऊर्जा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है: जनवरी 2026 तक भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता लगभग 54.65 गीगावाट तक पहुँच गई, जो नवीकरणीय ऊर्जा मिश्रण में बड़ा योगदान देती है और सौर ऊर्जा के साथ मिलकर ग्रिड विविधता को मजबूत बनाती है। साथ मिलकर सौर और पवन ऊर्जा भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का प्रमुख हिस्सा बनाते हैं।

सरकारी कार्यक्रमों ने इस विस्तार को घरों, कृषि, अवसंरचना और विनिर्माण क्षेत्रों में समर्थन दिया है:

  • पीएम सूर्य घर योजना के तहत 23.9 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे 7 गीगावाट विकेंद्रीकृत स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जुड़ी है।
  • प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देता है, जिससे डीज़ल पर निर्भरता कम होती है और किसानों को स्थिर ऊर्जा आपूर्ति मिलती है। योजना का लक्ष्य 31.03.2026 तक 14 लाख स्टैंडअलोन पंप स्थापित करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।
  • 13 राज्यों में 55 सोलर पार्क स्वीकृत किए गए हैं, जिनकी कुल स्वीकृत क्षमता लगभग 40 गीगावाट है, जिससे बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाओं की स्थापना तेज हुई है।
  • ₹24,000 करोड़ के प्रावधान वाली प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना घरेलू सौर विनिर्माण को मजबूत कर रही है और आयात पर निर्भरता घटा रही है।

नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार अब उत्पादन, अवसंरचना, विनिर्माण और वैश्विक सहयोग तक फैल चुका है। अब ध्यान केवल क्षमता बढ़ाने पर नहीं, बल्कि एक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर स्वच्छ ऊर्जा पारितंत्र बनाने पर केंद्रित हो गया है।

ग्रीन हाइड्रोजन: ऊर्जा के अगले मोर्चे का निर्माण

 

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

 

ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जो जीवाश्म ईंधन की बजाय नवीकरणीय ऊर्जाजैसे सौर या पवन ऊर्जाका उपयोग करके बनाई जाती है। इस प्रक्रिया में पानी को इलेक्ट्रोलिसिस के जरिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है, जिसमें बिजली सोलर पैनल या विंड टर्बाइन से आती है। भारत सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार, इस तरीके से बनी हाइड्रोजन कोग्रीनतभी माना जाता है जब पूरी प्रक्रिया से होने वाला कुल उत्सर्जन बहुत कम होयानी हर 1 किलोग्राम हाइड्रोजन उत्पादन पर अधिकतम 2 किलोग्राम CO₂ समतुल्य (पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर)

ग्रीन हाइड्रोजन बायोमास (जैसे कृषि अपशिष्ट) को हाइड्रोजन में बदलकर भी बनाई जा सकती है, बशर्ते उत्सर्जन इसी सीमा के भीतर रहे।

ग्रीन हाइड्रोजन भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, खासकर उन क्षेत्रों के लिए जहाँ उत्सर्जन कम करना कठिन है, जैसे इस्पात, उर्वरक, रिफाइनिंग, शिपिंग और भारी परिवहन।

 

भारत ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत 2030 तक हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है, जिसे 2023 में शुरू किया गया था। इस मिशन से उम्मीद है कि:

  • ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित होगा
  • ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा के जीवाश्म ईंधन आयात में कमी आएगी
  • 2030 तक हर साल लगभग 50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से बचाव होगा

इस विस्तार को समर्थन देने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2029–30 तक ₹19,744 करोड़ का प्रावधान मंजूर किया है, जिसमें ₹17,490 करोड़ SIGHT कार्यक्रम के तहत शामिल हैं। यह कार्यक्रम घरेलू इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है।

कार्यान्वयन पहले ही शुरू हो चुका है:

  • भारत का पहला पोर्ट-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन पायलट शुरू किया जा चुका है।
  • 10 मार्गों पर बसों और ट्रकों के साथ हाइड्रोजन मोबिलिटी पायलट संचालित हो रहे हैं।
  • ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन योजना (2025) यह सुनिश्चित करती है कि भारत में उत्पादित हाइड्रोजन निर्धारित उत्सर्जन मानकों पर खरी उतरे, जिससे घरेलू और निर्यात बाजारों में विश्वसनीयता मजबूत होती है।

ग्रीन हाइड्रोजन नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार को औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन से जोड़ती है। इसे केवल पर्यावरणीय समाधान ही नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, विनिर्माण वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक रणनीतिक साधन के रूप में भी देखा जा रहा है। परमाणु, सौर और पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी भंडारण और महत्वपूर्ण खनिज—ये सभी ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा परिवर्तन की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सभी प्रयासों के साथ, ग्रीन हाइड्रोजन भारत के विकसित होते ऊर्जा परिदृश्य में अगले महत्वपूर्ण मोर्चे के रूप में उभर रहा है।

परमाणु ऊर्जा: विधायी आधुनिकीकरण और बेसलोड विस्तार

परमाणु ऊर्जा लगातार और चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराती है तथा इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बहुत कम होता है। जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, परमाणु ऊर्जा ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और भरोसेमंद बेसलोड आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

भारत की वर्तमान परमाणु क्षमता 8.78 गीगावाट है। नए रिएक्टरों के निर्माण के साथ यह क्षमता 2031–32 तक बढ़कर 22.38 गीगावाट होने का अनुमान है। सरकार ने 2047 तक 100 गीगावाट हासिल करने के लक्ष्य के साथ एक दीर्घकालिक न्यूक्लियर एनर्जी मिशन की भी घोषणा की है, जो स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है।

इस विस्तार को समर्थन देने वाला एक प्रमुख संस्थागत सुधार सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) अधिनियम, 2025 है। यह अधिनियम भारत के परमाणु कानूनी ढांचे को एकीकृत और आधुनिक बनाता है। यह:

  • नियामकीय निगरानी के तहत सीमित निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति देता है
  • एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) को वैधानिक मान्यता प्रदान करता है
  • चरणबद्ध देयता ढांचा लागू करता है
  • सुरक्षा, संरक्षा और संरक्षण उपायों को मजबूत बनाता है
  •  संवेदनशील परमाणु ईंधन-चक्र गतिविधियों पर संप्रभु नियंत्रण बनाए रखता है

बड़े रिएक्टरों के साथ-साथ, न्यूक्लियर एनर्जी मिशन ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) के विकास के लिए ₹20,000 करोड़ आवंटित किए हैं, जिनका लक्ष्य 2033 तक कम से कम पाँच स्वदेशी डिज़ाइन वाले एसएमआर तैयार करना है। ये उन्नत रिएक्टर अधिक लचीले, विस्तार योग्य और विभिन्न ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए उपयुक्त बनाए गए हैं।

ऊर्जा दक्षता को मजबूत बनाना और कार्बन बाज़ारों का विकास

ऊर्जा दक्षता केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा का समझदारी से उपयोग करना भी है। इसका अर्थ है कम बिजली, ईंधन या ऊष्मा का इस्तेमाल करते हुए वही काम करना। इससे लागत कम होती है और प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ती है, जबकि ऊर्जा संरक्षण का उद्देश्य अपव्यय से बचना होता है।

भारत ने वर्षों में नीतिगत सुधारों और बाज़ार आधारित तंत्रों के माध्यम से अपनी ऊर्जा दक्षता व्यवस्था को मजबूत किया है।

एक बड़ा बदलाव परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (PAT) योजना से कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) की ओर संक्रमण रहा है। CCTS के तहत:

  • अधिक उत्सर्जन वाले उद्योगों को ग्रीनहाउस गैस तीव्रता के लक्ष्य दिए जाते हैं।
  • जो इकाइयाँ लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करती हैं, उन्हें व्यापार योग्य कार्बन क्रेडिट मिलते हैं।
  • इन क्रेडिट्स की खरीद-फरोख्त की जा सकती है, जिससे दक्षता सुधार के लिए बाज़ार आधारित प्रोत्साहन मिलता है।

घरेलू स्तर पर भी ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं, ताकि लोग अधिक दक्ष उपकरण और प्रकाश व्यवस्था अपनाएँ। उजाला कार्यक्रम के तहत 36.87 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं, जिससे:

हर साल 47,883 मिलियन kWh ऊर्जा की बचत होती है

प्रति वर्ष 3.88 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आती है

 

 

                                                                 क्या आप जानते हैं?
उजाला की एलईडी बल्ब वितरण मॉडल अब भारत से बाहर भी अपनाया जा रहा है। मलेशिया के मेलाका राज्य ने एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) के साथ समझौते के तहत उजाला जैसी योजना लागू की है। इससे पहले, सरकार ने ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए UJALA-UK पहल भी शुरू की थी।

 

ऊर्जा दक्षता सूचना उपकरण (UDIT) जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म विभिन्न क्षेत्रों में पारदर्शिता, निगरानी और अनुपालन को और बेहतर बनाते हैं।

ऊर्जा दक्षता ग्रिड पर मांग का दबाव कम करती है और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को पूरक बनाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि बिजली की पहुँच बढ़ने के साथ-साथ उत्सर्जन उसी अनुपात में न बढ़े।

विद्युत क्षेत्र सुधार और वितरण प्रणाली को सुदृढ़ बनाना

विश्वसनीय बिजली केवल उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि उसके कुशल संचरण, वितरण, बिलिंग और प्रबंधन पर भी निर्भर करती है। इसलिए वितरण प्रणाली को मजबूत बनाना सुधारों का प्रमुख केंद्र रहा है।

दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY), इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (IPDS) और प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत वितरण अवसंरचना उन्नयन के लिए लगभग ₹1.85 लाख करोड़ का निवेश किया गया। इसके परिणामस्वरूप 18,374 गाँवों का विद्युतीकरण हुआ और 2.86 करोड़ घरों को बिजली कनेक्शन मिले, जिससे देशभर में बिजली की पहुँच में बड़ा विस्तार हुआ।

सुधारों के अगले चरण में डिस्कॉम्स की वित्तीय और परिचालन स्थिति सुधारने पर ध्यान दिया गया। 2021 में शुरू की गई रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS), जिसका कुल प्रावधान ₹3.03 लाख करोड़ है, के तहत ₹2.8 लाख करोड़ की परियोजनाएँ मंजूर की गई हैं, जिनका उद्देश्य अवसंरचना का आधुनिकीकरण और स्मार्ट मीटरिंग लागू करना है।

इस डिजिटल परिवर्तन के तहत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से देशभर में 5.62 करोड़ स्मार्ट बिजली मीटर लगाए जा चुके हैं। ये मीटर बिलिंग की सटीकता बढ़ाते हैं, तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान कम करते हैं तथा लगभग वास्तविक समय के डेटा के जरिए मांग प्रबंधन बेहतर बनाते हैं।

संरचनात्मक सुधारों के साथ विधायी सुधार भी किए जा रहे हैं। प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक, 2026 का उद्देश्य क्षेत्र की वित्तीय व्यवहार्यता को मजबूत करना, भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना, वितरण नेटवर्क का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करना और नियामकीय जवाबदेही को बेहतर बनाना है।

 

इंडिया एनर्जी स्टैक (IES): ऊर्जा पहुँच से ऊर्जा सहभागिता तक

IES एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है, जिसे उपभोक्ताओं, यूटिलिटी कंपनियों, नियामकों और वितरित ऊर्जा परिसंपत्तियों के बीच भरोसेमंद डिजिटल संपर्क सक्षम करने के लिए तैयार किया गया है। बिखरी हुई डेटा प्रणालियों और महंगे इंटीग्रेशन की समस्या को दूर करने के लिए विकसित यह प्लेटफ़ॉर्म ओपन स्टैंडर्ड और सहमति-आधारित डेटा साझा करने पर आधारित सामान्य डिजिटल ढांचा प्रदान करेगा, साथ ही डेटा का स्वामित्व उसके वास्तविक मालिकों के पास ही रहेगा।

यह पहल डेटा आदान-प्रदान को मानकीकृत करती है, जिससे एक ऐसा पारितंत्र बन सके जो इंटरऑपरेबल, प्रतिस्पर्धी और भागीदारी को आर्थिक मूल्य में बदलने में सक्षम हो।

IES का लक्ष्य उपभोक्ताओं को सक्रिय ऊर्जा भागीदार बनाना है, जिसके लिए यह सक्षम करेगा:
विभिन्न यूटिलिटी सेवाओं में पोर्टेबल और सरल ऑनबोर्डिंग

सहमति-आधारित डेटा साझाकरण के माध्यम से वास्तविक उपभोक्ता विकल्प

रूफटॉप सोलर, बैटरियों, ईवी चार्जर और लचीले लोड से बड़े पैमाने पर आय अर्जित करने की सुविधा

पॉलिसी ऐज़ कोडको शामिल करते हुए और लगभग वास्तविक समय में सेटलमेंट सक्षम बनाकर, IES पारदर्शिता बढ़ाता है, विवाद कम करता है और ग्रिड समन्वय को मजबूत बनाता है। ओपन इनोवेशन को प्रणाली दक्षता और आजीविका सृजन के साथ जोड़ते हुए, IES ऊर्जा सहभागिता को सशक्त बनाता हैजिससे उपभोक्ता ऊर्जा परिवर्तन से जुड़कर बड़े पैमाने पर विकल्प चुनने और कमाई करने में सक्षम होते हैं।


इसी दिशा में ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2026 विश्वसनीय 24×7 गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराने के लक्ष्य के लिए रणनीतियाँ प्रस्तुत करती है, ताकि बिजली क्षेत्र वित्तीय रूप से सक्षम और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बन सके तथा सस्ती कीमत पर ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

 

वैश्विक नेतृत्व और रणनीतिक साझेदारियां

जैसे-जैसे भारत अपने घरेलू ऊर्जा परिवर्तन को मजबूत कर रहा है, वह स्वच्छ ऊर्जा, वहनीयता और स्थिरता पर वैश्विक विमर्श को भी दिशा दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ राष्ट्रीय सुधारों को पूरक बनाती हैं और भारत को वैश्विक ऊर्जा समाधानों में सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करती हैं।

भारत जी20 एनर्जी ट्रांजिशन वर्किंग ग्रुप जैसे बहुपक्षीय मंचों में अग्रणी भूमिका निभाता है, जहाँ उसने स्वच्छ ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा पर सहयोग को आगे बढ़ाया है। अपनी जी20 अध्यक्षता के दौरान भारत ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस (GBA)  की शुरुआत की, जिसमें अब 25 देश और 12 अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हैं, जो दुनिया भर में किफायती और कम-कार्बन जैव ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं।

ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में भी भारत ने 2024 में इंटरनेशनल एनर्जी एफिशिएंसी हब से जुड़कर सहयोग को मजबूत किया है, जिससे घरेलू पहलों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ जोड़ा जा रहा है।

UNFCCC ढाँचे के तहत भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो हासिल करने और 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता में 45% कमी लाने का संकल्प लिया है, जो विकास और जलवायु जिम्मेदारी के बीच संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

इन सभी पहलों के साथ भारत सस्ती स्वच्छ ऊर्जा, न्यायसंगत जलवायु वित्त और तकनीक तक पहुँच के मुद्दों पर वैश्विक दक्षिण की एक रचनात्मक आवाज़ के रूप में उभर रहा है।

 

भारत की वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा पहल दो प्रमुख मंचों—इंटरनेशनल सोलर एलाएंस (ISA) और इंडिया एनर्जी वीक (IEW)पर आधारित है, जो मिलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सौर सहयोग और व्यापक ऊर्जा संवाद को आगे बढ़ाते हैं।

इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA): भारत द्वारा सह-स्थापित यह गठबंधन 125 से अधिक सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देशों को साथ लाता है, जिसका उद्देश्य सौर वित्त जुटाना, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना और विशेष रूप से विकासशील देशों में सस्ती सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ाना है।

इंडिया एनर्जी वीक (IEW): भारत द्वारा आयोजित यह वैश्विक मंच सरकारों, उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ईंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा संक्रमण के रास्तों पर संवाद का अवसर देता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत की समन्वयक भूमिका मजबूत होती है।

 

निष्कर्ष

भारत की ऊर्जा यात्रा अब किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं रही; अब यह सोलर पार्कों, रूफटॉप पैनलों, हाइड्रोजन पायलट परियोजनाओं, आधुनिक परमाणु ढाँचों, स्मार्ट मीटरों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से शक्ति ले रही है।

नवीकरणीय क्षमता का विस्तार, नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की प्रगति, डिस्कॉम्स को मजबूत करना और इंडिया एनर्जी स्टैक का निर्माण—ये सभी ऐसे मील के पत्थर हैं जो एक सुनियोजित और भविष्य-दृष्टि वाले ऊर्जा परिवर्तन को दर्शाते हैं। यह बदलाव अचानक नहीं है; यह योजनाबद्ध, चरणबद्ध और नीतिगत सुधार, अवसंरचना निवेश, तकनीकी नवाचार तथा वैश्विक सहयोग से समर्थित है।

जैसे-जैसे भारत 2070 के नेट-ज़ीरो लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, ऊर्जा स्रोतों का विकसित होता परिदृश्य दिखाता है कि विकास और स्थिरता साथ-साथ चल सकते हैं। घरों, खेतों, कारखानों और डेटा केंद्रों को शक्ति देने वाली ऊर्जा अब ऐसे तंत्र से आएगी जो लचीला, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार होगा।

भारत केवल बिजली पैदा नहीं कर रहा—वह यह भी पुनः परिभाषित कर रहा है कि ऊर्जा का उत्पादन, वितरण और उपयोग किस तरह किया जाए, ताकि भविष्य सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बन सके।

संदर्भ

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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई)

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इंडिया एनर्जी वीक

https://www.indiaenergyweek.com/

 

विद्युत मंत्रालय

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https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2215187&reg=3&lang=2

 

गृह मंत्रालय

https://ndmindia.mha.gov.in/ndmi/leadership-initiatives

 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)

https://missionlife-moefcc.nic.in/

 

नीति आयोग

https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2022-11/Mission_LiFE_Brochure.pdf
https://niti.gov.in/key-initiatives/life

 

भारत की संसद

https://sansad.in/ls/legislation/bills
https://sansad.in/getFile/annex/269/AU1111_Djrfhp.pdf?source=pqars
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU491_lHmqAc.pdf?source=pqars
https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU1638_Yolfxg.pdf?source=pqals
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वित्त मंत्रालय

https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/

 

कैबिनेट सचिवालय

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1847812&reg=3&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1837898&reg=3&lang=2

 

पीआईबी

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2022/nov/doc2022119122601.pdf

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=156593&NoteId=156593&ModuleId=3&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2199729&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=156480&ModuleId=3&reg=3&lang=2#:~:text=Recognising%20their%20importance%2C%20India%20observes,contributions%20towards%20efficient%20energy%20use.

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219208&reg=3&lang=1

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पीआईबी रिसर्च

 

पीके/केसी/वीएस

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