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Economy

केंद्रीय बजट 2026–27: ग्लोबल इंडिया के लिए चैंपियन एमएसएमई तैयार करना

एमएसएमई को विस्तार, प्रतिस्पर्धात्मकता और वैश्विक एकीकरण के लिए मज़बूत बनाना

Posted On: 15 FEB 2026 10:52AM

मुख्‍य बिंदु

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को “चैंपियन” के रूप में विकसित करने के लिए त्रिस्तरीय दृष्टिकोण का प्रस्‍ताव किया गया है, जिसके तहत एमएसएमई को इक्विटी, तरलता और पेशेवर सहायता प्रदान की जाएगी।
  • बजट में कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की वर्तमान मूल्य सीमा को पूर्णतः हटाने का प्रस्ताव है, ताकि भारत के छोटे व्यवसायों, कारीगरों और स्टार्ट-अप्स की आकांक्षाओं को प्रोत्साहन मिल सके।
  • भारत में एमएसएमई क्षेत्र का विनिर्माण में ~35.4% निर्यात में लगभग ~48.58% तथा जीडीपी में 31.1% का योगदान है; देश में 7.47 करोड़ से अधिक इकाइयाँ हैं, जो 32.82 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं।

 

 

केंद्रीय बजट 2026-27 में एमएसएमई को विकास के केंद्र में रखा गया है

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत के आर्थिक विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और विकास के इंजन तथा सामाजिक-आर्थिक प्रगति के प्रमुख प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं। ये उद्यम विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में रोजगार सृजन में अहम योगदान देते हैं, जिससे बेरोजगारी और गरीबी में कमी लाने में सहायता मिलती है। 7.47 करोड़ से अधिक उद्यमों और 32.82 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करने के साथ, यह क्षेत्र कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है। केंद्रीय बजट 2026–27 में उल्लेख किया गया है कि एमएसएमई का भारत के विनिर्माण में ~35.4%  निर्यात में ~48.58% तथा जीडीपी में 31.1% योगदान है।

गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता के साथ, बजट तीन प्रमुख कर्तव्यों को रेखांकित करता है: पहला, आर्थिक विकास को तीव्रता प्रदान करना और उसकी निरंतरता बनाए रखना; दूसरा, जन-आकांक्षाओं की पूर्ति करना; और तीसरा, प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और सेक्‍टर तक संसाधनों, सुविधाओं तथा राष्ट्र के विकास में सार्थक भागीदारी के अवसरों तक समान पहुँच सुनिश्चित करते हुए क्षमताओं का निर्माण करना।

पहले कर्तव्य के अंतर्गत, बजट एमएसएमई को “चैंपियन” के रूप में विकसित करने के लिए त्रिस्तरीय दृष्टिकोण का प्रस्ताव करता है, जिसके तहत इक्विटी सहायता प्रदान करना, तरलता को सुदृढ़ करना तथा पेशेवर और प्रबंधकीय विशेषज्ञता तक पहुँच को मजबूत करना शामिल है।

एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजटीय सुधार और रणनीतिक पहल

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय एमएसएमई क्षेत्र के विकास और विस्तार को प्रोत्साहित करते हुए इस क्षेत्र को सशक्त और गतिशील बनाने की परिकल्पना करता है। यह मुख्यतः उद्यमिता को बढ़ावा देने, रोजगार एवं आजीविका के अवसर सृजित करने तथा एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने में राज्यों को सहयोग प्रदान करता है। पिछले वर्षों से मंत्रालय के लिए बजटीय आवंटन में निरंतर वृद्धि हुई है, जो कौशल विकास और उद्यमिता संवर्धन के माध्यम से एमएसएमई के प्रदर्शन को दीर्घकालिक रूप से बेहतर बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित है।

केंद्रीय बजट 2026–27 वित्तीय सहायता बढ़ाते, नवाचार को प्रोत्साहित करते और नियामकीय अनुपालन को सरल बनाते हुए एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए विविध उपाय प्रस्तुत करता है। इन पहलों के माध्यम से सरकार का लक्ष्य घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ बनाना है।

पहले कर्तव्य के अंतर्गत एमएसएमई को “चैंपियन” के रूप में तैयार करने हेतु त्रिस्तरीय दृष्टिकोण

इक्विटी सहायता: इक्विटी सहायता उपायों के तहत, 10,000 करोड़ रुपये का एक समर्पित एसएमई ग्रोथ फंड घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य निर्धारित पात्रता मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहित कर भविष्य के चैंपियनों को तैयार करना है। इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म उद्यमों के लिए समर्थन बनाए रखने और जोखिम पूंजी तक निरंतर पहुँच सुनिश्चित करने के लिए 2021 में स्थापित आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) कोष में 2,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की जाएगी। उल्लेखनीय है कि एसआरआई कोष ने अब तक (30 नवंबर 2025 तक)  15,442 करोड़ रुपये के निवेश के माध्यम से 682 एमएसएमई को सहायता प्रदान की है।

तरलता सहायता: इस मोर्चे पर, एमएसएमई के लिए ट्रेड्स प्लेटफॉर्म के माध्‍यम से 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि पहले ही उपलब्‍ध करायी  जा चुकी है। इसकी क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए, चार मुख्य उपायों की घोषणा की गई है –

  1. केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा एमएसएमई से होने वाली समस्‍त खरीद के लिए ट्रेड्स को निपटान प्लेटफॉर्म के रूप में अनिवार्य करना, ताकि अन्य कॉर्पोरेट्स के लिए मानक निर्धारित  हो सके।
  2. ट्रेड्स प्लेटफॉर्म पर चालान छूट के लिए सीजीटीएमएसई-समर्थित ऋण गारंटी सहायता शुरु करना।
  3. सरकारी एमएसएमई खरीद के बारे में वित्तपोषकों के साथ जानकारी साझा करने के लिए जेम को ट्रेड्स के साथ एकीकृत करना, ताकि त्‍वरित और सस्‍ता ऋण प्राप्त करने में सुविधा हो।
  • iv. द्वितीयक बाज़ार को मजबूत बनाने, तरलता में सुधार लाने और निपटान में तेज़ी लाने के लिए ट्रेड्स प्राप्तियों को परिसंपत्ति-समर्थित प्रतिभूतियों के रूप में पेश करना।

पेशेवर सहायता : अंतिम दृष्टिकोण के अनुसार, सरकार आईसीएआई, आईसीएसआई, आईसीएमएआई जैसी पेशेवर संस्थाओं को अल्‍पावधि, मॉड्यूलर पाठ्यक्रम और व्यावहारिक उपकरण विकसित करने और विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में ‘कॉर्पोरेट मित्र’ की एक टीम तैयार करने को प्रोत्साहित करेगी। ये मान्यता प्राप्त सह-पेशेवर एमएसएमई को अनुपालन आवश्यकताओं को सुलभ लागत पर पूरा करने में मदद करेंगे।

भारत के छोटे व्यवसायों के लिए वैश्विक बाजार खोलने हेतु कर प्रस्ताव15

बजट में कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की वर्तमान सीमा हटाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे सीमा पार बी2सी व्यापार में बाधाएँ कम होने की संभावना है। यह भारत के छोटे व्यवसायों, कारीगरों और स्टार्ट-अप्स को ई - कॉमर्स के माध्‍यम से वैश्विक बाजार तक पहुँच कायम करने में मदद करेगा। साथ ही,यह अस्वीकृत और लौटाई गई खेपों के प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का उपयोग कर ऐसी खेपों को ट्रैक करने और उनकी पहचान में सुधार करने का लक्ष्य भी रखता है।

एमएसएमई को सशक्त बनाना: क्षमता को प्रदर्शन में बदलने वाली नीतियाँ

एमएसएमई क्षेत्र 2025 में औपचारिककरण में वृद्धि के साथ डिजिटल परिवर्तन की महत्‍वपूर्ण उपलब्धि का साक्षी बना। 1 जुलाई 2020 से दिसंबर 2025 तक 7.30 करोड़ से अधिक उद्यमों को उद्यम रजिस्‍ट्रेशन पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत किया गया।  इनमें से उद्यम पोर्टल पर 4.37 करोड़ और उद्यम असिस्ट प्लेटफ़ॉर्म पर 2.92 करोड़ पंजीकरण शामिल हैं।

 

एमएसएमई के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने और सभी योजनाओं तथा लाभों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए 2020 में उद्यम पंजीकरण पोर्टल की शुरुआत की गई थी। पंजीकरण की प्रक्रिया मुफ्त, पेपरलेस और डिजिटल बनी हुई  है। इसके अतिरिक्त, अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों (आईएमई) को औपचारिक क्षेत्र के दायरे में लाने और उन्‍हें  प्राथमिक क्षेत्र ऋण(पीएसएल) लाभ प्रदान करने हेतु जनवरी 2023 में उद्यम असिस्ट प्लेटफ़ॉर्म (यूएपी) पोर्टल की शुरुआत की गई।  

 

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी)

पीएमईजीपी बैंक ऋण पर मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान करके सूक्ष्म उद्यमियों की सहायता करता है। इसे उच्च परियोजना लागत और गतिविधियों के विस्तारित दायरे को शामिल करने के लिए बढ़ाया गया है। आरंभ से ही (वित्तीय वर्ष 2008-09) वित्तीय वर्ष 2025-26 (दिसंबर 2025) तक, 10.71 लाख से अधिक सूक्ष्म उद्यमों को 29,249.43 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान की गई, जिससे लगभग 87 लाख से अधिक व्यक्तियों के लिए रोजगार सृजित हुआ।

एमएसएमई चैंपियंस योजना

एमएसएमई चैंपियंस योजना का उद्देश्य चुनिंदा उद्यमों की पहचान कर उनकी प्रक्रियाओं का उन्नयन करके,  अक्षमता को कम करके, प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाकर और विकास में सहायता प्रदान कर  उन्हें सशक्त बनाना है, ताकि ये उद्यम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों दोनों में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।

इसके तीन घटक ‘एमएसएमई-टिकाऊ (जेडईडी)’, ‘एमएसएमई प्रतिस्पर्धी (लीन)’ और ‘एमएसएमई-नवोन्‍मेषी  (इनक्यूबेशन, डिजाइन और आईपीआर) हैं। प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती प्रदान करने के लिए, एमएसएमई चैंपियंस योजना “शून्य दोष, शून्य प्रभाव” प्रथाओं को जेडईडी प्रमाणन के माध्यम से बढ़ावा देती है और एमएसएमई प्रतिस्पर्धी (लीन) योजना के माध्यम से उत्पादकता में सुधार लाती है।  एमएसएमई-नवोन्‍मेषी  घटक के माध्यम से नवाचार को भी संस्थागत रूप दिया जा रहा है, जो इन्‍क्‍यूबेशन, डिजाइन हस्तक्षेप और आईपीआर (बौद्धिक संपदा अधिकार) की सुरक्षा को सक्षम बनाता है।

एमएसएमई-टिकाऊ (जेडईडी) प्रमाणन योजना के तहत कुल 2,71,373 एमएसएमई पंजीकृत हुए, जिनमें से 1,92,689 उद्यमों को प्रमाणित किया गया।

एमएसएमई प्रतिस्पर्धी (लीन) योजना के तहत कुल 32,077 एमएसएमई पंजीकृत हुए, और 31,987 एमएसएमई ने लीन प्रतिज्ञा ली, जो लीन प्रथाओं और दर्शन के मूल्यों को बनाए रखने हेतु पूर्व-प्रतिबद्धता है।

 

ई-कॉमर्स और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने के लिए पहल

टीम (ट्रेड एनेबलमेंट एंड मार्केटिंग) पहल के साथ-साथ ओएनडीसी (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) इकोसिस्टम का तेज़ विस्तार— जिसका लक्ष्य 5 लाख एमएसएमई को शामिल करना है — एमएसएमई को औपचारिक ई-कॉमर्स और आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल होने का एक परिवर्तनकारी मार्ग प्रदान करता है, साथ ही लेन-देन की लागत को महत्वपूर्ण रूप से कम करता है।

ऑनलाइन विवाद निपटान (ओडीआर)

 

क्या आप जानते हैं?
ओडीआर पोर्टल 27 जून 2025 को एमएसएमई दिवस के अवसर पर लॉन्च किया गया था।

विलंबित भुगतानों पर ऑनलाइन विवाद निपटान (ओडीआर) के लिए एमएसई योजना, इसके तहत विकसित एमएसएमई ओडीआर पोर्टल के साथ एक सुव्यवस्थित पूर्व-न्यायिक ढाँचा स्थापित करती है। यह ढाँचा एमएसएमई अधिनियम, 2006 के तहत किसी तरह की कार्यवाही किए जाने से पहले खरीदार और विक्रेता के बीच मैत्रीपूर्ण, संवाद-आधारित समझौतों को प्रोत्साहित करता है। यह तंत्र वर्तमान व्यावसायिक संबंधों को बनाए रखते हुए  एमएसएमई को देय राशियों की प्रभावी वसूली में सक्षम बनाता है।

 

 सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना  (सीजीएसएमएसई)

ऋण तक पहुँच में एक महत्वपूर्ण सफलता, सीजीएसएमएसई सदस्य ऋणदायी संस्थान द्वारा एमएसई को बिना कोलैटरल सुरक्षा या तृतीय-पक्ष गारंटी के प्रदान की गई ऋण सुविधाओं के लिए ऋण गारंटी देती है।

  • इसने 2025 में 25 वर्ष पूरे किए, और इस अवधि के दौरान अपनी स्थापना (अगस्त 2000) से 1 करोड़ से अधिक गारंटियों का आंकड़ा पार कर लिया।
  • कुल 3.77 लाख करोड़ रुपये की राशि की 29.03 लाख गारंटियों को मंजूरी दी गई, (1 जनवरी से 30 नवंबर 2025)
  • गारंटी कवरेज की सीमा को 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
  • ट्रांसजेंडर उद्यमियों द्वारा स्‍थापित एमएसई  के लिए एक विशेष प्रावधान पेश किया गया है, जिसके तहत गारंटी शुल्क में 10% छूट और 85% तक बढ़ी हुई गारंटी कवरेज प्रदान की जाती है (1 मार्च 2025 से प्रभावी)।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना

सितंबर 2023 में लॉन्च की गई प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना अपने हाथों और उपकरणों के माध्यम से कार्य करने वाले18 शिल्पों के कारीगरों और हस्तशिल्पकारों को समग्र सहायता प्रदान करती है।

  • इस योजना के तहत 20 लाख से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षण और बैंकिंग सहायता प्रदान की जा रही है, और अकेले 2025 में 7.7 लाख लाभार्थियों ने मूल कौशल प्रशिक्षण पूरा किया।32
  • 1 दिसंबर 2025 तक, 30 लाख लाभार्थियों पंजीकृत किए गए, जिनमें से 23.09 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
  • 2025 में, 2.62 लाख लाभार्थियों को कोलैटरल-फ्री ऋण के रूप में 2,257 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई, और 6.7 लाख लाभार्थी डिजिटल रूप से सक्षम बनाए गए।
  • क्या आप जानते हैं?
    प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के 30,000 से अधिक लाभार्थियों को गवर्नमेंट ई- मार्केटप्‍लेस पर शामिल  किया गया है, जिससे उन्हें संस्थागत खरीदारों तक पहुँच बढ़ाने में मदद मिली है।

    प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लाभार्थियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन मार्केटिंग सहायता प्रदान की जा रही है।

श्रम सुधार

श्रम संहिताएँ रोज़गार का औपचारिकरण, डिजिटलीकरण के माध्यम से अनुपालन की सरलता, सामाजिक सुरक्षा का सुदृढ़ीकरण, और कार्यस्थल पर सुरक्षा और समानता सुनिश्चित करते हुए भारत की श्रम व्‍यवस्‍था को आधुनिक बनाने के प्रति लक्षित हैं। ये सुधार उद्यमों के विकास में सहायता और कर्मचारियों की भलाई की सुरक्षा करते हुए  एक संतुलित ढाँचा तैयार करते हैं, जो  मापदंडों को तर्कसंगत बनाकर, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर, निरीक्षणों को कम कर और पूर्वानुमेय समयसीमाएँ सुनिश्चित करके, एमएसएमई पर लंबे समय से पड़े अनुपालन भार को कम करता है।

निष्‍कर्ष

बीते दशकों में, एमएसएमई क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था के सबसे गतिशील स्तंभों में से एक बनकर उभरा है। अपेक्षाकृत कम पूंजी लागत पर बड़े पैमाने पर रोजगारों का सृजन करते हुए, ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देते हुए और संतुलित क्षेत्रीय विकास का समर्थन करते हुए एमएसएमई ने न्‍यायसंगत  विकास और सामाजिक-आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बड़े उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण सहायक भागीदार के रूप में, ये व्यापक औद्योगिक इकोसिस्‍टम को सशक्त बनाते हैं

आज, एमएसएमई भारत के विकास पथ के केंद्र में हैं। अपने विस्‍तार, विविधता और लचीलेपन के साथ  ये मौजूदा विनिर्माण गति का पूरा लाभ उठाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण को मजबूत बनाने, अधिक औपचारिक, नवाचार-प्रधान और निर्यात-केंद्रित विकास की दिशा में अग्रसर होने में पूर्णतया सक्षम हैं।

 संदर्भ

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय

https://msme.gov.in/about-us/about-us-ministry

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https://www.dcmsme.gov.in/schemes/clcs-tus/Approved%20MSME%20Competitive(LEAN)%20Scheme_Guidelines_07_10_2022.pdf

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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

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सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

https://www.mospi.gov.in/sites/default/files/publication_reports/Factsheet_with_infograph_A4.pdf

https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=78903&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2205156&reg=3&lang=2

वित्‍त मंत्रालय

https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/echapter.pdf

https://www.indiabudget.gov.in/doc/budget_speech.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221434&reg=3&lang=1

https://www.indiabudget.gov.in/doc/bh1.pdf

https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/sbe68.pdf

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2117470&reg=3&lang=2

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

https://www.mygov.in/group/ministry-micro-small-and-medium-enterprises-msme//#:~:text=Micro%2C%20Small%20and%20Medium%20Enterprises%20(MSME)%20sector%20has%20emerged,https://twitter.com/minmsme

राष्ट्रपति सचिवालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219510&reg=3&lang=1

भारतीय रिजर्व बैंक

https://www.rbi.org.in/commonman/English/scripts/FAQs.aspx?Id=3138

https://www.rbi.org.in/commonman/english/scripts/FAQs.aspx?Id=966

इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन

https://www.ibef.org/industry/msme

अन्‍य

https://ddnews.gov.in/en/union-budget-2026-27-puts-exports-at-core-of-growth-strategy/

पीआईबी आर्काइव

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2199330&reg=3&lang=2

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पीआईबी शोध

पीके/केसी/आरके

 
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