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Economy

केंद्रीय बजट 2026–27: भारत की वस्त्र मूल्य श्रृंखला को देगा मज़बूती

Posted On: 04 FEB 2026 9:58AM

मुख्य बिंदु

· केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र को विकास रणनीति के केंद्र में रखा गया है, जिसमें रोजगार, निर्यात, ग्रामीण आजीविका और स्‍थायी विनिर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

· मेगा टेक्सटाइल पार्कों और मानव-निर्मित रेशा (एमएमएफ) तथा तकनीकी वस्त्रों के लिए समर्थन के माध्यम से बड़े पैमाने पर और आधुनिक उत्पादन को बढ़ावा।

· सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा कारीगरों को तरलता उपायों, क्लस्टर आधुनिकीकरण और कौशल विकास पहलों के माध्यम से समर्थन प्रदान किया गया।

· नीति की दिशा बड़े पैमाने, स्‍थायित्‍व और प्रतिस्पर्धात्मकता पर ज़ोर देती है, जिससे वैश्विक वस्त्र मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मज़बूत किया जा सके।

 

केंद्रीय बजट 2026-27 में वस्त्र क्षेत्र बना प्रमुख केंद्र

केंद्रीय  बजट 2026–27 में वस्त्र क्षेत्र सहित रणनीतिक और अग्रणी क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

 भारत का वस्त्र क्षेत्र देश के सबसे प्राचीन और विविध उद्योगों में से एक है, जो सदियों पुरानी परंपराओं में गहराई से निहित है। केंद्रीय बजट 2026–27 ने भारत की विकास रणनीति के केंद्र में वस्त्र क्षेत्र को रखा है, जिससे अर्थव्यवस्था में इसका रणनीतिक महत्व स्‍पष्‍ट होता है। इस श्रम-प्रधान उद्योग को प्राथमिकता देकर, बजट ने वस्त्रों को रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि, ग्रामीण आजीविका और सतत् विनिर्माण के एक मुख्य संचालक के रूप में स्‍वीकार किया है।

उल्‍लेखनीय है कि, भारतीय वस्त्र क्षेत्र में महत्वपूर्ण अंतर्निहित क्षमताएँ हैं भारत क्षेत्रफल के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा कपास उगाने वाला देश है, सबसे बड़ा जूट उत्पादक है, रेशम और सूती कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, मानव निर्मित रेशों (एमएमएफ) के क्षेत्र में विश्व का दूसरा प्रमुख केंद्र है, और पॉलीएस्टर तथा विस्कोज़ रेशों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

वस्‍त्र क्षेत्र से आर्थिक प्रगति: बजट 2026–27 भारत के वस्त्र क्षेत्र को कैसे सुदृढ़ करता है

केंद्रीय बजट 2026-27 में संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एक समग्र और एकीकृत नीतिगत ढांचा घोषित किया गया हैरेशे से लेकर फैशन तक, ग्रामीण उद्योगों से लेकर वैश्विक बाजारों तक।

वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम

प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने और रोजगार सृजन करने के उद्देश्य से, सरकार ने वस्त्र क्षेत्र के लिए एक एकीकृत कार्यक्रम प्रस्तावित किया है, जो पाँच उप-घटक पर तैयार किया गया है:

  • राष्ट्रीय रेशा योजना: इस योजना का उद्देश्य रेशमी, ऊनी और जूट जैसे प्राकृतिक रेशों के साथ-साथ मानव निर्मित रेशों (एमएमएफ) और नए प्रकार के रेशों को समर्थन प्रदान करके, रेशा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता विकसित करना है। घरेलू रेशा उपलब्धता को मजबूत करने और उन्नत वस्त्र सामग्रियों में नवाचार को प्रोत्साहित करने के माध्यम से, यह योजना आयात पर निर्भरता कम करने, कपास से परे विविधीकरण को बढ़ावा देने और उच्च-प्रदर्शन एवं विशिष्‍ट वस्त्रों में भारत की क्षमता को सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखती है।
  • वस्त्र विस्तार और रोजगार योजना: पारंपरिक वस्त्र क्लस्टरों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित इस घटक के तहत मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और सामान्य परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्रों की स्थापना के लिए पूंजी सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, गुणवत्ता अनुपालन में सुधार लाने और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन सक्षम करने की अपेक्षा है।
  •  राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम: हथकरघा और हस्तशिल्प की मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करके एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सुदृढ़ किया जाएगा। इसका उद्देश्य बुनकरों और कारीगरों को लक्षित और प्रभावी समर्थन प्रदान करना, आय में सुधार करना, बाजार संपर्क सुनिश्चित करना और भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा को संरक्षित करना है। इसके अतिरिक्त, सरकार प्राकृतिक और वनस्पति आधारित रंगों के प्रचार-प्रसार और रंग गृहों की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है, जो दो घटकोंमेगा क्लस्टर विकास कार्यक्रम और आवश्यकता आधारित विशेष अवसंरचना परियोजनाओंके माध्यम से किया जा रहा है।
  • टेक्स-इको पहल: टेक्स-इको पहल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ वस्त्र और परिधान (टीए) निर्माण को बढ़ावा देती है। यह घरेलू उत्पादन को अंतरराष्ट्रीय स्थिरता मानकों के अनुरूप बनाती है और उभरते हरित बाजारों तक पहुँच को भी समर्थन देती है।
  • समर्थ 2.0: एक उन्नत कौशल विकास कार्यक्रम, समर्थ 2.0 का उद्देश्य उद्योग और शैक्षणिक संस्थाओं के साथ गहरे सहयोग के माध्यम से वस्त्र कौशल पारिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाना है। यह मूल्य श्रृंखला में उद्योग के लिए तैयार कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।

मेगा वस्त्र पार्क और तकनीकी वस्त्र

सरकार ने मेगा वस्त्र पार्कों की स्थापना चुनौती मोड में करने की घोषणा की है, जिसमें समेकित अवसंरचना प्रदान करने, पैमाने की दक्षताओं को सक्षम बनाने और वस्त्र मूल्य श्रृंखला में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इन पार्कों से तकनीकी वस्त्रों, जो कि एक उच्च संभावनाशील क्षेत्र है, के विकास को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है और इनका उपयोग औद्योगिक, चिकित्सा, रक्षा और अवसंरचना क्षेत्र में किया जाता है।

महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल

महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मज़बूती प्रदान करने पर केंद्रित है। यह पहल वैश्विक बाजार से संपर्क, ब्रांडिंग, सुव्यवस्थित प्रशिक्षण, कौशल विकास, गुणवत्ता सुधार और प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण पर जोर देती है। इसका उद्देश्य बुनकरों, ग्रामीण उद्योगों और ग्रामीण युवाओं को लाभ पहुँचाना और, साथ ही वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) पहल का समर्थन करना है।

वस्त्र और संबंधित क्षेत्रों के लिए निर्यात संवर्धन उपाय

वस्त्र और संबंधित क्षेत्रों के निर्यात को समर्थन देने के लिए, बजट में वस्‍त्र परिधान, चमड़े के परिधान, चमड़े या सिंथेटिक फुटवियर और अन्य चमड़े के उत्पादों के निर्यातकों के लिए निर्यात दायित्व अवधि को छह महीने से बढ़ाकर बारह महीने करने की घोषणा की गई है, जब ये उत्पाद ड्यूटी-फ्री आयातित सामग्री का उपयोग करके निर्मित किए गए हों। यह उपाय निर्यातकों को अधिक संचालनात्मक लचीलापन, अनुपालन की आसानी और बेहतर कार्यशील पूंजी प्रबंधन प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।

टेक्सटाइल एमएसएमई के लिए टीआरईडीएस (TReDS ) के माध्यम से तरलता समर्थन

 

टीआरईडीएस (TReDS) क्या है?

टीआरईडीएस एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफ़ॉर्म है जो कई वित्तपोषकों के माध्यम से एमएसएमई की व्यापारिक प्राप्तियों के वित्तपोषण और छूट की सुविधा प्रदान करता है। ये प्राप्तियाँ कॉरपोरेट्स, अन्य खरीदारों, जिनमें सरकारी विभाग और पीएसयू शामिल हैं, से प्राप्त हो सकती हैं।

टेक्सटाइल एमएसएमई के लिए तरलता तक पहुँच को मजबूत करने के लिए, सरकार ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस) की प्रभावशीलता बढ़ाने के उपायों की घोषणा की है, जिसके माध्यम से अब तक ₹7 लाख करोड़ से अधिक की सुविधा प्रदान की जा चुकी है।

 

मुख्य उपायों में शामिल हैं:

  • एमएसएमई से खरीद के लिए सीपीएसई द्वारा टीआरईडीएस का अनिवार्य उपयोग
  • टीआरईडीएस पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग के लिए सूक्ष्‍म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) के माध्यम से क्रेडिट गारंटी समर्थन
  • सरकारी खरीद प्राप्तियों के तेज़ और कम लागत वाले वित्तपोषण को सक्षम बनाने के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) को टीआरईडीएस से जोड़ना
  • माध्यमिक बाजार में भागीदारी का समर्थन करने और तरलता सुधारने के लिए टीआरईडीएस प्राप्तियों को संपत्ति-समर्थित प्रतिभूतियों के रूप में पेश करना

एमएसएमई विकास कोष और चैंपियन एमएसएमई

 

क्या आप जानते हैं?

जनवरीनवंबर 2025 के दौरान, भारत के वस्त्र क्षेत्र ने 118 देशों और निर्यात गंतव्यों में निर्यात वृद्धि दर्ज की!

भविष्य के चैंपियन एमएसएमईके सृजन का समर्थन करने के लिए एक समर्पित ₹10,000 करोड़ का एमएसएमई विकास कोष शुरू किया गया है। यह कोष चयनित मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया है।

भारत में विकास, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा देता वस्त्र क्षेत्र                                                                                                              

करीब 179 अरब अमेरिकी डॉलर के अनुमानित आकार के साथ, भारतीय वस्त्र और परिधान (टी एंड ए) उद्योग देश की जीडीपी में लगभग 2% का योगदान देता है, विनिर्माण सकल मूल्यवर्धन (सकल मूल्यवर्धन) में लगभग 11% का हिस्सा रखता है, और निर्यात में 8.63% योगदान देता है, जो भारत की आर्थिक संरचना में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

निर्यात विकास की गति बनाए हुए हैं

निर्यात के क्षेत्र में, भारत वस्त्र और परिधान (टी एंड ए) का दुनिया में छठा सबसे बड़ा निर्यातक है, और इस क्षेत्र में विश्व निर्यात में इसका हिस्सा लगभग 4% है।

भारत का वस्त्र और परिधान (हस्तशिल्प सहित) निर्यात वित्तीय वर्ष 2025 में 37.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ गया, जो वित्तीय वर्ष 2024 में 35.87 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा था। यह वैश्विक व्यापार के मंद वातावरण के बावजूद हुआ, जो इस क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता, विविध बाजार उपस्थिति और मूल्य-संवर्धित एवं श्रम-गहन क्षेत्रों में मज़बूती को दर्शाता है।

  • दिसंबर 2025 में, निर्यात वृद्धि प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक थी, जिसमें सबसे अधिक हस्तशिल्प (7.2%), रेडी-मेड गारमेंट्स (2.89%), और एमएमएफ यार्न, फैब्रिक्स और मेड-अप्स (3.99%) की हिस्‍सेदारी रही।
  • ये रुझान वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव के बीच, मूल्य-वर्धित विनिर्माण, पारंपरिक शिल्प और रोजगार-गहन क्षेत्रों में भारत के प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को और सुदृढ़ करते हैं।
  • 2025 वह वर्ष था जब उभरते और पारंपरिक, दोनों बाजारों में महत्वपूर्ण विविधीकरण देखा गया, जिनमें यूएई, मिस्र, पोलैंड, सूडान, जापान, नाइजीरिया, अर्जेंटीना, कैमरून और युगांडा शामिल हैं। प्रमुख यूरोपीय बाजारों जैसे स्पेन, फ्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और यूके में वृद्धि स्थिर बनी रही।

रोज़गार सृजन

वस्त्र क्षेत्र भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार सृजन करने वाला क्षेत्र है। आर्थिक सर्वेक्षण 2026-27 के अनुसार, आठ प्रमुख उद्योग समूहों में वस्त्र उद्योग का रोजगार में 9% हिस्सा है। 2025 के अनुमान बताते हैं कि यह क्षेत्र 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है, जिसमें महिलाएँ और ग्रामीण समुदाय शामिल हैं।

भारत के वस्त्र क्षेत्र के विकास संचालक

इन वर्षों के दौरान, भारत ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों बाजारों में किफायती मास-मार्केट परिधानों से लेकर विशेष, उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों तक व्‍यापक मांग को पूरा करने की क्षमता विकसित की है। इस प्रतिस्पर्धात्मकता को बनाए रखने और निवेश को और आकर्षित करने के लिए, सरकार विभिन्न लक्षित पहलों के माध्यम से इस क्षेत्र का सक्रिय रूप से समर्थन कर रही है।

वर्ष 2025 में प्रधानमंत्री मित्रा योजना की महत्वपूर्ण प्रगति

  • सरकार ने ग्रीनफील्ड/ब्राउनफील्ड स्थलों में 7 पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन और अपैरल (पीएम मित्रा) पार्कों की स्थापना को मंजूरी दी, जिनके लिए 7 वर्षों की अवधि (2027-28 तक) के दौरान ₹4445 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
  • ₹27,434 करोड़ से अधिक की अपेक्षित निवेश संभावना के साथ निवेश समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • सभी 7 राज्य सरकारों द्वारा ₹2590.99 करोड़ मूल्य के अवसंरचना कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
  • इस योजना से प्रत्येक पार्क में अनुमानित ₹10,000 करोड़ के निवेश के साथ 3 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है (1 लाख प्रत्यक्ष और 2 लाख अप्रत्यक्ष)

वस्त्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई योजना)

  • वस्त्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी -प्रोत्साहन योजना (पीएलआई), जो वित्तीय वर्ष 2029-30 तक संचालन में रहेगी, का उद्देश्य एमएमएफ परिधान और फैब्रिक्स तथा तकनीकी वस्त्र उत्पादों के उत्पादन को बढ़ावा देना है।
  • इसका उद्देश्य उद्योग को आकार और पैमाना हासिल करने में मदद करना, प्रतिस्पर्धी बनाना, रोजगार के अवसर सृजित करना और एक व्यवहार्य उद्यम एवं प्रतिस्पर्धी उद्योग के निर्माण को समर्थन देना है।

कपास क्षेत्र में सुधार

  • कपास क्षेत्र लगभग 60 लाख किसानों और मूल्य श्रृंखलाओं में 4–5 करोड़ लोगों को समर्थन देता है।
  • पारदर्शिता बढ़ाने के लिए, कपास किसान मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया, जो किसानों को स्वयं पंजीकरण और स्लॉट बुकिंग करने की सुविधा देता है।
  • भारतीय कपास की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए 'कस्तूरी कॉटन भारत' कार्यक्रम लॉन्च किया गया।
  • इसके अलावा, कपास  की गांठों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) 2023 को अगस्त 2026 तक स्थगित कर दिया गया है।

स्थिरता और चक्रीयता को बढ़ावा देने हेतु पहल

  • अपसायकल उत्पादों की सार्वजनिक खरीद को बढ़ावा देने और मुख्यधारा में लाने के लिए टेक्सटाइल कमिटी, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईए) और पब्लिक एंटरप्राइजेज स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस (एससीओपीई), सर्कल बैक अभियान, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, और नेशनल टेक्‍स्‍टाइल सस्‍टेनेबिलिटी काउंसिल के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

श्रम सुधार

  • नई श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन का वस्त्र उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
  • वेतन, रोजगार की शर्तों, कार्यस्थल सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और विवाद समाधान को शामिल करने वाला एक एकीकृत ढांचा स्थापित करके, ये संहिताएँ अनुपालन को सुव्यवस्थित करती हैं और श्रमिक कल्याण को सुदृढ़ करती हैं।

 वस्‍तु एवं सेवा कर 2.0 (जीएसटी)

  • 2025 में वस्त्र क्षेत्र में नेक्स्ट-जेन जीएसटी को तर्कसंगत किया जाना उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम करने, निर्माताओं को राहत देने और निर्यात तथा रोजगार को बढ़ावा देने में सफल रहा।

निर्यात में निरन्‍तर वृद्धि के रुझान, व्यापक बाजार पहुँच और मूल्य-वर्धित क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन टी एंड ए के लिए एक भरोसेमंद और लचीले वैश्विक स्रोत केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को पुनः पुष्ट करता है। विविधीकरण, प्रतिस्पर्धात्मकता और एमएसएमई की भागीदारी पर निरंतर जोर के साथ, यह क्षेत्र आने वाले समय में निर्यात बढ़ाने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ अपने एकीकरण को गहरा करने के लिए अच्छी स्थिति में है।

वस्त्र क्षेत्र का परिदृश्‍य

हाल का नीतिगत संवर्धन पैमाने और आधुनिकीकरण की ओर हैएकीकृत वस्त्र पार्क, एमएमएफ और तकनीकी वस्त्रों के लिए समर्थन, निवेश प्रोत्साहन और कच्चे माल की बाधाओं को आसान बनानासभी का उद्देश्य प्रतिस्पर्धात्मकता और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना है।

साथ ही, वस्त्र मंत्रालय ने निर्यात के लिए एक महत्वाकांक्षी दिशा निर्धारित की है, जहाँ वर्तमान में वस्त्र निर्यात लगभग ₹3 लाख करोड़ है और विज़न 2030 का लक्ष्य इसे मजबूत घरेलू उत्पादन और व्यापक वैश्विक पहुँच के माध्यम से लगभग ₹9 लाख करोड़ तक बढ़ाना है।

व्यापार के क्षेत्र में हुए बदलाव इस दृष्टिकोण में एक और आयाम जोड़ते हैं। भारत के वस्त्र और परिधान (टी एंड ए) क्षेत्र के लिए एक परिवर्तनकारी व्यापार समझौता, भारत-ईयू एफटीए, सभी टैरिफ लाइनों को कवर करते हुए वस्त्र और परिधान में शून्य शुल्क पहुँच (ज़ीरो ड्यूटी एक्‍सेस) प्रदान करता है और 12% तक शुल्क घटाता है। यह भारतीय लकड़ी, बांस और हस्तशिल्पित फर्नीचर पर 10.5% तक के शुल्क को कम करता है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में कहा कि भारतईयू एफटीए शुल्क स्थितियों में सुधार करके, विशेष रूप से श्रम-गहन क्षेत्रों को लाभ पहुंचाते हुए, भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात को यूरोपीय बाजार में महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा सकता है।

केंद्रीय बजट 2026-27 की दिशा रोजगार सृजन, समावेशी विकास, स्‍थायित्‍व, और वस्त्र मंत्रालय के नेतृत्व में राज्यों, उद्योग, एमएसएमई, कारीगरों और कौशल संस्थानों के साथ समन्वित कार्यान्वयन पर और अधिक जोर देती है, जिससे  प्रतिस्पर्धी, भरोसेमंद और भविष्य की ओर उन्‍मुख वैश्विक वस्त्र और परिधान केंद्र के रूप में भारत की स्थिति और सुदृढ़ होती है।

 

निष्कर्ष

भारत का वस्त्र क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जिसे मजबूत उत्पादन आधार, बढ़ते निर्यात और लगातार नीतिगत समर्थन द्वारा समर्थित किया जा रहा है।

केंद्रीय बजट 2026–27 रेशा और निर्माण से लेकर कौशल, स्‍थायित्‍व और बाजार की पहुँच तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करके इस मार्ग को और सुदृढ़ करता है।

व्यापार भागीदारी के विस्तार और पैमाने, प्रौद्योगिकी और मूल्य संवर्धन की स्पष्ट दिशा के साथ, ये उपाय इस क्षेत्र को वैश्विक एकीकरण को गहरा करने के लिए तैयार करते हैं, साथ ही पूरे देश में रोजगार सृजन और आजीविका समर्थन जारी रखते हैं।

 

संदर्भ

वित्‍त मंत्रालय

https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/echapter.pdf

https://www.indiabudget.gov.in/doc/budget_speech.pdf

वस्‍त्र मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221486&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2208051&reg=6&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2215380&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2219250&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2204546&reg=3&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2222481&reg=3&lang=2

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2117470&reg=3&lang=2

भारतीय रिज़र्व बैंक

https://www.rbi.org.in/commonman/English/scripts/FAQs.aspx?Id=3138

इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन

https://www.ibef.org/industry/textiles

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