Social Welfare
केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र
आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भर भारत और पूर्व सैनिकों का कल्याण
Posted On:
03 FEB 2026 4:36PM
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मुख्य बिंदु
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- केंद्रीय बजट 2026–27 में रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो सभी मंत्रालयों में सबसे बड़ा बजटीय प्रावधान है।
- यह आवंटन वित्त वर्ष 2025–26 के बजट अनुमानों (बीई) की तुलना में 15.19% की वृद्धि को दर्शाता है और कुल केंद्रीय सरकारी व्यय का 14.67% है।
- घरेलू रक्षा उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उनसे खरीद के लिए 1.39 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
- वित्त वर्ष 2026–27 में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना हेतु 12,100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो वित्त वर्ष 2025–26 की तुलना में प्रारंभिक चरण में 45.49% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है।
- वित्त वर्ष 2026–27 में डीआरडीओ का आवंटन 29,100.25 करोड़ रुपये रहा है, जो वित्त वर्ष 2025–26 के 26,816.82 करोड़ रुपये की तुलना में अधिक है।
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परिचय

केंद्र सरकार द्वारा 01 फरवरी 2026 को प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत के आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और नवाचार की प्राथमिकताओं के केंद्र में राष्ट्रीय सुरक्षा को रखा गया है। रक्षा मंत्रालय को अब तक का सर्वाधिक 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के बजटीय अनुमानों (बीई) की तुलना में 15.19% अधिक है और यह कुल केंद्रीय बजट का 14.67% हिस्सा है, जो सभी मंत्रालयों में सर्वाधिक है। भारत का रक्षा बजट वर्ष 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, अर्थात इसमें लगभग 5.32 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो लगभग तीन गुना वृद्धि को दर्शाता है। रक्षा मंत्रालय को किए गए कुल आवंटन में से 27.95% पूंजीगत व्यय हेतु, 20.17% रखरखाव एवं परिचालन तैयारी में राजस्व व्यय के लिए, 26.40% वेतन व भत्तों पर राजस्व खर्च के उद्देश्य से, 21.84% रक्षा पेंशन और 3.64% असैन्य संगठनों को निर्धारित किया गया है।
आधुनिकीकरण पर जोर
रक्षा क्षेत्र से संबंधित बजट का एक प्रमुख लक्ष्य तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण और भविष्य की क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित होना है। इसके अंतर्गत उन्नत प्लेटफॉर्म, नवीनतम प्रौद्योगिकियों तथा फोर्स मल्टीप्लायर क्षमताओं की प्राप्ति पर विशेष बल दिया गया है।
- वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बलों को पूंजीगत मद के अंतर्गत 2.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटन किया गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के बजटीय अनुमानों की तुलना में 21.84% अधिक है।
- 2.19 लाख करोड़ रुपये के कुल पूंजीगत आवंटन में से 1.85 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत अधिग्रहण के लिए निर्धारित किए गए हैं, जो वित्त वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 24% की वृद्धि को दर्शाता है।
- आगामी पूंजीगत अधिग्रहण परियोजनाओं के माध्यम से सशस्त्र बलों को अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान, उन्नत हथियार प्रणालियां, युद्धपोत एवं पनडुब्बियां, मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) तथा ड्रोन जैसी आधुनिक क्षमताएं प्राप्त होंगी।
- सीमा सड़क संगठन के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजीगत आवंटन बढ़ाकर 7,394 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
- सीमा सड़क संगठन को प्रदान किए गए इस बढ़े हुए आवंटन से सुरंगों, पुलों और हवाई पट्टियों (एयरफील्ड) जैसे रणनीतिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के आधुनिकीकरण एवं सुदृढ़ीकरण में सहायता मिलेगी।
- रक्षा सेवाओं के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल आधारित नेटवर्क के विकास हेतु 975 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा
बजट ‘आत्मनिर्भर भारत’ को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहित करता है और आयात पर निर्भरता को कम करने पर बल देता है। इसके परिणामस्वरूप, निजी क्षेत्र की कंपनियों सहित घरेलू रक्षा उद्योग इसके प्रमुख लाभार्थी होंगे।
- घरेलू रक्षा उद्योगों से खरीद के लिए 1.39 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
- वित्त वर्ष 2026-27 में कुल पूंजीगत अधिग्रहण बजट का लगभग 75% भाग घरेलू रक्षा उद्योगों के लिए आरक्षित किया गया है।
- रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत एवं जांच-पड़ताल आवश्यकताओं के लिए उपयोग किए जाने वाले विमान पुर्जों के निर्माण हेतु आयात किए जाने वाले कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क (बेसिक कस्टम ड्यूटी) से छूट प्रदान की जाएगी।
- यह कदम घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने में सहायक होगा।
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए बजट आवंटन को वित्त वर्ष 2025-26 के 26,816.82 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 29,100.25 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस कुल आवंटन में से 17,250.25 करोड़ रुपये का एक महत्वपूर्ण भाग पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय लागू किए हैं। 1 दिसंबर, 2025 तक की स्थिति के अनुसार, प्रमुख पहलों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- बजट 2022-23 की घोषनाओं के अनुरूप, रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का लगभग 25% भाग रक्षा उद्योग, स्टार्ट-अप्स और शैक्षणिक संस्थानों के लिए खोल दिया गया है।
- 82 चिन्हित अनुसंधान क्षेत्रों को समाहित करते हुए 15 डीआरडीओ–उद्योग–शैक्षणिक संस्थान उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की गई है।
- डीआरडीओ ने रक्षा उपकरणों के निर्माण हेतु लगभग 2,000 उद्योगों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया है, जिसके अंतर्गत नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से भारतीय भागीदारों को बिना किसी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शुल्क के तकनीक हस्तांतरित की गई है।
- वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान रक्षा अनुसंधान एवं विकास पर कुल 68,210.22 करोड़ रुपये का व्यय किया गया, और वित्त वर्ष 2025-26 के बजटीय अनुमानों के अंतर्गत अतिरिक्त 26,816.82 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
- डीआरडीओ द्वारा वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 की अवधि में 148 नए अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है।
पूर्व सैनिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवा और पेंशन सहायता केंद्र

केंद्रीय बजट 2026-27 स्वास्थ्य सेवाओं एवं पेंशन के लिए बढ़ा हुआ आवंटन प्रदान कर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं व समयबद्ध वित्तीय सहायता सुनिश्चित करता है, जिससे पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता तथा अधिक सुदृढ़ होती है।
- वित्त वर्ष 2026-27 में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के लिए 12,100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के बजटीय अनुमानों की तुलना में 45.49% अधिक है।
- पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए चिकित्सा उपचार से संबंधित व्यय (एमटीआरई) में वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- पिछले पांच वर्षों में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के लिए बजट आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2021-22 की तुलना में बजटीय अनुमान (बीई) स्तर पर 300% से अधिक बढ़ गया है।
- रक्षा पेंशन के लिए कुल आवंटन 1.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक रखा गया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के बजटीय अनुमानों की तुलना में 6.56% अधिक है।
- यह राशि 34 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को मासिक पेंशन के भुगतान में सहायक है, जिसे स्पर्श प्रणाली और अन्य अधिकृत पेंशन वितरण प्राधिकरणों के माध्यम से प्रदान किया जाता है।
निष्कर्ष
केंद्रीय बजट 2026-27, ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के पश्चात प्रस्तुत किया गया पहला केंद्रीय बजट है, जो आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता और नवाचार के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने पर सरकार के निरंतर फोकस को प्रतिबिंबित करता है। स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को प्रोत्साहन, अनुसंधान एवं अवसंरचना में लक्षित निवेश व पूर्व सैनिकों के कल्याण को सतत प्राथमिकता देने के साथ, रक्षा क्षेत्र के लिए यह बजट एक अधिक सुरक्षित और सशक्त भारत की आधारशिला रखता है, जो ‘विकसित भारत @2047’ के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
संदर्भ
पत्र सूचना कार्यालय
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221612®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221455®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=154617
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2221612®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2191937®=3&lang=2
केंद्रीय बजट
https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/allsbe.pdf
रक्षा मंत्रालय
https://x.com/SpokespersonMoD/status/2017910793808044148?s=20
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पीआईबी शोध
पीके/केसी/एनके
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