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इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना

केंद्रीय बजट 2026–27 में योजना आवंटन बढ़कर ₹40,000 करोड़ हुआ

Posted On: 03 FEB 2026 2:36PM

मुख्य बातें

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में ईसीएमएस के लिए आवंटन बढ़कर 40,000 करोड़ हुआ।
  • दिसंबर 2025 तक, ईसीएमएस के तहत अपेक्षित निवेश 1.15 लाख करोड़ रहा, जो भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए सबसे अधिक है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 1.9 लाख करोड़ (2014–15) की तुलना में लगभग छह गुना बढ़कर 11.3 लाख करोड़ (2024–25) हो गया।     

 

परिचय    

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र विकास के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। केंद्रीय बजट 2026–27 में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना (ईसीएमएस) के लिए आवंटन को बढ़ाकर 40,000 करोड़ करने की घोषणा की गई है, जो घरेलू निर्माण क्षमता को मजबूत करने के प्रति सशक्त नीतिगत समर्थन का संकेत देता है। 

पिछले ग्यारह वर्षों में, भारत का तेजी से एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स-निर्माण केंद्र के रूप में रूपांतरण हुआ है और उत्पादन में लगभग छह गुनी वृद्धि हासिल की गयी है। इस क्षेत्र ने अपने औद्योगिक आधार का विस्तार किया है, 25 लाख नौकरियों का सृजन किया है तथा रोजगार एवं आर्थिक विकास के एक प्रमुख संचालक के रूप में उभरा है।

यह प्रगति भारत के निर्यात प्रदर्शन और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ इसके बढ़ते एकीकरण में परिलक्षित होती है। रणनीतिक सरकारी पहलों और लगातार नीति समर्थन ने स्थानीय निर्माण को मजबूत किया है, निर्यात विस्तार को समर्थन दिया है और महत्वपूर्ण वैश्विक निवेश आकर्षित किया है। ईसीएमएस, घरेलू घटक ईकोसिस्टम को मजबूत करने और भारत को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लिए विश्वसनीय वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के जरिये इस गति का लाभ उठाना चाहता है।

2030-31 तक 500 अरब डॉलर के घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण ईकोसिस्टम के निर्माण के महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के साथ, भारत विश्व के लिए नवाचार करते हुए और देश में विशाल अवसर सृजित करते हुए वैश्विक स्तर पर तकनीक के एक अग्रणी देश के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

क्षेत्र का दृष्टिकोण: भारत के प्रमुख निर्यात श्रेणी के रूप में इलेक्ट्रॉनिक्स

जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया है, 2024–25 में इलेक्ट्रॉनिक्स 2021–22 के सातवें स्थान से ऊपर उठकर भारत की तीसरी सबसे बड़ी और सबसे तेजी से बढ़ने वाली निर्यात श्रेणी के रूप में उभरी है। वित्त वर्ष 2025–26 के पहली छमाही में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 22.2 अरब डॉलर रहा, यह क्षेत्र मजबूत वृद्धि की गति बनाए हुए, देश की दूसरी सबसे बड़ी निर्यातित वस्तु बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। 

देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014–15 के 1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2024–25 में 11.3 लाख करोड़ हो गया, जो छह गुनी वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि में निर्यात 38,000 करोड़ से बढ़कर 3.27 लाख करोड़ हो गया, जो आठ गुनी वृद्धि को प्रतिबिंबित करता है। पिछले दशक में, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण ने देश भर में लगभग 25 लाख नौकरियों का सृजन किया है।

मोबाइल निर्माण ने इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस क्षेत्र में उत्पादन 2014–15 के ₹18,000 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹5.45 लाख करोड़ हो गया है, जो 28 गुनी वृद्धि है। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है। 2014 में केवल दो इकाईयां थीं, वहीं अब 300 से अधिक इकाईयां परिचालन में हैं।

मोबाइल फोन के निर्यात में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जो 2014–15 के 1,500 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में 2 लाख करोड़ हो गया है, यानि 127 गुनी वृद्धि। 2025–26 के पहले पांच महीनों में स्मार्टफोन का निर्यात 1 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 55 प्रतिशत अधिक है।

भारत अब मोबाइल उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हो चुका है, जो एक दशक पहले अपनी अधिकांश आवश्यकताओं का आयात करता था, अब घरेलू स्तर पर लगभग सभी उपकरणों के निर्माण कर रहा है। यह परिवर्तन भारत की नीतिगत इकोसिस्टम की ताकत और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और निर्यात के लिए एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में इसके उदय को उजागर करता है।

ईसीएमएस का अवलोकन

इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना की घोषणा 8 अप्रैल, 2025 को की गई थी, जिसका मूल परिव्यय ₹22,919 करोड़ था, जो लगभग 2.7 बिलियन डॉलर के बराबर है। इसकी समयावधि छह वर्षों की है, जिसमें वैकल्पिक एक वर्ष की स्थापना अवधि शामिल है। योजना का उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण के लिए एक मजबूत और आत्म-निर्भर इकोसिस्टम का निर्माण करना है। इसका ध्यान मूल्य श्रृंखला में घरेलू और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने, उच्च घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार में एक प्रमुख देश के रूप में स्थापित करने पर है। यह योजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) की पूरक है और इसके साथ मिलकर घरेलू सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने का काम करती है।

ईसीएमएस का उद्देश्य देश के भीतर आवश्यक उपकरण, उप-एसेंबली इकाईयों और कच्चे माल के उत्पादन को प्रोत्साहित करके भारत के इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ समेकित करना है।

दिसंबर 2025 तक, योजना के तहत अपेक्षित निवेश प्रतिबद्धताएं 1,15,351 करोड़ हैं, जो 59,350 करोड़ के मूल लक्ष्य से लगभग दोगुनी है. अगले छह वर्षों में 10,34,751 करोड़ रुपये का उत्पादन होने की उम्मीद है, जो प्रारंभिक अनुमान से 2.2 गुना अधिक है। प्रोत्साहन व्यय 41,468 करोड़ होने का अनुमान है, जो 22,805 करोड़ के मूल अनुमान का लगभग 1.8 गुना है. इस योजना से बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों के साथ-साथ 91,600 के लक्ष्य को पार करते हुए 1,41,801 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की भी उम्मीद है।

 

ईसीएमएस के तहत स्वीकृत आवेदन

अधिसूचना के बाद से, इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना के प्रति पूरे भारत में उद्योग जगत ने मजबूत अभिरुचि व्यक्त की है। अब तक, योजना के तहत 11 राज्यों में कुल 46 आवेदन मंजूर किए जा चुके हैं। ये स्वीकृतियां कुल ₹54,567 करोड़ के निवेश का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनका अनुमानित उत्पादन मूल्य ₹3,67,343 करोड़ है। इनके जरिए लगभग 51,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

इन अनुमोदित आवेदकों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक घटकों की एक विस्तृत श्रृंखला का निर्माण किया जाएगा, जैसे कि बहु-स्तरीय पीसीबी, कैमरा मॉड्यूल, कनेक्टर्स, ऑस्सीलेटर, ऑप्टिकल ट्रांससीवर तथा मोबाइल और आईटी हार्डवेयर उत्पादों के लिए एंक्लोजर तथा संबंधित उपकरण।

अनुमोदन तीन किस्तों में वितरित किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक उत्पादन क्षमता और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

क़िस्त

परियोजनाओं की संख्या

मंज़ूरी की तारीख

निवेश (करोड़ रुपये)

अनुमानित उत्पादन (करोड़ रुपये)

प्रत्यक्ष रोजगार

पहली

7

27 अक्टूबर 2025

5,532

36,559

5,100

दूसरी

17

17 नवंबर 2025

7,172

65,111

11,808

तीसरी

22

2 जनवरी 2026

41,863

2,58,152

33,791

 

ये अनुमोदन देश भर में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और इलेक्ट्रॉनिक घटकों के उत्पादन का समर्थन करते हुए पर्याप्त निवेश आकर्षित करने की योजना की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुमानित परिणाम संकेतक रोजगार के अवसर नौकरियाँ 

ईसीएमएस से वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ठोस परिणाम देने की उम्मीद है, जो अनुमोदित परियोजनाओं के पैमाने और उद्योग की निरंतर भागीदारी को रेखांकित करते हैं। इस योजना के तहत किए गए निवेश से इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण इकोसिस्टम में उच्च उत्पादन क्षमता और स्थिर रोजगार सृजन होने का अनुमान है।

परिणाम संकेतक

वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक अपेक्षित परिणाम

 निवेश

₹11,156  करोड़

उत्पादन

₹29,024 करोड़

रोजगार सृजन

19,240 नौकरियाँ

 

इन अपेक्षित परिणामों से एक मजबूत और उच्च-मूल्य वाली इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण संरचना की ओर लगातार प्रगति का संकेत मिलता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने के लिए अन्य प्रमुख सरकारी पहल 

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग मजबूत नीति समर्थन और लक्षित सरकारी पहलों के आधार पर विकसित हुआ है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादन इकोसिस्टम बनाना, निवेश आकर्षित करना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करना है, साथ ही वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका को मजबूत करना है। इस क्षेत्र को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति मिलने से भी लाभ हुआ है, जो लागू कानूनों और विनियमों के अधीन है।

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना

उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना, जिसका कुल परिव्यय 1.97 लाख करोड़ है, के तहत 14 प्रमुख क्षेत्र हैं,  जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी हार्डवेयर शामिल है। यह कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और निर्यात का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई योजना

  • 13,107 करोड़ रुपये के निवेश आकर्षित हुआ
  • उत्पादन: 8.56 लाख करोड़ रुपये
  • निर्यात: 4.65 लाख करोड़ रुपये
  • 1.35 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का सृजन
  • डेटा जून 2025 तक

 

भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में 4 बिलियन डालर से अधिक के एफडीआई प्रवाह को आकर्षित किया है। इस एफडीआई में लगभग 70 प्रतिशत का योगदान पीएलआई योजना के लाभार्थियों द्वारा किया गया है।

संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर (ईएमसी 2.0)

भारत सरकार ने अप्रैल 2020 में संशोधित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर, जिन्हें ईएमसी 2.0 के रूप में जाना जाता है, को अधिसूचित किया था। इस योजना का उद्देश्य सामान्य सुविधाओं के साथ समर्पित क्लस्टरों को वित्त पोषित करके इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए विश्व स्तरीय अवसंरचना का निर्माण करना है। ये क्लस्टर विनिर्माण कार्यों में तेजी लाने के लिए तैयार औद्योगिक भूखंडों, शीघ्र निर्माण योग्य फैक्ट्री शेड और प्लग एंड प्ले जैसी साझा सुविधाएं प्रदान करते हैं।

दिसंबर 2025 तक, 11 ईएमसी परियोजनाओं और 2 सामान्य सुविधा केंद्र परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। कुल मिलाकर, ये 5,226.49 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ 4,399.68 एकड़ में फ़ैली हुई हैं, जिसमें 2,492.74 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है। ये परियोजनाएं 1,46,846 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश और लगभग 1.80 लाख लोगों को रोज़गार मिलने की संभावना के साथ 10 राज्यों में फैली हुई हैं।

शुल्क और अधिभार छूट

केंद्रीय बजट 2026-27 में माइक्रोवेव ओवन के निर्माण में उपयोग होने वाले कुछ इनपुट पर मूल सीमा शुल्क छूट की घोषणा की गई, जो 2 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी।

साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक खिलौने बनाने के लिए पुर्ज़े अब सामाजिक कल्याण अधिभार से मुक्त हैं, जो समान तिथि से प्रभावी होंगे।

 

मूल सीमा शुल्क (बीसीडी): सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत लगाया जाने वाला सीमा शुल्क।

सामाजिक कल्याण अधिभार (एसडब्ल्यूएस): वित्त अधिनियम, 2018 की धारा 110 के तहत लगाया जाने वाला सीमा शुल्क।

 

इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना (एसपीईसीएस)

एसपीईसीएस योजना प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का उत्पादन करने के लिए पूंजीगत व्यय पर 25 प्रतिशत वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। यह महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला की कमियों को दूर करने में मदद करता है, स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करता है, और भारत के असेंबली-आधारित उत्पादन से उच्च-मूल्य घटक निर्माण की ओर आगे बढ़ने का समर्थन करता है।

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति (एनपीई) 2019

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स नीति का उद्देश्य भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स प्रणाली डिज़ाइन और निर्माण (ईएसडीएम) के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह नीति नवाचार को बढ़ावा देती है, डिज़ाइन-आधारित निर्माण को प्रोत्साहित करती है, और दीर्घकालिक उद्योग विकास सुनिश्चित करने के लिए अनुसंधान और विकास का समर्थन करती है।

ये उपाय साथ मिलकर मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स-निर्माण इकोसिस्टम बनाने, निवेश को आकर्षित करने और रोजगार सृजन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, साथ ही वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करते हैं।

निष्कर्ष

इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण योजना भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरी है। केंद्रीय बजट 2026–27 में इसका आवंटन बढ़कर 40,000 करोड़ हो गया है, जो घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए मजबूत नीति प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। ईसीएमएस ने पर्याप्त निवेश को आकर्षित किया है, उत्पादन में वृद्धि की है और महत्वपूर्ण रोजगार सृजन किया है। स्थानीय घटक इकोसिस्टम को मजबूत करके और भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़कर, यह योजना उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के विश्वसनीय हब के रूप में देश की स्थिति को सुदृढ़ करती है।

संदर्भ:

पीआईबी विश्लेषण:

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय:

केंद्रीय बजट:

 

पीआईबी अनुसंधान  

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पीके/केसी/जेके

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