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Economy

भारत–ओमान व्‍यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए)

नए व्यापार समझौते का निर्यात, सेवाओं और नौकरियों पर प्रभाव

Posted On: 10 JAN 2026 3:11PM

 

व्‍यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए)

यह देशों के बीच एक व्यापक समझौता है जो केवल वस्तुओं के व्यापार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाएं, निवेश, सरकारी खरीद, विवाद निपटान और अन्य नियामक पहलू भी शामिल हैं। इसमें पारस्परिक मान्यता समझौते भी शामिल हैं, जो इस आधार पर भागीदार देशों के भिन्न नियामक ढांचे को स्वीकार करते हैं कि इनसे समान परिणाम प्राप्त होते हैं।

 

मुख्‍य बिंदु

  • भारत–ओमान सीईपीए एक व्यापक ढाँचा प्रदान करता है जिसमें वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवरों की आवाजाही तथा नियामक सहयोग शामिल हैं।
  • भारत–ओमान द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2024–25 में 10.61 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया, जो दोनों देशों के आर्थिक सहयोग के बढ़ते पैमाने को दर्शाता है।
  • भारत को ओमान में 98.08 प्रतिशत शुल्क रेखाओं पर 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच प्राप्त होती है, जो 99.38 प्रतिशत निर्यात मूल्य को कवर करती है, और ये लाभ पहले दिन से प्रभावी होंगे।
  • यह समझौता इंजीनियरिंग वस्तुओं, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद, वस्त्र, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक, और रत्न एवं आभूषण सहित विभिन्न क्षेत्रों में निर्यात के अवसर खोलता है।
  • एक संतुलित उदारीकरण दृष्टिकोण, जिसमें अपवाद सूची भी शामिल हो, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा करता है और साथ ही लघु तथा मध्यम उद्यमों, श्रम-प्रधान उद्योगों और क्षेत्र भर में निर्यात वृद्धि का समर्थन करता है।

 

भूमिका

भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में एक सार्थक कदम को दर्शाता है। यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवरों की आवाजाही तथा नियामक सहयोग को एक ही, सुसंगत ढांचे के अंतर्गत लाता है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय आर्थिक एकीकरण को और मज़बूत करना है।

किसी एकल क्षेत्र या केवल शुल्क में कटौती पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, सीईपीए को स्थिर और दीर्घकालिक आर्थिक सहभागिता को समर्थन देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। व्यापार को सुगम बनाकर, निवेश को प्रोत्साहित करके और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करके, यह समझौता श्रम-प्रधान क्षेत्रों, सेवाओं और सहयोग के उभरते क्षेत्रों के लिए नए अवसरों को खोलने का प्रयास करता है। साथ ही, यह बाजार पहुंच के प्रति एक संतुलित और समायोजित दृष्टिकोण बनाए रखता है तथा दोनों देशों में व्यवसायों और निवेशकों के लिए स्पष्ट नियम, व्यापक बाजार पहुंच और अधिक पूर्वानुमेयता प्रदान करता है, वह भी घरेलू प्राथमिकताओं और संरक्षण उपायों से समझौता किए बिना।

भारतओमान आर्थिक सहभागिता

भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय सहयोग का एक प्रमुख स्तंभ व्यापार तथा वाणिज्य रहा है, जिसमें दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में आगे और वृद्धि तथा विविधीकरण की संभावनाओं को स्वीकार किया है। वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10.61 अरब अमेरिकी डॉलर पर रहा, जबकि वित्त वर्ष 2023–24 में यह 8.94 अरब अमेरिकी डॉलर था। अप्रैल–अक्टूबर 2025 की अवधि के दौरान व्यापार 6.48 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।


वस्तु व्यापार

  • वित्त वर्ष 2024–25 में ओमान को भारत का निर्यात 4.06 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान निर्यात, लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करवाते हुए, 2.57 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
  • वित्त वर्ष 2024–25 में ओमान से भारत का आयात 6.55 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान आयात 3.91 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।

सेवा व्यापार

  • भारत से ओमान को सेवाओं का निर्यात 2020 में 397 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2023 में 617 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसमें प्रमुख योगदान दूरसंचार, कंप्यूटर एवं सूचना सेवाओं, अन्य व्यावसायिक सेवाओं, परिवहन तथा यात्रा सेवाओं का रहा।
  • ओमान से सेवाओं का आयात 101 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 159 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसमें परिवहन, यात्रा, दूरसंचार सेवाएं और अन्य व्यावसायिक सेवाएं प्रमुख क्षेत्र रहे।

वस्तु एवं सेवा कारोबार में इस बढ़ती हुई सहभागिता ने एक व्‍यापक आर्थिक साझेदारी समझौता करने के निर्णय के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया।

वस्तुओं के लिए बाजार तक पहुंच: भारत के लाभ

सीईपीए के अंतर्गत, भारत को ओमान के लिए अपने निर्यात पर 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार की पहुंच प्राप्त होती है, जो ओमान की 98.08 प्रतिशत शुल्क रेखाओं को कवर करती है और 2022–23 के औसत के आधार पर भारत के व्यापार मूल्य के 99.38 प्रतिशत के बराबर है। सभी शून्य-शुल्क रियायतें समझौते के प्रभाव में आने के पहले दिन से लागू हो जाएंगी, जिससे निर्यातकों को तत्काल ही एक सुनिश्चितता मिल जाएगी।

वर्तमान में, सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र व्यवस्था के तहत भारत के निर्यात मूल्य का केवल 15.33 प्रतिशत और शुल्क रेखाओं का 11.34 प्रतिशत (2022–24 के औसत के अनुसार) ही शून्य शुल्क पर ओमानी बाजार में प्रवेश कर पाता है। सीईपीए के साथ, अब बेहतर मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता से ओमान को भारत के उस निर्यात के उल्लेखनीय रूप से लाभान्वित होने की अपेक्षा है, जिस पर पहले 5 प्रतिशत तक शुल्क लगता था और जिसका मूल्य लगभग 3.64 अरब अमेरिकी डॉलर था।

यह समझौता खनिज, रसायन, आधार धातु, मशीनरी, प्लास्टिक तथा रबर, परिवहन तथा ऑटोमोटिव उत्पाद, उपकरण तथा घड़ियाँ, कांच, सिरेमिक, संगमरमर, कागज, वस्त्र, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, समुद्री उत्पाद और रत्न एवं आभूषण सहित अनेक क्षेत्रों में निर्यात के अवसर खोलता है।

 

28 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के ओमान के आयात बाजार तक बेहतर पहुंच, सरलीकृत नियामक प्रक्रियाओं, अनुपालन आवश्यकताओं में कमी और तेज़ बाजार प्रवेश द्वारा समर्थित, भारतीय निर्यातक विभिन्न उत्पाद वर्गों में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के लिए अब काफ़ी अच्छी स्थिति में हैं।

भारत का बाजार पहुंच प्रस्ताव और संरक्षण उपाय

सीईपीए के अंतर्गत अपवाद सूची में वे सभी वस्तुएं शामिल हैं, जिन पर देशों द्वारा कोई शुल्क रियायत प्रदान नहीं की गई है।

भारत ने अपनी कुल शुल्क रेखाओं (12,556) में से 77.79 प्रतिशत पर शुल्क उदारीकरण की पेशकश की है, जो मूल्य के आधार पर ओमान से होने वाले भारत के 94.81 प्रतिशत आयात को कवर करता है। साथ ही, भारत ने अनेक शुल्क रेखाओं को अपवाद सूची में रखा है। इस कदम का उद्देश्य प्रमुख घरेलू क्षेत्रों और संवेदनशील मूल्य-श्रृंखला उद्योगों की सुरक्षा करना तथा विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता और किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

प्रमुख घरेलू क्षेत्र , जैसे परिवहन उपकरण, प्रमुख रसायन, अनाज, मसाले, कॉफी तथा चाय और पशु-जनित उत्पाद।

संवेदनशील मूल्य-श्रृंखला उद्योग, जैसे रबर, चमड़ा, वस्त्र, फुटवियर, पेट्रोलियम तेल तथा खनिज-आधारित उत्पाद।

प्रमुख कृषि उत्पाद, जैसे डेयरी, तिलहन, खाद्य तेल, शहद, फल और सब्ज़ियाँ।

 

सीईपीए का क्षेत्र-वार प्रभाव

अभियांत्रिकी वस्तुएँ:

ओमान भारत के अभियांत्रिकी निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण गंतव्य है, जो वित्त वर्ष 2024–25 में 875.83 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा। इसमें मशीनरी, विद्युत उपकरण, ऑटोमोबाइल, लौह एवं इस्पात तथा अलौह धातुएँ शामिल हैं।

  • सीईपीए के तहत, सभी अभियांत्रिकी उत्पादों को शून्य-शुल्क बाज़ार की पहुँच प्राप्त होती है, जो पहले के एमएफएन 0–5 प्रतिशत शुल्क को प्रतिस्थापित करती है और भारतीय निर्यातकों के लिए मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करती है।
  • शुल्क समाप्ति और बेहतर बाजार पहुंच के साथ, ओमान को होने वाले अभियांत्रिकी निर्यात के साल 2030 तक 1.3–1.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ने का अनुमान है, जिससे विकास की गति को पुनर्स्थापित करने में मदद मिलेगी।
  • प्रमुख लाभ अवसंरचना परियोजनाओं में उपयोग होने वाले लौह तथा इस्पात उत्पादों,  ओमान के विविधीकरण का समर्थन करने वाली विद्युत तथा औद्योगिक मशीनरी, 5 प्रतिशत शुल्क हटाए जाने के बाद मोटर वाहन, और विद्युत तथा निर्माण कार्यों के लिए तांबे के उत्पादों से अपेक्षित हैं।
  • इस समझौते से लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को लाभ होने की उम्मीद है, विशेष रूप से लौह तथा इस्पात और मशीनरी क्षेत्रों में, क्योंकि यह ओमान के औद्योगिक और अवसंरचना आपूर्ति श्रृंखलाओं में इनका विस्तार और गहन एकीकरण संभव बनाता है।
  • वाहनों, ऑटो कम्‍पोनेंट और औद्योगिक उपकरणों में शुल्क समाप्ति से निर्माण, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र और रसायन जैसे क्षेत्रों में भी मांग को समर्थन मिलता है।

व्यापक स्तर पर, अमेरिका, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे बाजारों में बढ़ते वैश्विक संरक्षणवाद के बीच, ओमान भारतीय अभियांत्रिकी निर्यातकों को एक स्थिर वैकल्पिक बाजार और रणनीतिक विविधीकरण प्रदान करता है और साथ ही जीसीसी तथा मध्य पूर्व तक व्यापक पहुंच को भी समर्थन प्रदान करता है।

फार्मास्यूटिकल्स

ओमान के फार्मास्यूटिकल बाजार का मूल्य साल 2024 में 302.84 मिलियन अमेरिकी डॉलर था और साल 2031 तक इसके 473.71 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो 6.6 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ रहा है। यह बाजार बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है, जिससे बाहरी आपूर्तिकर्ताओं के लिए मांग निरंतर बनी रहती है।

  • सीईपीए के अंतर्गत, सार्वजनिक-निजी खरीद में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाते हुए प्रमुख तैयार दवाओं, टीकों और प्रमुख सक्रिय फार्मास्यूटिकल अवयवों, जिनमें पेनिसिलिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन, टेट्रासाइक्लिन और एरिथ्रोमाइसिन शामिल हैं, के लिए बाध्यकारी शून्य-शुल्क पहुंच प्रदान की गई है, जिससे स्थिर मूल्य निर्धारण और दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित होती है।
  • यह समझौता उन फार्मास्यूटिकल उत्पादों के लिए नियामक त्वरित प्रक्रिया पेश करता है जिन्हें अमेरिका के यूएसएफडीए, यूरोप के ईएमए, यूके के एमएचआरए और ऑस्ट्रेलिया के टीजीए जैसे मान्यता प्राप्त कड़े प्राधिकरणों द्वारा अनुमोदित किया गया है, और पूर्ण मूल्यांकन दस्तावेज जमा करने पर बिना पूर्व निरीक्षण के 90-दिन की विपणन अनुमति के लिए पात्रता प्रदान करता है। जहाँ निरीक्षण आवश्यक हो, वहाँ अनुमोदन 270 कार्यदिवसों के भीतर लक्षित किया गया है।
  • जीएमपी (अच्‍छी निर्माण पद्धति) प्रमाणपत्रों और निरीक्षण परिणामों की स्वीकृति, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हुए सुव्‍यवस्थित स्थिरता आवश्यकताएँ, और स्थानीय बाजार की परिस्थितियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के अनुसार मूल्य निर्धारण, ये सभी मिलकर अनुपालन लागत और अनुमोदन समयसीमा को कम करते हैं, साथ ही ओमानी बाजार में वहनीयता तथा सतत् आपूर्ति को समर्थन देते हैं।

समुद्री उत्पाद

ओमान का समुद्री उत्पादों का आयात 2022–24 के दौरान 118.91 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा, जबकि भारत से आयात 7.75 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ही था। यह निर्यात विस्तार के लिए पर्याप्त संभावनाएं दर्शाता है। सीईपीए से भारत के समुद्री खाद्य उत्पादों जैसे झींगा और मछली के ओमान के लिए उच्च निर्यात को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

  • सीईपीए के तहत, समुद्री उत्पादों को तुरंत शून्य-शुल्क पहुँच प्राप्त होती है, जिससे पहले के 0 से 5 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को प्रतिस्थापित किया जाता है और भारतीय निर्यातकों के लिए तत्काल मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित हो जाती है।
  • समुद्री क्षेत्र की श्रम-प्रधान प्रकृति को देखते हुए, विस्‍तृत बाजार पहुंच रोजगार सृजन की संभावनाएं पैदा करती है, विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों और संबंधित प्रसंस्करण गतिविधियों में।

उत्पाद स्तर के आंकड़े प्रमुख श्रेणियों में अप्रयुक्त संभावनाओं को उजागर करते हैं। भारत के वैनामेई झींगा का ओमान को निर्यात साल 2024 में 0.68 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा, जबकि भारत का वैश्विक निर्यात 3.63 अरब अमेरिकी डॉलर का था, और फ्रोज़न कट्टलफ़िश का ओमान को किया गया निर्यात 0.36 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा, जबकि वैश्विक निर्यात 270.73 मिलियन अमेरिकी डॉलर का था।

 

कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ

ओमान का कृषि आयात साल 2020 में रहे 4.51 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर साल 2024 में 5.97 अरब अमेरिकी डॉलर का हो गया, जिसमें 7.29 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज की गई। साल 2024 में, ओमान के कृषि आयात में भारत की हिस्‍सेदारी 10.24 प्रतिशत की थी, जिससे यह दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया। उसी अवधि के दौरान, भारत का ओमान को किया गया कृषि निर्यात 364.67 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 556.34 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसमें 11.14 प्रतिशत की मजबूत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज हुई।

एपीडा-अनुसूचित उत्पादों का निर्यात 299.49 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 477.33 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जिसमें 12.36 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) दर्ज हुई। प्रमुख निर्यात वस्तुओं में बासमती और पारबॉयल्ड चावल, केले, आलू, प्याज, सोयाबीन मील, मीठे बिस्कुट, काजू गिरी, मिश्रित मसाले, मक्खन, फिश बॉडी ऑयल, झींगा और प्रॉन का चारा, फ्रोज़न बोनलेस मवेशी मांस और निषेचित अंडे शामिल हैं।

कृषि उत्पादों में प्रमुख लाभ

मवेशियों का बोनलेस मांस – ओमान के 68.27 मिलियन अमेरिकी डॉलर के आयात बाजार में 94.3% की हिस्सेदारी के साथ, शून्य-शुल्क पहुंच भारत की प्रमुख आपूर्तिकर्ता स्थिति को मजबूत करती है।

 

ताजा अंडे – शून्य-शुल्क पहुंच भारत की 98.3% हिस्सेदारी को मजबूत करती है, जिससे ओमान अंडों के लिए भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन जाता है।

 

मीठे बिस्कुट – शून्य-शुल्क प्रवेश ओमान के 8.05 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बिस्कुट बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करता है, जिससे तुर्की, यूएई और सऊदी अरब के मुकाबले में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है।

 

मक्खन5 प्रतिशत शुल्क की समाप्ति से ओमान में 5.75 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यातों की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है, जिससे डेनमार्क, सऊदी अरब और न्यूज़ीलैंड की तुलना में भारत को बढ़त मिलती है।

 

प्राकृतिक शहद – शुल्क समाप्ति से ओमान के 6.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर के शहद बाज़ार में भारत की मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है, जहाँ भारत की हिस्सेदारी 19.2 प्रतिशत है, और इससे ऑस्ट्रेलिया, चीन तथा सऊदी अरब की तुलना में भारत को बढ़त मिलती है।

 

मिश्रित मसाले एवं सीज़निंग – शुल्क-मुक्त पहुँच से ओमान के 40.02 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बाज़ार में भारत की 14.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सुदृढ़ होती है, जिससे भारत संयुक्त राज्य अमेरिका के समकक्ष तथा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से आगे हो जाता है।

 

 

इसके साथ ही, भारत ने घरेलू किसानों तथा संवेदनशील कृषि हितों की रक्षा के लिए एक संतुलित संरक्षणात्मक दृष्टिकोण अपनाया है। दुग्ध उत्पाद, अनाज, फल, सब्ज़ियाँ, खाद्य तेल, तिलहन तथा प्राकृतिक शहद जैसे प्रमुख उत्पादों को तत्काल शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है।

पाँच से दस वर्षों की अवधि में चरणबद्ध शुल्क उन्मूलन

 

चयनित प्रसंस्कृत उत्पादों के लिए, जैसे मीठे बिस्कुट, रस्क, टोस्टेड ब्रेड, पेस्ट्री और केक, पापड़, कुत्तों या बिल्लियों का भोजन, यह प्रावधान निर्यात वृद्धि को प्रोत्साहित करता है, साथ ही खाद्य सुरक्षा तथा घरेलू कृषि हितों की रक्षा सुनिश्चित करता है।

 

 

इलेक्ट्रॉनिक्स

साल 2024 में ओमान ने लगभग 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का आयात किया, जबकि भारत का निर्यात 123 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ही था, जो विस्तार की स्पष्ट संभावनाओं को दर्शाता है। प्रमुख आयात खंडों में स्मार्टफोन, फोटोवोल्टाइक सेल, दूरसंचार उपकरण एवं उनके पुर्जे, विद्युत नियंत्रण या वितरण हेतु बोर्ड एवं कैबिनेट, तथा स्टैटिक कन्वर्टर शामिल हैं।

भारत पहले से ही स्मार्टफोन, स्टैटिक कन्वर्टर तथा विद्युत नियंत्रण या वितरण हेतु बोर्ड और कैबिनेट का निर्यात करता है, जिनमें से बाद की दो श्रेणियों में इसकी उपस्थिति अपेक्षाकृत अधिक मजबूत है। अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर आयात शुल्क पहले से ही शून्य है और सीईपीए के अंतर्गत शेष वस्तुओं - बोर्ड और कैबिनेट, स्टैटिक कन्वर्टर तथा टेलीविजन रिसेप्शन उपकरण पर भी शुल्क शून्य हो जाता है, जिससे शुल्क व्यवस्था में निश्चितता बढ़ती है। शीर्ष दस उत्पादों के लिए ओमान का आयात बाजार लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसके चलते भारतीय निर्यातक चयनित उच्च संभावनाशील खंडों में क्रमिक रूप से अपनी बाज़ारी हिस्सेदारी बढ़ाने की स्थिति में हैं।

रसायन उद्योग

ओमान ने वर्ष 2024 में 3.13 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के रसायनों का आयात किया, जबकि भारत से निर्यात 169.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ही रहा, जिससे निर्यात विस्तार की पर्याप्त संभावनाएँ स्पष्ट होती हैं।

  • सीईपीए के तहत अकार्बनिक रसायनों, कार्बनिक रसायनों तथा रासायनिक उत्पादों सहित प्रमुख रसायन श्रेणियों को तत्काल शून्य-शुल्क बाजार पहुँच प्रदान की गई है, जिससे पूर्व में लागू 5 प्रतिशत शुल्क समाप्त हो गया है और भारतीय निर्यातकों के लिए लाभांश तथा व्यापारिक निश्चितता में सुधार हुआ है।
  • रसायनों पर 5 प्रतिशत तक शुल्क में कटौती लागू की गई है, जिसमें रंग, टैनिंग एक्‍सट्रैक्‍ट, साबुन एवं पृष्ठ-सक्रिय पदार्थ, औषधीय तेल तथा अन्य औद्योगिक मिश्रण शामिल हैं, जिससे गैर-एफटीए प्रतिस्पर्धियों की तुलना में भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को मूल्यगत बढ़त प्राप्त होती है।
  • यह समझौता निकट औद्योगिक सहयोग को प्रोत्साहित करता है, क्योंकि ओमान सुरक्षित फीडस्टॉक की उपलब्धता, औद्योगिक सह-स्थान और हरित आदान के अवसर प्रदान करता है, जिससे दोनों देश पेट्रोकेमिकल्स, हरित हाइड्रोजन तथा खाड़ी और अफ्रीकी बाज़ारों से जुड़ी मूल्य शृंखलाओं में दीर्घकालिक सहयोग के लिए सुदृढ़ स्थिति में आ जाते हैं।

 

यह देखते हुए, कि भारत के वैश्विक रसायन निर्यात का मूल्य 40.48 अरब अमरीकी डॉलर है, ओमान को होने वाले निर्यात में मामूली वृद्धि भी, विशेष रूप से छोटे तथा मध्‍यम स्‍तर के उपक्रमों के लिए, महत्वपूर्ण लाभ प्रदान कर सकती है।

वस्त्र उद्योग

ओमान का वस्त्र आयात साल 2024 में 597.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा, जबकि भारत का वस्त्र निर्यात 131.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा, जिससे भारत की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत हो गई, जो साल  2023 के 9.3 प्रतिशत के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है।

  • सीईपीए के तहत, भारतीय वस्त्र और परिधान उत्पादों, जिन्हें पहले लगभग 5 प्रतिशत आयात शुल्क अदा करना पड़ता था, को अब शून्य-शुल्क पर बाजार पहुँच प्राप्त होती है, जिससे मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सीधे सुधार होता है और उच्च निर्यात मात्रा को समर्थन मिलता है।
  • विकास के लिए जो खंड अच्‍छी स्थिति में हैं, उनमें मुख्‍यत:  रेडीमेड गारमेंट्स (87.0 मिलियन अमेरिकी डॉलर),  मेड-अप्स (17.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर), एमएमएफ वस्त्र (11.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) और जूट उत्पाद (7.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर) शामिल हैं।
  • शून्य-शुल्क पर पहुँच भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं - जैसे चीन, बांग्लादेश, तुर्की और यूएई - के मुकाबले सुदृढ़ करती है, विशेष रूप से श्रम-प्रधान खंडों - जैसे रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल्स, कालीन, जूट और रेशमी उत्पादों में।

वस्त्र निर्यात में वृद्धि से भारत के प्रमुख वस्त्र केंद्रों में उत्पादन और रोजगार को समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिनमें तिरुपुर, सूरत, लुधियाना, पानीपत, कोयंबटूर, करूर, भदोही, मुरादाबाद, जयपुर और अहमदाबाद शामिल हैं। ओमान तक बेहतर पहुँच भारतीय निर्यातकों को इस देश का उपयोग जीसीसी और पूर्वी अफ्रीकी बाज़ारों के लिए प्रवेश द्वार के रूप में करने का अवसर देती है, जिसे सोहर, दुक़म और सालालाह जैसे लॉजिस्टिक्स हब द्वारा समर्थन प्राप्‍त होता है।

प्लास्टिक उद्योग

भारत का वैश्विक प्लास्टिक निर्यात साल 2024 में 8.11 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो मजबूत उत्पादन क्षमता और निर्यात सक्षमता को दर्शाता है। सीईपीए के तहत शून्य-शुल्क पहुँच भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को गैर-एफटीए प्रतिस्पर्धियों की तुलना में 5 प्रतिशत तक स्पष्ट मूल्य बढ़त प्रदान करती है।

  • सीईपीए के तहत, प्लास्टिक और प्लास्टिक की वस्तुओं को तत्काल शून्य-शुल्क पहुँच प्राप्त होती है, जिससे पहले के 5 प्रतिशत आयात शुल्क का प्रतिस्थापन होता है और भारतीय निर्यातकों के लिए मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होता है।
  • चूंकि भारत का प्लास्टिक क्षेत्र मुख्यतः एसएमई-प्रधान है, ओमान के बाज़ार तक बेहतर पहुँच से समावेशी निर्यात वृद्धि को समर्थन मिलने और रोज़ग़ार-प्रधान उत्पादन केंद्रों के सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

ओमान का प्लास्टिक आयात साल 2024 में 1.06 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि भारत से आयात 89.39 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिससे अप्रयुक्त निर्यात विस्तार के लिए पर्याप्त संभावनाएँ नज़र आती हैं।

रत्न और आभूषण

भारत इस क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी है, जिसके वार्षिक निर्यात का मूल्य 29 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जबकि ओमान का वार्षिक रत्न और आभूषण आयात लगभग 1.07 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का है, जो अपार अप्रयुक्त संभावनाओं को दर्शाता है। भारत का ओमान के लिए रत्न और आभूषण निर्यात साल 2024 में 35 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा, जिसमें 24.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के पॉलिश किए हुए प्राकृतिक हीरे और 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के सोने के आभूषण शामिल हैं।

  • शून्य-शुल्क पहुँच के साथ,  इस समझौते से ओमान के बाज़ार में और अवसर खुलने की उम्मीद है, विशेष रूप से कटे और पॉलिश किए हुए हीरे, सोने और चाँदी के आभूषणों और प्लैटिनम तथा नकल किए हुए आभूषणों जैसे उभरते खंडों के लिए।
  • सभी भारतीय रत्न और आभूषण उत्पादों पर 5 प्रतिशत तक के आयात शुल्क को समाप्त कर दिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए बाज़ार पहुँच और मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता में महत्वपूर्ण सुधार होता है।
  • बेहतर बाज़ार पहुँच से भारत के आभूषण निर्माण केंद्रों में रोजगार सृजन को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात शामिल हैं, जो कुशल और श्रम-प्रधान उत्पादन से इस क्षेत्र के मजबूत जुड़ाव को दर्शाता है।

उद्योग अनुमान बताते हैं कि अगले तीन वर्षों में निर्यात में 150 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक की वृद्धि हो सकती है, क्योंकि भारतीय उत्पादों को इटली, तुर्की, थाईलैंड और चीन जैसे देशों - जिन पर अब भी शुल्क लागू हैं - के आपूर्तिकर्ताओं के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलती है।

सेवाएँ, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही

सेवाएँ भारत–ओमान सीईपीए का एक प्रमुख स्तंभ हैं। साल 2024 में, द्विपक्षीय सेवा व्यापार 863 मिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जिसमें 665 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात और 198 मिलियन अमेरिकी डॉलर का आयात शामिल था, जिससे भारत के लिए 447 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अधिशेष उत्पन्न हुआ। ओमान का वैश्विक सेवा आयात 12.52 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 5.31 प्रतिशत की ही है, जो भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए महत्वपूर्ण अप्रयुक्त संभावनाएं दर्शाता है।

सीईपीए के तहत, ओमान ने 127 सेवा उप-क्षेत्रों में व्यापक और गहन बाज़ार पहुँच प्रतिबद्धताएँ स्वीकार की हैं, जो जीएटीएस/सर्वोत्तम एफटीए-प्लस प्रतिबद्धताओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनमें भारत के निर्यात हित वाले प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं, जैसे पेशेवर सेवाएँ (कानूनी, लेखा, अभियांत्रिकी, चिकित्सा और संबंधित सेवाएँ), कंप्यूटर और संबंधित सेवाएँ, ऑडियो-विज़ुअल सेवाएँ, व्यावसायिक सेवाएँ और अनुसंधान एवं विकास, शिक्षा, पर्यावरणीय सेवाएँ, स्वास्थ्य, तथा पर्यटन और यात्रा से संबंधित सेवाएँ।

 

 

इन्ट्रा-कार्पोरेट ट्रांसफ्री कर्मचारी वे एमएनसी कर्मचारी होते हैं जिन्हें किसी विशेष भूमिका के लिए अस्थायी रूप से उनके मूल देश से किसी अन्य देया में स्थित शाखा, सहयोगी कंपनी या सहायक कंपनी में स्थानांतरित किया जाता है।

आईसीटी (इन्ट्रा-कार्पोरेट ट्रांसफ्री) की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे भारतीय कंपनियों को अधिक प्रबंधकीय और विशेषज्ञ कर्मचारी तैनात करने की सुविधा मिलती है। किसी भी एफटीए के तहत पहली बार, ओमान ने एक परिभाषित पेशेवर श्रेणी के लिए प्रतिबद्धताएँ भी स्वीकार की हैं, जिनमें लेखा, अभियांत्रिकी, चिकित्सा, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, निर्माण और परामर्श सेवाओं में कार्यरत पेशेवर शामिल हैं।

 

सेवाओं में अन्य प्रमुख लाभ

स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं पर परिशिष्ट

लाइसेंसिंग और योग्यताओं, डिजिटल लाइसेंसिंग परीक्षा, चिकित्सा संबंधी यात्रा, क्षमता निर्माण, मानक सामंजस्य, और पारंपरिक चिकित्सा में संयुक्त अनुसंधान पर सहयोग

निर्माण और अन्य गैर-सेवा क्षेत्रों में आवाजाही पर अपनी तरह का पहला प्रावधान

भारतीय औद्योगिक कर्मचारियों के लिए बाध्यकारी आश्वासन प्रदान करता है, जिससे ओमानीकरण के बीच निवेश और संयुक्त उद्यमों को अधिक पूर्वानुमेयता और कानूनी स्पष्टता के माध्यम से समर्थन मिलता है।

 सामाजिक सुरक्षा समझौते (एसएसए) पर भविष्य की वार्ताएँ,

 

भारतीय कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए सामाजिक सुरक्षा लाभों की पारस्परिक निरंतरता प्रदान करता है और दोहरे योगदान की आवश्यकता को रोकता है।

 

राज्य और क्षेत्र-वार निर्यात और रोजगार लाभ

सीईपीए से कई भारतीय राज्यों में व्यापक निर्यात और रोजगार लाभ उत्पन्न होने की उम्मीद है, जो भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था की भौगोलिक रूप से विविध संरचना को दर्शाता है।


 राज्य-वार प्रमुख कृषि लाभ

उत्‍पाद

राज्‍य

मांस

उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार

अंडे

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र

मीठे बिस्‍कुट

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब, उत्तर प्रदेश

मक्‍खन

गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब

मिठाइयां

कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र

आलू, तैयार/संरक्षित

गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र

शहद

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, पूर्वोत्तर क्षेत्र

 

श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए लाभ

सीईपीए श्रम-प्रधान क्षेत्रों, जैसे वस्त्र तथा परिधान, चमड़ा तथा जूते, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, रत्न तथा आभूषण, और चयनित अभियांत्रिकी खंडों के लिए महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है। ये क्षेत्र रोजगार से मजबूत संबंध रखते हैं और ये मिलकर भारत में एक बड़े कार्यबल को समर्थन देते हैं।

लगभग सार्वभौमिक शून्य-शुल्क बाज़ार पहुँच के साथ, भारतीय निर्यात को ओमान के बाज़ार में बेहतर मूल्य प्रतिस्पर्धात्मकता मिलती है, जिससे श्रम-प्रधान उद्योगों में उच्च मांग को समर्थन मिलता है।

चूंकि इनमें से कई क्षेत्र मुख्य रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) द्वारा संचालित हैं, सीईपीए के तहत वरीयता प्राप्त पहुँच एशिया और जीसीसी के प्रतिस्पर्धियों के साथ मुकाबले के समान अवसर प्रदान करने में सहायता देती है, जिससे विस्तार, बेहतर क्षमता उपयोग और निर्यात-प्रेरित वृद्धि संभव होती है।

इन क्षेत्रों में अधिक निर्यात से प्रमुख उत्पादन केंद्रों में रोजगार सृजन और आय समर्थन की संभावना बढ़ने की उम्मीद है, विशेष रूप से वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़े के उत्पाद, समुद्री उत्पाद और लघु विनिर्माण में।

प्रसंस्कृत और मूल्य-वर्धित उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करके, सीईपीए समावेशी विकास का समर्थन करता है और क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी को सुदृढ़ बनाता है।

 

नियामक सहयोग के लिए प्रावधान

टीबीटी समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी विनियम, मानक और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाएँ भेदभावपूर्ण न हों और व्यापार में अनावश्यक बाधाएँ उत्पन्न न करें।

 

एसपीएस समझौता खाद्य सुरक्षा और पशु एवं पौध स्वास्थ्य नियमों के लागू होने से संबंधित है।

 

सीईपीए में तकनीकी व्यापार बाधाओं (टीबीटी) और मानव, पशु एवं पौधे के जीवन व स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा (एसपीएस) उपायों पर समर्पित प्रावधान शामिल हैं, जो दोनों पक्षों के बीच सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करते हैं। ये अध्याय अंतरराष्ट्रीय मानकों, पारदर्शिता और परामर्श तंत्र के उपयोग पर जोर देते हैं, जिससे व्यापार को सुगम बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, ईआईसी द्वारा जारी प्रमाणपत्रों की अनिवार्य स्वीकार्यता से व्यापार सुगम होता है और ओमान में आगमन पोर्ट पर भारत के निर्यात का अनावश्यक परीक्षण और निरीक्षण टलता है।

 

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अनुकूलता मूल्यांकन प्रक्रियाओं का सुदृढ़ सामंजस्य

 

औषधीय उत्पाद: यूएसएफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए और अन्य कड़े नियामकों द्वारा अनुमोदित उत्पादों के लिए विपणन अनुमतियां तीव्र गति से प्रदान करना, साथ ही जीएमपी निरीक्षण दस्तावेज़ों के लिए स्‍वीकार्यता, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए अनुमोदन समय और अनुपालन लागत में महत्वपूर्ण कमी आती है।

हलाल और जैविक उत्पाद: यह समझौता हलाल प्रमाणन प्रणाली और भारत के राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) प्रमाणन को स्वीकार करने और मान्यता देने की भी व्यवस्था करता है, जिसका उद्देश्य परीक्षण और प्रमाणन आवश्यकताओं की पुनरावृत्ति से बचना और निर्यातकों के लिए बाज़ार पहुँच को सुगम बनाना है।

 

निष्‍कर्ष

भारत–ओमान सीईपीए एक व्यापक ढांचा स्थापित करता है, जिसमें वस्तुओं तथा सेवाओं का व्यापार, निवेश, पेशेवरों की आवाजाही और नियामक सहयोग शामिल हैं, साथ ही इसमें बाजार की पहुंच और संरक्षण उपायों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण भी बनाए रखा गया है। इस समझौते से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलने, रोजगार उत्‍पन्‍न होने, आपूर्ति श्रृंखलाओं के सुदृढ़ होने और भारत एवं ओमान के बीच गहन तथा स्‍थायी आर्थिक सहभागिता को समर्थन मिलने की अपेक्षा है।

 

पीआईबी शोध

 

संदर्भ

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2205889&reg=3&lang=2

विदेश मंत्रालय

https://www.mea.gov.in/bilateral-documents.htm?dtl/40518/India++Oman+Joint+Statement+during+the+visit+of+Prime+Minister+of+India+Shri+Narendra+Modi+to+Oman+December+1718+2025
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