Economy
8.2% जीडीपी: भारत की सशक्त होती विकास गाथा
जीडीपी में ठोस वृद्धि, स्थिर मुद्रास्फीति, मजबूत उत्पादन और बढ़ते निर्यात के सहारे भारत के विकास की कहानी आगे बढ़ रही है
Posted On:
28 NOV 2025 6:07PM
मुख्य बातें
• वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद में दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है और वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
• अक्टूबर 2024 की तुलना में अक्टूबर 2025 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई)घटकर 0.25 प्रतिशत रह गया,जो वर्तमान सीपीआई श्रृंखला की सबसे कम साल-दर-साल की मुद्रास्फीति है।
• आईआईपी ने विनिर्माण क्षेत्र में 4.8% की वृद्धि के कारण,सितंबर 2025 में साल-दर-साल 4.0% की ठोस वृद्धि दर्ज की।
• श्रम बल भागीदारी दर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो अक्टूबर 2025 में 55.4% तक दर्ज की गई।
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परिचय
भारत की आर्थिक उन्नति पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित कर रही है। भारत इस समय दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में पूरे विश्वास के साथ मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। इसका अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद उस समय तक 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाने का अनुमान है। विकास का मौजूदा चरण निर्णायक नीति-निर्धारण,ढांचागत सुधारों और भारत के गहन वैश्विक एकीकरण की शक्ति को दर्शाता है।
विकास में बढ़ोतरी के साथ,भारत ने एक बार फिर वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया है,जिससे सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में इसकी स्थिति मज़बूत हुई है। इस बढ़ोतरी को लचीली घरेलू मांग,कम होती मुद्रास्फीति और उच्च श्रम-बल भागीदारी का समर्थन मिला हुआ है। घरेलू निवेश में फिर आई तेजी और निवेश के लिए अनुकूल माहौल एक स्थिर और व्यापक आधार वाली अर्थव्यवस्था का संकेत देते हैं। जैसे-जैसे सुधार गति पकड़ रहे हैं और उपभोग का आशावादी रूख बरकरार है,भारत का आर्थिक दृष्टिकोण उत्साहजनक बना हुआ है जिससे सभी क्षेत्रों में निरंतर गति और उन्नति का संकेत मिलता है।
प्रमुख आर्थिक संकेतक: भारत की सतत वृद्धि
मजबूत जीडीपी वृद्धि

सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) समग्र आर्थिक प्रदर्शन के प्राथमिक संकेतकों में से एक है जो देश के विस्तार की दर को दर्शाता है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार,मुद्रास्फीति के लिए समायोजित भारत की वास्तविक जीडीपी,वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है,जबकि वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में इसकी वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी,जबकि वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर रही थी। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में नॉमिनल जीडीपी में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर देखी गई है। अर्थव्यवस्था का प्रत्येक क्षेत्र देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्राथमिक क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 3.1 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वास्तविक जीवीए वृद्धि दर रही। इसी प्रकार,द्वितीयक (8.1 प्रतिशत) और तृतीयक क्षेत्र (9.2 प्रतिशत) ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी विकास दर को बढ़ावा दिया है।
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वित्त वर्ष 26 की अर्धवार्षिक वृद्धि
पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर 2025-26) में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 8 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई, जबकि वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में 6.1प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई थी।
प्राथमिक क्षेत्र (2.9प्रतिशत) में मध्यम वृद्धि देखी गई, जबकि द्वितीयक (7.6प्रतिशत) और तृतीयक क्षेत्र (9.3प्रतिशत) में निरंतर विस्तार हुआ।
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मुद्रास्फीति स्थिरता दर्शाती है
अक्टूबर 2025 में भारत की मुद्रास्फीति की गति उल्लेखनीय रूप से धीमी रही है जो अर्थव्यवस्था के मज़बूत बुनियादी ढाँचे और प्रभावी मूल्य प्रबंधन उपायों को रेखांकित करती है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई)द्वारा मापी गई मुख्य मुद्रास्फीति पिछले वर्ष की तुलना में घटकर 0.25 प्रतिशत रह गई,जो वर्तमान सीपीआई श्रृंखला में दर्ज किया गया सबसे निचला स्तर है। मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई)के सहनशीलता दायरे के भीतर बनी हुई है। मुद्रास्फीति में यह नरमी आरबीआई के तटस्थ रुख के साथ रेपो दर को 5.50 प्रतिशत पर बनाए रखने के निर्णय के अनुरूप है, जो मूल्य स्थिरता और विकास संभावनाओं में विश्वास को दर्शाता है।
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संकेतक
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सितंबर 2025 (प्रतिशत में)
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अक्टूबर 2025 (प्रतिशत में)
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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक
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1.44
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0.25
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उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक
(सीएफपीआई)
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(-) 2.33
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(-) 5.02
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ग्रामीण मुद्रास्फीति
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1.07
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(-)0.25
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शहरी मुद्रास्फीति
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1.83
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0.88
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यह कमी मुख्य रूप से खाद्य मुद्रास्फीति (सीएफपीआई) में तेज गिरावट के कारण हुई, जो अक्टूबर 2024 की तुलना में (-) 5.02 प्रतिशत दर्ज की गई। इसे तेल और वसा, सब्जियों, फलों, अंडे, अनाज और उत्पादों की कीमतों में कमी से समर्थन मिला। यह रुझान जीएसटी दरों में हाल में की गयी कमी के सकारात्मक प्रभाव को भी दर्शाता है।
ग्रामीण मुद्रास्फीति गिरकर (-) 0.25 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी मुद्रास्फीति 0.88 प्रतिशत रही, जो विभिन्न क्षेत्रों में बहुआयामी नरमी का संकेत है। मुद्रास्फीति में निरंतर कमी क्रय शक्ति को बढ़ाती है,वास्तविक उपभोग वृद्धि को समर्थन देती है,और निवेश एवं उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मौद्रिक नीति को स्थान प्रदान करती है। कुल मिलाकर,मुद्रास्फीति में नरमी आने वाली तिमाहियों में सतत, समावेशी और स्थिर आर्थिक विकास की नींव को मजबूत करती है।

भारत का थोक मूल्य सूचकांक (डबल्यूपीआई)आधारित मुद्रास्फीति भी अक्टूबर 2024 की तुलना में अक्टूबर 2025 में (-) 1.21 प्रतिशत तक कम हो गई, जो खाद्य पदार्थों, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बिजली, खनिज तेलों और मूल धातु निर्माण आदि सहित प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में गिरावट को दर्शाती है। डबल्यूपीआई खाद्य सूचकांक के लिए साल-दर-साल मुद्रास्फीति दर अक्टूबर 2025 में (-) 5.04 प्रतिशत तक गिर गई,जो सितंबर 2025 में -1.99 प्रतिशत थी। थोक मुद्रास्फीति में यह निरंतर कमी व्यवसायों की क्रय शक्ति को मजबूत करने और बाजार की भावनाओं को आगे बढ़ाने का संकेत देती है
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में बढ़ोतरी
आईआईपी विनिर्माण, खनन और बिजली क्षेत्र में बढ़ोतरी का आकलन करता है,जो औद्योगिक कार्यकलाप की मजबूती को दर्शाता है। भारत के आईआईपी ने सितंबर 2025 में सालाना आधार पर 4.0 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की,जो मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र में 4.8 प्रतिशत के विस्तार का नतीजा है। बढ़ता आईआईपी मजबूत उत्पादन,उच्च रोजगार और मजबूत निवेश गति का संकेत देता है,जो अर्थव्यवस्था के समग्र विकास की गति को सशक्त बनाता है।
इस सशक्त प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार शीर्ष तीन सकारात्मक योगदानकर्ता विनिर्माण क्षेत्र से हैं। यह प्रदर्शन भारत के औद्योगिक आधार की मजबूती और व्यापक विकास एजेंडे में सार्थक योगदान देने की इसकी क्षमता को रेखांकित करता है।
• मूल धातुओं का निर्माण (12.3 प्रतिशत की वृद्धि),
• विद्युत उपकरणों का निर्माण (28.7 प्रतिशत की वृद्धि), और
• मोटर वाहनों, ट्रेलरों और अर्ध-ट्रेलरों का निर्माण (14.6 प्रतिशत)
उपयोग-आधारित वर्गीकरण के दृष्टिकोण से,कई श्रेणियों में सराहनीय वृद्धि दर्ज की गई। शीर्ष तीन योगदानकर्ता हैं: बुनियादी ढांचा और निर्माण वस्तुओं में 10.5 प्रतिशत की वृद्धि,उपभोक्ता सामग्रियों में 10.2 प्रतिशत की वृद्धि,और मध्यवर्ती वस्तुओं में सितंबर 2025 में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि। प्राथमिक वस्तुओं,पूंजीगत वस्तुओं, मध्यवर्ती वस्तुओं और उपभोक्ता सामग्रियों के क्षेत्रों में यह विविध वृद्धि मजबूत निवेश गतिविधि और लचीली उपभोग मांग दोनों का संकेत देती है। विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि के साथ, ये पैटर्न एक संतुलित औद्योगिक उछाल को दर्शाते हैं जो निरंतर, समावेशी आर्थिक विस्तार की नींव को मजबूत करता है।
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सरकारी हस्तक्षेपों से विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा
विनिर्माण क्षेत्र देश के विकास मॉडल का एक केंद्रीय स्तंभ बनकर उभरा है,जो न सिर्फ घरेलू मांग को पूरा कर रहा है,बल्कि वैश्विक वैल्यू चेन में भारत की स्थिति को भी मज़बूत कर रहा है। प्रमुख पहलों ने इस क्षेत्र की विकास गाथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
2020 में शुरू की गई उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, 14 रणनीतिक क्षेत्रों को कवर करती है, जो बिक्री में वृद्धि से जुड़े प्रोत्साहनों के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देती है और आत्मनिर्भर भारत तथा 2030 तक 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ती है।
1.97 लाख करोड़ रुपये के स्वीकृत परिव्यय और 800 से अधिक आवेदनों के साथ, इसने 1.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित किया है, जिससे उत्पादन, निर्यात और रोज़गार में वृद्धि हुई है। यह उद्योग जगत के मज़बूत आत्मविश्वास और व्यापक स्वीकृति को दर्शाता है।
स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन, जीएसटी सुधार जैसी अन्य पहलों का उद्देश्य क्षमता निर्माण में तेज़ी लाना और भारतीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करना है।
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आर्थिक विकास के लिए एक मज़बूत श्रम शक्ति अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह सभी क्षेत्रों में उत्पादन, नवाचार और उपभोग को बढ़ावा देती है। श्रम बाजार को अर्थव्यवस्था का ईंधन माना जाता है और यह अक्टूबर 2025 में भी लचीलेपन के उत्साहजनक संकेत दिखा रहा है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सीडबल्यूएस(वर्तमान में साप्ताहिक स्थिति) में समग्र श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर)अक्टूबर 2025 में 55.4 प्रतिशत तक पहुँच गई और छह महीने का उच्चतम स्तर दर्ज किया जबकि जून 2025 में यह 54.2 प्रतिशत दर्ज की गयी थी। अन्य श्रम बाजार संकेतकों जैसे श्रमिक भागीदारी दर (52.5प्रतिशत,जून 2025 से बढ़ रही है),महिला भागीदारी (34.2प्रतिशत, मई 2025 के बाद से उच्चतम) और बेरोजगारी दर (सितंबर 2025 से 5.2प्रतिशत पर अपरिवर्तित) में भी सुधार देखा गया। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने जुलाई 2025 के दौरान 21.04 लाख सदस्यों की वृद्धि दर्ज की,जो जुलाई 2024 की तुलना में 5.55 प्रतिशत की वृद्धि है। नए ग्राहकों में यह वृद्धि रोजगार के बढ़ते अवसरों, कर्मचारी लाभों के बारे में बढ़ती जागरूकता और ईपीएफओ के सफल संपर्क कार्यक्रमों को दर्शाती है।
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संकेतक
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सितंबर 2025 (प्रतिशत में)
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अक्टूबर 2025 (प्रतिशत में)
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श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डबल्यूपीआर)
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52.4
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52.5
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बेरोजगारी दर
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5.2
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5.2
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महिला श्रम बल भागीदारी
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34.1
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34.2
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ग्रामीण श्रम बल भागीदारी
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57.4
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57.8
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शहरी श्रम बल भागीदारी
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50.9
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50.5
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नौकरी जॉबस्पीक सूचकांक
नौकरी जॉबस्पीक सूचकांक भारत में व्हाइट कॉलर नियुक्तियों का एक प्रमुख संकेतक है। सितंबर 2025 में इस सूचकांक में साल-दर-साल 10.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई,जो व्हाइट कॉलर नियुक्तियों में मज़बूत गति को दर्शाता है। यह वृद्धि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) भूमिकाओं में 61 प्रतिशत की वृद्धि के कारण हुई है।
नए नियुक्तियों में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो भारत के उभरते हुए रोज़गार बाज़ार में शुरुआती करियर के अवसरों के विस्तार और नए ज़माने के कौशल की बढ़ती माँग का संकेत है।
बीमा, आतिथ्य और रियल एस्टेट जैसे गैर-आईटी क्षेत्रों में भी माँग बढ़ी।
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रोज़गार के बेहतर रुझान बढ़ती आय, मज़बूत रोज़गार सुरक्षा और रोज़गार की गुणवत्ता में सुधार दर्शाते हैं, जो आर्थिक विकास और नीतिगत उपायों के सकारात्मक प्रभाव को दिखाते हैं। ये सभी मिलकर अधिक समावेशी रोज़गार का संकेत देते हैं जो उत्पादकता बढ़ाते हैं और सतत आर्थिक विस्तार को बढ़ावा देते हैं।
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सरकारी पहलों से श्रम बाजार के परिणाम बेहतर
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत, देश भर में 27 लाख से ज़्यादा उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका है (17 नवंबर, 2025 तक)। नव्या (युवा किशोरियों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से आकांक्षाओं का पोषण) किशोरियों को उभरते क्षेत्रों में रोज़गार क्षमता बढ़ाने के लिए उद्योग-संबंधित कौशल से युक्त करता है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) जिसके तहत मार्च 2025 तक 4,91,406 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, स्टैंड-अप इंडिया जिसके तहत जून 2025 तक 62,790 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, और स्टार्ट-अप इंडिया जिसके तहत 200,235 डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप हैं (18 नवंबर, 2025 तक)। ये सभी उद्यमियों का समर्थन करते हैं, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार करते हैं और श्रम बल के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करते हैं। स्किल इंडिया मिशन सूचना प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों से लेकर व्यक्तित्व विकास तक, देश की सीमाओं से परे अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक, विविध कौशल-संबंधी कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के मंत्र के लिए प्रतिबद्ध है। देश भर में 40 स्थानों पर 17वां रोजगार मेला भी आयोजित किया गया, जिसमें 24 अक्टूबर, 2025 को नव चयनित युवाओं को 51,000 से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। ये कार्यक्रम मिलकर कौशल को मजबूत करते हैं, उद्यमशीलता को बढ़ावा देते हैं, और समावेशी आर्थिक विकास को गति देने वाले अधिक सक्षम और लचीले कार्यबल में योगदान करते हैं।
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व्यापार प्रदर्शन में सुधार

भारत का व्यापार क्षेत्र अप्रैल-अक्टूबर 2025 में मज़बूत बना रहा, जो मज़बूत वैश्विक मांग और प्रमुख निर्यात श्रेणियों में निरंतर सुधार को दर्शाता है। वस्तु और सेवा निर्यात, दोनों में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था की मज़बूती को बल मिला।
भारत का बाह्य क्षेत्र अप्रैल-अक्टूबर 2025 में मज़बूती दिखाता रहा,जहां संचयी निर्यात (वस्तु और सेवाएं) 4.84 प्रतिशत बढ़कर 491.80 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया,जबकि एक साल पहले यह 469.11 अरब अमेरिकी डॉलर था।
वस्तु निर्यात वैश्विक व्यापार व्यवधानों के बावजूद, स्पेन (40.74 प्रतिशत), चीन (24.77प्रतिशत), हांगकांग (20.7प्रतिशत), अमेरिका (10.15प्रतिशत), और संयुक्त अरब अमीरात (5.88प्रतिशत) जैसे प्रमुख बाजारों से मज़बूत मांग के कारण 0.63 प्रतिशत बढ़कर 254.25 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इस वृद्धि को निम्नलिखित देशों में मज़बूत प्रदर्शन का समर्थन प्राप्त हुआ:
• समुद्री उत्पाद (16.18प्रतिशत)
• मांस, डेयरी और पोल्ट्री उत्पाद (23.97प्रतिशत)
• अन्य अनाज (25.52प्रतिशत),
• काजू (28.32प्रतिशत),
• इलेक्ट्रॉनिक सामान (37.82प्रतिशत)
सेवा निर्यात लचीलेपन का एक प्रमुख स्तंभ बना रहा, जो अप्रैल-अक्टूबर 2024 के 216.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर से 9.75 प्रतिशत बढ़कर अप्रैल-अक्टूबर 2025 में अनुमानित 237.55 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। यह कंप्यूटर सेवाओं और व्यावसायिक सेवाओं में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है। कुल मिलाकर, निर्यात क्षेत्र भारत की आर्थिक स्थिरता और विकास के दृष्टिकोण को सुदृढ़ बना रहा है।
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व्यापार विस्तार में सरकार का सहयोग
सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर, अनेक योजनाओं और राहत उपायों को लागू करके भारत के व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत कर रही है। प्रमुख उपायों में भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं/सॉफ्टवेयर/सेवाओं के पूर्ण निर्यात मूल्य की वसूली और प्रत्यावर्तन की समयावधि को भारत से निर्यात की तिथि से नौ महीने से बढ़ाकर पंद्रह महीने करना शामिल है। माल की शिपमेंट की समयावधि को अग्रिम भुगतान प्राप्त होने की तिथि से एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष या समझौते के अनुसार, जो भी बाद में हो, किया गया है।
मंत्रिमंडल ने निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना को भी मंज़ूरी दी है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) को 100 प्रतिशत ऋण गारंटी कवरेज प्रदान किया जाएगा ताकि एमएसएमई सहित पात्र निर्यातकों को 20,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त ऋण सुविधाएं प्रदान की जा सकें। इस योजना का उद्देश्य वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और नए एवं उभरते बाजारों में विविधीकरण को बढ़ावा देना है। निर्यात संवर्धन मिशन निर्यात संवर्धन के लिए एक व्यापक,लचीला और डिजिटल रूप से संचालित ढांचा प्रदान करेगा, जिसे वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 के लिए 25,060 रुपये के कुल परिव्यय द्वारा समर्थित किया जाएगा।
विदेश व्यापार नीति 2023 जैसी नीतियां आरओडीटीईपी प्रतिपूर्ति, निर्यात केंद्रों के रूप में ज़िलों और निर्यात योजना के लिए व्यापार अवसंरचना के माध्यम से बुनियादी ढांचे के समर्थन जैसी पहलों का पूरक हैं,जिससे बाज़ार विविधीकरण, बेहतर अनुपालन और सुगम लॉजिस्टिक्स संभव हो रही है। व्यापार को बढ़ावा देते हुए, विशेष आर्थिक क्षेत्र रोज़गार, निवेश और निर्यात को भी बढ़ावा दे रहे हैं। सामूहिक रूप से, ये कदम निर्यातकों को वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में मदद कर रहे हैं और साथ ही भारत की व्यापार क्षमता का विस्तार भी कर रहे हैं।
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सरकार ने व्यापक जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) सुधार शुरू किए, जिसमें 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की सरलीकृत दो-स्लैब संरचना के साथ दरों को युक्तिसंगत बनाया गया। इस सुधार में प्रमुख क्षेत्रों में दरों में व्यापक कटौती शामिल है, जिसमें आम आदमी की वस्तुओं, श्रम-प्रधान उद्योगों, कृषि और स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण कारक हैं।
अक्टूबर 2025 में सकल जीएसटी संग्रह 1.96 लाख करोड़ रुपये रहा,जो पिछले वर्ष इसी महीने दर्ज 1.87 लाख करोड़ रुपये से 4.6 प्रतिशत अधिक है। दरों को युक्तिसंगत बनाने की शुरुआत के साथ ही राजस्व में यह वृद्धि त्योहारी सीज़न के दौरान लचीले उपभोग के रुझान को रेखांकित करती है।
जीएसटी दरों में कमी से वस्तुओं और सेवाओं की लागत कम हुई है,घरेलू बचत और उपभोग को बढ़ावा मिला है, साथ ही कर आधार का विस्तार हुआ है। साथ ही, एक व्यापक कर आधार स्थिर राजस्व प्रवृत्तियों में सहायता कर रहा है, जो एक अधिक संतुलित और सतत विकास परिवेश में योगदान दे रहा है।
भारत के विकास अनुमान
भारत का विकास परिदृश्य लगातार मज़बूत होता जा रहा है,प्रमुख वैश्विक और घरेलू संस्थान अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और बढ़ती घरेलू मांग को देखते हुए अपने अनुमानों को बेहतर कर रहे हैं। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के पूर्वानुमान को 6.5प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया है,जो सभी क्षेत्रों में मज़बूत गति को दर्शाता है। अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां भी इसी आशावाद को दोहराती हैं।
• विश्व बैंक ने मज़बूत उपभोग और जीएसटी सुधारों के सकारात्मक प्रभावों का हवाला देते हुए 2026 में 6.5प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है;
• मूडीज़ को उम्मीद है कि भारत 2026 तक 6.4प्रतिशत और 2027 में 6.5प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ एक बढ़ती हुई जी20 अर्थव्यवस्था बना रहेगा;
• आईएमएफ ने 2025 के लिए अपने अनुमानों को बढ़ाकर 6.6प्रतिशत और 2026 के लिए 6.2 प्रतिशत कर दिया है।
• ओईसीडी ने 2025 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7प्रतिशत और 2026 के लिए 6.2प्रतिशत कर दिया है।
• एसएंडपी का अनुमान है कि भारत की जीडीपी वित्त वर्ष 2026 में 6.5प्रतिशत और 2027 में 6.7 प्रतिशत बढ़ेगी।
कुल मिलाकर, ये संशोधन भारत के आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों और उभरती वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत, घरेलू स्तर पर संचालित विकास को बनाए रखने की इसकी क्षमता में व्यापक अंतरराष्ट्रीय विश्वास को उजागर करते हैं।
निष्कर्ष
भारत की अर्थव्यवस्था ढांचागत सुधारों,डिजिटल बदलाव और समावेशी विकास पर ज़ोरदार ध्यान केंद्रित करते हुए एक स्थिर और लचीले विकास पथ पर आगे बढ़ रही है। भारत की विकास की गति में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के विश्वास और स्थिर व्यापक आर्थिक संकेतकों के साथ,अर्थव्यवस्था अपनी आर्थिक गति को बनाए रखने के मामले में अच्छी स्थिति में है। आरबीआई द्वारा मुद्रास्फीति पर निरंतर निगरानी और हाल के नीतिगत उपायों - जैसे सुव्यवस्थित कर संरचना, श्रम-केंद्रित सुधार और व्यापार-संवर्धन पहल- के साथ, सरकार के प्रशासनिक प्रयास अनुपालन को आसान बनाने, लागत कम करने और सभी क्षेत्रों में व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देने में मदद कर रहे हैं। ये सभी घटनाक्रम एक अधिक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी और जन-केंद्रित अर्थव्यवस्था की ओर निरंतर प्रगति का संकेत देते हैं,जो दीर्घकालिक सतत विकास पर आधारित हो।
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Moodys
https://www.moodys.com/web/en/us/insights/credit-risk/outlooks/macroeconomics-2026.html
IMF
https://www.imf.org/external/datamapper/NGDP_RPCH@WEO/IND?zoom=IND&highlight=IND
OECD
https://www.oecd.org/en/publications/2025/09/oecd-economic-outlook-interim-report-september-2025_ae3d418b.html
PIB Backgrounder
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=155121&ModuleId=3#:~:text=Notably%2C%20India%20is%20projected%20to,projected%20GDP%20of%20%247.3%20trillion
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=155082&ModuleId=3®=1&lang=42
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=154880&ModuleId=3
https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?Id=150446
https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?Id=150328
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2172356
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2168711
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2175702
News On Air
https://www.newsonair.gov.in/india-will-become-the-worlds-third-largest-economy-soon-rbi-governor/
https://www.newsonair.gov.in/india-remains-fastest-growing-economy-for-4-years-aims-for-20-more-piyush-goyal/
Ministry of Labour & Employment
https://www.epfindia.gov.in/site_docs/PDFs/EPFO_PRESS_RELEASES/22062025_EPFOAdds19.14LakhNetMembers_April2025.pdf
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2169975
Prime Minister’s Office
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2182117
Ministry of Electronics and Information Technology
https://www.meity.gov.in/offerings/schemes-and-services/details/production-linked-incentive-scheme-pli-for-large-scale-electronics-manufacturing-gNyMDOtQWa
S&P
https://www.spglobal.com/en/research-insights/special-reports/india-forward/shifting-horizons/how-indian-economic-growth-realigns-with-shifting-global-trends
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