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Social Welfare

जमीनी स्‍तर से गौरव तक

'विकसित भारत 2047' के लिए खेल क्षेत्र में व्यापक बदलाव

Posted On: 28 AUG 2025 2:50PM

जब मैं अपने देश के परिवारों के भीतर खेलों को बढ़ावा देने का वातावरण देखता हूं तो मेरा ह्रदय गर्व से फूल जाता है। मैं इसे देश के भविष्य के लिए सबसे शुभ संकेत मानता हूं"– प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, 15 अगस्त, 2025

 

महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु

  1. युवा केंद्रित विजन: भारत की 65 प्रतिशत आबादी के 35 वर्ष से कम आयु के साथ, सरकार ने खेलों को युवा सशक्तिकरण के मुख्य स्तंभ के रूप में स्थापित किया है। युवा मामले और खेल मंत्रालय को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 3,794 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन प्राप्त हुआ (2014-15 से 130.9 प्रतिशत की वृद्धि), जिससे विकसित भारत 2047 विजन के लिए खेल केंद्रीय हिस्सा बन गया।
  2. विकास के लिये उत्प्रेरक के रूप में खेल: खेलो इंडिया, टॉप्स, फिट इंडिया और कीर्ति जैसी प्रमुख पहलें जमीनी स्तर की प्रतिभाओं का पोषण कर रही हैं, जन आंदोलन के रूप में फिटनेस को बढ़ावा दे रही हैं और खेलों को राष्ट्रीय गौरव, आर्थिक विकास और वैश्विक नेतृत्व के वाहक के रूप में स्थापित कर रही हैं
  • रूपांतरकारी खेल शासन सुधार: राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 में अनिवार्य एथलीट प्रतिनिधित्व, जेंडर समावेशन, सुरक्षित खेल नीति और पारदर्शी कदमों सहित ऐतिहासिक परिवर्तन किए गए हैं जो खेल निकायों को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरणों के रूप में स्थान देते हैं।

भारत को अन्य देशों की तुलना में अधिक जनसांख्यिकीय लाभ प्राप्त है। यहां की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है, जिससे यह विश्व में सबसे बड़ी युवा जनसंख्या वाला देश बन गया है।

इस जनसांख्यिकीय लाभ की क्षमता को पहचानते हुए, युवा मामले और खेल मंत्रालय ने युवा विकास और खेल को बढ़ावा देने के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसका उद्देश्य 2047 तक देश को विकसित भारत बनने के अपने लक्ष्य की ओर ले जाना है। यह व्यक्तित्व निर्माण, कौशल वृद्धि और विभिन्न पहलों के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।

राष्ट्रीय खेल दिवस (एनएसडी) 2025 समारोह का नेतृत्व फिट इंडिया मिशन द्वारा किया जाएगा और प्रेरक थीम 'एक घंटा, खेल के मैदान में' के तहत 29 से 31 अगस्त तक तीन दिवसीय, राष्ट्रव्यापी खेल और फिटनेस आंदोलन के रूप में आयोजित किया जाएगा। यह आंदोलन जीवनशैली से जुड़े रोगों से बचाव के लिए प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि के लिए समर्पित करने के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने का प्रयास करता है। एनएसडी 2025 की भावना उत्कृष्टता, मित्रता, सम्मान के ओलंपिक मूल्यों और साहस, दृढ़ संकल्प, प्रेरणा और समानता के पैरालंपिक मूल्यों को भी विशेष सम्मान देती है। प्रख्यात एथलीट और जन प्रतिनिधि भी समारोह में भाग लेने और देश के सभी हिस्सों में खेल गतिविधियों में शामिल होने के लिए तैयार हैं। विख्यात खिलाड़ी 29 अगस्त को राज्य की राजधानियों के साथ-साथ सभी जिलों में खेल के मैदानों पर कदम रखेंगे।

मेजर ध्यानचंद: खेल के माध्यम से युवाओं की प्रेरक पीढ़ियां

भारत में खेलों का महत्व मेजर ध्यानचंद को स्थायी प्रतीक बनाए जाने के रूप में प्रदर्शित होता है, जिनकी जयंती 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाई जाती है। महानतम हॉकी खिलाड़ियों में से एक माने जाने वाले ध्यानचंद अपने असाधारण गेंद नियंत्रण और गोल स्कोरिंग क्षमताओं के लिए विख्यात थे, जिसके कारण उन्हें "हॉकी के जादूगर" और "बाजीगर" की उपाधियां मिलीं। मेजर ध्यानचंद एकाग्रता, विनम्रता और राष्ट्रीय गौरव की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं जो युवा खिलाड़ियों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।

प्रमुख खेल पहल

भारत सरकार खेलों को युवा सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के मुख्य स्तंभ के रूप में देखती है। इस विजन को आगे बढ़ाने के लिए, केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए युवा मामले और खेल मंत्रालय को 3,794 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन किया है। 2,191 करोड़ रुपये का एक बड़ा हिस्सा, केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए आवंटित किया गया है, वित्त वर्ष 2014-15 में मंत्रालय को बजट आवंटन 1643 करोड़ रुपये था, जो  2025-26 में 130.9 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता  है

भारतीय खेल प्राधिकरण

युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वावधान में भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) को खेलों को बढ़ावा देने और राष्ट्रीयता तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल उत्कृष्टता अर्जित करने के दोहरे उद्देश्यों का दायित्व सौंपा गया है।

लक्ष्य और उद्देश्य:

  • निचले स्तर पर प्रतिभा स्काउटिंग और उत्कृष्टता के लिए प्रतिभा का पोषण
  • प्रशिक्षण और अंतर्राष्ट्रीय अनुभव
  • वैज्ञानिक और खेल उपकरण तथा विज्ञान से जुड़े कर्मियों के साथ सहायता प्रशिक्षण
  • वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रणाली के साथ प्रदर्शन की निगरानी कर उसे बेहतर बनाना
  • राष्ट्रीय टीमों का प्रशिक्षण और तैयारी
  • खेल अवसंरचना विकास और रखरखाव
  • दिल्ली में 4 स्टेडियम परिसरों और एक शूटिंग रेंज का रखरखाव तथा उन्नयन
  • खेल की विभिन्न स्पर्धाओं में उच्च क्षमता के कोच और शारीरिक शिक्षा देने वाले विशेषज्ञों को व्यापक आधार वाले खेलों में तैयार करना
  • एमवाईएएस जैसे खेलो इंडिया, एनएसएफ को सहायता, टॉप्स, फिट इंडिया की विभिन्न योजनाओं को क्रियान्वित करना

राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025

18 अगस्त, 2025 को लागू राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025, भारतीय खेल प्रशासन में एक ऐतिहासिक सुधार का प्रतिनिधित्व करता है। अधिनियम को एक एकीकृत ढांचा स्थापित करने के लिए लागू किया गया था जो ओलंपिक चार्टर, पैरालंपिक चार्टर और विश्‍वस्‍तरीय सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के अनुरूप पारदर्शिता, जवाबदेही, नैतिकता और एथलीट कल्याण सुनिश्चित करता है।


यह अधिनियम, एथलीट संरक्षण पर जोर देता है। पहली बार, खेल निकायों को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के साथ संयोजित आचार संहिता के साथ-साथ महिलाओं, छोटी उम्र के एथलीटों और अन्य निर्बल व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षित खेल नीति अपनाने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक राष्ट्रीय खेल निकाय एथलीटों, कोचों और ऐसे निकाय से जुड़े अन्य व्यक्तियों द्वारा उठाई गई शिकायतों का निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समाधान करने के लिए  एक आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करेगा।

अधिनियम शासन में संरचनात्मक सुधार भी पेश करता है। यह सशर्त छूट (अंतरराष्ट्रीय महासंघ संविधियों द्वारा अनुमति दिए जाने पर 70-75 वर्ष) के साथ पदाधिकारियों के लिए आयु और कार्यकाल सीमा तय करता है, साथ  ही नेतृत्व में पीढ़ीगत नवीकरण सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त, शासन से जुड़े संकट के मामलों में, यह न्यायालयों द्वारा पहले से नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के स्थान पर अनुभवी खेल प्रशासकों की नियुक्ति की अनुमति देता है।

खेलो भारत नीति 2025

जुलाई 2025 में लॉन्च की गई, खेलो भारत नीति 2025 भारत के खेल इको-सिस्टम में एक आमूलचूल बदलाव का प्रतीक है। खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों द्वारा रखी गई नींव पर आधारित इस नीति का उद्देश्य खेलों को एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन और एक व्यवहार्य योग्‍य करियर के रूप में बदलना है, जो विकसित भारत के लक्ष्यों और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की आकांक्षा के साथ जुड़ा हुआ है।

यह नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के साथ खेलों को एकीकृत करती है, जमीनी स्तर और विशिष्ट वर्ग के स्तर पर बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करती है, और कीर्ति (खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रारंभिक प्रतिभा पहचान को संस्थागत बनाती है।

इसके प्रमुख तत्वों में शामिल हैं:

खेलो भारत नीति केवल एक नीति ही नहीं है - यह प्रतिभा को पोषित करने, प्रेरणादायक भागीदारी और भारत को एक अग्रणी खेल राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतिबद्धता भी है।

खेलो इंडिया – खेलों के विकास के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम

वित्त वर्ष 2016-17 में शुरू किया गया, खेलो इंडिया – राष्ट्रीय खेल विकास कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक स्‍तर पर भागीदारी और खेल उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। सरकार द्वारा मजबूती से आगे बढ़ाई गई इस योजना को 2021 में 3,790.50 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पांच साल के लिए विस्तार मिला, जिससे देश भर में खेल संस्कृति को पोषित करने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन को सुदृढ़ किया गया। प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं:

  • 3,151.02 करोड़ रुपये की 328 नई खेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी।
  •  जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण और सहायता के लिए 1,045 खेलो इंडिया केंद्रों (केआईसी) की स्थापना।
  • 34 खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्रों (केआईएससीई) की अधिसूचना  और 306 अकादमियों को मान्यता।

कोचिंग, उपकरण, चिकित्सा देखभाल और 10,000 रुपये के मासिक आउट-ऑफ-पॉकेट भत्ते के साथ 2,845 खेलो इंडिया एथलीटों (केआईए) के लिए सहायता।

स्रोत: इंडियाज स्पोर्टिंग ट्रांसफॉर्मेशन बिल्डिंग चैंपियंस, इंस्पायरिंग ए नेशन, पीआईबी; वार्षिक रिपोर्ट 2023-2024, युवा मामले और खेल मंत्रालय

कीर्ति (खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन)

कीर्ति (खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन) 9 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के बीच खेल प्रतिभा की पहचान करने और पोषण करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी पहल है। यह कार्यक्रम पारदर्शी, योग्यता-आधारित चयन के लिए देश भर में प्रतिभा मूल्यांकन केंद्रों (टीएसी), मानकीकृत प्रोटोकॉल और उन्नत आईटी उपकरण (एआई और डेटा एनालिटिक्स सहित) का उपयोग करता है। इस समय देश में 174 टीएसी (प्रतिभा मूल्‍यांकन केंद्र) हैं। यह पहल युवा एथलीटों की मजबूत क्रम सुनिश्चित करती है जो भारत को वैश्विक खेलों में अधिक ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।

कीर्ति-(खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन) का लक्ष्य एथलीटों के एक स्थायी और निरंतर समूह का निर्माण करना है ताकि भारत को 2036 तक  शीर्ष 10 खेल देश और 2047 तक शीर्ष 5 देश ने में मदद मिल सके

टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स)

सरकार ने ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की तैयारियों में भारत के शीर्ष एथलीटों के लिए समर्थन को सुदृढ़ किया है। चयनित एथलीटों को अनुकूलित प्रशिक्षण और अन्य सहायता के लिए राष्ट्रीय खेल विकास निधि (एनएसडीएफ) से वित्त पोषित किया जाता है जो मंत्रालय की सामान्य योजनाओं के अंतर्गत अनुपलब्ध है। कोर ग्रुप एथलीटों को आउट ऑफ पॉकेट भत्ता (ओपीए) 50,000 प्रति माह रुपये दिया जाता है। जूनियर एथलीटों की सहायता करने के लिए एक विकास समूह जोड़ा गया, जिसमें 25,000 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति थी। टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) ने टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 ओलंपिक में भारत की पदक जीतने वाली सफलता में योगदान दिया, जो भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।

अगस्त 2024 तक, 174 व्यक्तिगत एथलीटों और 2 हॉकी टीमों (पुरुष और महिला) को कोर ग्रुप के रूप में योजना के तहत चुना गया है।

फिट इंडिया मूवमेंट

फिटनेस को हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने के उद्देश्य से फिट इंडिया मूवमेंट शुरू किया गया था। आंदोलन का मिशन व्यवहारगत परिवर्तन लाना और शारीरिक रूप से सक्रिय जीवन शैली की ओर बढ़ना है,  जो फिटनेस के लिए जन आंदोलन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान को दर्शाता है

इस आंदोलन ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें प्रख्यात फिटनेस विशेषज्ञों और फिट इंडिया आइकन द्वारा 'फिट इंडिया- हेल्दी हिंदुस्तान' कार्यक्रम नामक एक विशेष ऑनलाइन श्रृंखला 2023 में शुरू की गई थी

परिवारों के बीच फिटनेस दिनचर्या को विकसित करने के उद्देश्य से विशेषज्ञों के साथ फिट इंडिया परिवार सत्र भी आयोजित किए गए।

राष्ट्रीय खेल परिसंघों (एनएसएफ) को सहायता

यह योजना राष्ट्रीय खेल संघों को भारत में प्रतिस्पर्धी खेलों के इको-सिस्टम को सुदृढ़ करने में सक्षम बनाती है। राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की मेजबानी करना, विदेशों में भारतीय एथलीटों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाना, कोचिंग शिविर स्थापित करना, विदेशी कोचों की नियुक्ति और उन्नत उपकरणों की खरीद आदि के जरिए इसे सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य एथलीटों को संरचित, पेशेवर अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करना है।

राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय

“देश में स्थापित किए जा रहे राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, ने खेलों को मुख्यधारा की शिक्षा का हिस्सा बना दिया है। इन दोनों का उद्देश्य न केवल उत्कृष्‍ट एथलीट बल्कि भारत में शीर्ष स्तर के खेल  प्रोफेशनल्स भी तैयार करना है।” – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी

भारत में खेलों के लिए एक रूपांतनकारी विजन के साथ, सरकार ने एक मजबूत खेल इको-सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए खेल शिक्षा को प्राथमिकता दी है, जिससे एथलेटिक्स को शौकिया खिलाड़ी की जगह एक पेशेवर कैरियर में बदला जा सके। मणिपुर के इंफाल में 2018 में स्थापित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और कोचिंग में खेल शिक्षा के लिए एक समर्पित संस्थान है, जो कैनबरा और विक्टोरिया जैसे विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापनों के माध्यम से वैश्विक सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को अपनाकर चुनिंदा स्पर्धाओं के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी काम करता है। यह संस्था वैश्विक प्रतिभा का पोषण करने के लिए राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ संयोजित करते हुए शारीरिक शिक्षा, खेल विज्ञान और विशिष्ट प्रशिक्षण को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार

राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त) पर राष्ट्रपति द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किए जाने वाले ये पुरस्कार एथलीटों, कोचों और संस्थानों को सम्मानित करते हैं जिन्होंने भारतीय खेलों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्रमुख पुरस्कारों में शामिल हैं:

मेधावी खिलाड़ियों को पेंशन

यह योजना सेवानिवृत्त एथलीटों के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करती है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में देश के लिए पुरस्कार अर्जित किए हैं। पात्र खिलाड़ी, 30 वर्ष की आयु तक पहुंचने और सेवानिवृत्ति के बाद, 12,000 रुपये और 20,000 रुपये के बीच आजीवन मासिक पेंशन प्राप्त करते हैं। यह सहायता राशि उनके चुनौती भरे समय में बहुत मददगार साबित होती है।

खिलाड़ियों के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय कल्याण कार्यक्रम

यह कल्याणकारी कार्यक्रम वित्तीय या स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी कठिनाई का सामना करने वाले प्रतिष्ठित पूर्व एथलीटों को 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान करता है। सहायता में चिकित्सा उपचार, खेल उपकरण की खरीद और खेल आयोजनों में भागीदारी जैसे व्यय शामिल हैं। यह उन खिलाडियों के लिए निरंतर गरिमा और सहायता सुनिश्चित करता है जिन्होंने राष्ट्र को सम्मान दिलाया।

राष्ट्रीय खेल विकास कोष (एनएसडीएफ)

राष्ट्रीय खेल विकास कोष (एनएसडीएफ) निजी क्षेत्र, एनआरआई और परोपकारी संगठनों से वित्तीय योगदान जुटाता है। ये कोष सार्वजनिक निवेश के पूरक हैं और बुनियादी ढांचे को विकसित करने, उच्च क्षमता वाले एथलीटों की सहायता करने और अभिनव कार्यक्रमों के वित्त पोषण के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिससे खेल विकास के लिए एक सहयोगात्मक मॉडल तैयार होता है।

राष्ट्रीय खेल विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (एनसीएसएसआर)


2017 में आरंभ किया गया राष्ट्रीय खेल विज्ञान और अनुसंधान केंद्र (एनसीएसएसआर) भारतीय एथलीटों के लिए वैज्ञानिक सहायता को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्‍वपूर्ण कदम है। 2025-26 तक 260 करोड़ रुपये के बजट के साथ, इसमें केंद्रीय एनसीएसएसआर हब शामिल है और यह चिकित्सा संस्थानों में छह विश्वविद्यालय आधारित खेल विज्ञान विभागों और पांच खेल चिकित्सा विभागों की सहायता करता है। यह योजना खेल विज्ञान और चिकित्सा के माध्यम से उन्नत अनुसंधान, चोट की रोकथाम, पुनर्वास और प्रदर्शन वृद्धि को बढ़ावा देती है।

वैश्विक खेल क्षेत्र में भारत की प्रगति

ओलंपिक

वर्ष

आयोजक शहर

भारतीय एथलीट

पदक जीते

2016

रियो डी जनेरियो

117

2

2020

टोकियो

124

7

2024

पेरिस

117

6

 

 

 

 

 

 

 

 

भारत की ओलंपिक यात्रा में 2016 और 2024 के बीच एक उल्लेखनीय परिवर्तन देखा गया, जिसने एथलेटिक उत्कृष्टता के एक नए युग को चिह्नित किया। रियो 2016 में 117 सदस्यीय दल द्वारा 2 पदकों की मामूली संख्या की तुलना में भारत ने टोक्यो 2020 में 7 पदक जीते और पेरिस 2024 में 6 पदकों के साथ मजबूत प्रदर्शन बनाए रखा। दोनों ओलंपिकों में एथलीटों की संख्या क्रमशः 124-117 थी। इस अवधि में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वालों में नीरज चोपड़ा, एथलेटिक्स (भाला) में भारत के पहले ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता (टोक्यो 2020) और भारोत्तोलन में नियमित पदक विजेता मीराबाई चानू शामिल हैं

निष्‍कर्ष

बढ़ी हुई भागीदारी से लेकर वैश्विक स्पर्धाओं में पदक जीतने तक भारत की खेल यात्रा रूपांतरकारी रही है। राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 और खेलो भारत नीति 2025 जैसे सुधारों के साथ, भारत एक मजबूत इको-सिस्टम का निर्माण कर रहा है जिसने एथलेटिक क्षमता को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों में बदल दिया है।

एथलीट-केंद्रित शासन, वैज्ञानिक प्रशिक्षण सहायता और पारदर्शी जवाबदेही तंत्र के माध्यम से, देश एक ऐसी पीढ़ी विकसित कर रहा है जो 2036 के ओलंपिक खेलों और विकसित भारत 2047 विजन की दिशा में खेल उत्कृष्टता और राष्ट्रीय प्रगति दोनों को प्रेरित करेगी।

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पीके/केसी/केएल/एसकेजे/केके/एसवी

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