Social Welfare
विश्व मलेरिया दिवस – 2025
मलेरिया मुक्त भारत की ओर
Posted On:
25 APR 2025 5:22PM
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“मलेरिया चार हज़ार वर्षों से मानवता के सामने एक बड़ी चुनौती के रुप में रहा है। आज़ादी के समय भी, यह हमारी सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक थी। आज, मैं संतोष के साथ कह सकता हूँ कि देशवासियों ने सामूहिक रूप से और दृढ़ता के साथ इस चुनौती का मुकाबला किया है।”
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी
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सारांश
विश्व मलेरिया दिवस हर साल 25 अप्रैल को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।
2015-2023 के बीच मलेरिया के मामलों में 80.5% की गिरावट के साथ, भारत 2024 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के हाई बर्डन टू हाई इम्पैक्ट (एचबीएचआई) समूह से बाहर आ गया, जो देश के लिए अनूठी उपलब्धि साबित हुई।
2015 से 2023 के बीच मलेरिया से होने वाली मौतों में 78.38% की कमी आई।
122 जिलों में साल 2023 में मलेरिया का कोई मामला सामने नहीं आया, जो स्थानीय स्तर पर मजबूत तैयारी को दर्शाता है।
गहन मलेरिया उन्मूलन परियोजना (आईएमईपी) -3 का मकसद संवेदनशील क्षेत्रों में मलेरिया उन्मूलन में तेज़ी लाने के लिए 159 उच्च-मामलों वाले जिलों को लक्षित करना है।
देशव्यापी “टेस्ट, ट्रीट, ट्रैक” रणनीति से शुरूआती पहचान और समय पर उपचार में मदद मिलती है।
भारत का लक्ष्य 2027 तक मलेरिया के मामलों को शून्य करना और 2030 तक मलेरिया को पूरी तरह से खत्म करना है।
विश्व मलेरिया दिवस हर साल 25 अप्रैल को विश्व स्तर पर मनाया जाता है। वर्ष 2007 में विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सदस्य देशों द्वारा इसकी स्थापना की गई थी। साल 2025 की थीम, “मलेरिया हमारे साथ खत्म होता है: पुनर्निवेश, पुनर्कल्पना, पुनर्जीवन,” है, जिसके तहत नवाचार, सहयोग और निरंतर कार्रवाई के ज़रिए मलेरिया को खत्म करने के लिए नए सिरे से वैश्विक प्रतिबद्धता का आह्वान किया जाता है।
एक समय दुनिया में सबसे ज़्यादा मलेरिया से पीड़ित देशों में से एक, भारत ने निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति, जमीनी स्तर पर भागीदारी और लक्षित गतिविधियों के ज़रिए उल्लेखनीय तरक्की हासिल की है। साल 2024 में एक अहम पड़ाव उस वक्त आया, जब भारत डब्ल्यूएचओ के उच्च बोझ से उच्च प्रभाव (एचबीएचआई) समूह से बाहर निकल आया, जो मलेरिया को लेकर देश में आए एक बड़े बदलाव का संकेत था। मलेरिया उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रूपरेखा (2016-2030) और राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (2023-2027) द्वारा समर्थित, भारत ने स्थानीय ज़रुरतों के मुताबिक हल तैयार करते हुए अपनी रणनीति को वैश्विक मानकों के साथ जोड़ा है।
2015 से 2023 के बीच मलेरिया के मामलों में 80.5% की कमी और मौतों में 78.3% की कमी आई है। इसके अलावा पिछले साल 122 से ज़्यादा जिलों में मलेरिया का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। इन उपलब्धियों के साथ देश 2027 तक मलेरिया के स्वदेशी मामलों को शून्य करने की दिशा में नए सिरे से आगे बढ़ रहा है और सार्वजनिक स्वास्थ्य उन्मूलन प्रयासों में वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। भारत 2030 तक मलेरिया को खत्म करने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की भी पुष्टि करता है।


मलेरिया के बारे में संपूर्ण जानकारी
मलेरिया क्या है? यह कैसे होता है?
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मलेरिया परजीवियों के कारण होने वाली जानलेवा बीमारी है, और संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से मनुष्यों में फैलती है। यह उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में आम बीमारी है, लेकिन इसकी रोकथाम की जा सकती है और इसका इलाज भी किया जा सकता है। मलेरिया एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है, हालांकि यह संक्रमित रक्त या दूषित सुइयों के माध्यम से भी फैल सकता है। यदि इसका इलाज सही वक्त पर ना किया जाए, खासकर प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम संक्रमण के मामलों में, तो यह 24 घंटे के भीतर गंभीर बीमारी या यहां तक कि मौत का कारण भी बन सकता है।
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इसके लक्षण क्या हैं?
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मलेरिया के सबसे आम शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और ठंड लगना शामिल है, जो आमतौर पर संक्रमित मच्छर द्वारा काटे जाने के 10-15 दिन बाद दिखाई देते हैं। इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं, खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले मलेरिया हो चुका है, जिससे समय पर इलाज के लिए शुरुआती जांच ज़रूरी हो जाती है। गंभीर लक्षणों में अत्यधिक थकान, भ्रम, बार-बार दौरे पड़ना, सांस लेने में कठिनाई, गहरे रंग का या खूनी पेशाब, पीलिया और असामान्य रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं। मलेरिया के कुछ प्रकार गंभीर बीमारी और मौत का कारण भी बन सकते हैं।
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इसे कैसे रोका जा सकता है?
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मच्छरों के काटने से बचकर और कुछ मामलों में, निवारक दवाएँ लेकर मलेरिया को रोका जा सकता है। अगर आप ऐसे इलाकों में यात्रा कर रहे हैं, जहाँ मलेरिया आम समस्या है, तो पहले से ही निवारक दवाएँ (कीमोप्रोफिलैक्सिस) लेने के बारे में डॉक्टर से सलाह लें। मच्छरों के काटने के जोखिम को कम करने के लिए, सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें, खासकर उन इलाकों में जहाँ मलेरिया मौजूद है। शाम ढलने के बाद डीईईटी, आईआर3535 या इकारिडिन युक्त मच्छर भगाने वाली दवाएँ लगाएँ। मच्छरों को दूर रखने के लिए आप कॉइल, वेपोराइज़र और विंडो स्क्रीन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। शाम को लंबी बाजू के कपड़े पहनने से भी खुली त्वचा की सुरक्षा होती है।
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इसका इलाज कैसे किया जा सकता है?
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शुरुआती रोकथाम और उपचार के ज़रिए मलेरिया को फैलने से रोका जा सकता है। लक्षण वाले किसी भी व्यक्ति को माइक्रोस्कोपी या रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट का उपयोग करके जांच करवानी चाहिए। मलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जिसका हमेशा दवा से इलाज करना पड़ता है। मलेरिया में कौन सी दवाई लेनी चाहिए, यह मलेरिया परजीवी के प्रकार, व्यक्ति की उम्र, वज़न, मरीज़ के गर्भवती होने या ना होने और परजीवी कुछ दवाओं के प्रति प्रतिरोधी है या नहीं, इस पर निर्भर करता है। प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के लिए सबसे प्रभावी उपचार आर्टेमिसिनिन-आधारित कॉम्बिनेशन थेरेपी (एसीटी) है। प्लास्मोडियम वाइवैक्स के इलाज के लिए क्लोरोक्वीन का उपयोग उन जगहों पर किया जाता है, जहाँ यह अभी भी प्रभावी है। पी. वाइवैक्स और पी. ओवेल के मामलों में रिलैप्स को रोकने के लिए प्राइमाक्विन मिलाया जाता है। अधिकांश उपचारों में मरीज़ को गोली दी जाती है, लेकिन गंभीर मलेरिया वाले लोगों को अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में इंजेक्शन वाली दवाओं से इलाज करने की ज़रुरत हो सकती है।
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मलेरिया का वैश्विक प्रभाव
विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार, मलेरिया से होने वाली मौतों की अनुमानित संख्या 2023 में 5 लाख 97 हज़ार थी, जबकि 2022 में यह 6 लाख थी।
2023 में, 11 एचबीएचआई देश मलेरिया के वैश्विक 66% मामलों और 68% मौतों के लिए ज़िम्मेदार थे।
भारत की प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय लक्ष्य
भारत 2030 तक मलेरिया को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है, जिसका मध्यवर्ती लक्ष्य 2027 तक शून्य स्वदेशी मामले हासिल करना है। इस मिशन के लिए रणनीतिक रोडमैप निम्नलिखित द्वारा तय किए गए है:
भारत में मलेरिया उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रूपरेखा (2016-2030), चरणबद्ध मलेरिया उन्मूलन के लिए दृष्टि, लक्ष्य और लक्ष्यों को रेखांकित करती है।
मलेरिया उन्मूलन के लिए हाल ही में शुरू की गई राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (2023-2027) शुरूआती रूपरेखाओं पर आधारित है और मलेरिया 2016-2030 के लिए डब्ल्यूएचओ वैश्विक तकनीकी रणनीति के अनुसार है।
मलेरिया नियंत्रण के लिए सरकार द्वारा प्रमुख हस्तक्षेप और रणनीतिक दृष्टिकोण
मलेरिया उन्मूलन के अपने नज़रिए को कार्रवाई योग्य परिणामों में बदलने के लिए, भारत ने एक व्यापक और साक्ष्यों से संचालित रणनीति अपनाई है। यह विज़न स्थायी प्रभाव और समावेशी स्वास्थ्य कवरेज के लिए रोग प्रबंधन, वेक्टर नियंत्रण और समुदाय-संचालित हस्तक्षेपों को एकीकृत करता है।
मलेरिया उन्मूलन के लिए रणनीतियाँ:
मलेरिया उन्मूलन के लिए एक मुख्य हस्तक्षेप के रूप में मलेरिया पर निगरानी ज़रुरी।
केस प्रबंधन - "परीक्षण, उपचार और ट्रैकिंग" को बढ़ाकर और अनुकूलित करके मलेरिया निदान और उपचार तक सभी की पहुँच सुनिश्चित करना।
वेक्टर नियंत्रण को बढ़ाकर और अनुकूलित करके मलेरिया की रोकथाम तक सभी की पहुँच सुनिश्चित करना
उन्मूलन और मलेरिया-मुक्त स्थिति प्राप्त करने की दिशा में प्रयासों में तेजी लाना।
मलेरिया के उन्मूलन और मलेरिया के दोबारा फैलने पर रोकथाम के लिए अनुसंधान को बढ़ावा देना और रणनीतिक जानकारी के सृजन का समर्थन करना।
अन्य सहायक हस्तक्षेप
सामुदायिक लामबंदी के लिए व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी)। इसमें जनसंचार अभियान, सामुदायिक सहभागिता और स्थानीय प्रभावशाली लोगों का लाभ उठाना शामिल है।
मलेरिया के सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय निर्धारकों को संबोधित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों को शामिल करते हुए अंतर-क्षेत्रीय कन्वरजेंस।
क्षमता निर्माण: 2024 में 850 से अधिक स्वास्थ्य पेशेवरों को प्रशिक्षित किया गया और कीटनाशक प्रतिरोध और चिकित्सीय प्रभावकारिता पर अध्ययन किए गए।
मलेरिया उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रूपरेखा (एनएफएमई) 2016-2030 मलेरिया की व्यापकता के आधार पर क्षेत्रों को वर्गीकृत करता है, जिसमें श्रेणी 3 - गहन नियंत्रण चरण, ज्यादा मामलों वाले क्षेत्रों को लक्षित करता है। यह चरण आक्रामक रोग नियंत्रण, जिला-स्तरीय योजना और पी. वाइवैक्स के लिए विशिष्ट रणनीतियों पर केंद्रित है, जो उन्मूलन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूत प्रणालियों और संसाधनों द्वारा समर्थित है।
गहन मलेरिया उन्मूलन परियोजना-3 (आईएमईपी-3) 12 राज्यों में 159 उच्च- मामलों वाले जिलों को लक्षित करती है, जो उन्मूलन प्रयासों में तेजी लाने के लिए मलेरिया से ज्यादा संभावित और कमजोर आबादी पर ध्यान केंद्रित करती है।
निरंतर प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए एलएलआईएन वितरण, कीट विज्ञान निगरानी और डेटा-संचालित निगरानी प्रणाली जैसे वित्त पोषण की प्रमुख गतिविधियों में मदद करना।
आयुष्मान भारत के तहत मलेरिया सेवाओं का एकीकरण और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के ज़रिए वितरण।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 29 दिसंबर 2024 को मन की बात कार्यक्रम के 117वें संस्करण में समुदाय के नेतृत्व में किए गए मलेरिया नियंत्रण की सराहना की थी। ये उदाहरण मलेरिया मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में, जमीनी स्तर पर कार्रवाई की ताकत को उजागर करते हैं।
निष्कर्ष
विश्व मलेरिया दिवस के मौके पर, भारत अपनी सार्वजनिक स्वास्थ्य यात्रा में एक अहम मोड़ पर खड़ा है, जो मलेरिया नियंत्रण में एक उच्च मामलों वाले राष्ट्र से, एक वैश्विक उदाहरण में बदल रहा है। यह तरक्की, विज्ञान-आधारित रणनीतियों, मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियों और लोगों की भागीदारी की शक्ति के ज़रिए ही संभव हुई है। जैसे-जैसे राष्ट्र 2027 तक स्वदेशी मलेरिया को खत्म करने और 2030 तक पूर्ण उन्मूलन हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इस कार्रवाई का आह्वान साफ है: हमें नवाचार में फिर से निवेश करना चाहिए, सामुदायिक भागीदारी की फिर से कल्पना करनी चाहिए और सामूहिक संकल्प को फिर से जगाना चाहिए। “मलेरिया हमारे साथ समाप्त होता है” के बैनर तले हर कोशिश मायने रखती है - क्योंकि मलेरिया मुक्त भारत केवल एक लक्ष्य नहीं है, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है।
संदर्भ
पीडीएफ के लिए यहां क्लिक करें
एमजी/आरपीएम/केसी/एनएस
(Explainer ID: 154804)
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