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Economy

भारत का डीबीटी: कल्याणकारी दक्षता में वृद्धि

रिपोर्ट में 3.48 लाख करोड़ रुपये की बचत और लाभार्थियों में 16 गुना वृद्धि का खुलासा

Posted On: 21 APR 2025 4:55PM

परिचय

ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन द्वारा किए गए एक नए मात्रात्मक मूल्यांकन के मुताविक, भारत की प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली ने कल्याणकारी वितरण में रिसाव को रोककर देश को अनुमानित 3.48 लाख करोड़ रुपये बचाने में मदद की है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि डीबीटी के कार्यान्वयन के बाद से सब्सिडी आवंटन कुल सरकारी व्यय के 16 प्रतिशत से घटकर 9 प्रतिशत रह गया है, जो सार्वजनिक व्यय की दक्षता में एक बड़ा सुधार दर्शाता है।

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यह मूल्यांकन बजटीय दक्षता, सब्सिडी युक्तिकरण और सामाजिक परिणामों पर डीबीटी के प्रभाव की जांच करने के लिए 2009 से 2024 तक के आंकड़ों का विश्‍लेषण करता है। यह दर्शाता है कि कागज़-आधारित वितरण से सीधे डिजिटल हस्तांतरण में बदलाव ने यह सुनिश्चित किया है कि सार्वजनिक धन उन लोगों तक पहुंचे जिनके लिए वे हैं। डीबीटी की प्रमुख विशेषताओं में से एक जेएएम ट्रिनिटी का उपयोग है, जिसका अर्थ है जन धन बैंक खाते, आधार विशिष्ट पहचान संख्या और मोबाइल फोन। इस ढांचे ने बड़े पैमाने पर लक्षित और पारदर्शी हस्तांतरण को सक्षम किया है।

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इसके प्रभाव की पूरी सीमा को समझने के लिए, रिपोर्ट में कल्याणकारी दक्षता सूचकांक पेश किया गया है। यह सूचकांक बचत और कम सब्सिडी जैसे राजकोषीय परिणामों को लाभार्थियों की संख्या जैसे सामाजिक संकेतकों के साथ जोड़ता है, जिससे यह स्पष्ट तस्वीर मिलती है कि प्रणाली कितनी अच्छी तरह काम कर रही है। यह सूचकांक 2014 में 0.32 से लगभग तीन गुना बढ़कर 2023 में 0.91 हो गया है, जो प्रभावशीलता और समावेशन दोनों में तेज वृद्धि को दर्शाता है।

ऐसे समय में जब दुनिया भर की सरकारें सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के तरीकों पर पुनर्विचार कर रही हैं, डीबीटी मॉडल वित्तीय विवेक को न्यायसंगत शासन के साथ संरेखित करने में मूल्यवान सबक प्रस्तुत करता है।मुख्य निष्कर्षमुख्य निष्कर्ष

मुख्य निष्कर्ष

बजटीय आवंटन रुझान

सब्सिडी आबंटन के आंकड़ों से डीबीटी कार्यान्वयन के बाद महत्वपूर्ण बदलाव का पता चलता है, जो लाभार्थी कवरेज में वृद्धि के बावजूद राजकोषीय दक्षता में सुधार को उजागर करता है।

  • डीबीटी-पूर्व युग (2009-2013): सब्सिडी कुल व्यय का औसतन 16 प्रतिशत थी, जो सालाना 2.1 लाख करोड़ रुपये थी तथा प्रणाली में काफी रिसाव था।
  • डीबीटी-पश्चात युग (2014-2024): 2023-24 में सब्सिडी व्यय कुल व्यय का 9 प्रतिशत तक कम हो गया, जबकि लाभार्थी कवरेज 16 गुना बढ़कर 11 करोड़ से 176 करोड़ हो गया।
  • कोविड-19 अपवाद: आपातकालीन वित्तीय उपायों के कारण 2020-21 वित्तीय वर्ष के दौरान सब्सिडी में अस्थायी वृद्धि हुई। हालांकि, महामारी के बाद दक्षता में उछाल आया, जिससे प्रणाली की दीर्घकालिक प्रभावशीलता और मजबूत हुई।

 

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सब्सिडी आवंटन रुझान (2009-2024)

कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद सब्सिडी के बोझ में कमी, राजकोषीय आवंटन को अनुकूलित करने में डीबीटी की भूमिका को रेखांकित करती है। फर्जी लाभार्थियों और बिचौलियों को हटाकर, इस प्रणाली ने बजट में आनुपातिक वृद्धि किए बिना वास्तविक प्राप्तकर्ताओं को धन पुनर्निर्देशित किया।

क्षेत्रीय विश्लेषण

क्षेत्र-विशिष्ट प्रभावों का विस्तृत विवरण दर्शाता है कि किस प्रकार डीबीटी ने विशेष रूप से उच्च-रिसाव कार्यक्रमों को लाभ पहुंचाया है।

 

  • खाद्य सब्सिडी (पीडीएस): 1.85 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई, जो कुल डीबीटी बचत का 53 प्रतिशत है। यह मुख्य रूप से आधार से जुड़े राशन कार्ड प्रमाणीकरण के कारण संभव हुआ।
  • मनरेगा: 98 प्रतिशत मजदूरी समय पर हस्तांतरित की गई, डीबीटी-संचालित जवाबदेही के माध्यम से 42,534 करोड़ रुपये की बचत हुई।
  • पीएम-किसान: योजना से 2.1 करोड़ अयोग्य लाभार्थियों को हटाकर 22,106 करोड़ रुपये की बचत हुई।
  • उर्वरक सब्सिडी: 158 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की बिक्री कम हुई, जिससे लक्षित वितरण के माध्यम से 18,699.8 करोड़ रुपये की बचत हुई।

 

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क्षेत्रीय प्रभाव विश्लेषण

ये क्षेत्र-विशिष्ट बचतें उच्च-रिसाव कार्यक्रमों, जैसे कि खाद्य सब्सिडी और मनरेगा जैसी मजदूरी योजनाओं पर डीबीटी के असमान प्रभाव को उजागर करती हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और प्रत्यक्ष हस्तांतरण में प्रणाली की भूमिका दक्षता में सुधार और दुरुपयोग को रोकने में महत्वपूर्ण रही है।

सहसंबंध और कारण संबंधी निष्कर्ष

सहसंबंध विश्लेषण कल्याणकारी वितरण में सुधार लाने में डीबीटी की प्रभावशीलता को और अधिक रेखांकित करता है।

  • मजबूत सकारात्मक सहसंबंध (0.71): लाभार्थी कवरेज और डीबीटी बचत के बीच एक मजबूत  सकारात्मक सहसंबंध है, जो दर्शाता है कि जैसे-जैसे कवरेज का विस्तार हुआ, बचत में भी वृद्धि हुई।
  • नकारात्मक सहसंबंध (-0.74): कुल व्यय के प्रतिशत के रूप में सब्सिडी व्यय और कल्याणकारी दक्षता के बीच एक महत्वपूर्ण नकारात्मक सहसंबंध है, जो किए गए अपव्यय और रिसाव में कमी को उजागर करता है और डीबीटी के कारण संभव हुआ है।

 

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प्रमुख चरों के बीच सहसंबंध दर्शाने वाला हीट-मैप

हीट-मैप विश्लेषण बजट आवंटन, डीबीटी बचत और कल्याणकारी दक्षता के बीच संबंधों को मात्राबद्ध करता है। जैसे-जैसे डीबीटी बचत बढ़ी, सब्सिडी आवंटन में कमी आई, यह दर्शाता है कि डीबीटी ने रिसाव को कम करते हुए लक्षित करने में सुधार किया। इसने सरकार को कल्याणकारी कार्यक्रमों का विस्तार करने, राजकोषीय परिव्यय में वृद्धि किए बिना अधिक लाभार्थियों तक पहुंचने में सक्षम बनाया। सब्सिडी व्यय और दक्षता के बीच विपरीत संबंध "घटते कल्याणकारी खर्च" की आलोचनाओं को चुनौती देता है और राजकोषीय अनुकूलन के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में डीबीटी की भूमिका की पुष्टि करता है।

कल्याणकारी दक्षता सूचकांक (डब्ल्यूईआई)

प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली के प्रभाव का आकलन करने की कार्यप्रणाली के भाग के रूप में कल्याणकारी दक्षता सूचकांक (डब्ल्यूईआई) को विभिन्न आयामों में दक्षता लाभ को मापने के लिए एक समग्र मीट्रिक के रूप में विकसित किया गया था। डब्ल्यूईआई में तीन भारित घटक शामिल हैं:

वी. डीबीटी बचत (50 प्रतिशत भार) : यह घटक रिसाव में प्रत्यक्ष कमी को दर्शाता है, जिसे 3.48 लाख करोड़ रुपये की अधिकतम देखी गई बचत के सापेक्ष सामान्यीकृत किया गया है।

वी. सब्सिडी में कमी (30 प्रतिशत भार) : कुल राष्ट्रीय बजट के प्रतिशत के रूप में सब्सिडी व्यय में गिरावट को मापता है।

वी. लाभार्थी वृद्धि (20 प्रतिशत भार) : जनसंख्या वृद्धि के लिए समायोजित लाभार्थियों की संख्या में विस्तार का आकलन करता है।

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2014 में 0.32 से 2023 में 0.91 तक डब्ल्यूईआई में वृद्धि प्रणालीगत सुधारों को मात्राबद्ध करती है, जो इस बात पर जोर देती है कि दक्षता लाभ बहुआयामी कारकों से उत्पन्न होते हैं - न कि केवल बजट कटौती से। यह सूचकांक वैश्विक नीति निर्माताओं के लिए कल्याणकारी सुधारों का मूल्यांकन करने के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रदान करता है।

डब्ल्यूईआई में वृद्धि निम्नलिखित कारणों से हुई:

  • डीबीटी बचत (50 प्रतिशत भार) : 3.48 लाख करोड़ रुपए की संचयी रिसाव में कमी।
  • सब्सिडी में कमी (30 प्रतिशत भार) : कुल व्यय में 16 प्रतिशत से 9 प्रतिशत तक की गिरावट।
  • लाभार्थी वृद्धि (20 प्रतिशत भार) : कवरेज में 16 गुना विस्तार।

निष्कर्ष

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (सब्सिडी) प्रणाली देश की कल्याणकारी वितरण के लिए एक परिवर्तनकारी उपकरण साबित हुई है, जो सार्वजनिक खर्च की दक्षता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाती है और सामाजिक लाभों की पहुंच का विस्तार करती है। पिछले दशक में डीबीटी ने न केवल 3.48 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय रिसाव को तक कम किया है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया है कि सब्सिडी बेहतर तरीके से लक्षित हो और कुल व्यय के प्रतिशत के रूप में सब्सिडी आवंटन में उल्लेखनीय गिरावट आई है। कल्याणकारी दक्षता सूचकांक (डब्ल्यूईआई) में वृद्धि लाखों लाभार्थियों के लिए कवरेज का विस्तार करते हुए राजकोषीय संसाधनों के अनुकूलन में डीबीटी की सफलता को रेखांकित करती है। क्षेत्र-विशिष्ट बचत, विशेष रूप से खाद्य सब्सिडी, मनरेगा और पीएम किसान जैसे उच्च-रिसाव कार्यक्रमों में, दर्शाती है कि कैसे आधार और मोबाइल-आधारित हस्तांतरण प्रणाली के एकीकरण ने अक्षमताओं संबोधित है और दुरुपयोग को कम किया है।

ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, यह डेटा-संचालित मूल्यांकन दर्शाता है कि राजकोषीय विवेक और समावेशिता एक साथ चल सकते हैं, जो दुनिया भर के नीति निर्माताओं को अपने स्वयं के सामाजिक सुरक्षा मॉडल को परिष्कृत करने के लिए मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। जैसे-जैसे सरकारें राजकोषीय बाधाओं और सामाजिक इक्विटी को संतुलित करने के लिए संघर्ष कर रही हैं, डीबीटी के साथ भारत का अनुभव आर्थिक और सामाजिक विकास दोनों को बढ़ावा देने में प्रत्यक्ष हस्तांतरण की प्रभावकारिता के लिए एक सम्मोहक मामला प्रस्तुत करता है। इस सफलता की कहानी से सीखे गए सबक कल्याणकारी प्रणालियों को अधिक कुशल, पारदर्शी और समावेशी बनाने के वैश्विक प्रयासों का मार्गदर्शन कर सकते हैं।

संदर्भ:

 

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