Rural Prosperity
पहली बरसात से स्वच्छ सड़कों तक
स्वच्छ और स्वस्थ मानसून के लिए तैयार शहर
Posted On: 01 OCT 2026 4:21PM
बारिश से पहले शहरों की तैयारी

जैसे-जैसे मॉनसून पास आता है, पहली बरसात होने से पहले, भारत भर के शहर जलभराव, कचरा जमा होने और स्वच्छता से जुड़ी मौसमी समस्याओं से निपटने की तैयारी शुरू कर देते हैं। नालों की सफ़ाई की जाती है, कचरा जमा होने वाले संवेदनशील स्थानों की पहचान की जाती है और स्वच्छता व जन-स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए उपाय किए जाते हैं। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के नेतृत्व में चलाए गए 'सफ़ाई अपनाओ, बीमारी भगाओ 2025' (एसएबीबी) अभियान के तहत, शहरी स्थानीय निकायों ने मानसून-पूर्व तैयारियों को एक समन्वित स्वच्छता और जनस्वास्थ्य प्रयास में बदला। 1 जुलाई से 31 जुलाई 2025 तक, शहरों ने नालों की सफ़ाई, कचरा हटाने और स्वच्छता को बढ़ावा देने का काम किया, साथ ही स्कूलों, मोहल्लों और अन्य सार्वजनिक जगहों के ज़रिए समुदायों को भी इसमें शामिल किया।
इस अभियान के केंद्र में ‘6 स्वच्छता मंत्र’ हैं: साफ़ हाथ, घर, आस-पड़ोस, शौचालय, नाले और सार्वजनिक स्थान। ये आसान आदतें मिलकर मॉनसून के दौरान शहर को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा बन रहे हैं। और देशभर में यह प्रयास कई अलग-अलग रूपों में सामने आ रहा है। दिल्ली में, इस अभियान ने अपने संदेश को सड़कों और स्कूलों तक पहुँचाया। एनसीसी की 400 कैडेट बालिकाओं ने 3 किलोमीटर लंबी 'पिंकथॉन' (एक वॉकथॉन) का नेतृत्व किया, जो मानसून स्वच्छता और सफ़ाई को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की गई थी। इस अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर कई अहम काम किए गए, जिसमें 255 स्कूलों में हाथ धोने के अभियान चलाए गए, जबकि 206 सफ़ाई अभियानों के तहत गलियों और कचरा जमा होने वाली जगहों (जीवीपी) की सफ़ाई की गई। इसके अलावा, सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों (सीटी और पीटी) में 469 स्वच्छता अभियान चलाए गए। पटना नगर निगम (पीएमसी) ने शहरी सुरक्षा और साफ-सफाई को बेहतर बनाने के लिए 'मेनहॉल एम्बुलेंस' शुरू की, ताकि मेनहॉल की मरम्मत तेज़ी से और मौके पर ही की जा सके। हर एम्बुलेंस में खासकर बरसात के मौसम में पहले से तैयार मेनहॉल कवर, मरम्मत के औज़ार और तुरंत कार्रवाई के लिए एक खास टीम होती है। पटना नगर निगम (पीएमसी) ने पुराने और अप्रयुक्त नगर निगम वाहनों को उपयोगी इकाइयों में परिवर्तित किया। प्रति नगर निगम खंड के लिए एक-एक, यानी कुल छह एम्बुलेंस चालू हैं और त्वरित शिकायत निवारण के लिए इन्हें पटना नगर निगम के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) से जोड़ा गया है। इस पहल से नागरिकों की शिकायतों का समाधान करना आसान हो गया है और मेनहॉल से जुड़ी शिकायतों पर तेज़ी से कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
नवी मुंबई में एक स्वच्छता रैली का आयोजन किया गया, जिसमें 600 से अधिक छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और नागरिकों ने भाग लिया। इसके साथ ही, मलेरिया और डेंगू की रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करते हुए 26 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। दो दिनों में 52 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए, जिनसे 22,690 से अधिक नागरिकों को लाभ मिला। तेलंगाना में, यह अभियान लगभग 13 लाख घरों तक पहुँचा। लगभग 14,210 किलोमीटर लंबे नालों से गाद (सिल्ट) निकाली गई, जबकि सड़कों के किनारे उगी 4,343 किलोमीटर झाड़ियों को हटाया गया। डेंगू और मलेरिया रोधी जागरूकता अभियानों के माध्यम से लगभग 2.5 लाख घरों को कवर किया गया। स्वास्थ्य शिविरों से 8,500 से अधिक अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं को भी लाभ मिला। इस बीच, युवा नागरिकों को कचरे से खाद बनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्कूलों में 140 कंपोस्टिंग गड्ढे (पीट) स्थापित किए गए।
छत्तीसगढ़ में, यह कहानी स्वयं लोगों से शुरू होती है। पंडरिया में स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों को स्वच्छता का प्रशिक्षण दिया गया और 'स्वच्छता ऐप' से परिचित कराया गया। इसके बाद उन्होंने स्वच्छता अभियान में भाग लिया। रायपुर में, घर-घर जाकर चलाए गए जागरूकता अभियान के माध्यम से हाथों की स्वच्छता और कचरे को अलग-अलग करने के बारे में जागरूक किया गया, साथ ही कचरा जमा होने वाली संवेदनशील जगहों (जीवीपी) की सफाई की गई और उनका सौंदर्यीकरण किया गया।
स्वच्छ और सुरक्षित मानसून के लिए पूर्वोत्तर हुआ एकजुट

जैसे-जैसे मानसून करीब आता है, पूर्वोत्तर ने बरसात की प्रतीक्षा करने के बजाय उसके लिए खुद को तैयार किया। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, असम, सिक्किम और त्रिपुरा में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के नेतृत्व में चलाये जा रहे 'सफाई अपनाओ, बीमारी भगाओ' (एसएबीबी) अभियान के माध्यम से सामूहिक स्वच्छता और बीमारियों की रोकथाम के लिए मानसून की तैयारियों को मजबूत किया गया।
नागालैंड में, छह शहरों के शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) ने स्कूली जागरूकता गतिविधियों, नालों की सफ़ाई, स्वास्थ्य शिविरों और सफ़ाई अभियानों का नेतृत्व किया। इन प्रयासों में 60 स्वच्छता अभियानों, 30 वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) और मानसून समाप्त होने के बाद 40 जागरूकता अभियानों के माध्यम से लगभग 5,000 लोग शामिल हुए। सिक्किम की पहाड़ियों में, इस अभियान का उद्देश्य कचरा जमा होने वाले क्षेत्रों और जल व वेक्टर -जनित बीमारियों के जोखिमों से निपटना था। स्रोत पर ही कचरा अलग करने और बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए छात्र, अधिकारी और स्वयं सहायता समूह एक साथ आए। जागरूकता रैलियों और प्लास्टिक की बोतल नष्ट करने की पहलों के साथ-साथ 100 सफ़ाई और 100 मानसून के बाद के अभियानों में लगभग 4,000 लोगों ने भाग लिया। असम में, शहरों का ध्यान नालों की सफ़ाई, कचरा हटाने, सफ़ाईमित्र स्वास्थ्य जांच और कचरा अलग करने पर केंद्रित रहा। 160 संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से लगभग 5,500 लोग 200 स्वच्छता और 40 वर्षा जल संचयन गतिविधियों में शामिल हुए।
त्रिपुरा में, शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) ने कचरा संग्रहण, पृथक्करण और सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव को मजबूत किया। स्वास्थ्य शिविरों, स्कूल रैलियों और स्वच्छता पहलों के साथ-साथ 150 स्वच्छता अभियानों और 30 वर्षा जल संचयन अभियानों में लगभग 5,000 लोगों ने भाग लिया। अरुणाचल प्रदेश के 47 अधिसूचित शहरी कस्बों में, कचरा प्रबंधन, जल गुणवत्ता और सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव पर ध्यान केंद्रित किया गया। जल शोधन संयंत्रों का निरीक्षण किया गया, जबकि बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान कचरे से प्रभावित क्षेत्रों को लक्षित कर रहे थे। ये प्रयास दर्शाते हैं कि स्वच्छता और रोग निवारण को रोजमर्रा की सामुदायिक गतिविधियों में कैसे एकीकृत किया जा सकता है।
गलियों से स्वच्छ और जीवंत आसपड़ोस तक
'बैकलेन' (पीछे की गलियां) का मतलब है किसी इलाके में घरों के पीछे की जगह, जहाँ आम तौर पर पैदल चलने वालों की आवाजाही कम होती है। ऐसी जगहों पर कचरा जमा होने और अनौपचारिक रूप से कचरा फेंकने की समस्या हो सकती है। इसे जानते हुए, मध्य प्रदेश के शहरों ने लोगों की सक्रिय भागीदारी से बैकलेन सफाई अभियानों का आयोजन किया। इन पहलों में अतिक्रमण हटाना और नालियों की सफ़ाई करना शामिल था, ताकि मॉनसून के दौरान बारिश का पानी आसानी से बह सके।


रीवा में, नगर निगम ने सभी वार्डों में सफाई और उन्हें सुंदर बनाने के लिए सिर्फ़ पिछली गलियों (बैकलेन्स) में ही नहीं बल्कि सामने की गलियों को स्वच्छ रखने (फ्रंट लेन्स) पर भी काम किया। यहाँ दीवार पर चित्रकारी (म्यूरल और वॉल पेंटिंग) की गई और 3आर (रिड्यूस, रियूज़ और रीसायकल) के सिद्धांतों का इस्तेमाल करके खेल का सामान और संगीत वाद्ययंत्र बनाए गए। दीवारों पर अंग्रेज़ी और हिंदी के स्वर-व्यंजन, अक्षर, गिनती और पहाड़े भी लिखे गए हैं। सफाई को सीखने और मनोरंजन से जोड़कर, इस पहल ने सुरक्षित, दिलचस्प और बच्चों के अनुकूल आस-पड़ोस की जगहें बनाने में मदद की है।
आगरा में, आगरा नगर निगम ने शहर भर में नौ बैकलेनों (पीछे की गलियों) की सफलतापूर्वक सफाई की और उनका रखरखाव किया। शहरी शिक्षण इंटर्नशिप कार्यक्रम (ट्यूलिप) के प्रशिक्षुओं ने अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया, जबकि स्थानीय निवासियों ने पड़ोस की सड़कों की सफाई और सौंदर्यीकरण में योगदान दिया। उनकी भागीदारी दर्शाती है कि कैसे सामुदायिक भागीदारी स्वच्छता के स्थानीय लोगों की ज़िम्मेदारी की भावना को मजबूत कर सकती है और साझा सार्वजनिक स्थानों के निरंतर रखरखाव में मदद कर सकती है।
सुरक्षा से अवसर तक
भोपाल की ज्योत्स्ना धाबडे के लिए, संस्थागत ऋण मिलने से उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का मौका मिला। भोपाल नगर निगम के एक ऋण मेले में, उन्हें 'स्वच्छता उद्यमी योजना' के तहत ऋण मिला, जिससे वह स्वच्छता वाहन खरीदने में सक्षम हुईं। नई दिल्ली में, नई दिल्ली नगर परिषद के सुपरवाइज़र राजा ने मशीनीकृत सीवर सफाई के अपने अनुभव को साझा किया।
राजा कहते हैं, “पहले हमें सीवर की सफ़ाई के लिए सीवर के अंदर जाना पड़ता था। लेकिन अब आधुनिक मशीनों के आने से यह काम मशीनों से किया जाता है। साथ ही, गमबूट, मास्क, सेफ्टी ग्लास, हेलमेट और दूसरे सुरक्षा उपकरण मिलने से हम ज़्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं।”
ये अनुभव मिलकर स्वच्छता कार्य को अधिक सुरक्षित, कुशल और सम्मानजनक बनाने के प्रयासों को दर्शाते हैं।

‘सफाई मित्र सुरक्षा चुनौती 2021’ ने स्वास्थ्य शिक्षा, सुरक्षा उपकरणों के प्रावधान और उपयोग, कार्यकर्ता कल्याण तथा व्यावसायिक जोखिमों में कमी लाने पर ध्यान केंद्रित किया। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छता कार्य के दौरान होने वाली मौतों को पूरी तरह रोकने के लक्ष्य की ओर काम करने के लिए शहरी स्थानीय निकायों द्वारा सुरक्षा उपकरणों को उपलब्ध कराने, प्रशिक्षण और सुरक्षा के प्रति जागरूकता पर जोर दिया है।
इस क्षेत्र में एक अग्रणी के रूप में, चंडीगढ़ ने 2018 से खतरनाक हाथ से सीवर की सफाई को प्रतिबंधित कर दिया है। रेस्पोंसिबल सेनिटेशन अथॉरिटी (आरएसए) के तहत काम करने वाली आपातकालीन कार्रवाई स्वच्छता इकाई (इआरएसयू), व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई), सुरक्षा उपकरण और नियमित चिकित्सा जांच प्रदान करके अधिक सुरक्षित स्वच्छता के तरीकों को बढ़ावा देती है।
असम में, 96 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में से 83 ने 2023 में खुद को 'सफाईमित्र सुरक्षित शहर' घोषित किया। राज्य ने 5,230 सफाई कर्मचारियों की पहचान की और 92 स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया। महाराष्ट्र में, पहले चरण के दौरान 246 मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया गया, जिसके बाद 1,917 स्वच्छता कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। उत्तर प्रदेश ने ऋण और आजीविका के अवसरों तक पहुँच को सुगम बनाकर सफाईमित्रों की सहायता की। ये उपाय मिलकर सफाईमित्रों की सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा, गरिमा और उद्यमशीलता के अवसरों को मजबूत करने का प्रयास करते हैं, जिससे स्वच्छता कार्य से स्वच्छा-उद्यमिता की ओर मार्ग प्रशस्त होता है।
तैयारी से सामुदायिक कार्रवाई तक
जैसे ही बरसात शुरू होती है, मानसून-पूर्व की गई तैयारियों की वास्तविकता ज़मीन पर दिखाई देने लगती है। साफ़ किये गए नालों से बारिश का पानी बिना रुकावट के बह जाता है, साफ़ सड़क पर कचरा जमा नहीं होता है और समय पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर समुदायों को बीमारियों के जोखिम को फैलने से पहले पहचानने और उन्हें नियंत्रित करने में मदद करते हैं। प्रत्येक उपाय के केंद्र में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी होती है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य को एक साझा ज़िम्मेदारी बनाती है।
पूर्वोत्तर की पहाड़ियों से लेकर दिल्ली की सड़कों तक और तेलंगाना, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के समुदायों में, यह अभियान विविध और स्थानीय रूपों में सामने आया है। फिर भी इन सभी के मूल में एक ही साझा सत्य निहित है: वास्तविक मानसून पूर्व-तैयारी केवल बरसात से निपटने के बारे में नहीं है, बल्कि एक साथ मिलकर प्रत्येक सड़क, प्रत्येक मोहल्ले और प्रत्येक समुदाय के स्तर पर तैयारी करना है।
संदर्भ
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
https://sbmurban.org/SABB-in-Northeast
https://sbmurban.org/safai-Apnao-Bimaari-Bhagao-2025%
https://sbmurban.org/Back-Lanes-Cleaning
https://sbmurban.org/Sani-Entrepreneur
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