Economy
भारत के निर्यात क्षेत्र में वृद्धि को गति देती श्रम संहिताएं
प्रविष्टि तिथि:
30 NOV 2025 11:58 AM
मुख्य बातें
- सभी श्रम संहिताओं में “मजदूरी” की एक समान परिभाषा, विभिन्न और असंगत परिभाषाओं द्वारा पैदा की गई अस्पष्टता को समाप्त करती है।
- भर्ती और वेतन में लैंगिक आधार पर भेदभाव के निषेध का प्रावधान समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक सुनिश्चित करता है।
- एकल पंजीकरण और एकीकृत रिटर्न के प्रावधान लाइसेंस और निरीक्षण की बहुलता को कम करते हैं।
- पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित एक समान एवं व्यापक प्रावधान निर्यात से जुड़े उद्योगों तथा श्रमिकों को लाभान्वित करते हैं।
- सभी कर्मचारियों को कवर करने वाले प्रावधानों के जरिए सामाजिक सुरक्षा का सार्वभौमिकरण।
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एक सशक्त निर्यात क्षेत्र के लिए श्रम सुधार
निर्यात के क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन नवाचार और दुनिया के साथ गहराई से जुड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास को दर्शाता है। निर्यातोन्मुखी उद्योग (ईओआई) - जिनमें वस्त्र, परिधान, चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न एवं आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट और आईटी-आधारित सेवाएं शामिल हैं - भारत के रोजगार सृजन और विदेशी मुद्रा के अर्जन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का पालन करते हुए एक सुदृढ़, कर्तव्यनिष्ठ और कुशल श्रमबल को बनाए रखने की क्षमता पर बहुत अधिक निर्भर करती है। इस क्षेत्र के विकास की गति को उत्प्रेरित करने के हेतु, सरकार द्वारा हाल ही में 29 कानूनों को 4 सुव्यवस्थित संहिताओं में एकीकृत करने से एक ऐसा वातावरण तैयार हुआ है, जो श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए औद्योगिक दक्षता को बढ़ावा देता है।
निर्यातोन्मुखी उद्योगों / नियोक्ताओ के लिए लाभ
यह श्रम सुधार भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए अनेक लाभ लेकर आया है। खासकर, नियोक्ताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाने तथा श्रमबल के बेहतर प्रबंधन को संभव बनाने के मामले में।

- मजदूरी की एक समान परिभाषा- सबसे प्रभावशाली सुधारों में से एक सभी श्रम संहिताओं में “मजदूरी” की एक समान परिभाषा को लागू करना है। यह प्रावधान पहले के कानूनों में विविध एवं असंगत परिभाषाओं से उत्पन्न अस्पष्टता को दूर करता है। कई राज्यों में कार्यरत ईओआई के लिए, यह वेतन संबंधी प्रशासन एवं अनुपालन को सरल बनाता है, जिससे सामाजिक सुरक्षा योगदान, बोनस और ग्रेच्युटी के लिए मजदूरी की गणना में एकरूपता सुनिश्चित होती है।
- राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी दर और न्यूनतम मजदूरी का युक्तिकरण- सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारित करने का प्रावधान एक ऐसा मानक स्थापित करता है, जिसके नीचे कोई भी राज्य अपना न्यूनतम मजदूरी निर्धारित नहीं कर सकता। विभिन्न राज्यों में कार्यरत ईओआई के लिए, यह श्रम की लागत से जुड़ी संरचनाओं के बारे में पूर्वानुमान प्रदान करता है और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करता है।
- मजदूरी का डिजिटल भुगतान- मजदूरी के डिजिटल भुगतान को कानूनी मान्यता मिलने से पारदर्शी और पता लगाने योग्य भुगतान प्रणालियों को अपनाने को बढ़ावा मिला है। इससे ईओआई को सत्यापन योग्य भुगतान के रिकॉर्ड, जिसकी अक्सर वैश्विक खरीदारों और अनुपालन ऑडिट के लिए आवश्यकता होती है, को बनाए रखने की क्षमता का लाभ मिला है।
- समान पारिश्रमिक और भेदभाव का निषेध - भर्ती और मजदूरी के मामले में लैंगिक आधार पर भेदभाव का निषेध समान कार्य के लिए समान पारिश्रमिक सुनिश्चित करता है। ईओआई के लिए, यह प्रावधान घरेलू कार्यप्रणालियों को अंतरराष्ट्रीय श्रम एवं मानवाधिकार मानकों, विशेष रूप से वैश्विक खुदरा व सोर्सिंग भागीदारों द्वारा मांगे गए मानकों के अनुरूप बनाता है।
रोजगार संबंधी लचीलापन और श्रमबल का प्रबंधन
- निश्चित अवधि का रोजगार (एफटीई) - एफटीई का प्रावधान नियोक्ताओं को एक निश्चित अवधि या परियोजना के लिए सीधे कर्मचारियों की भर्ती करने की अनुमति देता है। इस सीधी भर्ती में स्थायी कर्मचारियों के समान सभी वैधानिक लाभ शामिल होते हैं। यह उन ईओआई के लिए विशेष रूप से लाभकारी है, जो वैश्विक ऑर्डर चक्रों से जुड़ी उतार-चढ़ाव वाली या मौसमी मांग का सामना करते हैं। उद्योगों को अनौपचारिक या संविदात्मक नियुक्तियों का सहारा लिए बिना ही अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने या घटाने की सुविधा मिलती है, जिससे वे कानून का पालन करते हुए अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के बीच अपनी सकारात्मक छवि बनाए रख सकते हैं।
- छंटनी और तालाबंदी संबंधी मानदंडों में लचीलापन- छंटनी, काम से हटाने या बंद करने के लिए सरकार की पूर्व स्वीकृति की सीमा को 100 से बढ़ाकर 300 करने से उद्योगों को बदलते निर्यात ऑर्डर और वैश्विक बाजार की स्थितियों के अनुसार समायोजित करने हेतु संचालन संबंधी लचीलापन हासिल होता है। यह प्रावधान निर्यातकों को मंदी के दौरान अत्यधिक सख्ती के डर के बिना, अधिकतम मांग की अवधि के दौरान रोजगार बढ़ाने का भरोसा देता है।
- कामकाज का समय और ओवरटाइम का समय तय करने की छूट- सरकारों (राज्य/केन्द्र, जहां जैसा लागू हो) को कामकाज के समय की सीमा तय करने की पूरी छूट दी गई है। पहले यह सीमा एक तिमाही में 75 ओवरटाइम घंटे की थी, जिसे अब सरकारें (राज्य/केन्द्र, जहां जैसा लागू हो) तय कर सकती हैं। कामकाज के समय के मामले में यह छूट उद्योग जगत को अपनी व्यावसायिक जरूरतों, जिसमें अधिकतम ऑर्डर मिलने की अवधि भी शामिल है, के अनुरूप काम के घंटे तय करने में समर्थ बनाएगा। इससे विकास और रोजगार में भी वृद्धि होगी।
सरलीकृत अनुपालन और व्यवसाय करने में आसानी
- सरलीकृत पंजीकरण व लाइसेंसिंग और एकीकृत रिटर्न- एकल पंजीकरण और एकीकृत रिटर्न के प्रावधानों की शुरुआत से विभिन्न श्रम कानूनों के तहत लाइसेंस और निरीक्षणों की बहुलता कम हो जाएगी। इससे ईओआई, जो अक्सर कई उत्पादन इकाइयां संचालित करते हैं या कई ठेकेदारों को नियुक्त करते हैं, को सरलीकृत अनुपालन और कम प्रशासनिक लागत का लाभ मिलेगा।
- अभिलेखों का डिजिटलीकरण और उनकी सुवाह्यता (पोर्टेबिलिटी) - ये संहिताएं रोजगार संबंधी अभिलेखों, रजिस्टरों और रिटर्न के डिजिटल रखरखाव को बढ़ावा देती हैं। ईओआई, जिनका अक्सर विदेशी ग्राहकों और प्रमाणन एजेंसियों द्वारा ऑडिट किया जाता है, पारदर्शी और पता लगाने योग्य डिजिटल दस्तावेजीकरण के जरिए विश्वसनीयता हासिल कर सकेंगे।
- निरीक्षक-सह-सुविधाप्रदाता और आकस्मिक डिजिटल निरीक्षण- इस प्रावधान का उद्देश्य पारंपरिक “इंस्पेक्टर राज”, जहां निरीक्षणों को अक्सर दखलंदाजी भरा और बोझिल माना जाता था, को कम करना है। निरीक्षक अब सुविधाप्रदाता के रूप में कार्य करेंगे - नियोक्ताओं को कानून का पालन करने में मदद करेंगे और कर्मचारियों में जागरूकता पैदा करेंगे। यह बदलाव सौहार्दपूर्ण वातावरण को बढ़ावा देगा और व्यवसाय करना आसान बनाएगा।
- तृतीय-पक्ष द्वारा ऑडिट एवं प्रमाणन- स्टार्ट-अप प्रतिष्ठानों या प्रतिष्ठानों के वर्ग के लिए तृतीय-पक्ष द्वारा ऑडिट एवं प्रमाणन का प्रावधान किया गया है। इससे ईओआई को निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता के हस्तक्षेप के बिना स्वास्थ्य एवं सुरक्षा का आकलन करने और उसमें सुधार करने में मदद मिलेगी।
- अपराधों की माफी - पहली बार किए गए अपराधों, जिनमें केवल जुर्माना होता है, का निपटारा अब अधिकतम जुर्माने का 50 प्रतिशत भुगतान करके किया जा सकेगा। जिन अपराधों में पहले जुर्माना, कारावास या दोनों शामिल थे, उनका निपटारा अधिकतम जुर्माने का 75 प्रतिशत भुगतान करके किया जा सकेगा। इससे कानून कम दंडात्मक हो जाएगा और अनुपालन को प्रोत्साहित करने पर अधिक केन्द्रित होगा। इसके अलावा, नियोक्ता निर्धारित जुर्माना देकर लंबी मुकदमेबाजी से बच सकते हैं, जिससे त्वरित समाधान संभव होगा और मुकदमेबाजी कम होगी तथा छोटे ईओआई के लिए अनुपालन संबंधी जोखिम कम होगा।
- सुधार संबंधी नोटिस और अपराधों का गैर-अपराधीकरण- इस प्रावधान का उद्देश्य आपराधिक दंड (जैसे कारावास) के स्थान पर दीवानी दंड (जैसे आर्थिक जुर्माना) लगाना है। नियोक्ता को कोई भी कानूनी कार्रवाई करने से पहले अनुपालन हेतु 30 दिन का नोटिस देना अनिवार्य होगा। कई अपराधों का गैर-अपराधीकरण कर दिया गया है और आपराधिक दंड के स्थान पर जुर्माने के प्रावधान किए गए हैं, जिससे कानून कम दंडात्मक और अधिक अनुपालन-उन्मुख हो गया है। इससे स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा, अभियोजन का डर कम होगा और निर्यात क्षेत्र के लिए प्रवर्तन सुगम होगा।
सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों का संरक्षण
- सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज- सभी कर्मचारियों (निश्चित अवधि, अनुबंध, गिग श्रमिकों सहित) को कवर करने वाले प्रावधानों के जरिए सामाजिक सुरक्षा का सार्वभौमिकरण और निर्यात उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों का सुरक्षा जाल मजबूत होता है। निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में नियोक्ताओं को भविष्य निधि, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसी पहले से बिखरी योजनाओं को स्पष्टता के साथ एक ही ढांचे में समेकित करने से लाभ होता है।
- शिकायतों का निवारण और सामूहिक संवाद- 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले कार्यस्थलों पर शिकायत निवारण समितियों की अनिवार्य स्थापना समस्याओं का आंतरिक स्तर पर शीघ्रता के साथ समाधान होना सुनिश्चित करती है। इससे निर्यात में संलग्न उद्योगों, जिन्हें निर्बाध उत्पादन का सिलसिला बनाए रखना होता है, को औद्योगिक अशांति और कानूनी विवादों में कमी का लाभ मिलेगा।
पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण
- पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी मानक – पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित एक समान और व्यापक प्रावधान, विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में लागू होने वाले मानकों का एकल व सुसंगत युग्म प्रदान करके निर्यात उद्योगों को लाभ पहुंचाते हैं। इन मानकों का अनुपालन कार्यस्थल पर सुरक्षा को बढ़ाता है और अंतरराष्ट्रीय सामाजिक अनुपालन व्यवस्थाओं के अंतर्गत प्रमाणन को बढ़ावा देता है, जिसकी वैश्विक खरीदारों द्वारा लगातार मांग की जा रही है।
श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी
- महिलाओं के रोजगार के लिए बेहतर प्रावधान- महिलाओं की सहमति और पर्याप्त सुरक्षा उपायों की शर्त पर रात्रि पाली में महिलाओं को रोजगार देने का प्रावधान उन ईओआई के लिए बेहद लाभदायक है, जो अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर को पूरा करने के लिए 24 घंटे के उत्पादन चक्र में काम करते हैं। परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी-आधारित सेवाओं जैसे क्षेत्रों के उद्योग अब उचित परिवहन, सुरक्षा और कल्याणकारी व्यवस्थाओं के साथ देर रात के समय महिलाओं को कानूनी तौर पर रोजगार दे सकते हैं। इससे निरंतर उत्पादन और ऑर्डर पूरा करने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।
अनुबंध पर काम करने वाले श्रमिक एवं प्रवासी श्रमिकों का प्रबंधन
- अनुबंध पर काम करने वाले श्रमिकों और अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों का विनियमन - ठेकेदारों के पंजीकरण और प्रमुख नियोक्ताओं के लाइसेंसिंग की आवश्यकता वाले प्रावधान निर्यात इकाइयों में अनुबंध पर आधारित श्रम संबंधी कार्यप्रणालियों को औपचारिक बनाने में मदद करते हैं। इससे ईओआई को कानूनी अनिश्चितता में कमी और उनकी आपूर्ति श्रृंखलाओं की बेहतर निगरानी का लाभ मिलता है।
निर्यात क्षेत्र के श्रमिकों के लिए लाभ
विस्तारित सामाजिक सुरक्षा, मजबूत संरक्षण और अधिकारों की राष्ट्रव्यापी सुवाह्यता (पोर्टेबिलिटी) से लैस श्रम सुधार श्रमिकों, विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं, असंगठित, गिग और प्रवासी श्रमिकों को श्रम संबंधी प्रशासन के केन्द्र में मजबूती से रखता है।
मजदूरी संबंधी सुधार और आय संबंधी संरक्षण
- न्यूनतम मजदूरी का सार्वभौमिकरण- पहले, न्यूनतम मजदूरी केवल अनुसूचित रोजगारों पर लागू होता था, लेकिन अब यह सभी कर्मचारियों को कवर करता है। सरकार न्यूनतम मजदूरी की दरों की समीक्षा या संशोधन सामान्य तौर पर पांच वर्षों से अधिक के अंतराल पर नहीं करेगी। इसके अलावा, सरकार कर्मचारी के कौशल और कार्य की जटिलता को ध्यान में रखते हुए, अलग-अलग मजदूरी अवधि के लिए समयबद्ध कार्य, टुकड़ा-दर-टुकड़ा कार्य, यानी घंटों, दिन या महीने के हिसाब से, न्यूनतम मजदूरी दर तय करेगी। यह कदम ईओआई के श्रमिकों द्वारा घर ले जाने वाले (टेक-होम) वेतन और लाभों की गणना में पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता सुनिश्चित करेगा। यह वैधानिक अंशदान को कम करने के लिए वेतन को कृत्रिम रूप से कई भत्तों में विभाजित करने की पुरानी प्रथा पर भी अंकुश लगाएगा। उल्लेखनीय रूप से, मजदूरी की एक समान परिभाषा श्रमिकों के हित में निष्पक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा देगी।
- न्यूनतम मजदूरी- सरकार द्वारा कर्मचारी के भोजन, वस्त्र आदि सहित न्यूनतम जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की जाएगी। सरकार नियमित अंतराल पर न्यूनतम मजदूरी में संशोधन करेगी। यह प्रावधान ईओआई के कर्मचारियों को विभिन्न क्षेत्रों में एक न्यूनतम आय की सुरक्षा की गारंटी देगा, कम वेतन वाले समूहों में शोषण को रोकगा और बुनियादी जीवन स्तर को सहारा देगा। एक उचित न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करके, यह प्रावधान उचित वेतन के अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के अनुरूप भारत के अनुपालन को भी मजबूत करता है - जो नैतिक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार खरीदारों के साथ व्यापार करने वाले निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।
- मजदूरी का डिजिटल भुगतान - इस प्रावधान के जरिए, ईओआई के कर्मचारियों का वेतन समय पर सीधे उनके बैंक खातों में जमा होने, नकदी के प्रबंधन से जुड़े जोखिमों में कमी आने और एक औपचारिक वित्तीय रिकॉर्ड के निर्माण होने से लाभ होगा, जो ऋण और सामाजिक लाभों तक पहुंच को सुगम बनाएगा। उल्लेखनीय रूप से, यह प्रावधान वित्तीय समावेशन और वेतन से जुड़ी कार्यप्रणालियों में जवाबदेही को बढ़ावा देगा।
- वेतन का समय पर भुगतान और अनाधिकृत कटौती - वेतन के समय पर भुगतान और वेतन से अनाधिकृत कटौती से संबंधित प्रावधान, जो पहले केवल 24,000 रुपये प्रति माह तक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के संबंध में लागू थे, लेकिन अब वेतन सीमा की परवाह किए बिना सभी कर्मचारियों पर लागू होंगे। ईओआई – जहां उत्पादन का दबाव अधिक है और ऑर्डर पूरा करने की समय सीमा सख्त है - में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह प्रावधान वित्तीय स्थिरता, निष्पक्षता और पारिश्रमिक में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ नियोक्ता और कर्मचारी के बीच विश्वास एवं जवाबदेही की भावना को भी बढ़ावा देगा।
- ओवरटाइम की मजदूरी - नियोक्ताओं को कर्मचारियों को कामकाज के सामान्य घंटों से अधिक किसी भी कार्य के लिए सामान्य मजदूरी दर से कम से कम दोगुना भुगतान करना होगा। यह प्रावधान विशेष रूप से ईओआई, जहां निर्यात की समय-सीमा या थोक ऑर्डर को पूरा करने के लिए उत्पादन की मांग अक्सर तेजी से बढ़ जाती है, में काम करने वाले श्रमिकों के लिए लाभदायक है। यह प्रावधान सुनिश्चित करेगा कि श्रमिकों को अतिरिक्त कार्य घंटों के लिए उचित पारिश्रमिक मिले।
लैंगिक समानता और श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी
- लैंगिक आधार पर भेदभाव का निषेध- नियोक्ता, कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले समान कार्य या समान प्रकृति के कार्य के संबंध में भर्ती, मजदूरी या रोजगार की शर्तों से संबंधित मामलों में लैंगिक आधार पर, जिसमें ट्रांसजेंडर भी शामिल हैं, भेदभाव नहीं करेंगे। श्रमिकों, विशेषकर वस्त्र, चमड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में निर्यात श्रमबल का एक बड़ा हिस्सा बनने वाली महिलाओं, के लिए यह प्रावधान समानता की गारंटी देता है, मनोबल बढ़ाता है और औपचारिक रोजगार में महिलाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करता है।
- महिलाओं को सभी प्रकार के रोजगार (रात्रि पाली सहित) में काम करने की अनुमति - यह सुधार वस्त्र, परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी-आधारित सेवाओं जैसे ईओआई, जहां चौबीसों घंटे काम करना आम बात है, में कार्यरत महिला कर्मचारियों के लिए बेहद लाभदायक है। यह महिलाओं को उच्च-भुगतान वाली रात्रि पाली के अवसरों को सुलभता से हासिल करने में सक्षम बनाएगा और वैश्विक समय क्षेत्रों और जस्ट-इन-टाइम निर्यात कार्यक्रम द्वारा संचालित उद्योगों में उनकी रोजगार क्षमता और करियर की प्रगति को बढ़ाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रावधान उन अनिवार्य सुरक्षा उपायों - कामकाज की सुरक्षित परिस्थितियां, पर्याप्त परिवहन, विश्राम की सुविधाएं और सहमति-आधारित तैनाती – से लैस व संतुलित है, जो महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण सुनिश्चित करते हैं।

रोजगार का औपचारिकीकरण एवं नौकरी की सुरक्षा
- निश्चित अवधि का रोजगार (एफटीई) - एफटीई विशेष रूप से ईओआई, जहां उत्पादन चक्र अक्सर बदलती वैश्विक मांग और मौसमी ऑर्डर पर निर्भर करता है, में कार्यरत श्रमिकों के लिए लाभदायक है। यह प्रावधान इन श्रमिकों को औपचारिक रोजगार का दर्जा, सामाजिक सुरक्षा लाभ और रोजगार की अवधि के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करेगा। वे आनुपातिक आधार पर ग्रेच्युटी के भी पात्र होंगे, भले ही उनकी सेवा अवधि पांच वर्ष से कम हो। इसके अलावा, प्रतिष्ठित निर्यात इकाइयों में सीधे काम करने से उनके कौशल, अनुभव और रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे उन्हें अनौपचारिक या अस्थायी काम से हटकर औपचारिक क्षेत्र में स्थिर और सम्मानजनक भागीदारी की ओर बढ़ने का एक विश्वसनीय मार्ग मिलेगा।
- रोजगार का औपचारिकीकरण- सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का अनिवार्य प्रावधान ईओआई, जहां श्रमबल का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से अनौपचारिक रूप से कार्यरत रहा है, में रोजगार के औपचारिकीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह प्रावधान कानूनी मान्यता और नौकरी में पारदर्शिता स्थापित करेगा। यह श्रमिकों को मनमाने ढंग से नौकरी से निकाले जाने या वैधानिक अधिकारों से वंचित किए जाने से बचाएगा। विशेष रूप से महिला और प्रवासी श्रमिकों के लिए, यह प्रावधान रोजगार का सत्यापन योग्य प्रमाण प्रदान करेगा जिसका उपयोग लाभों का दावा करने या विवादों को निपटाने के लिए किया जा सकेगा।
सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और श्रमिक कल्याण
- सभी श्रेणियों के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज – यह प्रावधान श्रमिकों के रोजगार के प्रकार या अवधि की परवाह किए बिना, उनका पीएफ, ईएसआई, मातृत्व और अन्य लाभों में समावेश सुनिश्चित करता है। डिजिटल पंजीकरण और पोर्टेबल खाता संख्या की शुरुआत से, श्रमिकों के एक निर्यात इकाई या राज्य से दूसरी इकाई या राज्य में जाने के दौरान भी, लाभों की निरंतरता सुनिश्चित रहेगी। यह कदम श्रमबल के बीच दीर्घकालिक कल्याण, निष्ठा और स्थिरता को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर उद्योग जगत की अनुपालन संबंधी छवि में सुधार करेगा।
- पुनः कौशलीकरण निधि और छंटनी क्षतिपूर्ति- छंटनीग्रस्त श्रमिकों के लिए पुनः कौशलीकरण निधि की स्थापना का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि नियोक्ता के अंशदान का एक हिस्सा (15 दिनों के वेतन के बराबर) श्रमिकों को नए कौशल हासिल करने और नए रोजगार में जाने में मदद के लिए इस्तेमाल किया जाए। यह प्रावधान श्रमिकों को बदलाव के एक महत्वपूर्ण चरण में वित्तीय और कौशल संबंधी सहायता प्रदान करेगा, जिससे उनकी कठिनाई कम होगी और पुनः रोजगार पाने में सुविधा होगी। यह प्रावधान अस्थिर वैश्विक बाजारों में स्थायी रोजगार को बढ़ावा देगा।
- पेशेगत सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण संबंधी मानक- सरकार 50 या उससे अधिक श्रमिकों वाले कारखानों और खदानों में स्वच्छता, पेयजल, शौचालय, विश्राम कक्षों और अनुबंध पर काम करने वाले श्रमिकों सहित 100 या उससे अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों में कैंटीन के एक समान प्रावधान निर्धारित करेगी। यह प्रावधान श्रमिकों के लिए कामकाज की बेहतर परिस्थितियां - जिसमें सुरक्षित कार्यस्थल, पर्याप्त हवादार सुविधा, कैंटीन, चिकित्सा सुविधाएं और विश्राम कक्ष शामिल हैं - सुनिश्चित करता है। इन प्रावधानों में बड़े प्रतिष्ठानों में अनिवार्य चिकित्सा जांच, कल्याण अधिकारी और सुरक्षा समिति की व्यवस्था भी शामिल हैं। इसका परिणाम कामकाज के एक सुरक्षित और स्वस्थ माहौल, दुर्घटनाओं में कमी और उत्पादकता में सुधार के रूप में सामने आएगा।
- स्वास्थ्य सेवा संबंधी उपाय- निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच का प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक कर्मचारी, चाहे वह किसी भी श्रेणी का हो, के लिए निवारक स्वास्थ्य सेवा सुलभ हो। वस्त्र, चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और परिधान निर्माण जैसे निर्यात क्षेत्रों में करने वाले श्रमिक अक्सर धूल, रसायनों, शोर और श्रम संबंधी तनाव की चपेट में आते हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच से पेशेगत बीमारियों का शीघ्र पता लगाने, समय पर उपचार संभव बनाने और दीर्घकालिक बीमारियों को रोकने में मदद मिलेगी। समय-समय पर होने वाली जांच महिला श्रमिकों को महत्वपूर्ण निवारक देखभाल प्रदान करेगी और उनके समग्र कल्याण में योगदान देगी।
- वेतन सहित वार्षिक अवकाश - एक कैलेंडर वर्ष में 180 दिन (पहले के 240 दिन की अनिवार्यता से घटाया गया) काम पूरा करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को वेतन सहित वार्षिक अवकाश का प्रावधान ईओआई में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए लाभदायक होगा, जिन्हें अक्सर उत्पादन के भारी दबाव और निर्यात की सख्त समय-सीमाओं का सामना करना पड़ता है। इससे आय में किसी भी तरह की हानि के बिना पर्याप्त आराम, स्वास्थ्य लाभ और कामकाजी जीवन के बीच संतुलन सुनिश्चित होगा। वेतन सहित वार्षिक अवकाश उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने, व्यक्तिगत या स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने और तरोताजा होकर काम पर लौटने में सक्षम बनाएगा, जिससे उनका मनोबल और कार्यकुशलता बेहतर होगी।
कामकाज की स्थितियां, काम के घंटे और अवकाश
- कामकाज का समय, अवकाश और कल्याण संबंधी सुविधाओं के प्रावधान- कामकाज के समय, साप्ताहिक विश्राम और अवकाश के अधिकारों को तर्कसंगत बनाने से निर्यात इकाइयों के लिए एक जैसा और पूर्वानुमानित ढांचा तैयार होगा। श्रमिकों को विनियमित कार्य सारणी, विश्राम की अवधि और कैंटीन, क्रेच एवं चिकित्सा संबंधी सुविधाओं जैसी कल्याणकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। व्यवस्थित कामकाज के समय और कल्याण के संयोजन से श्रमिकों की कार्य संतुष्टि बेहतर होगी।
औद्योगिक सद्भाव और श्रमिकों का प्रतिनिधित्व
- शिकायत निवारण और सामूहिक संवाद - यह संहिता श्रमिकों को कामकाज की स्थितियों, वेतन या कल्याण संबंधी चिंताओं को बिना किसी प्रतिशोध के भय के व्यक्त करने का एक सुलभ मंच प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, इसमें निहित ट्रेड यूनियनों और वार्ता परिषदों को मान्यता देने के प्रावधान सामूहिक सौदेबाजी को मजबूत करते हैं और एक सहकारी औद्योगिक माहौल को बढ़ावा देते हैं।
निष्कर्ष

श्रम संहिताओं के अंतर्गत प्रत्येक प्रावधान भारत के निर्यात इकोसिस्टम को एक विशिष्ट किन्तु परस्पर संबद्ध तरीके से सुदृढ़ करता है। ये संहिताएं निर्यातोन्मुख उद्योगों (ईओआई) को गतिशील वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक लचीलापन, सरलीकरण और पूर्वानुमेयता प्रदान करती हैं। साथ ही, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अनुपालन मानकों को भी पूरा करती हैं। यही सुधार श्रमिकों को उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा, सुरक्षा, समानता और कौशल उन्नयन के अवसरों की गारंटी देते हैं, जिससे कार्यस्थल पर उनके कल्याण और सम्मान दोनों में वृद्धि होती है। ये संहिताएं मिलकर भारत को एक ऐसे आधुनिक श्रम व्यवस्था की ओर अग्रसर करती हैं जो व्यवसाय करने में आसानी और श्रमिकों के जीवनयापन में आसानी के बीच संतुलन स्थापित करती है, जिससे निर्यात क्षेत्र में आर्थिक प्रगति और समावेशी विकास दोनों को गति मिलती है।
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पीके/केसी/आर
(तथ्य सामग्री आईडी: 150512)
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