सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव श्री सुधांश पंत ने दिल्ली के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में आयोजित शिल्प समागम मेला 2026 का जायजा लिया


मेले में लगभग ₹35 लाख की बिक्री दर्ज की गई, जो लोगों के जबरदस्त उत्साह और कारीगरों के लिए बढ़ते बाजार के अवसरों को दर्शाती है

प्रविष्टि तिथि: 05 NOV 2026 9:32PM by PIB Delhi

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में आयोजित शिल्प समागम मेला 2026 में आज शाम सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के केंद्रीय सचिव श्री सुधांश पंत ने दौरा किया।

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सचिव के साथ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (एनएसएफडीसी) के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री प्रभात त्यागी, एनएसएफडीसी के डीजीएम रजनीश बांकर और मंत्रालय के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।



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श्री सुधांश पंत ने उन स्टॉलों का दौरा और निरीक्षण किया, जो अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों, सफाई कर्मचारियों और दिव्यांग कारीगरों और लाभार्थियों की उद्यमशीलता क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ये स्टॉल उन्हें अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और उनकी मार्केटिंग करने के लिए एक सुलभ मंच प्रदान करते हैं।


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श्री पंत ने कहा कि शिल्प समागम मेला पारंपरिक कारीगरों और उद्यमियों को उपभोक्ताओं से जोड़ने, बाजार संपर्क बनाने और आजीविका के अवसरों को मजबूती प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।


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उन्होंने बताया कि इस मेले में 130 से अधिक स्टॉलों के माध्यम से तरह-तरह के हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, पारंपरिक वस्त्र, त्योहारों की सजावट का सामान, लैंप, घर की सजावट की वस्तुएं और अन्य स्वदेशी उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।


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श्री पंत ने बताया कि मंत्रालय 2022 से शिल्प समागम मेले का आयोजन कर रहा है। इन मेलों के माध्यम से अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और सफाई कर्मचारी बिरादरी के 1,000 से अधिक कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और उनकी बिक्री करने के अवसर मिले हैं, जिससे उन्हें लाभ हुआ है।


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सचिव ने बताया कि शिल्प समागम मेला 2026 आईएनए के दिल्ली हाट में 15 नवंबर 2026 तक चलेगा। उन्होंने आम लोगों, परिवारों और आगंतुकों से अपील की कि वे यहां मौजूद तरह-तरह के पारंपरिक उत्पादों को देखें, कारीगरों की कलाकारी की सराहना करें और उद्यमिता, आर्थिक सशक्तिकरण तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में उनके प्रयासों का अपना सहयोग दें।

 

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एनएसएफडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मेले की शुरुआत से ही यहां बिक्री उत्साहजनक रही है, जो आने वाले लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया और कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों के लिए बढ़ती सराहना को दर्शाती है।

अधिकारी ने कहा कि चार भाग लेने वाले निगमों, एनएसएफडीसी, एनबीसीएफडीसी, एनएसकेएफडीसी और एनडीएफडीसी के कुल बिक्री आंकड़ों के अनुसार 1 नवंबर से 4 नवंबर, 2026 के बीच 29,86,110 रुपये की कुल बिक्री हुई।


उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद लगभग ₹5 लाख की अतिरिक्त बिक्री हुई, जिससे अब तक कुल बिक्री लगभग 34.86 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह मेले में प्रदर्शित उत्पादों के प्रति बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाता है।

 

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उन्होंने कहा कि प्रकाश और परंपरा - ज्योति से ज्योति जलती है' विषय पर आयोजित 15 दिवसीय मेला सात अलग-अलग विषयगत क्षेत्रों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प कौशल को एक मंच उपलब्ध कराता है।


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उन्होंने कहा कि इनमें कला आंगन, प्रकाश चौक, पूजा पथ, सजावट बाजार, घराना, स्वाद चौक और मंच शामिल हैं, जो आगंतुकों को भारत की कलात्मक, सांस्कृतिक और पाक (व्यंजन) विविधता का व्यापक अनुभव प्रदान करते हैं।


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अधिकारी ने बताया कि यह मेला कारीगरों को भारत ट्यूलिप और पर्पल फेस्ट जैसी पहलों के माध्यम से अपने बाजार का दायरा बढ़ाने का अवसर देता है। भारत ट्यूलिप कारीगरों को ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म से जोड़ता है, जबकि पर्पल फेस्ट दिव्यांगजनों की रचनात्मकता और क्षमताओं का उत्सव मनाता है, साथ ही समावेशी और समान अवसरों को बढ़ावा देता है।


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उन्होंने कहा कि इसमें शामिल लाभार्थियों को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त और विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त और विकास निगम (एनबीसीएफडीसी), राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम (एनएसकेएफडीसी) और राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त और विकास निगम (एनडीएफडीसी) सहित मंत्रालय के शीर्ष निगमों द्वारा सहयोग प्रदान किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय उन्हें मुफ्त स्टॉल, यात्रा खर्च, दैनिक भत्ता और उनके सामान के लिए परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करता है।

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पीके/केसी/आरटी/आरकेजे/डीए


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