प्रविष्टि तिथि:
02 NOV 2026 3:20PM by PIB Delhi
लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज कहा कि एक स्वस्थ और मजबूत लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों का समान महत्व है। उन्होंने कहा कि असहमति का स्वागत और सम्मान किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे नए विचार सामने आते हैं, प्रशासन की कमियों को दूर करने में मदद मिलती है और बेहतर शासन व्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक, दलीय और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी जनप्रतिनिधियों का मुख्य उद्देश्य राज्य और देश की निरंतर प्रगति होना चाहिए।
श्री बिरला आज पंचकूला में संविधान पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत हरियाणा विधानसभा द्वारा आयोजित ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलन’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। हरियाणा विधानसभा के वर्तमान और पूर्व सदस्यों तथा पूर्व मंत्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने हरियाणा की छह दशक की विकास यात्रा, सामाजिक और आर्थिक मजबूती तथा विभिन्न क्षेत्रों में राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा की इन उपलब्धियों का आधार भारत के संवैधानिक मूल्य और लोकतांत्रिक परंपराएं हैं।
पिछले साठ वर्षों में हरियाणा के विकास का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि अनेक ऐतिहासिक और प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद हरियाणा ने देश की प्रगति में हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भगवद्गीता में दिए गए कर्म के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने किसानों की सराहना की, जिन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया, फसल उत्पादन बढ़ाया और देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने हरियाणा के युवाओं की भी सराहना की, जो सशस्त्र बलों में शामिल होकर देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में अदम्य साहस का परिचय दे रहे हैं। उन्होंने हरियाणा के खिलाड़ियों की भी प्रशंसा की, जो अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।
भारत की संविधान निर्माण प्रक्रिया की समावेशी और विचार-विमर्श पर आधारित परंपरा का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि संविधान सभा ने प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबासाहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर के मार्गदर्शन में तथा हरियाणा और पंजाब सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित नेताओं के सहयोग से भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधताओं के बीच एक मजबूत संसदीय लोकतंत्र की नींव रखी। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता और संघीय व्यवस्था के बावजूद लोकतंत्र का लगातार मजबूत होना पूरी दुनिया के लिए भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि हमारा संविधान केवल सरकार चलाने का ढाँचा नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा है, जिसमें हमारी राष्ट्रीय चेतना और करोड़ों लोगों की आकांक्षाएं समाहित हैं।
श्री बिरला ने कहा कि विधायिका में किसी व्यक्ति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी जनसेवा का दायित्व समाप्त नहीं होता। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे शासन और प्रशासन को केवल सरकारी व्यवस्था के रूप में न देखें, बल्कि इसे आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक जीवन की वास्तविक सफलता इसी में है कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों और पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के जीवन में वास्तविक सामाजिक और आर्थिक बदलाव आए तथा उनके जीवन में खुशहाली आए।
श्री बिरला ने हरियाणा विधानसभा की सराहना करते हुए कहा कि पिछले छह दशकों में विधानसभा ने उच्च स्तरीय चर्चा, सार्थक संवाद और सदन की गरिमा बनाए रखने की एक अच्छी परंपरा स्थापित की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा देश की अन्य विधानसभाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। इससे यह साबित होता है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं तभी मजबूत होती हैं, जब वे जनकल्याण और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं।
इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी; हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री हरविन्द्र कल्याण; हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा; हरियाणा के संसदीय कार्य मंत्री श्री महीपाल ढांडा तथा हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा भी उपस्थित थे।
***
AM