प्रविष्टि तिथि:
27 OCT 2026 6:03PM by PIB Delhi
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने आज जम्मू-कश्मीर के जम्मू संभाग के सांबा जिले के विजयपुर स्थित चक जवाला गाँव में दिव्यांगजनों के कौशल विकास, पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए बनाए जा रहे समग्र क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी), जम्मू के स्थायी परिसर के निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की।

लगभग 24 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बन रहे इस स्थायी परिसर से क्षेत्र में पुनर्वास और सहायता सेवाओं की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे दिव्यांगजनों को अधिक आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि स्थायी परिसर से सीआरसी जम्मू की संस्थागत क्षमता मजबूत होगी और क्षेत्र के दिव्यांगजनों को पुनर्वास, शिक्षा तथा सहायता सेवाएँ उपलब्ध कराने का दायरा बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह केंद्र जम्मू शहर में सीमित स्तर पर काम कर रहा है। नए परिसर से इसकी सेवाओं का विस्तार हो सकेगा।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री के साथ सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। इनमें दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के संयुक्त सचिव श्री राजीव शर्मा शामिल थे।

इस दौरान सीआरसी जम्मू की निदेशक डॉ. रोनिका शर्मा ने केंद्रीय मंत्री को निर्माण कार्य की प्रगति, अब तक पूरे हो चुके कार्यों और शेष कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने स्थायी परिसर को समय पर पूरा करने और इसे चालू करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं तथा अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं से भी अवगत कराया।
परिसर के चालू होने के बाद यहाँ दिव्यांगजनों के पुनर्वास, विशेष शिक्षा, शुरुआती हस्तक्षेप, कौशल विकास और सशक्तिकरण से जुड़ी गतिविधियों को सहायता मिलेगी।

इस दौरे से निर्माण कार्य की स्थिति का आकलन करने और शेष कार्यों में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदमों की समीक्षा करने का अवसर मिला है।
केंद्रीय मंत्री ने परियोजना को समय पर पूरा करने और दिव्यांगजनों तक सेवाएँ प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए उपयुक्त बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि सीआरसी जम्मू का स्थायी परिसर स्थापित होना जम्मू क्षेत्र में पुनर्वास सेवाओं, विशेष शिक्षा, शुरुआती हस्तक्षेप, कौशल विकास और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
डॉ. कुमार ने कहा कि यह केंद्र दिव्यांगजनों को पुनर्वास संबंधी सेवाएँ उपलब्ध कराने के साथ-साथ उचित उपचार और कौशल विकास के अवसरों तक उनकी पहुँच आसान बनाएगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र में दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए फिजियोथेरेपी और विशेष प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। दिव्यांग बच्चों की बेहतर देखभाल में सहायता के लिए उनके माता-पिता और देखभाल करने वालों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि केंद्र में सहायक उपकरणों की उपलब्धता आसान बनाने के लिए प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा दिव्यांगता से संबंधित बी.एड. और एम.एड. जैसे पाठ्यक्रम शुरू करने की भी योजना है। इससे शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे और दिव्यांगजनों के पुनर्वास तथा सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएँ बढ़ेंगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र में जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंगों और अन्य सहायक उपकरणों की माप लेने, निर्माण करने और उन्हें लगाने के लिए प्रयोगशालाएँ विकसित की जाएँगी। इससे लाभार्थियों को रोजमर्रा के काम अधिक आसानी और आत्मनिर्भरता से करने में मदद मिलेगी।
समावेशी विकास पर बल देते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि दिव्यांगजनों को सशक्त बनाना ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सीआरसी जम्मू क्षेत्र में लंबे समय से महसूस की जा रही व्यापक पुनर्वास सुविधा की जरूरत को पूरा करेगा। इससे बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक, दिव्यांगजनों को उनके नजदीक ही संबंधित सेवाएँ मिल सकेंगी।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को सहयोग देने से उनके परिवार भी सशक्त होंगे और वे समाज तथा राष्ट्र के विकास में अधिक सक्रिय योगदान दे सकेंगे।
इस समीक्षा से जम्मू-कश्मीर में दिव्यांगजनों के पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए संस्थागत क्षमता मजबूत करने के उद्देश्य से निर्माण परियोजना को समय पर पूरा करने के महत्व की पुष्टि हुई।
उल्लेखनीय है कि सीआरसी जम्मू, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अंतर्गत, नई दिल्ली स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शारीरिक दिव्यांगजन संस्थान (पीडीयूएनआईपीपीडी) के माध्यम से संचालित होता है।
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