आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
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राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026 का ओडिशा के भुवनेश्वर में उद्घाटन


तीन चीजों पर गौर किया जाना चाहिएः हमारे शहरों की योजना बनाने और उन्हें संचालित करने की प्रणालियां, जमीनी स्तर पर लागू किए जाने वाले समाधान तथा नागरिकों को सेवाओं के वितरण के तौरतरीके - केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू

समृद्ध ओडिशा और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से निर्देशित होकर ओडिशा नियोजित शहरीकरण, आधुनिक अवसंरचना और संवहनीय गतिशीलता के एक नए युग की ओर बढ़ रहा है- श्री मोहन चरण मांझी

सात विषय क्षेत्रों पर केंद्रित रहीं पहले दिन की चर्चाएं

प्रविष्टि तिथि: 24 OCT 2026 7:17PM by PIB Delhi

केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने ओडिशा के भुवनेश्वर में दूसरे राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन का उद्घाटन किया। 24 और 25 अक्टूबर 2026 को होने वाले इस सम्मेलन का आयोजन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने ओडिशा सरकार के सहयोग से किया है। राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान (एनआईयूए) इसका ज्ञान भागीदार है। हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) और नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) इस सम्मेलन के मुख्य प्रायोजक हैं।

इस सम्मेलन की थीम ‘शहर उत्थान- शहरी प्रणालियों, समाधानों और वितरण पर पुनर्विचार’ है। इसमें भाग लेने वाले 1200 से अधिक प्रतिभागियों में शहरी विकास मंत्री, महापौर तथा शहरी स्थानीय निकायों, शहरी विकास प्राधिकरणों, अकादमिक जगत, उद्योग जगत, सिविल सोसाइटी और व्यापक शहरी विकास पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह सम्मेलन उन प्रणालियों, संस्थानों और कार्यान्वयन तंत्रों की नए सिरे से कल्पना करने पर केंद्रित है जो शहरों के कामकाज के तौरतरीकों को आकार देते हैं।

सम्मेलन का उद्घाटन

माननीय केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने उद्घाटन सत्र के दौरान पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलित करते हुए भारत के चल रहे शहरी परिवर्तन पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि देश की शहरी आबादी 2011 के लगभग 37.7 करोड़ से बढ़कर तकरीबन 50 करोड़ हो गई है। इसके 2036 तक 60 करोड़ तक पहुंच जाने की उम्मीद है। भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी तक लगभग हर दूसरा भारतीय किसी शहर में निवास कर रहा होगा। उन्होंने कहा कि ‘पीएमएवाई’, ‘अमृत’, ‘स्वच्छ भारत मिशन’, ‘पीएम स्वनिधि’, ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन’ और ‘स्मार्ट सिटीज मिशन’ सहित राष्ट्रीय कार्यक्रमों ने शहरी विकास के अगले चरण के लिए एक मजबूत नींव तैयार की है।

इस अवसर पर उपस्थित ओडिशा के माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी ने ‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में भारत की यात्रा में एक प्रमुख विकास इंजन बनने की राज्य की महत्वाकांक्षा को साझा किया। उन्होंने कहा, ‘‘समृद्ध ओडिशा और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण से निर्देशित होकर ओडिशा नियोजित शहरीकरण, आधुनिक बुनियादी ढांचे और संवहनीय गतिशीलता के एक नए युग की ओर बढ़ रहा है। 2036 तक 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में काम करते हुए हमारा ध्यान समावेशी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और जन-केंद्रित शहरों के निर्माण पर है। ‘आमा बस’ सेवाओं का विस्तार, इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत और भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप आर्थिक क्षेत्र का विकास स्वच्छ गतिशीलता, बेहतर शहरी बुनियादी ढांचे और हमारे नागरिकों के लिए जीवन की बेहतर गुणवत्ता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम ऐसे शहर बना रहे हैं जो न केवल आर्थिक विकास के इंजन हैं बल्कि सभी के लिए सुरक्षित, अधिक सुलभ और अधिक रहने योग्य भी हैं।’’

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इस अवसर पर ओडिशा की मुख्य सचिव श्रीमती अनु गर्ग ने कहा, "ओडिशा '8एस' दृष्टिकोण—सर्विस एक्सेस और सर्विस रिलायबिलिटी (सेवा तक पहुंच और विश्वसनीयता), स्मार्ट मोबिलिटी, सस्टेनेबिलिटी (संवहनीयता), सिस्टम्स, सेफ्टी (सुरक्षा), सीमलेसनेस (निर्बाधता), समावेशी (समानता) और संतुष्टि—के माध्यम से शहरी गतिशीलता को बदलने के लिए प्रतिबद्ध है। आठ शहरों में लगभग 800 बसों के साथ, सीआरयूटी डिजिटल टिकट, महिला ड्राइवरों की अधिक भागीदारी और यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं के जरिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत कर रहा है। ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) अवसंरचना के विस्तार के साथ-साथ, हमारा ध्यान एक ऐसे एकीकृत, समावेशी और संवहनीय मोबिलिटी इकोसिस्टम को बनाने पर है, जो सार्वजनिक परिवहन को सभी के लिए सुरक्षित, स्मार्ट और सुलभ बनाए।"

शहरी विकास विभाग के सचिव श्री सतेंद्र सिंह ने शहरों को अधिक रहने योग्य, समावेशी, लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने के उद्देश्य से शहरी प्रणालियों पर पुनर्विचार करने, मिलकर नए समाधान खोजने और सेवा वितरण तंत्र को मजबूत करने के अवसर पर जोर दिया। उन्होंने सेवा वितरण में सुधार, नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और शहरी लचीलेपन को मजबूत करने में 'स्वच्छ भारत मिशन', 'अमृत', 'सभी के लिए आवास', मेट्रो रेल, 'पीएम-ईबस सेवा' और 'पीएम स्वनिधि'  जैसी प्रमुख पहलों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 1 लाख करोड़ रुपये के 'अर्बन चैलेंज फंड', 5,000 करोड़ रुपये की 'क्रेडिट पुनर्भुगतान गारंटी योजना', सोलहवें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित 10,000 करोड़ रुपये के 'शहरीकरण प्रीमियम अनुदान'  और एसएएससीआई योजना के तहत सुधारों सहित हालिया पहलों और सुधारों की भी रूपरेखा प्रस्तुत की।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अनुराग जैन ने अपने  संबोधन में कहा कि भारत के शहरी विकास एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकारों के साथ संवाद को संस्थागत रूप देना और निरंतर जुड़ाव बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि 'विकसित भारत 2047' का दृष्टिकोण व्यापक भागीदारी और परामर्श के माध्यम से तैयार हुआ है, जिसमें सामाजिक और आर्थिक विकास को गति देने में शहरों की भूमिका को रेखांकित किया गया है। वर्ष 2047 तक भारत की लगभग 50 प्रतिशत आबादी के शहरी होने और जीडीपी में लगभग 75 प्रतिशत का योगदान देने की संभावना के साथ, उन्होंने तीन स्तंभों- निवेश, संस्थागत प्रतिक्रिया और क्षमता निर्माण द्वारा समर्थित सुनियोजित और समन्वित शहरीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

ओडिशा सरकार की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती उषा पाढ़ी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन की मेजबानी करने और शहरी विकास के क्षेत्र में ओडिशा की पहलों तथा अनुभवों को प्रदर्शित करने का अवसर मिलने पर आभार व्यक्त किया। उन्होंने उल्लेख किया कि इस सम्मेलन से शहरी विकास से जुड़े विशेषज्ञों और हितधारकों को राज्य के प्रयासों से बहुत कुछ सीखने और समझने का अवसर मिला। उन्होंने राज्य मंत्री, ओडिशा के मुख्यमंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य आयुक्तों और सम्मेलन के आयोजन में योगदान देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।

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शुभारंभ एवं प्रकाशन

उद्घाटन कार्यक्रम में कई पहलों और प्रकाशनों का शुभारंभ किया गया:

अर्बन इन्वेस्ट विंडो (यूआईडब्ल्यूआईएन) जर्नल

हुडको की अर्बन इन्वेस्ट विंडो (यूआईडब्ल्यूआईएन), परियोजना विकास, क्षमता निर्माण और निवेश के लिए तैयार परियोजनाओं की तैयारी के माध्यम से राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) का समर्थन करती है। शहरी आकांक्षाओं को कार्यान्वयन योग्य परियोजनाओं में परिवर्तित करने के लिए मजबूत परियोजना तैयारी और नवाचारी वित्तपोषण आवश्यक है जिनसे नागरिकों को वास्तविक लाभ मिल सके।

सीपीएचईईओ के लिए 'सामर्थ्य' प्लेटफॉर्म

ठोस अपशिष्ट, इस्तेमाल किए गए पानी और जल क्षेत्र में जानकारी के प्रबंधन और क्षमता निर्माण के लिए एकीकृत पोर्टल।

'अंकुर' हैंडबुक

'अंकुर हैंडबुक: 2025–26 की प्रमुख उपलब्धियाँ और 2026–27 की सुधार प्राथमिकताएं', अटल नेटवर्क फॉर नॉलेज, अर्बनाइजेशन एंड रिफॉर्म (अंकुर) की प्रगति और परिणामों को प्रस्तुत करती है। यह हैंडबुक 'सुजोग' (एसयूजेओजी) के माध्यम से शहरी नियोजन, नगर निगम वित्त, संस्थागत क्षमता निर्माण और डिजिटलशासन के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर प्रकाश डालती है।

ओडिशा नगर नियोजन हैंडबुक

ओडिशा सरकार के आवास एवं शहरी विकास विभाग के नगर नियोजन निदेशालय द्वारा, एनआईयूए के सहयोग से तैयार की गई ये हैंडबुक, शहरी नियोजन की प्रक्रियाओं और नियमों को सरल बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है। साथ ही, ये नागरिकों को भवन योजना और लेआउट योजना के अनुमोदन के संबंध में मार्गदर्शन भी करती हैं।

ओडिशा के लिए सरकारी और निजी स्वामित्व वाले सार्वजनिक स्थानों का फ्रेमवर्क

प्रस्तावित सरकारी स्वामित्व वाले सार्वजनिक स्थान ' (जीओपीएस) और निजी स्वामित्व वाले सार्वजनिक स्थान ' (पीओपीएस) नीति का उद्देश्य समावेशी, सुलभ और अच्छी तरह से रखरखाव वाले सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच का विस्तार करना है। जीओपीएस का ध्यान कम उपयोग में आने वाली सरकारी और संस्थागत भूमि को सक्रिय करने पर केंद्रित है, जबकि पीओपीएस नियोजन नियमों और प्रोत्साहनों के माध्यम से निजी विकास परियोजनाओं में सार्वजनिक रूप से सुलभ प्लाज़ा, सुंदर हरित क्षेत्रों और सामुदायिक स्थानों को शामिल करता है।

ई-बुक: 'मेरा घर, मेरा अभिमान'

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (पीएमएवाई-यू) के लाभार्थियों की आवाज़ और अनुभवों को शामिल करने वाला एक संग्रह।

पीएमएवाई-यू 2.0 मोबाइल एप्लिकेशन का ई-शुभारंभ

यह एप्लिकेशन मौजूदा मोबाइल एप्लिकेशन का एक अद्यतन संस्करण है।

पीएमएवाई-यू पुरस्कार 2027 के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)

यह एसओपी उन मापदंडों और रूपरेखा को स्थापित करेंगे जिनके आधार पर राज्यों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा, जिससे शहरी आवास पहलों के कार्यान्वयन को और अधिक प्रोत्साहन तथा मजबूती मिलेगी।

सी एंड डी अपशिष्ट प्रबंधन पर परामर्श

शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए जारी यह परामर्श बताता है कि 'निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2025' को कैसे लागू किया जाए। ये नियम 2016 के नियमों की जगह लेंगे और इनमें 'सर्कुलर इकॉनमी' (चक्रीय अर्थव्यवस्था) का दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसमें 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व' (ईपीआर), अनिवार्य अपशिष्ट प्रबंधन और उपयोग योजनाएं, रीसाइक्लिंग के लक्ष्य, तथा अनुपालन के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शामिल हैं।

‘सभी के लिए पर्याप्त आवास’ पर परिणाम रिपोर्ट

यह परिणाम रिपोर्ट विश्व पर्यावास दिवस (वर्ल्ड हैबिटैट डे), 2026 के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों की चर्चाओं और सिफारिशों को संकलित करती है। इन सत्रों में इस बात का विश्लेषण किया गया कि किराये के आवास की संभावनाओं को कैसे साकार किया जा सकता है, आवास की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को कम करने के लिए किस तरह के विनियामक उपाय किए जा सकते हैं और स्थानीय तथा स्वदेशी प्रौद्योगिकियां किस प्रकार मजबूत और किफायती आवासों के विस्तार में मदद कर सकती हैं।

'बल्क वेस्ट जनरेटर्स के अनुपालन पर मार्गदर्शन दस्तावेज़' भी जारी किया गया।

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तकनीकी चर्चाएँ

सम्मेलन के पहले दिन सात विषयों पर चर्चाएँ हुईं।

'चलने के अधिकार' (राइट टू वॉक) पर हुए सत्र में हमारे शहरों की एक रोज़मर्रा की समस्या पर बात की गई: फुटपाथ, सुरक्षित स्कूल ज़ोन, पैदल यात्रियों के लिए बेहतर क्रॉसिंग और 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' (गंतव्य तक पहुँचने के अंतिम चरण) में सुधार के ज़रिए सड़कों को कैसे ज़्यादा सुरक्षित और सुलभ बनाया जाए।

'जल, अपशिष्ट और संसाधन दक्षता' के तहत बुनियादी ढाँचे के निर्माण से आगे बढ़कर सेवा दक्षता में सुधार, जल के नुकसान को कम करने, प्रसंस्कृत जल (ट्रीटेड वाटर) के पुनर्उपयोग को बढ़ावा देने और कचरे से मूल्य प्राप्त करने पर जोर दिया गया।

'किफायती आवास’ पर हुए सत्र में किराये के आवास की बढ़ती जरूरत, नियामक स्वीकृतियों को सरल बनाने, जमीन और वित्त तक बेहतर पहुंच तथा किफायती और जलवायु-अनुकूल निर्माण प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया गया।

एकीकृत शहरी विकास और बुनियादी ढाँचा वितरण'  के माध्यम से, इस सत्र ने इस बात का अध्ययन किया कि कैसे एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, एकीकृत उपयोगिता योजना और जीआईएस-आधारित प्रणालियाँ दोहराव को कम कर सकती हैं तथा शहरी बुनियादी ढाँचे के नियोजन और कार्यान्वयन में सुधार ला सकती हैं।

'शहरी सेवा वितरण के लिए नए आयाम’ सत्र के तहत एक मुख्य प्रश्न यह था कि नगर पालिकाएं स्पष्ट संस्थागत जिम्मेदारियों, मजबूत वित्त, खरीद सुधारों, तकनीकी क्षमता और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी के माध्यम से बेहतर सेवाएं कैसे प्रदान कर सकती हैं।

'मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज़' पर आयोजित सत्र में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया कि मौजूदा नियामक ढांचे में किस तरह बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि भवन निर्माण की स्वीकृतियों को सरल बनाया जा सके, सुरक्षा और पहुंच को मजबूत किया जा सके तथा जलवायु अनुकूलन और निर्माण क्षेत्र की नई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप कदम उठाए जा सकें।

अंत में, ‘मॉडल म्युनिसिपल लॉ’ (आदर्श नगरपालिका कानून) ने उन विधायी सुधारों पर विचार किया, जो नगरपालिका की स्वायत्तता को मजबूत करने, निर्वाचित प्रतिनिधियों और कार्यकारी अधिकारियों की शक्तियों को स्पष्ट करने तथा शहरी प्रशासन में संस्थागत क्षमता और जवाबदेही में सुधार लाने के लिए आवश्यक हैं।

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पीके/केसी/आरटी/एसके


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