संस्‍कृति मंत्रालय
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माननीय राष्ट्रपति ने कलाकारों को 65वें राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी और तीसरे प्रिंट  द्विवार्षिक इंडिया पुरस्कार प्रदान किए; भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत एवं समकालीन सृजनशीलता का जश्न


केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया

प्रविष्टि तिथि: 21 OCT 2026 7:01PM by PIB Delhi

भारत की माननीय राष्ट्रपती श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन ललित कला अकादमी द्वारा आयोजित 65वें राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी तथा तीसरे प्रिंट द्विवार्षिक इंडिया 2026 के पुरस्कार समारोह में भाग लिया। यह समारोह नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल, वरिष्ठ अधिकारियों, कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों के साथ उपस्थित थे।

पुरस्कार समारोह में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और समकालीन दृश्य कलाओं में कलाकारों के उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित किया गया। 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी तथा तीसरे प्रिंट द्विवार्षिक इंडिया 2026 के अंतर्गत चयनित कलाकारों को पुरस्कार प्रदान किए गए।

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केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने माननीय राष्ट्रपति का स्वागत किया और आभार स्वरूप उन्हें एक गोंड चित्रकला भेंट की, जो भारत की देशज कलात्मक परंपराओं की समृद्धि को दर्शाती है। इस अवसर पर ललित कला अकादमी की यात्रा और वर्ष 1955 में इसकी स्थापना के बाद से राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के विकास को दर्शाने वाली एक विशेष फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

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संबोधन करते हुए माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने भारत की समृद्ध और विविध कलात्मक विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कला को देश की संस्कृति, परंपराओं और सभ्यतागत यात्रा का दर्पण बताया। उन्होंने पारंपरिक कलाकृतियों के संरक्षण के महत्व पर बल दिया और प्रिंटमेकिंग (मुद्रण कला) को कलात्मक अभिव्यक्ति की एक महत्वपूर्ण परंपरा बताया।

माननीय राष्ट्रपति ने कलाकारों के बीच संवाद और विचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने में प्रदर्शनियों तथा बिएनेल यानी हर दो वर्ष पर होने वाली अंतरराष्ट्रीय मुद्रित कला प्रदर्शनी की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कलाकृतियों के प्रचार-प्रसार और व्यापक पहुंच के अवसर सृजित करने तथा कलाकारों को रचनात्मक अर्थव्यवस्था में जोड़ने के लिए संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों की भी सराहना की।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ललित कला अकादमी की सराहना की, जिसने कलाकारों को अपनी कृतियाँ प्रदर्शित करने और भारत की कलात्मक विविधता का उत्सव मनाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कलाकृति में कलाकार के विशिष्ट दृष्टिकोण और कल्पनाशीलता की अनूठी झलक मिलती है। उन्होंने जोर दिया कि कलात्मक अभिव्यक्ति की यह विविधता कला की दुनिया को समृद्ध करती है और भारत की जीवंत सृजनात्मक परंपराओं को मजबूत बनाती है।

हर दो वर्ष पर आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय मुद्रित कला प्रदर्शनी बिएनेल के उद्घाटन के दौरान मुद्रण कला के अभ्यासों को देखने के अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रिंटमेकिंग के महत्व पर प्रकाश डाला, जो तकनीकी दक्षता और कलात्मक नवाचार का संगम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी और प्रिंट बिएनेल जैसे मंच कलात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा देते हैं, अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करते हैं और भारतीय कला की वैश्विक पहुंच बढ़ाते हैं।

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विकसित भारत @ 2047 के दृष्टिकोण से भारत की सांस्कृतिक प्रगति को जोड़ते हुए श्री शेखावत ने देश की विकास यात्रा में संस्कृति समृद्धि और भारतीय सृजनशीलता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कलाकृतियों की बिक्री को कार्यक्रम में शामिल करने को भी कलाकारों के लिए अवसरों का विस्तार करने, उनकी आजीविका को मजबूत करने और भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम बताया।

अपने संबोधन में संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने वर्ष 1954 में स्थापना के बाद से ललित कला अकादमी की यात्रा तथा राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के विकास का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शनी वर्ष 1955 में जयपुर हाउस से शुरू हुई थी, जिसमें लगभग 1,200 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थीं।

65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी के विशाल स्तर को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि इस वर्ष के संस्करण में 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,495 कलाकारों से 6,175 कलाकृतियाँ प्राप्त हुईं। कुल 270 कलाकृतियों को प्रदर्शनी के लिए चुना गया तथा 20 कलाकारों को पुरस्कारों के लिए चयनित किया गया।

श्री अग्रवाल ने प्रिंट बिएनेल के महत्व को भी रेखांकित किया, जो प्रिंटमेकिंग को बढ़ावा देने, प्रयोग को प्रोत्साहित करने और भारतीय तथा अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के बीच संवाद सुविधाजनक बनाने में सहायक है। उन्होंने कला के साथ जन-जुड़ाव बढ़ाने, उभरती प्रतिभाओं को पोषित करने और कलाकारों को व्यापक दर्शकों से जोड़ने के अवसर सृजित करने हेतु अकादमी के निरंतर प्रयासों पर बल दिया।

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संस्कृति मंत्रालय 4 दिसंबर 2026 से 21 मार्च 2027 तक दिल्ली के स्मारकों और धरोहर स्थलों में इंडिया बिएनेल 2026 आयोजित करेगा। यह पहल कलात्मक अभिव्यक्ति और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव के लिए एक मंच प्रदान करेगी, जिसमें समकालीन सृजनशीलता देश के ऐतिहासिक स्थानों के साथ संवाद स्थापित करेगी।

यह बिएनेल कलाकारों को अपनी कृतियाँ प्रदर्शित करने के अवसरों को और मजबूत करेगी, रचनात्मक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी तथा कला एवं धरोहर के साथ जन-जुड़ाव बढ़ाएगी।

पुरस्कार समारोह ने भारत की विविध कलात्मक परंपराओं के संरक्षण, समकालीन सृजनशीलता को प्रोत्साहन, कलाकारों को व्यापक मान्यता तथा कला को देश की सांस्कृतिक एवं रचनात्मक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करने के महत्व को पुनः रेखांकित किया।

पुरस्कार विजेताओं की सूची

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पीके/ केसी /आरटी/ एमएम /डीए


(रिलीज़ आईडी: 2326211) आगंतुक पटल : 62
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