कोयला मंत्रालय
सीसीओ की सुविकल्प पहल सतत खनन पुनरुपयोग को बढ़ावा देती है और इसे स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026 प्राप्त हुआ है
प्रविष्टि तिथि:
21 OCT 2026 12:47PM by PIB Delhi
कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) ने वैज्ञानिक तरीके से खदानों को बंद करने और खनन के बाद की भूमि के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए पहल की है।
सीसीओ ने हितधारकों को एक संरचित और डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया के माध्यम से उपयुक्त खदान पुनरुपयोग परियोजनाओं के चयन में सहायता करने के लिए सुविकल्प नामक एक आंतरिक खदान पुनरुपयोग उपकरण विकसित किया है। यह उपकरण कई तकनीकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक मानदंडों के आधार पर पुनर्उपयोग परियोजनाओं का मूल्यांकन और रैंकिंग करता है।
एक उपयुक्त परियोजना की पहचान हो जाने के बाद उपयोगकर्ता प्रिज्म (एक ऐसा ढांचा, जिसके तहत खनन समाप्त होने के बाद उस भूमि का पुनरुपयोग पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद तरीके से किया जाता है) के माध्यम से कार्यान्वयन के रास्ते तलाश सकते हैं। प्रिज्म परियोजना अवधारणाओं, कार्यान्वयन दृष्टिकोणों, केस स्टडीज़, नमूना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर), निविदा दस्तावेज़ और समान क्षेत्रों में कार्यरत एजेंसियों की जानकारी प्रदान करता है।
सुविकल्प की नवीनता और उपयोगिता को 26 सितंबर 2026 को ‘डिजिटल परिचालन दक्षता - डेटा-संचालित निर्णय लेना’ श्रेणी के तहत स्कॉच गोल्ड अवार्ड 2026 के माध्यम से राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई । स्कॉच पुरस्कार शासन, प्रौद्योगिकी, नवाचार और सार्वजनिक मूल्य प्रदान करने वाली परिवर्तनकारी पहलों में उत्कृष्टता को मान्यता देते हैं।

सीसीओ ने खनन बंद करने और सतत पुनरुपयोग पर सूचित निर्णय लेने में सहायता के लिए एक संरचित ज्ञान-साझाकरण और क्षमता-निर्माण पहल के रूप में सुविकल्प संवाद वेबिनार श्रृंखला भी शुरू की है। इस राष्ट्रीय वेबिनार श्रृंखला में कोयला कंपनियों, सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य हितधारकों को खनन के बाद भूमि उपयोग से संबंधित व्यावहारिक समाधान, नवीन मॉडल और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए एक साथ लाया गया।
इस श्रृंखला के अंतर्गत कुल 12 विषयगत वेबिनार आयोजित किए गए, जिनमें रिक्लेम और लाइव्स फ्रेमवर्क, सुविकल्प माइन रिपर्पसिंग टूल, पीएमयू की स्थापना, सामुदायिक सहभागिता, पर्यटन और गंतव्य विकास, आजीविका के अवसर, वित्तपोषण तंत्र, परित्यक्त खदानों के रिक्त स्थानों के अभिनव उपयोग और खदान परिवर्तन के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुभवों को शामिल किया गया।
इस श्रृंखला ने खदानों को बंद करने के बहुआयामी पहलुओं पर कोयला कंपनियों की संस्थागत समझ को मजबूत किया है, जिससे नियामक अनुपालन से आगे बढ़कर पर्यावरण बहाली, आजीविका सृजन, सामुदायिक विकास और आर्थिक विविधीकरण जैसे क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिला है। विशेषज्ञों के नेतृत्व में हुई चर्चाओं और ज्ञान के आदान-प्रदान ने टिकाऊ पुनरुपयोग परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और अनुकूलनीय दृष्टिकोण प्रदान किए हैं।
ये पहलें कोयला मंत्रालय के बंद कोयला खदानों को उत्पादक संपत्तियों में बदलने और सतत क्षेत्रीय विकास को सक्षम बनाने के दृष्टिकोण का समर्थन करती हैं।
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पीके/केसी/आरटी/पीसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2325899)
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