सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्य योजना - नमस्ते के तहत संजय कुमार की संविदा कर्मचारी से उद्यमी बनकर वित्तीय आत्मनिर्भरता हासिल करने की यात्रा
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के सफाईकर्मी ने मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं द्वारा आत्मनिर्भर आजीविका का साधन बनाया
प्रविष्टि तिथि:
16 OCT 2026 3:12PM by PIB Delhi
श्री संजय कुमार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि संस्थागत ऋण और पूंजीगत सहायता प्रदान करना सफाई कर्मचारियों को मशीनीकृत स्वच्छता सेवा अपनाने, उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने और आजीविका के बेहतर अवसर प्राप्त करने में कितने सहायक हो सकते हैं। राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र- नमस्ते योजना के तहत मिली सहायता ने श्री संजय कुमार को स्वतंत्र आय का साधन स्थापित करने और खुद का सफाई वाहन हासिल कर उसका संचालन करने में सक्षम बनाया। इससे उन्हें मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं के क्षेत्र में स्वरोजगार आरंभ करने का अवसर मिला।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी 42 वर्षीय श्री संजय कुमार को अपने छह सदस्यों वाले परिवार के भरण-पोषण करने में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। वे संविदा सफाईकर्मी थे और उनकी मासिक आय लगभग 12 हजार रुपये थी।
कड़ी मेहनत और समर्पण के बाद भी सीमित आय की वजह से उनके लिए घरेलू खर्च और परिवार की जरूरतें पूरी करना और भविष्य के लिए बचत करना कठिन था।
माध्यमिक विद्यालय की शिक्षा पूरी करने के बाद श्री कुमार के पास रोजगार के सीमित अवसर थे और आय बढ़ाने की संभावनाएं भी काफी कम थीं। परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य होने के कारण वे अपनी आर्थिक हालत सुधारकर परिवार को बेहतर जीवन देना चाहते थे। उनका सपना खुद का मशीनीकृत सफाई वाहन खरीद कर स्वतंत्र रूप से स्वच्छता सेवा व्यवसाय स्थापित करना था।
इसी दौरान श्री कुमार को गाजियाबाद नगर निगम द्वारा आयोजित एक जागरूकता शिविर में भाग लेने का अवसर मिला। शिविर में उन्हें केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र योजना - नमस्ते के अंतर्गत स्वच्छता उद्यमी योजना की जानकारी मिली।

इस योजना के तहत उन्हें मंत्रालय से अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी और केनरा बैंक से गाद निकालने वाले वाहन खरीदने के लिए ऋण प्राप्त हुआ। परियोजना की कुल लागत 9.55 लाख रुपये थी, जिसमें 5.91 लाख रुपये का ऋण और 3.64 लाख रुपये की पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी। वर्ष 2021-22 के दौरान मिली इस वित्तीय सहायता से वे वाहन खरीदने और संविदा पर कार्य करने से आगे बढ़कर मशीनीकृत स्वच्छता सेवा प्रदाता के रूप में स्वरोजगार शुरू करने में सफल हुए।
इस वित्तीय सहायता से श्री कुमार के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आ गया। संविदा कर्मचारी के रूप में हर महीने 12 हजार रुपये कमाने वाले श्री कुमार अब अपने स्वच्छता सेवा व्यवसाय से लगभग 60 हजार से 65 हजार रुपये प्रतिमाह कमाते हैं। परिचालन खर्चे पूरा करने के बाद उनकी हर महीने लगभग 25 हजार रुपये की बचत हो जाती है। आय में इस बढ़ोतरी से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और वे भविष्य की आवश्यकताओं के लिए बेहतर योजना बनाने में सक्षम हुए हैं।
श्री संजय कुमार का अनुभव दर्शाता है कि लक्षित वित्तीय सहायता किस प्रकार आर्थिक सशक्तीकरण के नए अवसर पैदा कर सकती है। संविदा कर्मचारी से उद्यमी बनने तक का उनका सफर नमस्ते योजना की उस क्षमता को रेखांकित करता है, जिसके द्वारा सफाई कर्मचारियों के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं, वित्तीय आत्मनिर्भरता मजबूत की जा सकती है तथा उनके और उनके परिवारों के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है।
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केपी/केसी/आरटी/एकेवी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2324397)
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