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महिलाएँ, कार्य और उद्यम: बेहतर आजीविका के लिए भारत का प्रयास

प्रविष्टि तिथि: 15 OCT 2026 12:23PM by PIB Delhi

भारत में महिलाओं के रोजगार की कहानी अब भागीदारी से आगे बढ़ते हुए बेहतर गुणवत्ता वाले रोजगार की ओर  बढ़ रही है। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (एलएफपीआर) के अनुसार, महिलाओं की श्रमबल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 2017-18 में 23.3प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई, जबकि श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्‍ल्‍यूपीआर) 22 प्रतिशत  से बढ़कर 38.8 प्रतिशत  हो गया। इस सुधार को आगे बढ़ाते हुए, नीतिगत सहायता के माध्यम से महिलाओं के रोजगार को औपचारिक उद्यम के रूप में मान्यता, ऋण, बाजार तक पहुँच, सुरक्षित कार्यस्थल, कौशल विकास और आजीविका के नए अवसरों के जरिए सशक्त बनाया जा रहा है। अब ध्यान इस बात पर है कि बढ़ती भागीदारी को अधिक आय, आर्थिक सुरक्षा और विकास में बेहतर योगदान में कैसे बदला जाए।

 

महिलाओं के रोजगार में वृद्धि और आर्थिक अवसरों का विस्तार

भारत में महिलाओं का रोजगार अब केवल कार्यबल में उनकी उपस्थिति तक सीमित नहीं रह गया है। श्रमबल भागीदारी में वृद्धि एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, साथ ही रोजगार के स्वरूप और गुणवत्ता पर भी अधिक ध्यान दिया जा रहा है। जैसे-जैसे अधिक महिलाएँ श्रमबल में शामिल हो रही हैं, प्रगति का अगला आयाम उन अवसरों में निहित है, जो रोजगार के माध्यम से सृजित होते हैं। आर्थिक सशक्तीकरण तब और मजबूत होता है, जब रोजगार से आय और सुरक्षा प्राप्त होती है, पहचान मिलती है तथा आर्थिक निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता हासिल होती है।

इस व्यापक बदलाव को ऐसी नीतियों के माध्यम से समर्थन दिया जा रहा है, जो महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थलों, सामाजिक सुरक्षा, उद्यमिता, औपचारिकरण और वित्तीय अवसरों तक पहुँच का विस्तार करती हैं। ये उपाय अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और उसे सुरक्षित एवं सशक्त बनाने वाले अवसरों में बदलने में मदद करते हैं।

 

मात्रात्मक बदलाव: कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि

हाल के वर्षों में भारत के श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं के लिए श्रमबल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 2017-18 में 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40.0 प्रतिशत हो गई।

इस वृद्धि के साथ वास्तव में काम करने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी में भी बढ़ोतरी हुई है। महिलाओं का श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्‍ल्‍यूपीआर) 2017-18 में 22.0 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 38.8 प्रतिशत हो गया। एक अनुमान के अनुसार, 2025 के दौरान भारत में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग 20 करोड़ महिलाएँ रोजगार में थीं।

 

श्रमबल भागीदारी दर (एलएफपीआर) से तात्पर्य जनसंख्या के उस अनुपात से है, जो या तो कार्यरत है अथवा काम की तलाश में है या काम करने के लिए उपलब्ध है।

श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्‍ल्‍यूपीआर) से तात्पर्य जनसंख्या में नियोजित व्यक्तियों के अनुपात से है।

श्रमबल भागीदारी दर (एलएफपीआर) से तात्पर्य जनसंख्या के उस अनुपात से है, जो या तो कार्यरत है अथवा काम की तलाश में है या काम करने के लिए उपलब्ध है।

श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्‍ल्‍यूपीआर) से तात्पर्य जनसंख्या में नियोजित व्यक्तियों के अनुपात से है।

 

 

कामगारों, उद्यमियों और आर्थिक योगदानकर्ताओं के रूप में महिलाएँ

भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका का स्वरूप भी बदल रहा है।

उद्यम में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति

महिलाओं की बढ़ती संख्या उद्यमिता को अपना रही है और अपने स्वयं के व्यवसाय स्थापित कर रही है। महिला उद्यमिता आय अर्जित करने, परिसंपत्तियाँ बनाने और व्यवसायों का विस्तार करने के अवसर सृजित करके आर्थिक भागीदारी को व्यापक बनाती है। इससे वित्तीय आत्मनिर्भरता मजबूत होती है, साथ ही कौशल और संसाधनों तक पहुँच का भी विस्तार होता है।  

  • महिलाओं के स्वामित्व वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई): अक्टूबर 2026 तक, लगभग 3.69 करोड़ पंजीकृत एमएसएमई महिलाओं के स्वामित्व वाले थे, जो कुल पंजीकरण का लगभग 38 प्रतिशत है।
  • स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाएँ: मार्च 2026 तक, 1.07 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम-से-कम एक महिला निदेशक या भागीदार थी। ये सभी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स का लगभग 48 प्रतिशत थे।

 

प्रौद्योगिकी और उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में महिलाएँ

उद्यमिता के साथ-साथ विनिर्माण और उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।

  • मोबाइल फोन विनिर्माण: जुलाई 2026 तक, मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र के प्रत्यक्ष कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के व्यापक क्षेत्र में, पिछले दशक के दौरान सृजित कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है।
  • सेमीकंडक्टर उद्योग: महिलाएँ सेमीकंडक्टर उद्योग में भी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। मार्च 2025 तक, वे इस उद्योग के कार्यबल का लगभग 25 प्रतिशत और भारत में चिप डिजाइन एवं इंजीनियरिंग कार्यबल का लगभग एक-चौथाई हिस्सा हैं।
  • नागरिक उड्डयन क्षेत्र: इस क्षेत्र में भी विशिष्ट भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी दिखाई देती है। भारत में 15 प्रतिशत महिला पायलट हैं, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक अनुपातों में से एक है। इसके अतिरिक्त, जून 2025 तक, वायु यातायात नियंत्रकों में 15 प्रतिशत, उड़ान प्रेषकों (फ्लाइट डिस्पैचर्स) में 11 प्रतिशत और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) में उड़ान संचालन निरीक्षकों में 33 प्रतिशत महिलाएँ थीं।
  • अनुसंधान एवं विकास: भारत के अनुसंधान तंत्र में भी महिलाओं की बढ़ती भागीदारी दिखाई देती है। अनुसंधान एवं विकास सांख्यिकी 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) के अनुसंधान संबंधी करियर में महिलाओं की भागीदारी 2000-01 में 13 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 18.6 प्रतिशत और 2023-24 में 29 प्रतिशत हो गई।

 

महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों का विकास: मान्यता से लेकर विस्तार तक

विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा व्यवसाय स्थापित किए जाने के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक विकास के लिए सहायता का महत्व भी बढ़ता जा रहा है। औपचारिक मान्यता, वित्त और बाजार तक पहुँच महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को सशक्त बनाने के प्रमुख आधार हैं।

औपचारिकरण: महिलाओं के कार्य को आर्थिक पहचान प्रदान करना

महिला-नेतृत्व वाली अनेक आर्थिक गतिविधियाँ छोटे स्तर पर शुरू होती हैं, इसलिए उन्हें औपचारिक मान्यता प्रदान करना महत्वपूर्ण है। औपचारिकीकरण से उन्हें आधिकारिक पहचान मिलती है और ऋण, सरकारी योजनाओं, कौशल विकास तथा व्यवसाय विकास सेवाओं तक पहुँच बेहतर होती है।  

क) स्वावलंबिनी योजना (2025): यह योजना युवा महिलाओं को उद्यमिता संबंधी प्रशिक्षण, वित्तीय एवं बाजार मार्गदर्शन और कानूनी सहायता के माध्यम से व्यावसायिक विचार विकसित करने से लेकर उद्यम स्थापित करने तक सहयोग प्रदान करती है। चयनित प्रतिभागियों को टिकाऊ उद्यम विकसित करने में सहायता के लिए 21 सप्ताह तक मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग भी दिया जाता है।

इस योजना का शुभारंभ फरवरी 2025 में असम, मेघालय, मिजोरम, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के छह उच्च शिक्षण संस्थानों में एक पायलट परियोजना के रूप में किया गया था।

स्वावलंबिनी पायलट परियोजना के अंतर्गत जो लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं।

  • संकाय विकास कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 82 संकाय सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया;
  • उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत 1,200 के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 1,276 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया;
  • उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 600 के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 602 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया।

ख) यशस्विनी अभियान (2024): इस अभियान का उद्देश्य वर्ष 2029 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म पर लैंगिक समानता हासिल करके उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इसका एक अन्य उद्देश्य महिला-स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए निर्धारित 3 प्रतिशत सार्वजनिक खरीद लक्ष्य को बढ़ावा देना है।

यह अभियान जागरूकता, मार्गदर्शन और क्षमता निर्माण संबंधी पहलों के माध्यम से मौजूदा और भावी महिला उद्यमियों को भी सहयोग प्रदान करता है। जुलाई 2026 तक, यशस्विनी अभियान के माध्यम से महिला-स्वामित्व वाले 22 लाख से अधिक एमएसएमई के पंजीकरण में सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2025-26 में महिला-स्वामित्व वाले एमएसई से कुल सार्वजनिक खरीद 3.8 प्रतिशत रही, जो 3 प्रतिशत के निर्धारित सार्वजनिक खरीद लक्ष्य से अधिक थी।

ऋण: उद्यमों के विकास के लिए वित्तपोषण

प्रबन्‍ध से उद्यमों को मान्यता प्राप्त व्यावसायिक व्यवस्था का हिस्सा बनने में मदद मिलती है, जबकि वित्त तक पहुँच उन्हें निवेश करने, नवाचार को बढ़ावा देने और अपने व्यवसाय का विस्तार करने में सक्षम बनाती है।

महिला-नेतृत्व वाले एमएसएमई के लिए वित्तीय सहायता

क) प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई): वर्ष 2015 में शुरू इस योजना का उद्देश्य गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि क्षेत्र में आय अर्जित करने वाली गतिविधियों में संलग्न सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को 20 लाख रुपये तक का जमानत-मुक्त ऋण उपलब्ध कराकर ऋण तक उनकी पहुँच का विस्तार करना है।

  • शुरुआत से लेकर अप्रैल 2026 तक, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत 57.79 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए, जिनमें महिला उद्यमियों की हिस्सेदारी कुल स्वीकृत ऋणों का दो-तिहाई रही।

ख) सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना: इस योजना की शुरुआत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा उन उद्यमियों के लिए वित्त तक पहुँच बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई, जिन्हें पर्याप्त वित्तीय सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं या जिन तक इन सेवाओं की पहुँच सीमित है। इस योजना के अंतर्गत, महिला-नेतृत्व वाले एमएसई को 90 प्रतिशत का बढ़ा हुआ गारंटी कवरेज तथा गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है।      

  • फरवरी 2026 तक (वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 तक), इस योजना के अंतर्गत महिला-स्वामित्व वाले MSEs के लिए लगभग 30.75 लाख ऋण गारंटियाँ स्वीकृत की गईं, जिनका कुल मूल्य लगभग 2.07 लाख करोड़ रुपये था।

ग) प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी): पीएमईजीपी एक ऋण-संबद्ध सब्सिडी योजना है, जो गैर-कृषि क्षेत्र में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना को सहायता प्रदान करती है। इसके अंतर्गत लाभार्थियों को बैंक ऋण के विरुद्ध मार्जिन मनी (सब्सिडी) के रूप में वित्तीय सहायता दी जाती है। इस योजना के तहत महिलाओं को शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत सब्सिडी प्राप्त करने की पात्रता है।

  • मई 2026 तक, पीएमईजीपी के अंतर्गत सहायता प्राप्त सभी सूक्ष्म उद्यमों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत थी। इसके अतिरिक्त, वितरित की गई कुल मार्जिन मनी सब्सिडी का लगभग 45 प्रतिशत महिलाओं को प्राप्त हुआ।  

 

महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता 

वर्ष 2016 में शुरू किया गया स्टार्टअप इंडिया, नवाचार को बढ़ावा देने और एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्‍टम विकसित करने के लिए सरकार की प्रमुख पहल है। इसके अंतर्गत, सरकार विभिन्न वित्तपोषण पहलों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में और व्यावसायिक चक्र के अलग-अलग चरणों में स्टार्टअप्स को सहायता प्रदान करती है।

  • स्टार्टअप्स के लिए निधियों का कोष (एफएफएस): वर्ष 2016 में स्थापित एफएफएस, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) को पूंजी उपलब्ध कराकर स्टार्टअप्स के लिए वित्तपोषण में सहायता करता है। इसके बाद ये एआईएफ इक्विटी और इक्विटी-संबद्ध वित्तीय साधनों के माध्यम से स्टार्टअप्स में निवेश करते हैं।
  • जनवरी 2026 तक, समर्थित एआईएफ ने वर्ष 2025 से अब तक महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स में लगभग 2,995 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

ख) स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (एसआईएसएफएस): वर्ष 2021 में शुरू यह योजना अनुमोदित इनक्यूबेटरों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को प्रारंभिक वित्तपोषण प्रदान करती है।

  • जनवरी 2026 तक, इस योजना के अंतर्गत समर्थित इनक्यूबेटरों ने महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स के लिए लगभग 294 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की थी।

ग) स्टार्टअप्स के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसएस): अप्रैल 2023 से संचालित यह योजना पात्र स्टार्टअप्स को जमानत-मुक्त ऋण वित्तपोषण उपलब्ध कराने में सहायता करती है। इसके अंतर्गत बैंकों, वित्तीय संस्थानों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सेबी में पंजीकृत एआईएफ द्वारा दिए गए ऋणों पर ऋण गारंटी प्रदान की जाती है।

  • जनवरी 2026 तक, महिला-नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को दिए गए लगभग 39 करोड़ रुपये के ऋणों पर गारंटी प्रदान की गई थी।

बाज़ार तक पहुँच: महिलाओं के कार्य को खरीदारों से जोड़ना

बाजार तक पहुंच महिला उद्यमियों को अधिक खरीदारों तक पहुंचने तथा मांग, गुणवत्ता मानकों, ब्रांडिंग और मूल्य निर्धारण को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।

क) वोमनिया पहल: वोमनिया, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) की एक समावेशन-केन्‍द्रित पहल है, जो महिलाओं के स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को सरकारी क्षेत्र के औपचारिक खरीदारों से जोड़ती है। एक समर्पित डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से, ये उद्यम हथकरघा, जूट, कॉयर (नारियल रेशा) और गृह-सज्जा से संबंधित उत्पादों को पंजीकृत कर सूचीबद्ध कर सकते हैं।

  • जुलाई 2026 तक, जीईएम पर महिलाओं के स्वामित्व वाले 2.17 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम पंजीकृत थे। जीईएम एक समर्पित ई-मार्केटप्लेस है, जिसके माध्यम से सरकारी संगठन, विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद करते हैं।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में, महिला सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को दिए गए अनुबंधों का कुल मूल्य 28,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
  • जीईएम के माध्यम से दिए गए कुल ऑर्डर मूल्य का 5.6 प्रतिशत महिलाओं को प्राप्त हुआ, जो 3 प्रतिशत के अनिवार्य सरकारी खरीद लक्ष्य से अधिक है।

विस्तृत जानकारी के लिए, कृपया देखें: वोमनिया: महिला उद्यमियों के लिए समावेशी बाजार पहुंच का निर्माण

ख) खरीद एवं विपणन सहायता योजना (पीएमएस): यह योजना पंजीकृत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, विक्रेता विकास कार्यक्रमों, ई-कॉमर्स और पैकेजिंग सहायता के माध्यम से बाजार तक पहुंच बनाने में मदद करती है। महिलाओं के स्वामित्व वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यम व्यापार मेलों में निर्मित प्रदर्शनी स्थल के किराए पर 100 प्रतिशत सब्सिडी पाने के पात्र हैं।

ग) एमएसएमई व्यापार सक्षमता एवं विपणन (टीईएएम) पहल : सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) को डिजिटल विपणन तक पहुंच प्रदान करने के उद्देश्य से, रैंप कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2024 से 2027 तक तीन वर्षों के लिए टीईएएम पहल शुरू की गई। इसका उद्देश्य ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के माध्यम से सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने, अपने ग्राहक आधार का विस्तार करने और आय बढ़ाने में सक्षम बनाना है।

  • वित्त वर्ष 2025-26 तक, इस पहल के अंतर्गत महिलाओं के स्वामित्व वाले 1,700 सूक्ष्म एवं लघु उद्यम पंजीकृत किए गए।

बाजार तक पहुंच उद्यम की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को पूर्ण करती है। प्रबंध से उद्यमों को पहचान मिलती है, ऋण से उत्पादन को बढ़ावा मिलता है, और बाजार संबंधी सहायता उत्पादन को आय तथा सतत विकास में परिवर्तित करती है।

 

उभरते क्षेत्रों के लिए कौशल विकास की सुदृढ़ व्यवस्था का निर्माण

प्रौद्योगिकी और विशिष्ट क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अवसरों का विस्तार होने के साथ-साथ, इन क्षेत्रों में उनकी भागीदारी और पहुंच बढ़ाने के लिए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास महत्वपूर्ण हो जाता है।

प्रमुख कौशल विकास योजनाओं के अंतर्गत उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित महिला अभ्यर्थियों की संख्या (वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक)

योजना

उद्देश्‍य

क्षेत्र

 

 

कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता

सेमीकंडक्‍टर

नवीकरणीय ऊर्जा

प्रधान मंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (पीएमकेवीवाई 4.0)

कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप और नवीनतम तकनीकों में प्रशिक्षण पर विशेष जोर।

20,393

5,927

76,671

राष्ट्रीय प्रशिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस)

यह पारंपरिक और उभरते क्षेत्रों में कार्यस्थल पर सवेतन प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षुता प्रशिक्षण को बढ़ावा देती है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षुओं को प्रत्यक्ष वजीफा सहायता भी प्रदान की जाती है।

1,534

-

19,899

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस)

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से व्यावसायिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करती है, जिससे पारंपरिक और उभरते हुए व्यवसायों में रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित होते हैं।

512

31

5,753

 

महिलाओं के लिए लक्षित पहलें

क) किशोरियों के व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से आकांक्षाओं को प्रोत्साहित करना (नव्‍य): वर्ष 2025 में शुरू की गई नव्‍य योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (पीएमकेवीवाई 4.0) के अंतर्गत 3,850 किशोरियों को गैर-पारंपरिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रोजगार भूमिकाओं में लक्षित कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। योजना के अंतर्गत 31 अगस्त 2026 तक, 1,105 किशोरियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

ख) महिलाओं के लिए एआई करियर: वर्ष 2025 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के अंतर्गत छह राज्यों के महिला महाविद्यालयों में 30 उत्कृष्टता केन्‍द्र  स्थापित किए जा रहे हैं। ये केन्‍द्र टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित 150 सहायक केन्‍द्रों (स्पोक सेंटर) को सहयोग प्रदान करेंगे।

इसका उद्देश्य 20,000 शिक्षार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता में व्यावहारिक, उद्योग-प्रासंगिक प्रशिक्षण और परियोजना-आधारित अनुभव प्रदान करना है। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, इंटर्नशिप, शिक्षुता प्रशिक्षण, फेलोशिप, करियर मार्गदर्शन और एआई-सक्षम रोजगार के अवसरों तक पहुंच भी उपलब्ध कराई जाएगी।

ग) विज्ञान एवं इंजीनियरिंग में महिलाएं—अनुसंधान उन्नति में ज्ञान की भागीदारी को प्रोत्साहन (वाइस-किरन): यह योजना फेलोशिप और संस्थागत कार्यक्रमों के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देती है।

  • फेलोशिप कार्यक्रमों में पीएच.डी. के लिए वाइस फेलोशिप (वाइस-पीएचडी), वाइस पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप (वाइस-पीडीएफ), वाइस-सामाजिक चुनौतियां एवं अवसर (वाइस-स्‍कोप), बौद्धिक संपदा अधिकारों में वाइस इंटर्नशिप (वाइस-आईपीआर) तथा वैज्ञानिक उत्कृष्टता एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं की पहल (विदुषी) शामिल हैं। ये कार्यक्रम डॉक्टरेट एवं पोस्ट-डॉक्टोरल अनुसंधान, करियर में पुनः प्रवेश, अनुप्रयोगोन्मुख अनुसंधान, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) संबंधी प्रशिक्षण और अनुसंधान में निरंतर भागीदारी को समर्थन प्रदान करते हैं।
  • संस्थागत कार्यक्रमों में नवाचार एवं उत्कृष्टता के लिए विश्वविद्यालय अनुसंधान का सुदृढ़ीकरण (क्‍यूरी), विज्ञान ज्योति, संस्थानों में परिवर्तन के लिए लैंगिक समानता को बढ़ावा (गति) तथा अंतरिक्ष नेतृत्व में महिलाओं का कार्यक्रम (डब्‍ल्‍यूआईएसएलपी) शामिल हैं।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में 180 महिलाओं ने पीएच.डी. की पढ़ाई की, 606 महिला वैज्ञानिकों को पोस्ट-डॉक्टोरल या अनुप्रयोगोन्मुख अनुसंधान के लिए सहायता मिली, 26 वरिष्ठ वैज्ञानिकों को अनुसंधान एवं विकास संबंधी सहायता प्रदान की गई तथा एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) के क्षेत्र में 29,443 छात्राओं को सहयोग दिया गया।
  • 110 से अधिक महिला वैज्ञानिकों को रोजगार मिला, जबकि 450 से अधिक महिलाओं को अनुसंधान में भागीदारी, कौशल उन्नयन या करियर में पुनः प्रवेश के अवसर प्राप्त हुए।

ये पहलें कौशल विकास और अनुसंधान संबंधी सहायता के माध्यम से उभरते एवं विशिष्ट क्षेत्रों में महिलाओं के लिए करियर के अवसर मजबूत बना रही हैं।

सुरक्षित रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने वाले श्रम सुधार

महिलाओं की कार्यबल में व्यापक भागीदारी केवल रोजगार के अवसरों की उपलब्धता पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि उन अवसरों तक पहुंच बनाना और उनमें निरंतर बने रहना कितना संभव है। इन परिस्थितियों को निर्धारित करने में श्रम संबंधी नियमों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

नवम्‍बर 2025 में, सरकार ने 29 मौजूदा श्रम कानूनों को समेकित करके चार श्रम संहिताओं में शामिल किया: वेतन संहिता, 2019; औद्योगिक संबंध संहिता; सामाजिक सुरक्षा संहिता; तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता, 2020.

इस समेकित ढांचे के अंतर्गत, अनेक प्रावधान कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा, प्रतिनिधित्व और रोजगार तक उनकी पहुंच को मजबूती प्रदान करते हैं।

  • शिकायत निवारण में प्रतिनिधित्व: शिकायत निवारण समितियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कार्यबल में उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में होना अनिवार्य है।
  • मातृत्व लाभ: पात्र महिलाओं को 26 सप्ताह तक का सवेतन मातृत्व अवकाश मिलता है। दत्तक माताओं और कमीशनिंग माताओं (वे जैविक माताएं जो सरोगेसी का सहारा लेती हैं) को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाता है। अन्य प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं:
    • जहां निःशुल्क प्रसव-पूर्व और प्रसव-पश्चात देखभाल की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है, वहां महिलाओं को 3,500 रुपये का चिकित्सा बोनस पाने का अधिकार है।
    • महिलाओं को कार्यदिवस के दौरान दो बार शिशु को दूध पिलाने के लिए अवकाश लेने का अधिकार है। यह सुविधा बच्चे के 15 माह का होने तक उपलब्ध रहती है।
    • कम से कम 50 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में शिशुगृह (क्रेच) की सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य है। नियोक्ता को महिला कर्मचारी को दिन में चार बार शिशुगृह जाने की अनुमति देनी होगी। इसमें विश्राम के अंतराल भी शामिल हैं।
  • रोजगार के व्यापक अवसर: महिलाएं सभी प्रतिष्ठानों में काम कर सकती हैं। इसमें उनकी सहमति और निर्धारित सुरक्षा उपायों के साथ रात्रि पाली में काम करना भी शामिल है।
  • लिंग-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध: भर्ती, वेतन और रोजगार की शर्तों में लिंग के आधार पर भेदभाव करना प्रतिबंधित है।
  • नीतिगत प्रतिनिधित्व: केंद्रीय और राज्य सलाहकार बोर्डों में महिलाओं की हिस्सेदारी एक-तिहाई होना अनिवार्य है। ये बोर्ड न्यूनतम वेतन तथा महिलाओं के रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के उपायों पर सलाह देंगे।

 

 

महिलाओं के रोजगार के अवसरों को सुदृढ़ करने के लिए बेहतर मार्ग

भारत में महिलाओं के रोजगार को लेकर दृष्टिकोण अब उन परिस्थितियों को सुदृढ़ करने पर अधिक केंद्रित हो रहा है, जो महिलाओं को काम करने और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने में सक्षम बनाती हैं। अवसरों का दायरा बढ़ने के साथ, रोजगार, उद्यमिता और अर्थव्यवस्था के नए क्षेत्रों में महिलाओं का योगदान अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

कौशल, वित्त, बाजार और अनुकूल कार्यस्थलों तक बेहतर पहुंच इन अवसरों को और अधिक सशक्त बनाते हैं। इससे भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका और सुदृढ़ होगी तथा विकसित भारत की यात्रा में महिला-नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा मिलेगा।

 

संदर्भ

श्रम और रोजगार मंत्रालय

https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/06/4b7ec0e8206aa4860576d6f75b432e97.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2078530&lang=2&reg=48

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2256177&lang=2&reg=48

वित्‍त मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2249915&lang=1&reg=3

सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्रालय

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वाणिज्‍य और उद्योग मंत्रालय

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कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय

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https://nstiwshimla.dgt.gov.in/en/node/2209

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय

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https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2057970&lang=2&reg=3

https://mospi.gov.in/uploads/publications_reports/publications_reports1787307445576_78c40fd2-1acd-40fb-abb8-15f9491ba4b8_QBUSE_Bulletin_(2).pdf

https://www.mospi.gov.in/national-sample-survey-office

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2284808&reg=48&lang=2

महिला और बाल विकास मंत्रालय

https://sansad.in/getFile/annex/270/AU3029_YErb7m.pdf?source=pqars

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2298220&lang=1&reg=48

पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) अभिलेखागार

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2250664&lang=1&reg=3

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2181702&lang=2&reg=3

https://newindiasamachar.pib.gov.in/WriteReadData/Magazine//2026/May/M202605011.pdf

https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?Id=150499&reg=3&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=154624&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/blogs/blogsdescr.aspx?feaaid=581&lang=1

इन्‍वैस्‍ट इंडिया

https://www.investindia.gov.in/team-india-blogs/women-shaping-future-indian-industries

अंतर्राष्‍ट्रीय संगठन

https://www.unwomen.org/sites/default/files/2024-03/un-women-womens-economic-empowerment-strategy-en.pdf

https://www.ilo.org/sites/default/files/wcmsp5/groups/public/%40ed_emp/%40emp_ent/%40ifp_seed/documents/publication/wcms_766156.pdf

 https://www.worldbank.org/ext/en/topic/competitiveness/small-and-medium-enterprises-smes-finance#tab-context

https://digitalforwomen.worldbank.org/access-markets

 

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पीआईबी शोध

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पीके/केसी/आरटी/केपी


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