वित्त मंत्रालय
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज थाईलैंड के बैंकॉक में विश्व बैंक की विकास समिति के 114वीं पूर्ण बैठक में हिस्सा लिया
प्रविष्टि तिथि:
15 OCT 2026 9:21PM by PIB Delhi
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज विश्व बैंक के गवर्नर के तौर पर थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित विकास समिति की 114वीं पूर्ण बैठक में भाग लिया। बैठक का एजेंडा "निजी पूंजी जुटाना और रोजगार" था।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने "निजी पूंजी जुटाना और रोजगार" विषय पर भारत की ओर से निम्नलिखित भाषण दिया:
"हम निजी पूंजी जुटाने और रोजगार निर्माण पर लगातार ध्यान केंद्रित करने का स्वागत करते हैं। ऊर्जा बाजार में बढ़ते तनाव, व्यापार में उथल-पुथल, जलवायु दबाव और द्रुत तकनीकी परिवर्तन के इस दौर में, उत्पादक और बेहतर वेतन वाली नौकरियां ही गरीबी के उन्मूलन और साझा समृद्धि का सबसे प्रभावी मार्ग बनी हुई हैं।"
मैं संक्षेप में छः बिंदु रखना चाहती हूं।
सबसे पहले, रोजगार निर्माण के लिए समग्र पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता होती है, न कि अलग-अलग हस्तक्षेपों की। लगातार रोजगार निर्माण के लिए उच्च गुणवत्ता और समावेशी आर्थिक विकास आवश्यक है, जिसके लिए व्यापक आर्थिक स्थिरता, कुशल इंफ्रास्ट्रक्चर, सरल और निश्चित नियमन तथा वित्त एवं कौशल तक व्यापक पहुंच की आवश्यकता होती है। हमारा अनुभव बताता है कि ऊर्जा और रोजगार बाजारों तक अंतिम बिंदु तक कनेक्टिविटी, बड़े पैमाने पर भौतिक और डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन और बाजार शक्तियों में नियामकों का भरोसा, उत्पादकता में सुधार और व्यापक स्तर पर रोजगार निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
दूसरा, विकास के एजेंडे के केंद्र में निजी क्षेत्र का ही स्थान होना चाहिए। अधिकांश रोजगार निजी उद्यमों के माध्यम से ही निर्मित किए जाएंगे और किए जाने चाहिए। लघु एवं मध्यम उद्यम और स्टार्टअप इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए निजी निवेश जुटाना बेहद आवश्यक है। साथ ही, सफलता का मापन जुटाए गए वित्तपोषण की मात्रा से नहीं, बल्कि परिणामों: निर्मित रोजगार और उत्पादकता में बढ़ोतरी; से होना चाहिए।
हम आईबीआरडी, आईएफसी और एमआईजीए के बीच मजबूत सहयोग और विश्व बैंक गारंटी प्लेटफॉर्म के तेजी से संचालन को प्रोत्साहित करते हैं। विकासशील अर्थव्यवस्थाएं जोखिम पूंजी की कमी से जूझ रही हैं। गारंटी और जोखिम न्यूनीकरण उपकरण जोखिम पूंजी निर्माण और निजी पूंजी के प्रवाह को बढ़ाने के सबसे प्रभावी साधनों में से हैं।
तीसरा, प्रतिस्पर्धी वित्तपोषण एक प्रमुख प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। विश्व बैंक को प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण, स्थानीय मुद्रा वित्तपोषण जैसे साधनों का इस्तेमाल, मजबूत गारंटी उत्पादों और कम लेन-देन लागत के माध्यम से एक विकास भागीदार बने रहना चाहिए। किफायती, पूर्वानुमानित और सुलभ वित्तपोषण मध्य-आय रणनीति के मूल में होना चाहिए।
चौथा, नॉलेज बैंक को बाजार की विफलताओं को दूर करने में मदद करनी चाहिए। विश्व बैंक समूह के सबसे प्रभावी हस्तक्षेप शहरीकरण, पर्यटन, कृषि निर्यात और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बाजार की विफलताओं को दूर करने में होंगे। विकासशील देशों को एआई से मिलने वाली राज्य क्षमता में बढ़ोतरी से बहुत लाभ हो सकता है: बैंक के परिचालन और जानकारी संबंधी एजेंडे में इस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
पांचवां, हम विश्वव्यापी शासन संकेतकों और इसी तरह के समग्र आकलन के संबंध में अपनी लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दोहराते हैं। इनके दूरगामी असर को देखते हुए, मौजूदा पद्धतियों की व्यापक समीक्षा और संशोधन की आवश्यकता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे पारदर्शी, वस्तुनिष्ठ, साक्ष्य-आधारित हों और वर्तमान वास्तविकताओं तथा सदस्य देशों के विविध विकास अनुभवों के साथ बेहतर ढंग से संरेखित हों। यह बैंक के जानकारी संबंधा उत्पादों की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए आवश्यक होगा।
और अंत में, विकास से विकासशील देशों की आवाज और विकास पर पड़ने वाले प्रभाव को मजबूती मिलनी चाहिए। सफलता का अंतिम मापदंड यह है कि क्या सुधार देशों को रोजगार निर्माण करने, उत्पादकता बढ़ाने, गरीबी कम करने और जीवन स्तर में सुधार लाने में मदद करते हैं। हम बैंक की शासन संरचना में विकासशील देशों की आवाज और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के महत्व को भी दोहराते हैं।
हम इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए साथी शेयरधारकों, प्रबंधन और विकास भागीदारों के साथ काम करने के लिए तैयार है।"
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पीके/केसी/आरटी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2324192)
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