विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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ईएसटीआईसी 2026 के उद्घाटन समारोह में स्वायत्त प्रणालियों, फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के महत्व पर बल दिया गया

प्रविष्टि तिथि: 15 OCT 2026 2:31PM by PIB Delhi

भारत के प्रमुख विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन, इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ईएसटीआईसी 2026) के दूसरे संस्करण का उद्घाटन समारोह आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी भवन में आयोजित किया गया है। इस समारोह में विख्यात हस्तियों और नोबेल पुरस्कार विजेताओं को प्रमु‍खता दी गई है। साथ ही, सम्मेलन के 12 विषयगत क्षेत्रों में से एक के रूप में स्वायत्त प्रणालियों, फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के महत्व को भी विशेष रूप से रखा गया है।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र को एक मंच पर लाने के उद्देश्‍य से “ईएसटीआईसी का विचार प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने दिया था। इस वर्ष का विषय है- “रचनात्मक दिमाग विज्ञान को गति प्रदान करते हैं और प्रौद्योगिकी को सशक्त बनाते हैं”। नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर ने उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई। इस अवसर पर उन्‍होंने इस विषय के बारे में कहा कि वैज्ञानिक नवाचारों के लिए काम करने वाले और फिर उन्हें समाज की सेवा के लिए प्रौद्योगिकी में परिवर्तित करने वाले रचनात्मक दिमागों के संदर्भ में यह वास्तव में उपयुक्त है,”

उन्होंने यह भी कहा कि फिजिकल एआई निश्चित रूप से एआई के विकास में अगली बड़ी चीज होने जा रही है। इस सम्मेलन में साइबर-फिजिकल मिशन के अगले संस्करण की योजना बनाने के तरीके पर विचार-विमर्श करने के अवसर का लाभ उठाया जाना चाहिए।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय में सचिव प्रो. उमेश वाघमारे ने अपने संबोधन में कहा कि ईएसटीआईसी 2026 में भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक, नोबेल पुरस्कार विजेता, उद्योग प्रतिनिधि, प्रौद्योगिकी कंपनियां, स्टार्टअप, उद्यमी और युवा शोधकर्ता एक साथ आएंगे। यह सम्मेलन विकसित भारत 2047 के समर्थन में भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी इकोसिस्‍टम को मजबूत करने के लिए विचारों के आदान-प्रदान और साझेदारी बनाने का अवसर प्रदान करेगा।

प्रोफेसर वाघमारे ने विषय से जुड़ते हुए बताया कि स्वायत्त प्रणालियां, फिजिकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स विनिर्माण, कृषि की वास्‍तविक स्थिति, स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास, रसद, बुनियादी ढांचे की निगरानी और आपदा प्रतिक्रिया में सुरक्षित और अधिक उत्पादक अनुप्रयोगों का समर्थन कर सकते हैं।

उन्होंने विश्वसनीय, सुरक्षित, किफायती और भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास के महत्व पर बल दिया। अंतरविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों पर राष्ट्रीय मिशन के तहत, डीएसटी ने 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र स्थापित किए हैं। इनमें आईआईटी हैदराबाद में तिहान, आईआईटी दिल्ली में आईएचएफसी और आईआईएससी बेंगलुरु में एआरटीपार्क शामिल हैं। ये केंद्र अनुसंधान को इंजीनियरिंग, प्रयोग और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों से जोड़ते हैं।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के बारे में प्रोफेसर वाघमारे ने कहा कि यह प्रौद्योगिकी विकास, अनुवाद और उद्यमिता के माध्यम से अनुसंधान को व्यावहारिक अनुप्रयोगों की ओर ले जाने पर समान ध्यान केंद्रित करता है।

प्रोफेसर वाघमारे ने वैज्ञानिकों, शैक्षणिक और स्वायत्त संस्थानों, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्ट-अप्स, निवेशकों और युवा नवोन्मेषकों को ईएसटीआईसी2026 में भाग लेने और रचनात्मक विचारों को व्यावहारिक प्रौद्योगिकियों में बदलने की दिशा में काम करने के लिए आमंत्रित किया।

कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की संयुक्त सचिव सुश्री ए. धनलक्ष्मी ने ईएसटीआईसी 2026 पर एक प्रस्तुति दी। इसके बाद ईएसटीआईसी का प्रचार वीडियो दिखाया गया। मुख्य अतिथि प्रोफेसर करंदीकर और प्रोफेसर वाघमारे ने ईएसटीआईसी 2026 की विवरणिका  का अनौपचारिक शुभारंभ किया। ईएसटीआईसी का एक वीडियो और डीएसटी के विषयगत सत्र पर भी एक वीडियो दिखाया गया।

हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यक्रम में डीएसटी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ वैज्ञानिक और विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार इकोसिस्‍टम के प्रतिनिधि एक साथ आए।

इस वर्ष के आयोजन का संचालन वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा किया जा रहा है। ईएसटीआईसी 2026 का आयोजन 27 से 29 अक्टूबर तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया जाएगा।

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पीके/केसी/आरटी/वीके/पीके


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