श्रम और रोजगार मंत्रालय
भविष्य निधि (पीएफ) ट्रस्टों की छूट प्राप्त स्थिति को पूर्वव्यापी प्रभाव से नियमित करने के लिए माफी योजना, 2026
ईपीएफओ ने देशव्यापी अभियान तेज किया; पात्र प्रतिष्ठानों को 28 दिसंबर की समय-सीमा की याद दिलाई
प्रविष्टि तिथि:
13 OCT 2026 2:37PM by PIB Delhi
कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना, 2026 में माफी योजना से संबंधित प्रावधान एक संक्रमणकालीन उपाय के रूप में शामिल किए गए थे। इस योजना को 29 जून, 2026 को अधिसूचित किया गया था। इन प्रावधानों के तहत ऐसे भविष्य निधि (पीएफ) ट्रस्टों को अपनी छूट प्राप्त स्थिति नियमित कराने का एकमुश्त अवसर दिया गया है, जिन्हें आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है, लेकिन उनके पास कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 17 अथवा सामाजिक सुरक्षा संहिता (सीओएसएस), 2020 की धारा 143 के तहत जारी औपचारिक छूट आदेश नहीं है।
माफी योजना के संचालन संबंधी दिशा-निर्देशों, जिनमें आवेदन की प्रक्रिया और प्रक्रियागत आवश्यकताएं शामिल हैं, का विवरण 11 जुलाई, 2026 को जारी परिपत्र में दिया गया था। यह योजना अधिसूचना की तारीख से छह महीने की अवधि के लिए जारी है और इसकी समय-सीमा 28 दिसंबर, 2026 को समाप्त होगी। समय-सीमा में तीन महीने से भी कम समय शेष रहने के मद्देनजर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) देशभर के पात्र प्रतिष्ठानों से अपने आवेदन शीघ्र जमा करने का आग्रह कर रहा है। छूट प्राप्त स्थिति को पूर्वव्यापी प्रभाव से नियमित करने के अतिरिक्त, इस योजना के प्रमुख लाभों में सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत निर्धारित वैधानिक आवश्यकताओं से छूट भी शामिल है। इनमें कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या, निधि की राशि तथा तीन वर्ष के अनुपालन संबंधी नियम शामिल हैं। स्थिति नियमित होने के बाद प्रतिष्ठानों को परिचालन संबंधी पूरी लचीलापन भी मिलेगा, जिसके तहत वे छूट प्राप्त अथवा गैर-छूट प्राप्त प्रतिष्ठान के रूप में अनुपालन करने का विकल्प चुन सकेंगे।
योजना के बारे में अधिकतम जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए ईपीएफओ ने देशभर में विभिन्न माध्यमों से व्यापक पहल की है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) सहित प्रमुख उद्योग एवं बाजार संगठनों के सहयोग से रणनीतिक बैठकें और सेमिनार आयोजित किए गए हैं। पात्र पीएफ ट्रस्टों की पहचान करने और उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए सनदी लेखाकारों तथा वैधानिक लेखा परीक्षकों को विशेष रूप से इस कार्य में लगाया गया है। इसके साथ ही, ईपीएफओ के देशभर में स्थित आंचलिक और क्षेत्रीय कार्यालयों ने स्थानीय प्रतिष्ठानों, नियोक्ताओं तथा ट्रस्ट सदस्यों से सीधे संपर्क स्थापित करने के लिए देशव्यापी सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित की हैं। इन प्रयासों को मल्टीमीडिया अभियानों, सोशल मीडिया के माध्यम से जनसंपर्क तथा प्रक्रियागत अनुपालन संबंधी दिशा-निर्देशों को सरल रूप में समझाने वाले व्याख्यात्मक इन्फोग्राफिक्स के जरिए समर्थन दिया जा रहा है।
आवेदकों को प्रभावी सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से, मुख्यालय के छूट प्रभाग ने देशभर में तैनात ईपीएफओ के क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए विशेष हाइब्रिड प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। इसके अतिरिक्त, विभागीय अधिकारियों और नियोक्ताओं, दोनों के लिए संस्थागत एवं नियोक्ता-स्तर पर दोहरी प्रशिक्षण व्यवस्था के तहत ऑनलाइन मॉड्यूल के माध्यम से तथा पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (पीडीयूएनएएसएस) में प्रत्यक्ष रूप से प्रशिक्षण दिया गया है।
इसके अलावा, ईपीएफओ ने छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के अभिलेखों को साझा करने की व्यवस्था संस्थागत बनाने के लिए वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग/आयकर विभाग के साथ सक्रिय समन्वय किया है। इस डेटा एकीकरण का उद्देश्य ऐसे पीएफ ट्रस्टों की पहचान करना, उनके अभिलेखों का परस्पर सत्यापन करना तथा उन्हें वैधानिक दायरे में लाना है, जिनकी स्थिति अधिसूचित नहीं है या जो अनुपालन नहीं कर रहे हैं। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि आयकर विभाग से मान्यता प्राप्त ऐसे ट्रस्ट, जिनके पास ईपीएफओ का औपचारिक छूट आदेश नहीं है, वह भी अपनी स्थिति समय पर नियमित करा सकें। ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय निर्धारित समय-सीमा के भीतर नियमितीकरण के आवेदन जमा कराने में सहायता के लिए लगातार आगे की कार्रवाई कर रहे हैं।
देशभर के पात्र पीएफ ट्रस्टों को सलाह दी जाती है कि वे इस एकमुश्त अवसर का लाभ उठाएं, ताकि आयकर विभाग से मान्यता प्राप्त ट्रस्टों को उपलब्ध आयकर लाभ जारी रह सकें।
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पीके/केसी/आरटी/एके/एम
(रिलीज़ आईडी: 2322802)
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