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तरंग शक्ति अभ्यास 2026: साझेदारी में शक्ति, आत्मनिर्भरता में सामर्थ्य

प्रविष्टि तिथि: 12 OCT 2026 5:42PM by PIB Delhi

भारतीय वायु सेना द्वारा 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर आयोजित तरंग शक्ति अभ्यास का दूसरा संस्करण, सहयोगी वायु सेनाओं के साथ भारत की बढ़ती सहभागिता और क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में इसकी उभरती भूमिका में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 'साझेदारी में शक्ति' की थीम पर आधारित इस बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास में सात मित्र विदेशी देश (एफएफसी) - ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका - तथा 32 पर्यवेक्षक देश शामिल हैं। यह भागीदारी भारत की परिचालन क्षमताओं, पेशेवर मानकों और विस्तारित एयरोस्पेस एवं डिफेंस इकोसिस्‍टम में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय रुचि को दर्शाती है।

वर्ष 2024 में अपने पहले संस्करण की सफलता को आगे बढ़ाते हुए तरंग शक्ति 2026 ने जटिल संयुक्त अभियानों, परिचालन अनुभवों के आदान-प्रदान और भाग लेने वाली वायु सेनाओं के बीच बेहतर अंतर-संचालनीयता के लिए एक मंच प्रदान किया। इस अभ्यास में विविध युद्ध, परिवहन, निगरानी और वायु-से-वायु ईंधन भरने की क्षमताओं को एक साथ लाया गया, जिससे वायुसैनिकों, मिशन योजनाकारों और सहायक कर्मियों को एक-दूसरे की परिचालन रणनीतियों और प्रक्रियाओं की बहुमूल्य जानकारी प्राप्त करने में मदद मिली। बड़ी संख्या में पर्यवेक्षक देशों की उपस्थिति ने अभ्यास के रणनीतिक महत्व को और भी बढ़ा दिया, जिससे रचनात्मक रक्षा जुड़ाव और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बल मिला।

इस अभ्यास की समकालीन प्रासंगिकता ऑपरेशन सिंदूर में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका से स्पष्ट होती है, जिसने राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए सटीक, सुनियोजित और प्रभावी अभियानों को अंजाम देने की भारतीय वायु सेना की क्षमता को प्रदर्शित किया। इस ऑपरेशन ने जटिल सुरक्षा परिवेश में परिचालन तत्परता, एकीकृत योजना, विश्वसनीय प्रतिरोध और वायु शक्ति के प्रभावी उपयोग के महत्व को उजागर किया। परिचालन अनुभव से प्राप्त ज्ञान, आधुनिक युद्ध की उभरती चुनौतियों के लिए पेशेवर समझ को बढ़ावा देने और तैयारी करने में तरंग शक्ति जैसे बहुराष्ट्रीय अभ्यासों के महत्व को पुष्ट करता है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत के तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के विजन का केंद्रबिंदु बनी हुई है। हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच) प्रचंड सहित स्वदेशी प्लेटफार्मों की भागीदारी, स्वदेशी डिजाइन, इंजीनियरिंग और विनिर्माण के माध्यम से उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं के विकास में हुई प्रगति को रेखांकित करती है। अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्मों के साथ इनकी उपस्थिति आधुनिक सैन्य प्रणालियों को विकसित करने और तैनात करने की भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। तरंग शक्ति साझेदार देशों को भारत के एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग की क्षमताओं को समझने का अवसर भी प्रदान करती है, जो भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के विजन और रक्षा नवाचार और विनिर्माण में भारतीय उद्योग की बढ़ती भूमिका के अनुरूप है।

तरंग शक्ति का दायरा हवाई अभियानों से कहीं अधिक विस्तृत है। औद्योगिक दौरे प्रतिभागी दलों को भारत के बढ़ते एयरोस्पेस, रक्षा विनिर्माण और तकनीकी इकोसिस्‍टम से परिचित कराते हैं, जबकि पेशेवर गतिविधियां ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान को बढ़ावा देती हैं। योग सत्र, विरासत स्थलों का भ्रमण और अन्य अंतःक्रियाएं प्रतिभागियों को भारत की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का अनुभव करने के अवसर प्रदान करती हैं। इंटरनेशनल नाइट प्रतिभागी देशों द्वारा प्रस्तुत विविध संस्कृतियों और परंपराओं का उत्सव है, जो परिचालन परिवेश से परे सौहार्द और आपसी समझ को मजबूत करती है।

जनसंपर्क इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू रहा है। ओपन डे में 20,000 से अधिक आगंतुक आए, जिससे जनता को भारतीय वायु सेना की शक्ति को देखने और उसके विमानों, परिचालन क्षमताओं और कर्मियों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। इस तरह की सहभागिता सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच संबंधों को मजबूत करती है, साथ ही युवा पीढ़ी को विमानन, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्र सेवा के बारे में सीखने के लिए प्रेरित करती है।

यह अभ्यास इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि देश भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ मना रहा है। नौ दशकों से अधिक समय में, भारतीय वायु सेना एक साधारण बल से विकसित होकर एक आधुनिक, बहुआयामी एयरोस्पेस शक्ति बन गई है, जिसकी परिचालन क्षमता का विस्तार हो रहा है, उन्नत प्लेटफार्म मौजूद हैं, एकीकृत क्षमताएं हैं और स्वदेशी तकनीकी आधार लगातार मजबूत हो रहा है। इसका परिचालन अनुभव, पेशेवर उत्कृष्टता और निरंतर आधुनिकीकरण एक ऐसी संस्था को दर्शाता है जो उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है और साथ ही भविष्य के युद्ध की मांगों के लिए भी तैयार है।

तरंग शक्ति 2026 अभ्यास परिवर्तन की इस यात्रा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। परिचालन क्षमता, स्वदेशी नवाचार, अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता और जन जागरूकता के संयोजन से यह अभ्यास राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा आत्मनिर्भरता और स्थायी साझेदारी के प्रति देश की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है। भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर, 'साझेदारी में शक्ति' इसके विजन के एक प्रमुख सिद्धांत को दर्शाती है : एक मजबूत, सक्षम और आत्मनिर्भर वायु सेना, जो विश्वसनीय साझेदारों के साथ मिलकर शांति, स्थिरता और सुरक्षा में योगदान देती है।

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पीके/केसी/आरटी/एचएन/जीआरएस 


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