PIB Backgrounder
समय की बचत, यात्रा छोटी
भारत की अवसंरचना से जगह आ रही करीब
प्रविष्टि तिथि:
05 OCT 2026 12:49PM by PIB Delhi
घंटों की बचत संपर्क सुविधा का अनुमान
लाखों यात्रियों के लिए, बेहतर संपर्क सुविधा का मतलब सिर्फ़ यह नहीं है कि कितने किलोमीटर सड़क बनी, बल्कि यात्रा में कितने घंटे बचे, यह मायने रखता है। पूरे भारत में, नए पुल, सुरंगें, एक्सप्रेसवे और रेल सेवाएँ शहरों, इलाकों और समुदायों के बीच यात्रा के समय को बदल रही हैं। लंबे चक्कर, मुश्किल रास्तों और धीमी गति वाले मार्ग की जगह सीधे और तेज़ कनेक्शन के माध्यम से ये परियोजनाएं रोज़मर्रा की यात्रा में अवसंरचना से होने वाले परिवर्तन को स्पष्ट रूप से दिखा रही हैं। जैसे-जैसे तेज़ लिंक देश के ज़्यादा हिस्सों तक पहुँच रहे हैं, रोज़मर्रा की आवाजाही में दूरी अब कोई बड़ी रुकावट नहीं रह गई है।
पुल: बाधाएं दूर, यात्रा का समय कम
पुल रोज़मर्रा की यात्रा से नदियों को पार करने में लगने वाले लंबे और धीमे समय को खत्म कर रहे हैं और उन यात्राओं को अब बहुत कम समय में पूरा किया जा रहा है जिनमें पहले घंटों लगते थे।

- भूपेन हज़ारिका सेतु/धोला-सदिया पुल, असम-अरुणाचल प्रदेश (मई, 2017)
6 घंटे → 1 घंटा
असम में रुपई और अरुणाचल प्रदेश में मेका/रोइंग के बीच यात्रा का समय छह घंटे से घटकर एक घंटा रह गया है, जिससे पाँच घंटे की बचत हुई है।
- बोगीबील पुल, असम (दिसंबर, 2018)
पूरे दिन की यात्रा → 1-2 घंटे
ब्रह्मपुत्र पर बने रेल-सह-सड़क पुल ने धेमाजी और डिब्रूगढ़ के बीच संपर्क सुविधा को बदल दिया है। जिन यात्राओं में पहले लगभग पूरा दिन लगता था, उनमें अब लगभग एक से दो घंटे लगते हैं।
- अटल सेतु, महाराष्ट्र (जनवरी, 2024)
2 घंटे → 20 मिनट
मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक मुंबई और नवी मुंबई के बीच सीधा कनेक्शन उपलब्ध कराता है, जिससे यात्रा का समय घटकर लगभग 20 मिनट रह गया है।
- कोसी रेल महासेतु, बिहार (सितंबर, 2020)
8 घंटे → 30 मिनट
कोसी रेल महासेतु ने निर्मली और सरायगढ़ के बीच रेल यात्रा के समय को लगभग आठ घंटे से घटाकर 30 मिनट कर दिया है। इसके साथ ही इसने दूरी को भी लगभग 300 किमी से घटाकर 22 किमी कर दिया है।
- सिसेरी नदी पुल, अरुणाचल प्रदेश (नवंबर, 2019)
लगभग 5 घंटे की बचत
200 मीटर लंबे सिसेरी नदी पुल ने पासीघाट और रोइंग के बीच यात्रा के समय को लगभग पांच घंटे कम कर दिया है, जिससे दिबांग घाटी और सियांग के बीच संपर्क सुविधा मजबूत हुई है।
सुरंगें: मुश्किल क्षेत्रों को काटकर, घंटों की बचत
सुरंगें भारत के सबसे मुश्किल क्षेत्रों से होकर सबसे छोटा रास्ता बनाती हैं। पहाड़ों, घुमावदार सड़कों और खतरनाक रास्तों से बचते हुए, ये यात्रा के समय को कम करती हैं और यात्रा को आसान बनाती हैं।

- अटल सुरंग, हिमाचल प्रदेश (अक्टूबर, 2020)
4–5 घंटे की बचत
यह सुरंग 9.02 किलोमीटर लंबी है जो रोहतांग दर्रे से अलग होकर गुजरती है और मनाली-सारचू के बीच की दूरी को 46 किलोमीटर कम करती है। इससे लाहौल-स्पीति के लिए हर मौसम में संपर्क सुविधा मिलती है।
- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग, जम्मू-कश्मीर (अप्रैल, 2017)
लगभग 2 घंटे की बचत
यह सुरंग 9 किलोमीटर लंबी है जो मुश्किल रास्तों से अलग होकर गुजरती है, यात्रा की दूरी को लगभग 30 किलोमीटर कम करती है। यह जम्मू-श्रीनगर के बीच यात्रा के समय को लगभग दो घंटे कम कर देती है।
- बनिहाल-काजीगुंड रोड टनल, जम्मू-कश्मीर (अप्रैल, 2022)
~1.5 घंटे की बचत
यह ट्विन-ट्यूब सुरंग 8.45 किलोमीटर लंबी है जो सड़क की दूरी को 16 किलोमीटर कम करती है। यह यात्रा के समय को लगभग डेढ़ घंटे कम कर देती है।
- सेला सुरंग, अरुणाचल प्रदेश (मार्च, 2024)
यात्रा के समय में 1 घंटे से अधिक कमी
लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई पर बनी यह सुरंग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेजपुर-तवांग मार्ग पर हर मौसम में संपर्क सुविधा सुनिश्चित करती है।
एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर
एक्सप्रेसवे छोटे रास्तों, नियंत्रित पहुंच और तेज़ गति के ज़रिए शहरों के बीच यात्रा की रफ़्तार बदल रहे हैं। लंबी यात्राओं में पहले कई घंटे लगते थे, लेकिन अब वे बहुत तेज़ सड़क यात्राओं में बदल गई हैं।
- दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (2021)
2.5 घंटे → 50 मिनट
82 किलोमीटर लंबी इस परियोजना ने दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा के समय को लगभग ढाई घंटे से घटाकर लगभग 50 मिनट कर दिया है।
- बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेसवे (मार्च, 2023)
3 घंटे → 75 मिनट
118 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे ने बेंगलुरु और मैसूरु के बीच यात्रा के समय को लगभग तीन घंटे से घटाकर लगभग 75 मिनट कर दिया है।
- दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (अप्रैल, 2026)
6 घंटे → 2.5 घंटे
213 किलोमीटर लंबा यह नियंत्रित पहुंच गलियारा (एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर) दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा के समय को छह घंटे से ज़्यादा से घटाकर लगभग ढाई घंटे कर देता है।
- मुंबई–नागपुर समृद्धि महामार्ग (दिसंबर, 2022)
16 घंटे → ~8 घंटे
701 किलोमीटर लंबे नियंत्रित पहुंच (एक्सेस-कंट्रोल्ड) एक्सप्रेसवे ने मुंबई और नागपुर के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर दिया है।
- अहमदाबाद–धोलेरा एक्सप्रेसवे (मार्च, 2026)
अहमदाबाद-धोलेरा: 100 किमी और 2 घंटे 15 मिनट → 83 किमी और 45 मिनट
अहमदाबाद से भावनगर: 169 किमी और 3 घंटे 15 मिनट → 141 किमी और 1 घंटा 45 मिनट
109 किलोमीटर लंबा यह नियंत्रित पहुंच (एक्सेस-कंट्रोल्ड) ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अहमदाबाद और धोलेरा के बीच तेज़ गति वाला संपर्क प्रदान करता है।
- दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे (पहला चरण - जुलाई, 2026)
दिल्ली–अमृतसर: 8 घंटे → 4 घंटे
दिल्ली–कटरा: 14 घंटे → 6 घंटे
इस एक्सप्रेसवे को श्री माता वैष्णो देवी जाने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही को बढ़ावा देने और इस गलियारे के साथ औद्योगिक व लॉजिस्टिक्स विकास को गति देने के लिए विकसित किया जा रहा है।
33 घंटे → ~12 घंटे
यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा के समय को लगभग 33 घंटे से घटाकर करीब 12 घंटे करने के लिए बनाया जा रहा है।

रेलवे: तेज़ रेलगाड़ियां, कम समय की यात्रा
नई पीढ़ी की रेलगाड़ियाँ और विशेष हाई-स्पीड कॉरिडोर रेल यात्रा में काफी समय बचा रहे हैं। 2026 की रेलवे समय सारिणी इस बदलाव को दिखाती है, जिसमें पूरे नेटवर्क पर 549 रेलगाड़ियों की गति बढ़ाई गई है। इनमें से 20 रेलगाड़ियाँ 60 मिनट या उससे ज़्यादा तेज़ हो गईं। 48 अन्य रेलगाड़ियों का समय 31-59 मिनट कम हुआ, जबकि 105 रेलगाड़ियों का समय 16-30 मिनट कम हुआ। बाकी 376 रेलगाड़ियों की गति 5-15 मिनट बढ़ाई गई।
नई पीढ़ी की रेलगाड़ियाँ
- वंदे भारत एक्सप्रेस, नई दिल्ली-वाराणसी (फरवरी, 2019)
पुरानी सेवाओं की तुलना में 40-50% तेज़
भारत की पहली वंदे भारत 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-कानपुर-प्रयागराज-वाराणसी कॉरिडोर पर शुरू की गई थी। नई दिल्ली और वाराणसी के बीच यात्रा का तय समय लगभग आठ घंटे है, जो इस मार्ग पर पहले की सेवाओं की तुलना में इसे लगभग 40-50% तेज़ बनाता है।
- वंदे भारत एक्सप्रेस, कटरा-श्रीनगर (जून, 2025)
2-3 घंटे की बचत
इस ट्रेन ने कटरा-श्रीनगर की यात्रा को लगभग तीन घंटे का कर दिया है। जम्मू-श्रीनगर तक बढ़ाई गई सेवा अब यह यात्रा 4 घंटे 50 मिनट में पूरी करती है।
- वंदे भारत एक्सप्रेस, बनारस-खजुराहो (नवंबर, 2025)
~2 घंटे 40 मिनट की बचत
यह ट्रेन पहले चलने वाली स्पेशल रेलगाड़ियों की तुलना में लगभग 2 घंटे 40 मिनट बचाती है।
- वंदे भारत एक्सप्रेस, एर्णाकुलम -बेंगलुरु (नवंबर, 2025)
2 घंटे से ज़्यादा की बचत
यह सेवा यात्रा को 8 घंटे 40 मिनट में पूरा करती है, जिससे यात्रा के समय में दो घंटे से ज़्यादा की कमी आई है।
- वंदे भारत एक्सप्रेस, लखनऊ–सहारनपुर (नवंबर, 2025)
लगभग 1 घंटे की बचत
यह ट्रेन लगभग 7 घंटे 45 मिनट में यात्रा पूरी करती है।
- वंदे भारत स्लीपर, हावड़ा–गुवाहाटी (जनवरी, 2026)
~17 घंटे → ~14 घंटे
भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, सरायघाट एक्सप्रेस की तुलना में लगभग तीन घंटे बचाती है। इसमें लगभग 823 यात्रियों के लिए 16 एयर-कंडीशन्ड कोच हैं।

हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
- मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर
सड़क मार्ग से 8–9 घंटे → ~1 घंटा 58 मिनट
508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में रेलगाड़ियां 320 किमी/घंटा की रफ़्तार से चलेंगी और यह 12 स्टेशनों को जोड़ेगा। इसमें समुद्र के नीचे बनी भारत की पहली रेल सुरंग भी शामिल है, जो ठाणे क्रीक के नीचे लगभग 7 किलोमीटर लंबी है। पहली सेवा अगस्त 2027 में शुरू करने का लक्ष्य है।
- घोषित सात हाई-स्पीड रेल (HSR) कॉरिडोर
लगभग 1–4 घंटे की दूरी वाले प्रमुख शहरों के बीच
केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषित ये कॉरिडोर लगभग 4,000 किलोमीटर में फैले होंगे और इनमें अनुमानित निवेश ₹16 लाख करोड़ होगा।
|
कॉरिडोर
|
यात्रा में लगने वाला अनुमानित समय
|
|
दिल्ली–वाराणसी
|
~3 घंटे 50 मिनट
|
|
वाराणसी–पटना–सिलीगुड़ी
|
~2 घंटे 55 मिनट
|
|
चेन्नई–बेंगलुरु
|
~1 घंटा 13 मिनट
|
|
बेंगलुरु–हैदराबाद
|
~2 घंटे
|
|
चेन्नई–हैदराबाद
|
~2 घंटे 55 मिनट
|
|
मुंबई–पुणे
|
~48 मिनट
|
|
पुणे–हैदराबाद
|
~1 घंटा 55 मिनट
|
यात्रियों और समुदायों के लिए बचाए गए घंटे
भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में हो रहे बदलाव से लोगों और क्षेत्रों के आपस में जुड़ने का तरीका बदल रहा है। पुल और सुरंगें नए रास्ते खोल रहे हैं, जबकि एक्सप्रेसवे और आधुनिक रेल सेवाएँ लंबी दूरी की यात्रा को नया रूप दे रही हैं। ये सभी मिलकर आवाजाही को आसान बना रहे हैं और अलग-अलग इलाकों तक पहुँच बढ़ा रहे हैं।
संदर्भ
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय:
रेल मंत्रालय:
प्रधानमंत्री कार्यालय:
पत्र सूचना कार्यालय:
वित्त मंत्रालय:
रक्षा मंत्रालय:
महाराष्ट्र सरकार:
Click to see pdf
पीआईबी रिसर्च
***
पीक/केसी/आरटी/पीबी
(रिलीज़ आईडी: 2319055)
आगंतुक पटल : 184
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें:
English