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नीति आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार और UNDP के सहयोग से राज्य सहायता मिशन के अंतर्गत कोलकाता में SDG के बजट पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया

प्रविष्टि तिथि: 02 OCT 2026 11:35AM by PIB Delhi

नीति आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के तकनीकी सहयोग से, नीति आयोग की राज्य सहायता मिशन (SSM) पहल के अंतर्गत 29 सितंबर 2026 को कोलकाता में सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के बजट पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के साथ योजना और बजट प्रक्रियाओं के संरेखण को सुदृढ़ करना था, जिसमें एसडीजी बजट टैगिंग को संस्थागत रूप देने और वित्तीय प्रतिबद्धताओं को उप-राष्ट्रीय स्तर पर मापने योग्य विकास परिणामों में परिवर्तित करने पर जोर दिया गया।

इस कार्यशाला में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागियों के साथ-साथ नीति आयोग, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और उसके कार्यालयों, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI), लेखा महानियंत्रक (CGA), सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE), भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान (IICA), यूएनडीपी, संयुक्त राष्ट्र निवासी समन्वयक कार्यालय (UNRCO), विकास साझेदारों और FCI, CII, SEBI, टाटा स्टील फाउंडेशन, इंटेलेकैप और GIZ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हरियाणा, ओडिशा, मेघालय और पश्चिम बंगाल के सरकारी प्रतिनिधियों ने एसडीजी बजट के कार्यान्वयन और संस्थागतकरण पर अपने अनुभव साझा किए, जो एसडीजी के स्थानीयकरण के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाता है।

उद्घाटन सत्र में पश्चिम बंगाल सरकार के माननीय वित्त मंत्री डॉ. स्वपन दासगुप्ता; नीति आयोग के माननीय सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम; भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक श्री के. संजय मूर्ति (वर्चुअल माध्यम से); भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन (वर्चुअल माध्यम से); पश्चिम बंगाल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त); संयुक्त राष्ट्र के निवासी समन्वयक श्री स्टीफन प्रीसनर; यूएनडीपी की निवासी प्रतिनिधि डॉ. एंजेला लुसिगी; और नीति आयोग के कार्यक्रम निदेशक (SDGs) श्री राजीव कुमार सेन उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में डॉ. स्वपन दासगुप्ता ने कहा, "हमारे पास हमेशा से लक्ष्य से उद्देश्य, बजट में आवंटन और वास्तव में खर्च करने वाली इकाई तक एक स्पष्ट रेखा नहीं रही है। इस रेखा के बिना, सतत विकास लक्ष्य खाते के परिसंपत्ति पक्ष में एक आकांक्षा बनकर रह जाते हैं, जिनका देनदारी पक्ष में कोई प्रासंगिक विवरण नहीं होता। सतत विकास लक्ष्य बजट टैगिंग उस रेखा को खींचने का अनुशासन है।"

अपने मुख्य भाषण में डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा, "राज्य के व्यय के साथ सतत विकास लक्ष्यों का मानचित्रण एक महत्वपूर्ण कदम है। 'संपूर्ण समाज' और 'संपूर्ण सरकार' जैसे विचार भले ही नारों की तरह लगें, लेकिन वित्त विभाग, राजनीतिक नेतृत्व, बहुपक्षीय संस्थाओं और निजी क्षेत्र के एक साथ आने से आज यह विचार साकार हो उठता है। आगे का कार्य प्रत्येक राज्य को इस प्रकार मार्गदर्शन देना है ताकि यह दिखाया जा सके कि खर्च किया गया धन बुद्धिमानी से खर्च किया गया है।"

पश्चिम बंगाल सरकार के वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री प्रभात कुमार मिश्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्य ने पहली बार अपने बजट को सतत विकास लक्ष्यों के स्तर के अनुरूप तैयार किया है और इस प्रक्रिया को अपनी एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली में शामिल किया है।

श्री स्टीफ़न प्रीसनर ने CSR, व्यावसायिक उत्तरदायित्व और सतत विकास रिपोर्टिंग, पूंजी बाज़ारों में ESG और सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज सहित निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए भारत के सहायक ढांचे पर प्रकाश डाला और सतत विकास को मुख्य व्यावसायिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. एंजेला लुसिगी ने विशिष्ट एसडीजी लक्ष्यों के साथ व्यय को जोड़ने और यह आकलन करने में एसडीजी बजट टैगिंग के महत्व को रेखांकित किया कि क्या संसाधन उन लोगों तक पहुंच रहे हैं जिन्हें उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है, साथ ही CSR, निवेश और परोपकार को विकास प्राथमिकताओं के साथ संरेखित करने में भी इसका महत्व बताया। उन्होंने सार्वजनिक और निजी संगठनों को SDG को निर्णय लेने के केंद्र में रखने में सहायता करने के लिए ISO और UNDP द्वारा शुरू किए गए संयुक्त मानकों का भी उल्लेख किया।

चर्चाओं में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप बजट तैयार करने से सरकारें विकास लक्ष्यों के संदर्भ में व्यय को स्पष्ट रूप से देख सकेंगी, कमियों की पहचान कर सकेंगी और साक्ष्य-आधारित योजना को मज़बूत कर सकेंगी। नीति आयोग, भारत के केंद्रीय सरकारी प्राधिकरण और UNDP द्वारा संयुक्त रूप से विकसित "गाइड ऑन मैपिंग स्टेट बजट्स टू द SDGs" पर चर्चा की गई, जो राज्य बजट को लक्ष्यों के साथ संरेखित करने के लिए एक व्यावहारिक फ्रेमवर्क है। विचार-विमर्श में वार्षिक बजट चक्र में सतत विकास प्राथमिकताओं को शामिल करने और माप से मिशन-आधारित कार्यान्वयन की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक संस्थागत व्यवस्था स्थापित करने के महत्व पर भी बल दिया गया।

कार्यशाला में SDG बजट टैगिंग के डिजाइन तत्वों को कवर करने वाले चार तकनीकी सत्र शामिल थे, जिनमें टैग किए जाने वाले व्यय की पहचान, टैगिंग का उपयुक्त स्तर, लेखा प्रमुख के साथ संबंध, SDG लक्ष्यों के साथ टैगिंग, नीति आयोग की योजना-SDG मैपिंग के माध्यम से आवंटन और मूल्य निर्धारण शामिल थे।

हरियाणा, ओडिशा, मेघालय और पश्चिम बंगाल सहित राज्यों ने कार्यान्वयन और संस्थागतकरण के अपने अनुभव साझा किए। सतत विकास लक्ष्यों के लिए बजट को वार्षिक बजट चक्र में एकीकृत करने पर हुई चर्चा में संस्थागत जिम्मेदारियां, सामंजस्य, गुणवत्ता आश्वासन, रिपोर्टिंग और प्रदर्शन लेखापरीक्षा जैसे विषय शामिल थे।

श्री नवनीत गुप्ता, प्रधान महालेखाकार (A&E) के नेतृत्व में आयोजित सत्र " मेकिंग इट हेप्पन :एसडीजी बजटिंग इन द ऐन्यूअल बजट साइकल " में बजट निर्माण में एसडीजी बजट टैगिंग के एकीकरण, संस्थागत जिम्मेदारियों और जवाबदेही तंत्रों, जिनमें सामंजस्य, गुणवत्ता आश्वासन, रिपोर्टिंग और प्रदर्शन लेखापरीक्षा शामिल हैं, के साथ-साथ सीएजी की भूमिका का भी विश्लेषण किया गया।

सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के प्रति निजी क्षेत्र की निरंतर भागीदारी को मजबूत करने के लिए सहायक नीतिगत फ्रेमवर्क, अभिनव वित्तपोषण और जिम्मेदार व्यावसायिक आचरण पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में टाटा स्टील फाउंडेशन, इंटेलेकैप, IICA, MoSPI, फिक्की, GIZ, आईटीसी लिमिटेड, CII और SEBI के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भारत, विकसित भारत@2047  की ओर अग्रसर है, जिसमें सतत विकास लक्ष्यों के लिए 2030 एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। कार्यशाला में नीति आयोग ने सहकारी संघवाद को मजबूत करने और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को उनकी योजना, बजट और शासन प्रक्रियाओं में सतत विकास लक्ष्यों को शामिल करने में सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। विचार-विमर्श में सार्वजनिक व्यय, विकास प्राथमिकताओं और मापने योग्य परिणामों के बीच संबंध को मजबूत करने तथा मापन से कार्यान्वयन की ओर संक्रमण को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

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पीके /केसी /आरटी/जेएस


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