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साधना श्रंखला: मिशन कर्मयोगी पर पहली क्षेत्रीय कार्यशाला विजयवाड़ा में संपन्न


कार्यशाला ने उन्नति एवं क्षमता निर्माण आयोग के प्रशिक्षण संस्थान के परिवर्तन ढांचे के जरिए प्रशिक्षण से क्षमता निर्माण की ओर बदलाव को मजबूती प्रदान किया

सभी सात प्रतिभागी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने प्रशिक्षण संस्थानोंको क्षमता निर्माण संस्थानों में बदलने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं व कार्य योजनाओं को प्रस्तुत किया

आंध्र प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ने पूरे भारत में सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थान इकोसिस्टम को बेहतर बनाने के लिए सीबीसी की परिवर्तनकारी पहलों की सराहना की

प्रविष्टि तिथि: 01 OCT 2026 8:07PM by PIB Delhi

क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) द्वारा मिशन कर्मयोगी पर साधना श्रृंखला  के तहत आयोजित पहली क्षेत्रीय कार्यशाला 30 सितंबर 2026 को विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश में संपन्न हुई। दो दिवसीय कार्यशाला (29-30 सितंबर 2026) का विषय "प्रशिक्षण संस्थानों से क्षमता निर्माण संस्थानों की ओर" था। इसमें आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, पुडुचेरी, केरल और तमिलनाडु से 300 से अधिक प्रतिभागियों के साथ-साथ इन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के विषय विशेषज्ञ (एसएमई) शामिल हुए। इनमें प्रशिक्षण संस्थानों, प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों (एटीआई), सामान्य प्रशासन विभागों और अकादमियों के प्रमुख एवं संकाय सदस्य शामिल थे।

पृष्ठभूमि

साधना (स्ट्रेंथनिंग एडाप्टिव डेवलपमेंट एंड ह्यूमन एप्टीट्यूड ऑर नेशनल एडवांसमेंट) श्रृंखला क्षेत्रीय परामर्श बैठकों की एक देशव्यापी श्रृंखला है। यह सीबीसी द्वारा पहले आयोजित हितधारक परामर्शों पर आधारित है, जैसे— साधना सप्ताह 2026 (2-8 अप्रैल 2026) के दौरान आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण सम्मेलन, जो प्रौद्योगिकी, परंपरा और मूर्त परिणामों पर केंद्रित था, तथा "क्षमता निर्माण का संस्थागतकरण: प्रशिक्षण से प्रदर्शन-संबंधित शासन तक" विषय पर राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन।

ये क्षेत्रीय कार्यशालाएँ संबंधित हितधारकों को उनकी विविध आवश्यकताओं और संदर्भों को दर्शाने वाला एक प्रशिक्षण संस्थान परिवर्तन ढांचा सह-विकसित करने के लिए एक साथ लाती हैं। कार्यशालाएँ इस ढांचे को मान्य करने और परिवर्तन के लिए एक साझा रोडमैप हेतु इसे कार्रवाई योग्य प्राथमिकताओं में बदलने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं। इसका कार्यान्वयन इस ढांचे के मुख्य डिजिटल सक्षमकर्ता  'उन्नति' पर आधारित होगा, जो संसाधन साझा करने, सहयोग और निरंतर, डेटा-सूचित संस्थागत सुधार का समर्थन करने के लिए 900 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ता है।

दिवस 1: उद्घाटन सत्र

कार्यशाला की शुरुआत दीप प्रज्वलन और कर्मयोगी गान के साथ हुई। सीबीसी की सदस्य (प्रशासन) डॉ. अलका मित्तल ने स्वागत भाषण दिया। आंध्र प्रदेश सरकार के प्रधान सचिव (योजना) श्री पीयूष कुमार और मुख्य सचिव श्री जी. साई प्रसाद ने सभा को संबोधित किया। 'उन्नति' पर एक वीडियो प्रदर्शित किया गया और राज्य स्तर पर अभिनंदन किया गया।

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष, श्रीमती एस. राधा चौहान ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकों, विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को ध्यान में रखते हुए सरकारी अधिकारियों की क्षमताओं को लगातार बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि "नागरिक देवो भव" शासन का एक मुख्य सिद्धांत बनकर उभरा है, जिसके तहत अधिकारियों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने व्यवहार, कौशल और प्रदर्शन को नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालें। उन्होंने संरचित शिक्षण प्रदान करने में आईजीओटी कर्मयोगी की भूमिका पर प्रकाश डाला और कहा कि टीआई को रणनीतिक, योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण संस्थानों में बदलने से सरकारी संगठनों को उन क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी जिनकी उनकी भूमिकाओं के लिए आवश्यकता होती है, और यह आईजीओटी कर्मयोगी द्वारा बड़े पैमाने पर सक्षम ऑनलाइन शिक्षण का पूरक होगा।

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए आंध्र प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि प्रौद्योगिकी और डेटा ने शासन व्यवस्था को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि रियल-टाइम डेटा, विभागों के बीच डेटा एकीकरण और एआई-सक्षम निगरानी अब समय पर कार्रवाई का समर्थन कर सकती है, और अच्छी नीति का प्रभावी क्रियान्वयन तथा नेतृत्व के साथ मेल होना आवश्यक है। उन्होंने मिशन कर्मयोगी और इसके वितरण माध्यमों- आईजीओटी और उन्नति  प्लेटफार्मों की सराहना की, जो एक एकीकृत क्षमता निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि ऑनलाइन शिक्षण का पूरक संस्थानों में भौतिक प्रशिक्षण होना चाहिए, और प्रत्येक अधिकारी के लिए निरंतर सीखना तथा पुरानी चीजों को भूलकर नया सीखना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल पर दो करोड़ कोर्स पूरे करने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के तंत्र को बधाई दी। राज्य की 'स्वर्ण आंध्र 2047' आकांक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सक्षम प्रशासन और प्रभावी नीति क्रियान्वयन विकास को गति देने की कुंजी हैं। उन्होंने विकास के लाभों को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए पी4 (पब्लिक-प्राइवेट-पीपल पार्टनरशिप / सार्वजनिक-निजी-जन भागीदारी) दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और राज्य प्रशिक्षण संस्थानों को एक मंच पर जोड़ने के लिए 'उन्नति' का स्वागत किया और इस नेटवर्क को विश्वविद्यालयों तथा निजी क्षेत्र तक विस्तारित करने का सुझाव दिया ताकि अधिकारियों को विभिन्न कार्य वातावरणों का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके।

इस अवसर पर, आंध्र प्रदेश को सरकारी कर्मचारियों के क्षमता निर्माण में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में सम्मानित किया गया, जिसमें कर्नाटक दूसरे स्थान पर और ओडिशा तीसरे स्थान पर रहा। ये पुरस्कार मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान किए गए। सत्र का समापन सीबीसी के सचिव श्री जगदीप गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

दिवस 1: तकनीकी सत्र

  • प्रशिक्षण संस्थान से क्षमता निर्माण संस्थान में परिवर्तन: उन्नति के माध्यम से संचालित इस पहले सत्र में यह बताया गया कि कैसे टीआई व्यक्तिगत कार्यक्रम प्रदान करने से लेकर संपूर्ण क्षमता निर्माण जीवनचक्र  का प्रबंधन करने की ओर बढ़ सकते हैं। इसमें क्षमता निर्माण योजनाओं (सीबीपी) से मांग को समझना, इसे उपयुक्त शिक्षण हस्तक्षेपों में बदलना और उन्हें प्रभावी ढंग से प्रदान करना शामिल था। इसमें आईजीओटी कर्मयोगी के एआई सीबीपी निर्माण टूल का प्रदर्शन, उन्नति पोर्टल की उन विशेषताओं को शामिल किया गया जो एक प्रशिक्षण संस्थान के लिए सीबीपी के माध्यम से प्राप्त मांगों को अनुवादित करती हैं और यह बताती हैं कि यह एक प्रशिक्षण संस्थान को उन पर प्रभावी ढंग से अमल करने में कैसे सक्षम बनाता है। सभी भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने संबंधित मिशन कर्मयोगी मापदंडों पर अपनी प्रगति भी प्रस्तुत की।
  • टीआई के लिए कर्मयोगी गुणवत्ता ढांचा (केक्यूएफ): इस सत्र में बताया गया कि कैसे टीआई योग्यता आवश्यकताओं की पहचान करने से लेकर शिक्षण हस्तक्षेपों को डिजाइन करने, विकसित करने, प्रदान करने, मूल्यांकन करने और सुधारने तक, पूरे शिक्षण जीवनचक्र में गुणवत्ता को शामिल कर सकते हैं। इसने इस ढांचे के दो पूरक घटकों की शुरुआत की: योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम डिजाइन के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम डिजाइन ढांचा (एनसीडीएफ), और पाठ्यक्रम समीक्षा के लिए एक एआई-सक्षम गुणवत्ता मूल्यांकनकर्ता, जिसे आवश्यकता पड़ने पर मानवीय समीक्षा का समर्थन प्राप्त हो।
  • कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम (केकेके): इस सत्र में राष्ट्रीय व्यवहार प्रशिक्षण कार्यक्रम और लोक सेवकों, विशेष रूप से जमीनी स्तर पर सेवा भाव विकसित करने के इसके दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि कैसे अनुभवात्मक शिक्षण, आत्मनिरीक्षण और साथियों के बीच संवाद  नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण और व्यवहार को मजबूत कर सकते हैं, और इस कार्यक्रम को अंतिम छोर तक पहुँचाने में प्रशिक्षण संस्थानों तथा संकाय की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
  • प्रशिक्षण संस्थान परिवर्तन ढांचे पर परामर्श: इस सत्र में संस्थागत शासन को मजबूत करने, डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ाने और प्रशिक्षण संस्थानों को एआई-नेटिव बनाने पर प्रतिभागियों के विचार आमंत्रित किए गए। प्रतिभागियों ने अपने-अपने राज्य और संस्थागत संदर्भों के आधार पर सीबीसी के टीआई परिवर्तन ढांचे को क्रियान्वित करने में आने वाले अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की। इन विचार-विमर्शों ने कार्यान्वयन के लिए प्राथमिकताओं और कदमों की पहचान करते हुए मसौदा राज्य कार्य योजनाओं  के विकास को आकार दिया।

दिवस 2: विचार-विमर्श, विशेषज्ञ सत्र और राज्य कार्य योजनाओं की प्रस्तुति

दूसरे दिन की शुरुआत "एआई के युग में शिक्षा पर पुनर्विचार"  पर एक विशेषज्ञ सत्र के साथ हुई। सिंपलीलर्न के संस्थापक और सीईओ श्री कृष्ण कुमार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि शिक्षा अब जीवन का कोई एक चरण नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि अब लोक सेवकों को विषयगत विशेषज्ञता के साथ-साथ एआई दक्षता की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रचुर मात्रा में सामग्री उपलब्ध होने के कारण सही मार्गदर्शन दुर्लभ हो गया है, इसलिए एक मेंटर के रूप में प्रशिक्षक की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों से एआई-फर्स्ट  पाठ्यक्रम अपनाने, करके सीखने पर जोर देने और सीखने की प्रक्रिया को बढ़ाने के लिए एआई का उपयोग करने का आग्रह किया।

इसके बाद दूसरे दिन आंध्र प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (योजना) श्री पीयूष कुमार द्वारा पहले दिन के सत्रों पर अपने विचार रखे गए। उन्होंने प्रत्येक सत्र के मुख्य विचारों का सारांश प्रस्तुत किया:

  • नियम-आधारित, पाठ्यक्रम-केंद्रित प्रशिक्षण से भूमिका-आधारित, योग्यता-आधारित और परिणाम-उन्मुख क्षमता निर्माण की ओर बदलाव, जिसमें सीबीपी  निरंतर मांग के स्रोत के रूप में कार्य करते हैं।
  • केक्यूएफ के माध्यम से डिज़ाइन से ही शिक्षा में गुणवत्ता का समावेश।
  • केकेके के तहत अनुभव, आत्मनिरीक्षण और साथियों के बीच संवाद के माध्यम से विकसित 'सेवा भाव'।
  • भविष्य के लिए तैयार टीआई की तीन आवश्यकताएँ जिन्हें एक साथ आगे बढ़ाना होगा: एक जुड़ा हुआ इकोसिस्टम, प्रभावी संस्थान और जिम्मेदार एआई अपनाना।

इसके बाद सभी सात भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं और मसौदा कार्य योजनाओं को प्रस्तुत किया, जिसमें संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और 'उन्नति'  को अपनाने के लिए उनकी आवश्यकताओं की पहचान की गई। उपस्थित विषय विशेषज्ञों  ने भी कार्यशाला से अपने मुख्य निष्कर्ष साझा किए।

समापन भाषण

क्षमता निर्माण आयोग के सचिव श्री जगदीप गुप्ता ने अपने समापन भाषण में विचार-विमर्श से तीन विषयों का सारांश प्रस्तुत किया। ये विषय टीआई परिवर्तन ढांचे के तीन स्तंभों के अनुरूप हैं:

  • संरचनात्मक और शासन: सशक्त संस्थागत नेतृत्व, मापी गयी स्वायत्तता और प्रदर्शन-संबंधी जवाबदेही।
  • परिचालन उत्कृष्टता और इकोसिस्टम सहयोग: उन्नति के माध्यम से संस्थानों के बीच संकाय, ज्ञान और बुनियादी ढाँचे का व्यवस्थित रूप से साझाकरण।
  • डिजिटल और एआई को अपनाना: मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा और एआई उपकरणों का सुरक्षित उपयोग, जिसमें अंतिम निर्णय मनुष्यों के पास ही रहेंगे।

उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया कि वे कार्यशाला में प्राप्त फीडबैक को शामिल करते हुए अपनी कार्य योजनाओं को अंतिम रूप दें। उन्होंने उन संस्थानों से भी अनुरोध किया जो अभी तक इससे नहीं जुड़े हैं, वे उन्नति से जुड़ें।

उन्नति के बारे में

उन्नति (यूनिफाइड न्यू-एज नेशनल ट्रेनिंग इनिशिएटिव) सीबीसी द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल मंच है। यह पहले के एनएससीएसटीआई एक्रिडिटेशन को एक निरंतर विकास इकोसिस्टम विकसित करता है और देश भर के 700 से अधिक प्रशिक्षण संस्थानों को जोड़ता है। यह अधिक संस्थागत दृश्यता, सहयोग और संकाय, ज्ञान तथा बुनियादी ढाँचे के व्यवस्थित साझाकरण को सक्षम बनाता है। यह प्रशिक्षण के लिए एक निरंतर मांग संकेत के रूप में सीबीपी का उपयोग करता है, और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों प्रकार की सीखने की प्रक्रिया को ट्रैक करने के लिए आईजीओटी कर्मयोगी एवं राज्य एचआर सिस्टम्स के साथ एकीकृत होता है। उन्नति क्षमता सूचकांक संस्थागत प्रदर्शन की वास्तविक समय पर बेंचमार्किंग प्रदान करता है। एआई केवल सहायक बना रहता है, जबकि अंतिम निर्णय संस्थानों और लोगों के पास ही रहते हैं।

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पीके/केसी/आरटी/एसके


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