PIB Backgrounder
azadi ka amrit mahotsav

सभी के लिए साक्षरता

प्रविष्टि तिथि: 29 SEP 2026 11:22AM by PIB Delhi

'विकसित भारत' की दिशा में भारत का सफ़र

भारत में साक्षरता की बड़ी छलांग: पूर्ण साक्षरता की राह पर अग्रसर

साक्षरता राष्ट्रीय विकास की नींव है। यह सिर्फ़ शैक्षिक प्रगति का पैमाना मात्र नहीं है, बल्कि यह लोगों को नए अवसर पाने, अर्थव्यवस्था में हिस्सा लेने और समाज में सार्थक रूप से जुड़ने में भी सहायता करती है। यूनेस्को साक्षरता को बुनियादी मानवाधिकार एवं समानता, न्याय, समावेश और कानून के शासन के प्रति सम्मान हासिल करने का महत्वपूर्ण साधन मानता है। पिछले आठ दशकों में भारत ने अपनी साक्षरता दर को बेहतर बनाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। 1947 में, देश की समग्र साक्षरता दर सिर्फ़ 14% थी, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 8% पर बहुत कम थी। भारत ने साक्षरता को बेहतर बनाने और अपनी शिक्षा प्रणाली को मज़बूत करने के लिए कई पहल की हैं। सरकार ने सभी स्तरों पर शिक्षा में सुधार लाने और कुशल, परिस्थितियों के अनुसार ढलने में सक्षम और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल तैयार करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 शुरू की।

साक्षरता क्या है?

शिक्षा मंत्रालय स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने पहली बार साक्षरता को इस तरह परिभाषित किया है: "पहचानने, समझने, व्याख्या करने और रचना करने के साथ ही डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशल के लिए समझ के साथ पढ़ने, लिखने और हिसाब-किताब करने की क्षमता।" यह किसी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में 95% साक्षरता को पूर्ण साक्षरता के बराबर मानता है।

वैश्विक संदर्भ में, यूनेस्को साक्षरता को पढ़ने, लिखने और संख्याओं का उपयोग करने की क्षमता के साथ-साथ तेज़ी से तकनीकी और सूचना-समृद्ध वातावरण में समस्याओं को हल करने के लिए डिजिटल सामग्री का उपयोग करने की क्षमता के रूप में परिभाषित करता है - यह एक बुनियादी कौशल है जो कार्य करने, सीखने और जीवन में लोगों की भागीदारी के लिए केंद्रीय पक्ष है। यह शिक्षा के अधिकार का ज़रूरी घटक है और अन्य मानवाधिकारों का लाभ उठाने के लिए पूर्व-आवश्यकता है।

 

साक्षरता और शिक्षा में प्रगति को मापना

भारत की साक्षरता दर में 1951 के बाद से उल्लेखनीय प्रगति हुई है; यह 1951 में 18.32% से बढ़कर 2011 में 74.04% हो गई। पुरुषों की साक्षरता दर 27.15% से बढ़कर 82.14% हो गई, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर में भी काफ़ी बढ़ोतरी हुई और यह 8.86% से बढ़कर 65.46% हो गई। 

शहरी साक्षरता दर 1951 में 34.59% से बढ़कर 2011 में 84.1% हो गई, जबकि ग्रामीण साक्षरता दर 12.10% से बढ़कर 67.8% हो गई। 2001 और 2011 के बीच, ग्रामीण महिलाओं की साक्षरता में 26% की वृद्धि हुई, जबकि ग्रामीण पुरुषों में यह वृद्धि 10% थी; इससे महिलाओं की साक्षरता में उल्लेखनीय सुधार का पता चलता है।

पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) 2025 के अनुसार, शहरी इलाकों में 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की साक्षरता दर 89% और 5 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की साक्षरता दर 88% रही। शहरी इलाकों में 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों में पुरुषों की साक्षरता दर 93.1% और महिलाओं की 84.8% रही। ग्रामीण इलाकों में 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की साक्षरता दर 77.4% और 5 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों की 76.4% रही। ग्रामीण आबादी में 7 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों में पुरुषों की साक्षरता दर 84.8% और महिलाओं की 70.3% रही। इस सर्वे के अनुसार, देश की कुल साक्षरता दर 81.1% है।

साक्षरता में सुधार के साथ-साथ, सरकार ने स्कूल में दाखिले, बच्चों के स्कूल में बने रहने और अगली कक्षा में जाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए भी कदम उठाए हैं। 2014-15 के बाद से सकल नामांकन अनुपात (जीईआर), एक स्तर से दूसरे स्तर पर जाने (ट्रांज़िशन) और स्कूल में बने रहने (रिटेंशन) की दरों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। UDISE+ रिपोर्ट (2025-26) के अनुसार:

  • विद्यालय में दाखिला: स्कूलों में 24.72 करोड़ से ज़्यादा विद्यार्थी नामांकित थे।
  • सकल नामांकन अनुपात (जीईआर): यह शुरुआती स्तर (फाउंडेशनल स्टेज) पर 42.8%, तैयारी के स्तर (प्रिपरेटरी स्टेज) पर 91.7%, मिडिल स्टेज पर 89.6% और सेकेंडरी स्टेज पर 71.7% था।
  • ड्रॉपआउट दरें (स्कूल छोड़ने की दरें) तैयारी के स्तर पर 1.8%, मिडिल स्टेज पर 3.6% और सेकेंडरी स्टेज पर 7.0% थीं।
  • रिटेंशन दरें (स्कूल में बने रहने की दरें) शुरुआती स्तर के लिए 98.5%, तैयारी के स्तर के लिए 91.1%, मिडिल स्टेज के लिए 83.7% और सेकेंडरी स्टेज के लिए 51.9% थीं।
  • ट्रांज़िशन दरों में सुधार हुआ; 99.2% छात्र शुरुआती स्तर से तैयारी के स्तर पर, 93.8% तैयारी के स्तर से मिडिल स्टेज पर और 88.3% मिडिल स्टेज से सेकेंडरी स्टेज पर पहुँचे।

ट्रांज़िशन दर का मतलब उन विद्यार्थियों के प्रतिशत से है जो सफलतापूर्वक शिक्षा के एक स्तर से अगले स्तर पर जाते हैं।

पिछले दशक में उच्च शिक्षा में भागीदारी काफी बढ़ी है:

  • नामांकन 2014-15 में 3.42 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 4.50 करोड़ हो गया।
  • इसी अवधि में जीईआर 23.7% से बढ़कर 30% हो गया।
  • उच्च शिक्षा से निकलने वाले विद्यार्थियों की संख्या 2014-15 में 88.28 लाख से बढ़कर 2023-24 में 1.09 करोड़ से ज़्यादा हो गई। 

हायर एजुकेशन आउट-टर्न का मतलब है किसी विशेष शैक्षिक वर्ष में हायर एजुकेशन संस्थानों से पास होने वाले कुल विद्यार्थियों की संख्या।

महिलाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी के साथ-साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों को शामिल करने से बेहतर पहुंच और समानता का पता चलता है। यह उच्च शिक्षा (हायर एजुकेशन) तक पहुंच में लगातार सुधार को दिखाता है, जो एनईपी 2020 के 2035 तक 50% हायर एजुकेशन जीईआर (सकल नामांकन अनुपात) हासिल करने के लक्ष्य को समर्थन देता है।

साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए सरकार की मुख्य पहल

साक्षरता के प्रति भारत का दृष्टिकोण बुनियादी पढ़ाई और गिनती-पहाड़े सीखने से आगे बढ़कर, तेज़ी से बदलती अर्थव्यवस्था और समाज में हिस्सा लेने के लिए ज़रूरी व्यापक क्षमताओं तक विकसित हुआ है। एनईपी 2020 के अंतर्गत, सरकार ने पहुंच बढ़ाने, सीखने के नतीजों को मज़बूत करने, समावेश को बढ़ावा देने और जीवन भर सीखने को समर्थन देने के लिए उल्लास (ULLAS) और निपुण (NIPUN) भारत जैसी पहल शुरू की हैं।

उल्लास (समाज में सभी के लिए जीवन भर सीखने की समझ)

उल्लास (ULLAS) - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम: उल्लास, या नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (एनआईएलपी), केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित पहल है। यह एनईपी 2020 के अनुरूप है। यह 15 वर्ष और उससे ज़्यादा उम्र के उन वयस्कों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है जिनकी औपचारिक स्कूली शिक्षा छूट गई थी। यह कार्यक्रम कार्यात्मक साक्षरता, गिनती-पहाड़े का ज्ञान, ज़रूरी जीवन कौशल और जीवन भर सीखने के अवसर प्रदान करता है। इससे लक्षित समूह का सामाजिक एकीकरण होता है और राष्ट्रीय विकास में उनके योगदान को बढ़ावा मिलता है।

उल्लास का विज़न 'जन-जन साक्षर' है, यानी साक्षरता के ज़रिए हर व्यक्ति को सशक्त बनाना। यह 'कर्तव्य बोध' की भावना का पालन करता है। यह सार्वभौमिक साक्षरता हासिल करने के लिए स्वयंसेवा और जनभागीदारी या सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देता है।

उल्लास हाइब्रिड लर्निंग अप्रोच का पालन करता है। iOS और Android प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध ULLAS ऐप में 27 भाषाओं में शिक्षण-अधिगम सामग्री मौजूद है। इस योजना के अंतर्गत, ज़िला या ब्लॉक स्तर पर सर्वे करने वालों द्वारा सीखने वालों और स्वयंसेवकों की पहचान की जाती है। इनमें स्कूल शिक्षक, सिविल सोसाइटी वर्कर, आशा वर्कर और आंगनवाड़ी वर्कर शामिल हो सकते हैं। सर्वे करने वाले घर-घर जाकर निरक्षर लोगों और संभावित स्वयंसेवक शिक्षकों की पहचान करते हैं। अगले चरण में, सीखने वालों को स्वयंसेवक शिक्षक से जोड़ा जाता है ताकि वे ULLAS ऐप पर रजिस्टर करने में विद्यार्थियों की सहायता और मार्गदर्शन कर सकें।  प्रशिक्षण, ओरिएंटेशन और कार्यशाला आमने-सामने और ऑनलाइन, दोनों तरीकों से आयोजित की जाती हैं। सीखने वाले लर्निंग मटीरियल का इस्तेमाल करते हैं और बुनियादी साक्षरता और संख्या-ज्ञान (न्यूमरेसी) से जुड़े कौशल विकसित करते हैं। इसके बाद वे 'फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी असेसमेंट टेस्ट' (एफएलएनएटी) देते हैं, जिसके बाद मूल्यांकन और सर्टिफिकेशन होता है।

उल्लास की प्रगति और प्रभाव: इस योजना का लक्ष्य 2022-27 के दौरान ₹1,037.90 करोड़ के बजट के साथ 5 करोड़ शिक्षार्थियों को शामिल करना है। उल्लास में लगभग 4.03 करोड़ पंजीकृत शिक्षार्थी और 52.20 लाख से ज़्यादा स्वयंसेवक (वॉलंटियर) हैं। अब तक, 3.3 करोड़ से ज़्यादा शिक्षार्थियों ने एफएलएनएटी में भाग लिया है।

दस (10) राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने 2024 और 2026 के बीच खुद को पूरी तरह साक्षर घोषित किया है। इनमें लद्दाख, मिज़ोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, सिक्किम, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं। उल्लास सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए वयस्क साक्षरता का विस्तार कर रहा है, लाखों शिक्षार्थियों तक पहुँच रहा है और साथ ही सभी के लिए साक्षरता के भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।

निपुण (NIPUN) भारत: (समझकर पढ़ने और अंकगणित में दक्षता के लिए राष्ट्रीय पहल)

जुलाई 2021 में 'समग्र शिक्षा' के अंतर्गत शुरू की गई यह पहल शुरुआती शिक्षा को मज़बूत करने और लगातार शैक्षणिक विकास में सहायता करने पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य 2026-27 तक सभी के लिए बुनियादी साक्षरता और अंकगणित का ज्ञान हासिल करना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर बच्चा दूसरी कक्षा तक बुनियादी कौशल हासिल कर ले। यह मिशन 3 से 8 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए 'बुनियादी चरण' पर केंद्रित है।

इसके अलावा, सरकार ने स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और बच्चों के स्कूल में बने रहने (रिटेंशन) को बेहतर बनाने के लिए कई पहल की हैं। मुख्य योजनाओं में समग्र शिक्षा, पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया), पीएम e-VIDYA और पीएम पोषण (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण) शामिल हैं।

  • समग्र शिक्षा स्कूल की प्रभावशीलता बढ़ाने और सीखने के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए स्कूली शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। यह योजना शिक्षा पर 'सतत विकास लक्ष्य 4' (एसडीजी-4) के अनुरूप है। इसे तीन पुरानी योजनाओं - सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) और शिक्षक शिक्षा (टीई) - को मिलाकर शुरू किया गया था। यह योजना बुनियादी शिक्षा, शिक्षक विकास और व्यावसायिक शिक्षा को शामिल करने पर ध्यान देते हुए समान, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देती है।
  • प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएम श्री) का लक्ष्य देश भर में 14,500 से ज़्यादा आदर्श विद्यालयों को मज़बूत करना है।  यह स्कीम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देती है। इसके लिए सीखने का ऐसा माहौल बनाया जाता है जो सबके लिए समान, समावेशी और आनंददायक हो और जिसमें अलग-अलग पृष्ठभूमि, कई भाषाओं की ज़रूरतों और अलग-अलग शैक्षणिक क्षमताओं का ध्यान रखा जाए।
  • PM e-VIDYA व्यापक पहल है जो डिजिटल, ऑनलाइन और ऑन-एयर शिक्षा से जुड़े अलग-अलग प्रयासों को एक साथ लाती है ताकि सीखने के कई तरीके उपलब्ध कराए जा सकें। इस पहल से देश भर में स्कूल जाने वाले लगभग 25 करोड़ बच्चों को लाभ होने की आशा है।
  • पीएम पोषण (PM POSHAN) केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना है। इसके तहत, 10.36 लाख सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में बाल वाटिका और कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले 11.20 करोड़ विद्यार्थियों को स्कूल के सभी दिनों में एक समय का पका हुआ गर्म भोजन दिया जाता है। इस स्कीम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषण संबंधी सहायता देना और स्कूलों में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।

ये सभी योजनाएं मिलकर ऐसा माहौल बनाती हैं जिससे एनरोलमेंट (दाखिला), रिटेंशन (पढ़ाई जारी रखना) और सीखने के नतीजों में सुधार होता है। ये अलग-अलग उम्र और सीखने के स्तरों पर साक्षरता से जुड़ी ज़रूरतों को भी पूरा करती हैं, जिससे बुनियादी शिक्षा, वयस्कों की साक्षरता और जीवन भर सीखने की प्रक्रिया मज़बूत होती है।

विकसित भारत और सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सतत विकास) के लिए साक्षरता

एसडीजी (सतत विकास लक्ष्य) सभी के लिए ज़्यादा न्यायपूर्ण, समावेशी और टिकाऊ भविष्य को बढ़ावा देने के लिए व्यापक ढांचा प्रदान करते हैं। साक्षरता और शिक्षा एसडीजी 4 के केंद्र में हैं, जिसका उद्देश्य सभी के लिए समावेशी और न्यायपूर्ण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जीवन भर सीखने के अवसर सुनिश्चित करना है। साक्षरता का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और प्रति व्यक्ति आय से सकारात्मक संबंध है और यह आर्थिक विकास और राष्ट्रीय प्रगति में योगदान देती है। देश के लिए, विकसित भारत के विज़न को हासिल करने के लिए साक्षर, शिक्षित और कुशल जनसंख्या की ज़रूरत है।

शिक्षा के अलावा, साक्षरता महिलाओं के सशक्तिकरण, समानता, समावेश और मानवाधिकारों को साकार करने में योगदान देती है। इसके साथ ही रोज़गार की क्षमता, उत्पादकता, नवाचार और आर्थिक भागीदारी को भी बढ़ाती है। शिक्षा और कौशल 'ग्रीन जॉब्स' (पर्यावरण-अनुकूल नौकरियों) में भागीदारी को सक्षम बना सकते हैं, सर्कुलर इकोनॉमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) का समर्थन कर सकते हैं और पर्यावरणीय स्थिरता में योगदान दे सकते हैं। इस प्रकार, साक्षरता में प्रगति एसडीजी के लक्ष्यों को हासिल करने में कई गुना असर डाल सकती है, जिससे समावेशी, टिकाऊ और व्यापक विकास को बढ़ावा मिलता है।

भविष्य की राह: सभी के लिए साक्षरता को बढ़ावा देना

स्वतंत्रता के पश्चात से भारत की साक्षरता यात्रा राष्ट्र-निर्माण और मानव विकास में आए व्यापक बदलाव को दर्शाती है। आज साक्षरता का दायरा पढ़ने और लिखने से कहीं आगे बढ़ गया है। यह सीखने, आजीविका, सशक्तिकरण और समाज में सार्थक भागीदारी को सक्षम बनाती है। एनईपी 2020, उल्लास और निपुण भारत जैसी योजनाएं इस दृष्टिकोण का विस्तार कर रही हैं। ये बुनियादी शिक्षा को वयस्क शिक्षा, जीवन भर सीखने और भविष्य के लिए ज़रूरी कौशलों से जोड़ती हैं। एसडीजी 4 के अनुरूप, ये प्रयास समावेशी और न्यायपूर्ण विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मज़बूत करते हैं।

जैसे-जैसे भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है, इन प्रयासों को लगातार लागू करना ज़रूरी है। क्षेत्रीय और लैंगिक असमानताओं पर ज़्यादा ध्यान देने से यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी कि साक्षरता का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे। साक्षर, कुशल और सशक्त जनसंख्या ज़्यादा समावेशी, उत्पादक और टिकाऊ विकसित भारत के लिए मज़बूत आधार बन सकती है।

 

संदर्भ

शिक्षा मंत्रालय

https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2282525&reg=48&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2049494&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1882765&reg=48&lang=2

https://ullas.education.gov.in/nilp/about-us

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2021/jul/doc20217531.pdf

https://aicte.gov.in/sites/default/files/nep2020.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1805881&reg=48&lang=2

https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1911807&reg=48&lang=2

https://udiseplus.gov.in/#/en/page/publications

https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s392049debbe566ca5782a3045cf300a3c/uploads/2025/06/202506041473712372.pdf

https://cdnbbsr.s3waas.gov.in/s392049debbe566ca5782a3045cf300a3c/uploads/2026/07/202607131602421770.pdf

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2291330&reg=48&lang=2

https://www.dsel-education.gov.in/offerings/initiative/details/pm-e-vidya-IDOyMTMtQWa

https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2120666&reg=48&lang=2

 

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय

https://www.mospi.gov.in/sites/default/files/reports_and_publication/cso_social_statices_division/Chapter_3_2014.pdfhttps://www.mospi.gov.in/uploads/publications_reports/publications_reports1780040415321_0624fb13-fb47-40bc-b470-7c7e9635c3ef_PLFS_2025_F_REV_29052026.pdf

 

नीति आयोग

https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2026-05/School-Education-System-in-India.pdf

 

पीआईबी विश्लेषक

https://www.pib.gov.in/FactsheetDetails.aspx?Id=150983&reg=48&lang=1

https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=159901&NoteId=159901&ModuleId=3&reg=3&lang=1

यूनेस्को

https://www.unesco.org/en/days/literacy

https://unesdoc.unesco.org/ark:/48223/pf0000399013

Click here to see PDF

****

पीआईबी शोध

पीके/केसी/आरटी/पीबी


(रिलीज़ आईडी: 2316361) आगंतुक पटल : 292
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Bengali , Bengali-TR , Gujarati