विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
स्वस्थ रहना केवल बीमारियों का न होना नहीं है, बल्कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल और शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है: डॉ. जितेंद्र सिंह
पिछले एक दशक में आयुर्वेद, योग और स्वास्थ्य केंद्रों पर अधिक जोर देने के साथ स्वास्थ्य के प्रति भारत का दृष्टिकोण विकसित हुआ है।
स्वस्थ युवा पीढ़ी 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी: डॉ. जितेंद्र सिंह।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा ने भारत की स्वास्थ्य चुनौतियों को भी बदल दिया है, जिससे जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां अधिक प्रमुख हो गई हैं।
विज्ञान और व्यावहारिक अनुसंधान किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यापक आबादी तक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह
प्रविष्टि तिथि:
25 SEP 2026 4:59PM by PIB Delhi
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य एवं कल्याण शिखर सम्मेलन 2026 में कहा कि स्वस्थ रहना केवल रोग का न होना नहीं है । अब ध्यान निवारक स्वास्थ्य देखभाल और शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने स्वास्थ्य की व्यापक समझ की ओर अग्रसर होकर आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल के साथ-साथ आयुर्वेद, योग और कल्याण केंद्रों पर अधिक जोर दिया है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा पीढ़ी, विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य अब केवल रोगमुक्त होने या किसी विशेष बीमारी का इलाज कराने तक सीमित नहीं है। इसमें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, लोगों के रहने और काम करने का वातावरण, कार्य-जीवन संतुलन और समग्र रूप से जीवन की सुगमता शामिल है। स्वास्थ्य की इस बदलती समझ के कारण रोकथाम और स्वस्थ जीवन शैली स्वास्थ्य सेवा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।
डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में जीवन प्रत्याशा में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ बीमारियों का स्वरूप भी बदल गया है। स्वतंत्रता के समय भारत की औसत जीवन प्रत्याशा लगभग 45 वर्ष थी लेकिन आज लोग काफी अधिक समय तक जीवित रह रहे हैं जबकि हृदय रोग और टाइप 2 मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याएं, साथ ही जीवनशैली से संबंधित अन्य गैर-संक्रामक रोग, तेजी से प्रमुख हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में प्रगति और चिकित्सा सुविधाओं की व्यापक पहुंच से गंभीर बीमारियों के निदान और उपचार की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं के अगले चरण में बीमारी होने के बाद उपचार पर निर्भर रहने के बजाय रोकथाम, शीघ्र निदान और स्वास्थ्य बनाए रखने पर अधिक जोर देना होगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य सेवा के प्रति व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है। इसमें उपचार की बेहतर पहुंच के साथ-साथ रोकथाम और जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप शामिल हैं। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और आयुष्मान भारत जैसी पहलों का उदाहरण देते हुए कहा कि ये स्वास्थ्य सेवा को अधिक सुलभ बनाने और गंभीर बीमारियों के कारण परिवारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करने के प्रयास का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने और विशेष रूप से किफायती, सुलभ और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। डॉ सिंह ने कहा कि भारत के वैज्ञानिक तंत्र ने कोविड-19 सहित प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जब भारतीय प्रयोगशालाओं ने तेजी से SARS-CoV-2 जीनोम को अलग किया और उसका अनुक्रमण किया, जिससे स्वदेशी टीकों के विकास में योगदान मिला।
उन्होंने कहा कि अब ध्यान वैज्ञानिक अनुसंधान को ऐसी प्रौद्योगिकियों और उत्पादों में परिवर्तित करने पर भी केंद्रित होना चाहिए जिनसे व्यापक आबादी को लाभ मिल सके। चिकित्सा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग को एक साथ लाने वाला ट्रांसलेशनल रिसर्च किफायती निदान, बायो सेंसर, दवा वितरण प्रौद्योगिकियों और अन्य स्वास्थ्य देखभाल समाधानों को विकसित करने में मदद कर सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं में आनुवंशिक विकारों की प्रारंभिक जांच मे विशेष रूप बसे ज़ोर दिया गया। उन्होंने कहा कि आनुवंशिक विकारों के प्रबंधन और उपचार के लिए विशिष्ट विधियों (उम्मीद) जैसे कार्यक्रम प्रारंभिक पहचान और प्रबंधन को मजबूत करने में सहायक हैं। यह दर्शाते हैं कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए वैज्ञानिक क्षमताओं का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताएं देश की बदलती जनसांख्यिकी और रोग संबंधी स्थिति के अनुरूप विकसित होनी चाहिए। दीर्घायु की ओर बढ़ते रुझान के कारण यह सुनिश्चित करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि लोग न केवल अधिक समय तक जीवित रहें बल्कि बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का भी आनंद लें।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी उभरती चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान विकसित करने में चिकित्सा जगत के पेशेवरों, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि लक्ष्य एक स्वस्थ भारत का निर्माण करना होना चाहिए, जिसमें निवारक स्वास्थ्य देखभाल और कल्याण, विकसित भारत 2047 की दिशा में देश की यात्रा का अभिन्न अंग बन जाएं।



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पीके/केसी/आरटी/एनकेएस
(रिलीज़ आईडी: 2314996)
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