सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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पीएम यशस्वी योजना अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़े समाज और विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजातियों के विद्यार्थियों के शैक्षिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है


2014-15 से 2025-26 तक योजना के विभिन्न घटकों के तहत 15,555.53 करोड़ रुपये जारी किए गए: डॉ. वीरेंद्र कुमार


छात्रवृत्ति, छात्रावास संबंधी बुनियादी ढांचे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से 1,069 लाख से अधिक लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई है


विद्यालय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के तहत 45,000 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिला, जबकि महाविद्यालय स्तर पर लगभग 38,000 छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया

प्रविष्टि तिथि: 16 SEP 2026 4:35PM by PIB Delhi

भारत सरकार ने पीएम यंग अचीवर्स स्कॉलरशिप अवॉर्ड स्कीम फॉर वाइब्रेंट इंडिया (पीएम यशस्वी) के माध्यम से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े समाज (ईबीसी) और विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजातियों (डीएनटी) के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के अवसरों को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

पीएम-यशस्वी योजना के तहत प्री-मैट्रिक व पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति, अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावासों का निर्माण और विद्यालय एवं महाविद्यालय स्तर पर उच्चस्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराने जैसी पहल शामिल हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि यह योजना समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि योजना अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़े समाज व विमुक्त, घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू जनजातियों के विद्यार्थियों को देश के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक विकास में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बना रही है। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य लक्षित छात्रवृत्ति सहायता, आवासीय बुनियादी ढांचे और प्रमुख विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं संस्थानों में अध्ययनरत मेधावी छात्रों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराकर शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करना, स्कूल छोड़ने की दर को कम करना तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाना है।

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक पीएम-यशस्वी योजना के विभिन्न घटकों के तहत 15,555.53 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता जारी की गई है। इससे देशभर में 1069 लाख से अधिक विद्यार्थी और लाभार्थी लाभान्वित हुए हैं।

डॉ. कुमार ने कहा कि प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी समुदायों के विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। इसका उद्देश्य सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्र-छात्राओं को उनकी शिक्षा जारी रखने में सहायता देना और उनके विद्यालय छोड़ने की दर को कम करना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान इस योजना के तहत कुल 2,163.15 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे 642.58 लाख लाभार्थी लाभान्वित हुए। डॉ. कुमार ने कहा कि वर्ष 2025-26 में 252.21 करोड़ रुपये जारी किए गए और 25.22 लाख विद्यार्थियों को अस्थायी रूप से योजना में शामिल किया गया।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए, पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी समुदायों के ऐसे विद्यार्थियों को की मदद करती है, जो पोस्ट-मैट्रिक या फिर उच्च शिक्षा ले रहे हैं। इससे छात्र-छात्राओं को पढ़ाई का खर्च उठाने में मदद मिलती है और उन्हें बेहतर शैक्षणिक तथा प्रोफेशनल अवसरों तक पहुंच बनाने ने में आसानी होती है।

डॉ. कुमार ने कहा कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच इस मद के तहत 12,118.75 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे 425.66 लाख विद्यार्थी लाभान्वित हुए। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2025-26 में 1,138.88 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है, जिससे 31.29 लाख लाभार्थियों के लाभान्वित होने का अनुमान है।

प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत वर्ष 2025-26 के लिए उपलब्ध कराए गए लाभार्थियों के आंकड़े अभी प्रारंभिक हैं। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश वर्ष 2026-27 के लिए अपने प्रस्तावों के साथ वास्तविक आंकड़े एकत्र कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने यह तथ्य को स्वीकार किया कि उचित आवास की सुविधा न होने के कारण कई छात्र शिक्षण संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम-यशस्वी योजना का उद्देश्य अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावासों के निर्माण में सहायता प्रदान करना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच सरकार ने 28,865 छात्रावास सीटों के निर्माण के लिए 346.79 करोड़ रुपये जारी किए हैं।  डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि अकेले 2025-26 में 3,700 छात्रावास सीटों के निर्माण के लिए 21.06 करोड़ रुपये जारी किए गए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि छात्रावास की सुविधा से आवासीय शिक्षा के ढांचे को मजबूती मिल रही है। इससे वंचित पृष्ठभूमि के विद्यार्थी अपने घर से दूर रहकर भी शिक्षा प्राप्त करने और बेहतर शैक्षणिक अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम हो रहे हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022-23 से लागू ‘विद्यालयों में शीर्ष श्रेणी की शिक्षा’ योजना के तहत देशभर के चयनित शीर्ष विद्यालयों में अध्ययनरत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (ईबीसी) और विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजाति (डीएनटी) श्रेणी के मेधावी विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि योजना की शुरुआत से अब तक 116.69 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं और 45,228 छात्रों को इसका लाभ मिला है। डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि योजना का दायरा लगातार बढ़ा है। वर्ष 2022-23 में जहां 1,275 विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला था, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 27,007 हो गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान इस योजना के तहत 75.63 करोड़ रुपये जारी किए गए।

डॉ. कुमार ने कहा कि वर्ष 2023-24 से लागू ‘कॉलेजों में टॉप क्लास एजुकेशन’ योजना ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी समुदायों के मेधावी विद्यार्थियों को सहायता प्रदान करती है। यह सहायता उन छात्र-छात्राओं को दी जाती है, जो चयनित उत्कृष्ट कॉलेजों और संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि 2023-24 से 2025-26 की अवधि के दौरान, 810.15 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई, जिससे 37,937 विद्यार्थियों को लाभ मिला और 2025-26 में, 368.86 करोड़ रुपये की राशि जारी करके इस योजना के तहत 17,295 छात्र-छात्राओं को सहायता प्रदान की गई।

केंद्रीय मंत्री ने इस बात का विशेष उल्लेख किया कि छात्रवृत्ति, आवासीय सुविधाओं और उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों तक पहुंच जैसे उपायों को शामिल करने वाली पीएम-यशस्वी योजना के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सामाजिक या आर्थिक रूप से पिछड़े होने के कारण कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपनी शैक्षिक आकांक्षाओं को पूरा करने से वंचित न रहे।

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पीके/केसी/एनके/एसएस  

 


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