इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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डिजिटल इंडिया भाषिणी के सीईओ ने आईआईएम कलकत्ता में लैटिस 2026 को संबोधित किया; जनसंख्या-स्तरीय प्रभाव के लिए एआई पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डाला


कोलकाता में ‘द कैपेबिलिटी डिकेड’ विषय के अंतर्गत वार्षिक व्यापार संगोष्ठी का आयोजन किया गया

प्रविष्टि तिथि: 12 SEP 2026 7:41PM by PIB Delhi

भारतीय प्रबंधन संस्था कलकत्ता (आईआईएम कलकत्ता) का वार्षिक व्यापार संगोष्ठी 'लैटिस 2026' का आयोजन आज कोलकाता में 'द कैपेबिलिटी डिकेड' (क्षमता का दशक) विषय के अंतर्गत किया गया। इस सम्मेलन में छात्र, उद्योग जगत के नेता और पेशेवर एक साथ आए ताकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तकनीक, नवाचार, नेतृत्व एवं तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में प्रभावशाली काम करने आवश्यक क्षमताओं पर चर्चा की जा सके।

इस संगोष्ठी में श्री अमिताभ नाग, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीज़न (डीआईबीडी), डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में भाषा प्रौद्योगिकी के निर्माण एवं तैनाती के भारत के अनुभव से प्राप्त अंतर्दृष्टि साझा कीं, जिसमें एआई को मॉडल और प्रयोगों से आगे ले बड़े पैमाने पर असल दुनिया में अपनाने में आने वाली चुनौतियों पर खास ध्यान केंद्रीत किया गया।

विभिन्न जनसंख्या तक पहुंचने की चुनौतियों पर बात करते हुए, श्री नाग ने डिजिटल, भाषा एवं साक्षरता के अंतर को आपस में जुड़ी हुए चुनौती बताया और कहा कि प्रौद्योगिकी को लोगों और उनकी परिस्थितियों के अनुसार ढलना चाहिए। उन्होंने पहुंच बढ़ाने में वॉइस-फर्स्ट और बहुभाषी तकनीकों के महत्व को उजागर किया। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की विविधता को ध्यान में रखते हुए एआई प्रणाली को भाषा, बोली, क्षेत्र और संदर्भ के अंतर पर ध्यान देना होगा।

सत्र के दौरान इस दृष्टिकोण का व्यावहारिक अनुप्रयोग भी प्रदर्शित किया गया, जब श्री नाग के संबोधन के दौरान भाषिणी का श्रुतलेख लाइव तैनात किया गया, जिससे वास्तविक समय में भाषा अनुवाद एवं ट्रांसक्रिप्शन संभव हुआ। इस प्रदर्शन से पता चला कि भाषा एआई लाइव परिवेश में कैसे काम कर सकता है और नियंत्रित या प्रायोगिक वातावरण से आगे बहुभाषी संचार में मदद कर सकता है।

इस बातचीत में उन संगठनात्मक एवं उत्पाद विकल्पों पर भी चर्चा हुई जो उभरती तकनीकों की सफलता को आकार देते हैं। भाषिणी के अनुभव के आधार पर, श्री नाग ने लोगों के साथ और लोगों के लिए काम करने की बात की, जिसमें 'भाषादान' के माध्यम से भाषा संसाधन बनाने में समुदाय की भागीदारी भी शामिल है। उन्होंने जोर दिया कि स्पष्ट उपयोग मामलों, तेज़ प्रयोग, गलतियों से सीखने और छोटे फीडबैक लूप्स का महत्व है ताकि विचारों से वास्तविक इस्तेमाल योग्य समाधान तक पहुंचा जा सके, और अनुसंधान एवं उत्पाद टीमों को वास्तविक दुनिया की जरूरतों के करीब लाया जा सके।

'भाषिणीको बनाने के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा, "हमें जो सबसे मुश्किल चुनौतियां आईं, वे लगभग कभी भी मॉडल से जुड़ी नहीं थीं। वे बाजार डिज़ाइन, प्रोत्साहन डिज़ाइन, संगठनात्मक डिज़ाइन और पारिस्थितिकी तंत्र  डिज़ाइन से जुड़ी थीं।" उन्होंने आगे कहा, "विविधता ही अब नई सामान्य स्थिति है और हमें तेज़ी से खुद को उसके अनुसार ढालने की आवश्यकता है।"

चर्चा में प्रौद्योगिकी को व्यक्तिगत उत्पादों से आगे ले जाने में साझेदारियों, खुली अवसंरचना, सह-निर्माण एवं टीमवर्क की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ काम करने वाले संगठनों को बातचीत, प्रयोग, विचार-मंथन और साझेदारी की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है, साथ ही ऐसा अवसंरचना तैयार करना चाहिए जो कई प्रतिभागियों को एक बड़े पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान करने में सक्षम बनाए।

संगोष्ठी में उभरती प्रौद्योगिकियों, व्यवसाय और नेतृत्व पर भी चर्चा हुईं, जिसमें प्रतिभागियों ने एआई-संचालित अर्थव्यवस्था में संगठनों एवं पेशेवरों की बदलती आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया। क्षमता निर्माण पर जोर का मतलब केवल तकनीकी विकास नहीं था बल्कि उससे आगे बढ़कर सार्थक रुप से अपनाने के लिए आवश्यक संगठनात्मक एवं पारिस्थितिकी तंत्र की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है।

छात्रों के साथ अपने संवाद को समाप्त करते हुए, श्री नाग ने उन्हें यह प्रोत्साहित किया कि वे केवल व्यक्तिगत आवेदन तक ही सीमित न रहें बल्कि बड़े प्लेटफॉर्म, मानकों और पारिस्थितिकी तंभ पर भी ध्यान दें जिन्हें वे बनाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा, उसने कहा, इसके बजाय पूछो, हम कौन सा पारिस्थितिकी तंत्र स्टैंडर्ड स्थापित कर सकते हैं, और कितनी तेज़ी से दूसरों की मदद से इसके आस-पास नेटवर्क इफ़ेक्ट तैयार कर सकते हैं?”

डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीज़नके संदर्भ में

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन का 'डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीज़न', एआई-आधारित बहुभाषी डिजिटल समावेशन के लिए भारत का राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म है। भाषिणी 800 से ज़्यादा सरकारी वेबसाइट्स को समर्थन देती है, इसने कुल मिलाकर 9 अरब से ज़्यादा संचयी कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुमान को सक्षम बना चुका है, प्रतिदिन 2.4 करोड़ से अधिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता अनुमान को प्रोसेस करता है, और 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय वॉइस भाषाओं तथा 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का समर्थन करता है, जिससे 'लैंग्वेज एआई' के माध्यम से डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना अधिक सुलभ बनता है।

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पीके/केसी/एके

 

 

 

 


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