पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

सरबानंदा सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर सोसायटी की दूसरी शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की और लोथल में हुई प्रगति की समीक्षा की


चरण 1ए में 82%  प्रगति पूरी हुई। भारत की समुद्री विरासत परियोजना के लिए 13 देशों ने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

एनएमएचसी लोथल के लिए वैश्विक सहयोग प्रयास का विस्तार 35 से अधिक देशों तक हो रहा है, जिसमें पहले से ही 13 देश शामिल हैं

प्रविष्टि तिथि: 11 SEP 2026 8:08PM by PIB Delhi

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन  और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) सोसायटी की दूसरी शासी परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में गुजरात के लोथल में बन रही महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसका उद्देश्य भारत की पांच सहस्राब्दियों से अधिक पुरानी समुद्री विरासत को पुनर्जीवित करना और प्रदर्शित करना है।

सोनोवाल ने एनएमएचसी को भारत सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और समुद्री पहलों में से एक बताते हुए कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य लोथल को समुद्री विरासत, ज्ञान, शिक्षा और पर्यटन के विश्व स्तर पर प्रसिद्ध केंद्र के रूप में स्थापित करना है। श्री सोनोवाल ने कहा कि लोथल में एनएमएचसी भारत सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और समुद्री पहलों में से एक है। उन्होंने याद दिलाया कि शासी परिषद ने जून 2025 में अपनी पहली बैठक में एक स्पष्ट दृष्टिकोण और दिशा निर्धारित की थी।

केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि सोसाइटी ने आयकर छूट, सीएसआर और दर्पण पंजीकरण सहित प्रमुख वैधानिक पंजीकरण पूरे कर लिए हैं। इससे भविष्य में संसाधन जुटाने के लिए इसका संस्थागत ढांचा मजबूत हुआ है। उन्होंने परियोजना को मिली अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया से विशेष रूप से प्रोत्साहन व्यक्त किया, जिसमें पुर्तगाल, यूएई, वियतनाम, थाईलैंड, नीदरलैंड, डेनमार्क, ओमान, इज़राइल, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, इटली, न्यूजीलैंड और सिंगापुर सहित 13 देशों ने सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं और 35 से अधिक देशों के साथ साझेदारी की प्रस्तावित योजना के लिए कई और देशों के साथ बातचीत जारी है। श्री सोनोवाल ने बताया कि ये साझेदारियां कलाकृतियों, प्रतिकृतियों, जहाज मॉडलों के आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग और सांस्कृतिक जुड़ाव को सक्षम बना रही हैं जिससे एनएमएचसी समुद्री कूटनीति का एक शक्तिशाली साधन बन गया है।

निर्माण कार्य की प्रगति के संबंध में, परिषद को सूचित किया गया कि चरण 1ए का लगभग 82 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। श्री सोनोवाल ने कार्यान्वयन एजेंसियों से 31 अक्टूबर 2026 की संशोधित समयसीमा को पूरा करने के लिए कड़ी निगरानी बनाए रखने का आग्रह किया और गैलरी 4 और 6, लोथल टाउन और एक्वाटिक थीमिंग जैसे उन घटकों की ओर ध्यान दिलाया जिनका कार्य अभी पूरा होना बाकी है। उन्होंने 1,492 कलाकृतियों की स्थापना के लिए तैयार होने की ओर भी ध्यान दिलाया और शीघ्र अनुमोदन की मांग की ताकि प्रदर्शनी को आगंतुकों के लिए समय पर शुरू किया जा सके।

संग्रहालय से आगे बढ़ते हुए, परिषद ने चरण 1बी और चरण 2 की योजनाओं की समीक्षा की, जिनमें अतिरिक्त गैलरी, एक 5डी डोम थिएटर, तटीय राज्य मंडप, प्रकाशस्तंभ एवं प्रकाशयान महानिदेशालय (डीजीएलएल) के सहयोग से प्रस्तावित प्रकाशस्तंभ संग्रहालय, भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (आईएमयू) के साथ विकसित किया जा रहा एक समुद्री अनुसंधान संस्थान (एमआरआई), एक म्यूज़ियोटेल और एक इको रिसॉर्ट शामिल होंगे। श्री सोनोवाल ने उल्लेख किया कि प्रस्तावित प्रकाशस्तंभ संग्रहालय में विश्व का सबसे ऊंचा प्रकाशस्तंभ संग्रहालय बनने की क्षमता है।

शासी परिषद ने बाहरी अवसंरचना में हुई प्रगति पर भी ध्यान दिया, जिसमें पूर्ण हो चुका धोलेरा एक्सप्रेसवे, उच्च गति रेल गलियारे की अंतिम योजना और लोथल में चल रही खुदाई (जो अब तक 70 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा की जा रही है) शामिल हैं। इसके अलावा, गुजरात सरकार द्वारा कनेक्टिविटी, बिजली, पानी और पर्यटक सुविधाओं के लिए दिए जा रहे निरंतर समर्थन की भी सराहना की गई। परिषद ने प्रस्तावित एनएमएचसी उपनियमों पर भी विचार किया और उन्हें मंजूरी दी, जो सोसायटी को एक पूर्णतः कार्यरत संस्था में परिवर्तित करने के लिए एक शासन ढांचा प्रदान करते हैं।

केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने इस परियोजना की गति का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि को दिया जिनके नेतृत्व में भारत की समुद्री विरासत को राष्ट्रीय नीति के केंद्र में रखा गया है। श्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के गतिशील नेतृत्व में हम लोथल में सिर्फ एक संग्रहालय का निर्माण नहीं कर रहे हैं  बल्कि भारत की पांच हजार साल पुरानी समुद्री सभ्यता को पुनर्जीवित कर रहे हैं और इसे दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।

श्री सोनोवाल ने एनएमएचसी टीम, आईपीआरसीएल, गुजरात सरकार, भारतीय नौसेना, आईएमयू, प्रमुख बंदरगाहों और सहयोगी मंत्रालयों के योगदान के लिए धन्यवाद व्यक्त किया और विश्वास जताया कि निरंतर प्रगति के साथ एनएमएचसी भारत की समुद्री विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं का जश्न मनाने वाले एक वैश्विक मील के पत्थर के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि  सामूहिक प्रयास, समन्वित कार्रवाई और इस शासी परिषद के निरंतर मार्गदर्शन से मुझे विश्वास है कि राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर एक वैश्विक मील के पत्थर के रूप में उभरेगा।

 

 

***

पीके/केसी/एनकेएस/


(रिलीज़ आईडी: 2309327) आगंतुक पटल : 118
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Gujarati