विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

‘इएसटीआईसी- 2026’ 27-29 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा; इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी करेंगे, इसमें तीन नोबेल पुरस्कार विजेता और कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शामिल होंगे: डॉ. जितेंद्र सिंह


मंत्री महोदय ने कहा कि इएसटीआईसी की परिकल्पना पिछले साल एक नए दृष्टिकोण के तहत की गई थी, ताकि साल भर अलग-अलग कार्यक्रम करने के बजाय विज्ञान और प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के कई हिस्सों को एक साझा मंच पर लाया जा सके

50-60 प्रतिशत स्टार्टअप अब बड़े शहरों के बजाय छोटे शहरों से आ रहे हैं; उनके पास आगे बढ़ने के लिए विशेषज्ञों, उद्यमियों, व्यापारिक अग्रणियों और बाजारों तक बेहतर अवसर है: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत की अगली नवाचार लहर बड़े शहरों के आगे से आनी चाहिए: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

गतिरोधों को तोड़ें, प्रयोगशालाओं से बाजारों तक जुड़ाव बढ़ाएं: डॉ. जितेंद्र सिंह ने इएसटीआईसी-2026 पूर्वावलोकन कार्यक्रम में मज़बूत तालमेल का आह्वान किया

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान के साथ प्रबंधन और संचार के व्यापक एकीकरण पर जोर दिया

डॉ. जितेंद्र सिंह ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ इएसटीआईसी का रोडमैप तैयार करने को कहा

प्रविष्टि तिथि: 10 SEP 2026 5:02PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि उभरता विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार कॉन्क्लेव- 2026’ (इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव- ‘इएसटीआईसी) का आयोजन 27-29 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम में किया जाएगा, इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी करेंगे और इसमें कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता वक्ताओं के अलावा तीन नोबेल पुरस्कार विजेता- प्रो. जोआचिम फ्रैंक, सर रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स और प्रो. कोस्त्या नोवोसेलोव भी शामिल होंगे।

इएसटीआईसी-2026’ के पूर्वावलोकन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी  के तेज़ी से आगे बढ़ने के साथ, इस इकोसिस्टम को वैज्ञानिक क्षमताओं के साथ-साथ प्रबंधन, संचार और दूसरे क्षेत्रों की विशेषज्ञता का भी ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इएसटीआईसी की शुरुआत पिछले साल एक नई सोच के तहत की गई थी, ताकि पूरे साल अलग-अलग बिखरे हुए कार्यक्रमों के बजाय विज्ञान और प्रौद्योगिकी  इकोसिस्टम के कई हिस्सों को एक ही मंच पर लाया जा सके। उन्होंने कहा कि यह सम्मलेन विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए अधिक एकीकृत तंत्र बनाने के उद्देश्य से शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच बेहतर बातचीत का अवसर प्रदान करता है।

मंत्री महोदय ने कहा कि संस्थागत गतिरोधों को तोड़ने का समय आ गया है, ताकि नवाचार को गति दी जा सके और भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव में बदला जा सके। इसके लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, स्टार्टअप्स, उद्योग, बाजारों और समाज के बीच मजबूत संबंध बनाना आवश्यक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इएसटीआईसी -2026 का विषय-"सृजनात्मक मन, उत्प्रेरित होता विज्ञान, सशक्त बनती प्रौद्योगिकियां" वैज्ञानिक नवाचार में रचनात्मकता और कल्पना के महत्व को रेखांकित करता है। डॉ. सिंह ने कहा कि रचनात्मकता और कल्पनाशीलता नवाचार की क्षमताओं को मजबूत करती हैं, जबकि विचारों को सार्थक परिणामों में बदलने के लिए एक अनुकूल इकोसिस्टम आवश्यक है।

भारत के स्टार्टअप विकास का उल्लेख करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2014 में देश में लगभग 350-400 स्टार्टअप थे, जबकि अब यह संख्या 2.3 लाख को पार कर गई है, जिससे भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है। उन्होंने कहा कि 50-60 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप अब बड़े शहरों के बजाय छोटे शहरों से आ रहे हैं, जो देश भर में उद्यमिता और नवाचार के बढ़ते दायरे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे उभरते स्टार्टअप्स को बड़े स्तर पर काम करने के लिए विशेषज्ञों, उद्यमियों, अग्रणीय व्यापारियों और बाजारों तक बेहतर पहुँच मिलनी चाहिए।

मंत्री महोदय ने कहा कि इएसटीआईसी के भावी संस्करणों में प्रबंधन और संचार संस्थानों को और अधिक व्यापक रूप से शामिल किया जा सकता है। प्रबंधन विशेषज्ञता स्टार्टअप्स और संभावित उद्यमियों को बाजार तक पहुंच बनाने की रणनीतियां विकसित करने में मदद कर सकती है, जबकि संचार विशेषज्ञता वैज्ञानिक उपलब्धियों को युवाओं और समाज के व्यापक वर्गों तक उनकी भाषा और माध्यमों से पहुंचाने में मदद कर सकती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसा अनुकूल तंत्र बनाने के सरकार के प्रयासों में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन और 1 लाख करोड़ रुपये का अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष जैसी पहल शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न मंत्रालयों और हितधारकों का एक साथ आना अनुसंधान और नवाचार से लेकर प्रौद्योगिकी विकास, उद्यमिता और बाजार अनुप्रयोगों तक की यात्रा को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

मंत्री महोदय ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में भारत की हालिया उपलब्धियों का भी उल्लेख किया, जिनमें 'डीप ओशन मिशन' (समुद्र यान मिशन) और समुद्री अर्थव्यवस्था (ब्लू इकोनॉमी) पर देश का बढ़ता ध्यान शामिल है। भारत के पहले स्वदेशी अनुसंधान पोत के शुभारंभ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब समुद्री अर्थव्यवस्था द्वारा प्रदान किए जाने वाले अवसरों की खोज के लिए बड़े पैमाने पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत की बढ़ती वैज्ञानिक क्षमताओं के पैमाने के उदाहरण के रूप में अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी में उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।

तीन दिन के कॉन्क्लेव के बाद भी काम जारी रखने की बात करते हुए, डॉ. सिंह ने वैज्ञानिक सलाहकार और आयोजन टीमों से कहा कि वे इएसटीआईसी में हुई चर्चाओं और सीख के आधार पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक  लक्ष्यों वाला एक रोडमैप तैयार करें। उन्होंने कहा कि एक संस्करण का अनुभव अगले संस्करण में काम आना चाहिए और अंतर-मंत्रालयी प्रयास जारी रहने चाहिए ताकि यह कॉन्क्लेव केवल एक अलग-थलग वार्षिक कार्यक्रम बनकर न रह जाए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने युवा नवप्रवर्तकों के बीच स्टार्टअप पंजीकरण, पेटेंट और अन्य नवाचार प्रक्रियाओं से संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में ज़्यादा जानकारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कई संभावित उद्यमियों के पास विचार और क्षमताएं हो सकती हैं, लेकिन वे अपने नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं से अनजान रहते हैं; ऐसी जानकारी तक आसान पहुंच इस क्षमता को उजागर करने में मदद कर सकती है।

तेजी से बदलते प्रौद्योगिकी परिदृश्य, विशेष रूप से कृत्रिम मेधा (एआई) के बारे में  मंत्री महोदय ने कहा कि प्रौद्योगिकी तेजी से युवाओं के लिए केवल प्रौद्योगिकी द्वारा निर्मित अवसरों की तलाश करने के बजाय नई संभावनाएं पैदा करने का एक साधन बन रही है। उन्होंने कहा कि इएसटीआईसी को समाज की हर पीढ़ी और वर्ग, विशेष रूप से युवाओं के लिए दिलचस्पी का कार्यक्रम बनना चाहिए।

पूर्वावलोकन कार्यक्रम के मौके पर भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय के. सूद; वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी; जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले; इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय की वैज्ञानिक सचिव डॉ. परविंदर मैनी के साथ-साथ मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय के. सूद ने कहा कि इएसटीआईसी-2026 अपने पहले संस्करण की सफलता को आगे बढ़ा रहा है।  पहले संस्करण में 13 मंत्रालयों, प्रमुख संस्थानों, उद्योग भागीदारों और 5,000 से अधिक प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया था। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन संपूर्ण-सरकार दृष्टिकोण को मूर्त रूप देता है और एक साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण के तहत युवा नवोन्मेषकों, नीति निर्माताओं, संस्थानों और उद्योग जगत को एक साथ लाता है, जिसमें भारत के लिए महत्वपूर्ण उभरते अवसरों को कवर करने वाले 12 विषयगत क्षेत्र शामिल हैं।

डीएसआईआर की सचिव और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलाईसेल्वी ने कहा कि सीएसआईआर ने सीएसआईआर-एनआईआईएसटी, तिरुवनंतपुरम को नोडल प्रयोगशाला बनाते हुए इएसटीआईसी-2026 के आयोजन की जिम्मेदारी संभाली है और इस पहल के लिए 13 मंत्रालय एक साथ आए हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार इकोसिस्टम के बीच समन्वय को मजबूत करेगा और 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देगा।

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के मार्गदर्शन में सीएसआईआर द्वारा आयोजित और सीएसआईआर-एनआईआईएसटी की आयोजन भागीदारी वाला इएसटीआईसी-2026, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, वैश्विक वैज्ञानिक दिग्गजों, डीप-टेक स्टार्टअप्स, महिला उद्यमियों, युवा वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं, उद्योगपतियों, नीति निर्माताओं और शिक्षा जगत, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाएगा।

तीन दिवसीय इस सम्मेलन में मुख्य भाषण, 12 विषयगत तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी दिग्गजों व डीप-टेक स्टार्टअप्स द्वारा प्रस्तुतियां, प्रदर्शनियां, पोस्टर प्रस्तुतियां और बी2बी/बी2जी बैठकें शामिल होंगी। विषयगत क्षेत्रों में उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा प्रौद्योगिकियां, सिंथेटिक जीव विज्ञान, महासागर और समुद्री प्रौद्योगिकियां, क्वांटम संचार, सेमीकंडक्टर, एग्री-टेक, जनरेटिव और स्वायत्त एआई, रोबोटिक्स, उन्नत स्वास्थ्य देखभाल, इमर्सिव प्रौद्योगिकियां और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्र शामिल हैं।

इएसटीआईसी-2026 में भाग लेने वाली प्रमुख वैज्ञानिक हस्तियों में तीन नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. जोआचिम फ्रैंक, सर रिचर्ड जे. रॉबर्ट्स और प्रो. कोस्ट्या नोवोसेलोव शामिल हैं। इस सम्मेलन में भारत के उभरते स्टार्टअप और डीप-टेक  इकोसिस्टम को प्रदर्शित करने वाली एक प्रौद्योगिकी-उन्मुख प्रदर्शनी भी शामिल होगी, जो दूसरे दिन से आम लोगों के लिए खुली रहेगी।

इएसटीआईसी-2026 का आयोजन 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में किया जाएगा। भारत के माननीय प्रधानमंत्री 27 अक्टूबर 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में इएसटीआईसी-2026 का उद्घाटन करेंगे। पंजीकरण शुरू चुका है और 15 सितंबर 2026 को बंद हो जाएगा।

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/sep/image001_20260910170358_43532b.jpg

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/sep/image002_20260910170409_c637de.jpg

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/sep/image003_20260910170420_fe64b3.jpg

https://static.pib.gov.in/WriteReadData/userfiles/image/2026/sep/image004_20260910170430_f6162e.jpg

***

पीके/केसी/एसके


(रिलीज़ आईडी: 2308857) आगंतुक पटल : 75
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu , Telugu