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7वां ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026


प्रभाव डालने की प्रबल क्षमता

प्रविष्टि तिथि: 08 SEP 2026 6:01PM by PIB Delhi

फिनटेक क्रांति का सशक्तिकरण

 

भारत व्यापक विस्तार, नवाचार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) के माध्यम से वैश्विक फिनटेक परिदृश्य को नया आकार दे रहा है। आधार कार्ड की शुरुआत, इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) में हुई प्रगति ने वित्तीय सेवाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए हैं। इन नवाचारों ने डिजिटल पहचान, त्वरित भुगतान और सहमति आधारित डेटा साझाकरण को व्यापक जनसमूह तक पहुंचाया है। भारत का अनुभव दर्शाता है कि प्रौद्योगिकी किस तरह वित्तीय सेवाओं को अधिक सुलभ, कुशल और समावेशी बना सकती है।

इस परिवर्तन ने भारत को फिनटेक नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के वैश्विक केंद्र के तौर पर स्थापित किया है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (जीएफएफ) 2026 इस क्षेत्र में भारत के बढ़ते वैश्विक असर को प्रतिबिंबित करता है। जीएफएफ का 7वां संस्करण 8 से 11 सितंबर 2026 तक मुंबई में आयोजित किया जा रहा है। यह वित्तीय प्रौद्योगिकी में वैश्विक संवाद, सहयोग और नवाचार हेतु एक मंच प्रदान करता है।

 

2020 में अपनी स्थापना के बाद से ही, जीएफएफ दुनिया के अग्रणी फिनटेक सम्मेलनों में से एक बन गया है। इसकी प्रगति भारत की डिजिटल वित्तीय संरचना और फिनटेक क्षमताओं में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाती है। यह महोत्सव भारत के अनुभव को प्रदर्शित करने और वैश्विक नवाचारियों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करने का एक मंच प्रदान करता है। यह विकसित अर्थव्यवस्थाओं, उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के साथ जुड़ाव को भी सुदृढ़ करता है।

 

जीएफएफ 2026 की सफलता में योगदान देने वाली संस्थाएं

भारतीय भुगतान परिषद (पीसीआई), भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और फिनटेक कन्वर्जेंस काउंसिल (एफसीसी) जीएफएफ के प्रमुख आयोजक हैं। इसके साथ ही, जीएफएफ 2026 को निम्नलिखित संस्थाओं का सहयोग प्राप्त है:

  • इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई)
  • वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय
  • न्यू, इमर्जिंग एंड स्ट्रैटेजिक टेक्नोलॉजी (एनईएसटी) डिवीजन, विदेश मंत्रालय
  • नीति आयोग
  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई)
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)
  • अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए)
  • पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए)

 

जीएफएफ 2026 - वित्तीय नवाचार की अगली लहर का सशक्तिकरण

 

सातवां ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 एक सम्मेलन मात्र से कहीं अधिक है। यह दुनिया का सबसे बड़ा फिनटेक महोत्सव है, जो एआई-संचालित भविष्य को आकार देने के लिए प्रतिभाशाली लोगों को एक साथ लाता है। जीएफएफ का हर संस्करण नवाचार और समावेशी विकास तथा समृद्धि के साझा दृष्टिकोण से प्रेरित रहा है।

 

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट - विषयवस्तु और एजेंडा

जीएफएफ 2026 का विषय है प्रभाव डालने की की प्रबल क्षमता: एजेंटिक एआई | टोकनाइजेशन | क्वांटम: समावेशी अर्थव्यवस्था हेतु विश्वसनीय, संबद्ध और वैश्विक प्रणालियां। यह तीन मूलभूत प्रौद्योगिकियों पर आधारित है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के परिदृश्य को स्वायत्त, निर्देशयोग्य और सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र की ओर परिवर्तित कर रही हैं।

  • एजेंटिक एआई: यह वित्तीय प्रणालियों को मजबूत शासन फ्रेमवर्क के भीतर वास्तविक समय में स्थिति को समझने, निर्णय लेने और कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है। यह संपूर्ण कार्यप्रवाह को सुव्यवस्थित करता है, नियामक निगरानी को मजबूत करता है, धोखाधड़ी की रोकथाम को बढ़ाता है और व्याख्या योग्य बुद्धिमत्ता के माध्यम से मानवीय निर्णय लेने की क्षमता को सशक्त करते हुए बड़े पैमाने पर वित्तीय सेवाओं को जिम्मेदारीपूर्वक वैयक्तिकृत करता है।
  • टोकनीकरण: यह परिसंपत्तियों को प्रोग्राम करने योग्य डिजिटल इकाइयों में परिवर्तित करता है, जिससे आंशिक स्वामित्व, त्वरित निपटान और अंतरसंचालनीय मुद्रा संभव हो पाती है। तरलता को सुगम बनाकर और पहुंच को लोकतांत्रिक बनाकर, यह वैश्विक वित्तीय प्रणालियों में पूंजी बाजारों, भुगतानों और भागीदारी को नया आकार देता है।
  • क्वांटम: क्वांटम प्रौद्योगिकियां गणना और सुरक्षा में एक मूलभूत बदलाव लाती हैं। क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी से लेकर उन्नत स्तर के जोखिम अनुकूलन तक, ये प्रणालीकरण को मजबूत करती हैं और भविष्य के वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर में दीर्घकालिक विश्वास को सुनिश्चित करती हैं।

 

जीएफएफ 2026 का एजेंडा देखने के लिए यहां क्लिक करें

फिनटेक को समझना

 

फिनटेक को आम तौर पर एक ऐसे उद्योग के तौर पर परिभाषित किया जाता है जो वित्तीय प्रणालियों और वित्तीय सेवाओं के वितरण को अधिक कुशल बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करता है। यह "प्रौद्योगिकी-आधारित वित्तीय नवाचार" को संदर्भित करता है जो नए व्यावसायिक मॉडल, अनुप्रयोग, प्रक्रियाएं या उत्पाद तैयार कर सकता है, जिसका वित्तीय बाजारों, संस्थानों और वित्तीय सेवाओं के प्रावधान पर बड़ा असर पड़ता है।

 

फिनटेक की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली प्रमुख सहायक प्रौद्योगिकियां

  • एपीआई (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस): एपीआई नियमों और विशिष्टताओं का एक समूह है जिसका इस्तेमाल सॉफ्टवेयर प्रोग्राम एक दूसरे के साथ संवाद करने के लिए करते हैं। ये मौजूदा एप्लिकेशन के ऊपर नए एप्लिकेशन बनाने की अनुमति देते हैं।
  • क्लाउड कंप्यूटिंग: कंप्यूटिंग क्षमता के पैमाने और लचीलेपन को बढ़ाने और लागत में बचत करने के लिए होस्टिंग प्रोसेसर के एक ऑनलाइन नेटवर्क ('क्लाउड') का इस्तेमाल करना।
  • बायोमेट्रिक्स: विशिष्ट और मापने योग्य मानवीय विशेषताओं का अध्ययन, जिनका इस्तेमाल लोगों को वर्गीकृत करने और उनकी पहचान करने के लिए किया जा सकता है।
  • डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (डीएलटी): परिसंपत्तियों के लेन-देन को रिकॉर्ड करने की एक डिजिटल प्रणाली, जिसमें विवरण एक ही समय में कई स्थानों पर दर्ज किए जाते हैं।
  • बिग डेटा: डिजिटल उपकरणों और सूचना प्रणालियों की ओर से निर्मित, विश्लेषण और इस्तेमाल किए जा सकने वाले संरचित या असंरचित डेटा की विशाल मात्रा।
  • आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल): ये ऐसे आईटी सिस्टम हैं, जो ऐसे काम कर सकते हैं जिनके लिए आमतौर पर मानवीय क्षमताओं की आवश्यकता होती है। मशीन लर्निंग में कंप्यूटर बिना मानवीय हस्तक्षेप के डेटा से सीखते हैं।

फिनटेक का महत्व और लाभ

वित्तीय प्रौद्योगिकी में वित्तीय परिदृश्य को मौलिक रूप से बदलने की क्षमता है - यह उपभोक्ताओं को अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर वित्तीय उत्पादों के व्यापक विकल्प प्रदान करती है, साथ ही वित्तीय संस्थानों को अधिक कुशलता से कार्य करने में सहायता करती है। वित्तीय प्रौद्योगिकी विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में दक्षता, समावेशन और वित्तीय स्थिरता में उल्लेखनीय सुधार ला रही है।

  • फिनटेक ने वित्तीय क्षेत्र को अधिक कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उदाहरण के लिए, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा विश्व की सबसे बड़ी वास्तविक समय भुगतान प्रणाली के रूप में मान्यता प्राप्त यूपीआई ने केवल जुलाई 2026 में ही 2,365.8 करोड़ लेनदेन संसाधित किए, जिनका कुल मूल्य 29.88 लाख करोड़ रुपये था। इस मंच पर 741 बैंक सक्रिय थे और वित्तीय वर्ष 2016-17 से लेनदेन की संख्या में लगभग 12,000 गुना वृद्धि हुई है।
  • सूचना की विषमता या उच्च लेन-देन लागत जैसी बाजार संबंधी कमियों को दूर करके, फिनटेक वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहन देने में सहायक है। भारत का वित्तीय समावेशन सूचकांक मार्च 2017 में 43.4 से बढ़कर मार्च 2026 में 70.0 हो गया।
  • फिनटेक के विकास से क्रेडिट स्रोतों में पारंपरिक बैंकिंग चैनलों से परे विविधता रही है। क्रेडिट प्रदान करने में अधिक विविधता से सीमित संख्या में बैंकों पर निर्भरता से पैदा होने वाले प्रणालीगत जोखिम कम हो सकते हैं। इससे वित्तीय इकोसिस्टम की मजबूती, प्रतिस्पर्धा और स्थिरता बढ़ सकती है।

भारत की फिनटेक सफलता की नींव

 

भारत की फिनटेक सफलता डिजिटल इंडिया और डीपीआई में एक दशक के निवेश पर आधारित है। यह आधार सार्वभौमिक पहुंच, डिजिटल पहचान, अंतरसंचालनीय भुगतान और खुले डिजिटल नेटवर्क को जोड़ता है। इन क्षमताओं ने एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया है, जहां वित्तीय नवाचार तेजी से और समावेशी रूप से विस्तार कर सकता है। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में अधिक जानने के लिए क्लिक करें।

 

  • जेएएम ट्रिनिटी: डिजिटल वित्तीय समावेशन की नींव रखती है। जन धन खाते औपचारिक बैंकिंग तक पहुंच प्रदान करते हैं, जबकि आधार सुरक्षित डिजिटल पहचान सुनिश्चित करते हैं। इंटरनेट की बढ़ती पहुंच नागरिकों को डिजिटल वित्तीय सेवाओं से जोड़ती है। 26 अगस्त 2026 तक 59.15 करोड़ जन धन खाते खोले जा चुके हैं और आधार पंजीकरण मार्च 2026 तक 144 करोड़ से अधिक हो गए थे। इसने पूरे देश में फिनटेक सेवाओं के लिए एक बड़ा और सुलभ आधार तैयार किया है।
  • यूपीआई: एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) भारत के डिजिटल लेन-देन को संचालित करने वाला अंतरसंचालनीय भुगतान फ्रेमवर्क प्रदान करता है। यूपीआई लेन-देन की संख्या अगस्त 2026 में 24,509 मिलियन तक पहुंच गई। यह प्लेटफॉर्म वैश्विक त्वरित समय के डिजिटल लेन-देन की मात्रा का लगभग 50% संभालता है और 11 देशों में कार्यरत है। यह ओपन फ्रेमवर्क फिनटेक कंपनियों को व्यापक जनसमूह के लिए अभिनव भुगतान समाधान विकसित करने की अनुमति देता है।
  • डिजिटल पहचान और दस्तावेज: सुरक्षित और कुशल वित्तीय सेवाओं के लिए विश्वसनीय डिजिटल पहचान अनिवार्य है। आधार -केवाईसी डिजिटल ग्राहक सत्यापन को सक्षम बनाता है, साथ ही कागजी कार्रवाई और पंजीकरण प्रक्रिया में लगने वाले समय को भी कम करता है। 29 जून 2026 तक इसने 2,458 करोड़ से अधिक लेन-देन संसाधित किए। डिजीलॉकर के 73.53 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और इसने 936.03 करोड़ दस्तावेज जारी किए हैं। ये डिजिटल प्रणालियां वित्तीय सेवाओं में ग्राहक पंजीकरण और सत्यापन को सरल बनाते हुए भरोसे को सुदृढ़ करती हैं।
  • डिजिटल कल्याण वितरण: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) डिजिटल वित्तीय अवसंरचना के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे लाभ पहुंचाने की व्यवस्था है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है, पारदर्शिता बढ़ती है और सरकारी लाभों का तेजी से वितरण सुनिश्चित होता है। सितंबर 2026 तक डीबीटी के माध्यम से 53.26 लाख करोड़ रुपये की संचयी राशि सीधे लाभार्थियों को अंतरित की जा चुकी है। इस स्तर पर होने वाले डिजिटल अंतरण भारत की वित्तीय अवसंरचना की सेवाओं को कुशलतापूर्वक उपलब्ध कराने की क्षमता को दर्शाते हैं।
  • ओपन डिजिटल कॉमर्स: डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क (ओएनडीसी) भारत के इंटरऑपरेबल डिजिटल दृष्टिकोण को भुगतान से आगे बढ़ाता है। जून 2026 तक, ओएनडीसी 1000+ शहरों में 20 करोड़ से अधिक खरीदारों और 5 लाख विक्रेताओं तक पहुंच चुका था। इसकी वित्तीय सेवा श्रेणी डिजिटल वित्तीय उत्पादों के लिए नए मौके पैदा कर रही है। यह ओपन आर्किटेक्चर फिनटेक कंपनियों को नए उपयोगकर्ताओं और बाजारों तक अधिक कुशलता से पहुंचने में मदद कर सकता है।

 

एक मजबूत, विश्वसनीय नियामक इकोसिस्टम

 

भारत के फिनटेक क्षेत्र के विस्तार के साथ-साथ, सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने डिजिटल अर्थव्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने वाले नियामक और उपभोक्ता-संरक्षण फ्रेमवर्क को लगातार मजबूत किया है।

  • स्व-नियमन और मानक: वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में स्व-नियामक संगठनों के लिए आरबीआई का फ्रेमवर्क (एसआरओ-एफटी, मई 2024) उद्योग के भीतर नैतिक आचरण, बाजार अखंडता और विवाद समाधान को प्रोत्साहन देता है।
  • भुगतान सुरक्षा: डिजिटल भुगतान सुरक्षा नियंत्रणों पर आरबीआई के मास्टर दिशा-निर्देश (2021) वेब और मोबाइल ऐप खतरों से निपटने के लिए कई भुगतान चैनलों (इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग सहित) में सामान्य न्यूनतम सुरक्षा मानकों को अनिवार्य करते हैं, जबकि एनपीसीआई ने यूपीआई लेन-देन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई)/ मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित धोखाधड़ी निगरानी तैनात की है।
  • डेटा संरक्षण: लोगों के निजी डेटा की सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 2023 में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम और 2025 में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम अधिसूचित किए।
  • सुरक्षित नवाचार परीक्षण: भारतीय रिजर्व बैंक ने अगस्त 2019 में रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया, जिससे नियामक छूट के साथ या उसके बिना, नियंत्रित नियामक वातावरण में नवीन वित्तीय उत्पादों और सेवाओं का परीक्षण करने की अनुमति मिलती है।
  • डिजिटल लेंडिंग में उपभोक्ता संरक्षण: एकसुदृढ़ नियामक ढांचा, डिजिटल ऋण ऐप्स (डीएलए) की निर्देशिका और साइबर अपराध की रिपोर्टिंग संबंधी व्यवस्थाएं नागरिकों को धोखाधड़ी वाले ऋण ऐप्स से सुरक्षित रखने में मदद करती हैं। इनमें राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन 1930 शामिल हैं। वहीं, सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध सचेत पोर्टल विशेष रूप से अवैध रूप से जमा राशि एकत्र करने से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करता है।
  • इसलिए नियामक दृष्टिकोण केवल नवाचार के बाजार में पहुंचने के बाद उस पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है। यह संस्थागत तंत्र बनाता है जिसके माध्यम से जिम्मेदार नवाचार का परीक्षण, मूल्यांकन और सहयोग किया जा सकता है।

 

आगे की दिशा

 

भारत का फिनटेक इकोसिस्टम व्यापकता, अंतरसंचालनीयता, नवाचार और संस्थागत विश्वास पर आधारित है। इसका डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना सुलभ, किफायती और समावेशी वित्तीय सेवाओं के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। अगले चरण में डिजिटल संप्रभुता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भरोसेमंद नवाचार को और अधिक सुदृढ़ किया जाना चाहिए। खुले डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों, स्टार्टअप्स और व्यवसायों के लिए प्रौद्योगिकी को और अधिक लोकतांत्रिक बना सकते हैं।

उभरती प्रौद्योगिकियां अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और कुशल वित्तीय सेवाओं को सक्षम बना सकती हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, टोकनीकरण, ब्लॉकचेन और क्वांटम प्रौद्योगिकियां वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में नए मौके खोल सकती हैं डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ-साथ मजबूत साइबर सुरक्षा, डेटा संरक्षण और उपभोक्ता सुरक्षा उपाय जरूरी बने रहेंगे। फिनटेक नवाचार को जन-केंद्रित शासन, समावेशन और सार्वजनिक मूल्यों पर आधारित रहना चाहिए।

भारत उभरती अर्थव्यवस्थाओं और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ साझेदारी के माध्यम से अपनी डिजिटल विशेषज्ञता को और अधिक साझा कर सकता है। इससे समावेशी डिजिटल वित्तीय प्रणालियों के निर्माण में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की भूमिका मजबूत हो सकती है। आगे बढ़ने का रास्ता एक संप्रभु, सुरक्षित और समावेशी डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। यह दृष्टिकोण भारत को जन-केंद्रित डिजिटल अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार देने में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित कर सकता है।

 

संदर्भ

 

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट

पीआईबी

वित्त मंत्रालय

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम

भारतीय रिजर्व बैंक

अन्य

पीआईबी शोध

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