कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय
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पहाड़ी क्षेत्रों में पशुधन निगरानी में एआई से नई पहल, यह तकनीक किसानों के अपने पशुधन के प्रबंधन के तरीके को बदल सकता है


नागालैंड स्थित आईसीएआर के एक फार्म में कैमरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मिथुन के दैनिक व्यवहार को समझने और उसका विश्लेषण करने में जुटे हैं, यह तकनीक भविष्य में किसानों को ब्रीडिंग, पशु स्वास्थ्य और चौबीसों घंटे पशुधन की निगरानी में मददगार साबित हो सकती है

प्रविष्टि तिथि: 08 SEP 2026 6:36PM by PIB Delhi

पशुधन अनुसंधान और प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, नागालैंड स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र के शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक फार्म के माहौल में मिथुन के व्यवहार की रियल-टाइम पहचान और ट्रैकिंग के लिए एक एआई-आधारित प्रणाली विकसित की है। यह शोध पशुओं के निरंतर व्यवहार की निगरानी करने में सक्षम है और पशु स्वास्थ्य, कल्याण, नस्ल सुधार (ब्रीडिंग) व प्रजनन प्रबंधन के लिए बहुमूल्य जानकारी प्रदान कर सकता है।

हाल ही में प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस में प्रकाशित एक अध्ययन में मिथुन (बॉस फ्रोंटालिस) के व्यवहार की स्वचालित पहचान और ट्रैकिंग के लिए एआई-आधारित, रियल-टाइम और नॉन-कांटेक्ट ढाँचे को पेश किया गया है। पहाड़ों के मवेशी के नाम से लोकप्रिय मिथुन, पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय समुदायों के लिए अत्यधिक सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व रखता है, साथ ही यह क्षेत्र में आजीविका और खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

पशुधन प्रबंधन में मवेशियों के व्यवहार की निगरानी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके खाने-पीने, खड़े होने, बैठने और प्रजनन संबंधी व्यवहार में बदलाव से पशु के स्वास्थ्य, आराम, पोषण और शारीरिक स्थिति का शुरुआती संकेत मिल सकता है। हालांकि, पारंपरिक निगरानी मुख्य रूप से मैन्युअल ऑब्जर्वेशन पर निर्भर करती है, जिसमें काफी मेहनत लगती है और इसे लगातार - विशेषकर रात के समय इसे जारी रखना बेहद कठिन होता है।

इस चुनौती से निपटने के लिए, शोधकर्ताओं ने नागालैंड स्थित आईसीएआर-एनआरसी ऑन मिथुन फार्म के दो शेड्स में 12 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए। इन कैमरों ने इन्फ्रारेड कवरेज के जरिए दिन-रात लगातार निगरानी की सुविधा प्रदान की। रिकॉर्ड की गई फुटेज का उपयोग करके, शोध टीम ने 3,000 मैन्युअल रूप से वर्गीकृत छवियों का एक डेटासेट तैयार किया है जिसमें मिथुन के चार प्रमुख व्यवहार—भोजन करना, खड़े रहना, बैठना और माउंटिंग—को शामिल किया गया।

एआई आधारित इस प्रणाली में व्यवहार की पहचान के लिए YOLOv8n मॉडल तथा वीडियो के विभिन्न फ्रेम में प्रत्येक पशु की गतिविधियों पर नजर रखने और उसकी विशिष्ट पहचान बनाए रखने के लिए DeepSORT तकनीक का उपयोग किया गया है। यह प्रणाली किसी पशु द्वारा किए जा रहे व्यवहार की पहचान करने के साथ-साथ अलग-अलग मिथुन पशुओं की वास्तविक समय में निगरानी करने में भी सक्षम है।

YOLOv8n मॉडल ने mAP@0.5 पर 99.5 प्रतिशत का मीन एवरेज प्रिसीजन तथा 99.6 प्रतिशत का रिकॉल हासिल किया। NVIDIA RTX 3060 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट पर प्रणाली ने लगभग 31 फ्रेम प्रति सेकंड की प्रोसेसिंग गति दर्ज की, जो वास्तविक समय में इसके उपयोग की क्षमता को दर्शाती है। इस एआई फ्रेमवर्क का परीक्षण फार्म की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी किया गया, जिनमें आंशिक रूप से पशु का दृश्य से ओझल होना, बैकग्राउंड में अव्यवस्था, ऊबड़-खाबड़ और गीली जमीन, छाया, मोशन ब्लर तथा रात के समय इंफ्रारेड फुटेज जैसी स्थितियां शामिल थीं।

यह तकनीक पशुधन की निगरानी और प्रबंधन में सुधार के लिए अपार संभावनाएं रखती है। खाने, खड़े होने और बैठने के पैटर्न में बदलाव से पशु के स्वास्थ्य, आराम और शारीरिक स्थिति के बारे में उपयोगी जानकारी मिल सकती है, जबकि माउंटिंग व्यवहार से प्रजनन और एस्ट्रस प्रबंधन में मदद मिल सकती है। इस निरंतर स्वचालित निगरानी के जरिए किसान और पशुधन प्रबंधक पशुओं के व्यवहार संबंधी महत्वपूर्ण आंकड़े प्राप्त कर सकेंगे।

 

दो प्रमुख व्यवहार, यूनिक आईडी के साथ ट्रैक: लेटने और चरने की गतिविधि 96 प्रतिशत सटीकता (कॉन्फिडेंस) के साथ एक ही फ्रेम में दर्ज

 

नाइट विज़न: इन्फ्रारेड में 97% सटीकता के साथ माउंटिंग व्यवहार

 

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में इस प्रणाली का मूल्यांकन केवल एक ही फार्म पर किया गया है। इसलिए विभिन्न फार्मों, भौगोलिक क्षेत्रों, मौसमों, मवेशियों की संख्या और कैमरों की अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत इसका और अधिक परीक्षण व सत्यापन आवश्यक है। वर्तमान अध्ययन मुख्य रूप से चार प्रकार के व्यवहारों पर केंद्रित है, जबकि अत्यधिक रुकावट की स्थिति में एआई की पहचान और ट्रैकिंग क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, स्टैंडर्ड ट्रैकिंग मेट्रिक्स का उपयोग करके मवेशियों की पहचान की सटीक ट्रैकिंग का मात्रात्मक मूल्यांकन करने के लिए आगे और शोध की आवश्यकता है।

शोधकर्ता भविष्य में इस एआई फ्रेमवर्क का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं, ताकि मवेशियों के अन्य व्यवहारों जैसे—आक्रामकता, शरीर की सफाई करना और बीमारी के कारण सुस्ती/निष्क्रियता की पहचान की जा सके। भविष्य के कार्यों में टेम्पोरल एआई मॉडल, फार्म स्तर पर तुरंत डेटा प्रोसेस करने वाले एज डिवाइस और विभिन्न फार्मों व मौसमों को कवर करने वाले बड़े डेटासेट का विकास शामिल हो सकता है।

यह अध्ययन पशुधन प्रबंधन के लिए तकनीक-संचालित समाधान विकसित करने हेतु पशुधन विज्ञान को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर विजन के साथ जोड़ने की अपार क्षमताओं को दर्शाता है। इस तरह के नवाचार प्रिसिजन लाइवस्टॉक फार्मिंग (सटीक पशुपालन तकनीक) को मजबूत कर सकते हैं और पशुओं के व्यवहार की निरंतर, डेटा-आधारित निगरानी के माध्यम से किसानों और पशुपालकों को सीधा लाभ पहुँचा सकते हैं।

यह अध्ययन इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस के वॉल्यूम 8 (2026), आर्टिकल 175213 में प्रकाशित हुआ है। यह शोध आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा एनआईटी नागालैंड, नागालैंड यूनिवर्सिटी और क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के शोधकर्ताओं के सहयोग से पूरा किया गया है।

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