इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग ने नेपाल में भाषिणी शिल्पी का आयोजन किया; इसमें भाषा एआई से भविष्य में बनाने के लिए डेवलपर्स एकजुट हुए
संवाद आधारित डेवलपर सत्र में चर्चा की गई कि कैसे भाषा प्रौद्योगिकी वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को समावेशी, बहुभाषी डिजिटल समाधानों में बदल सकती है
प्रविष्टि तिथि:
31 AUG 2026 6:43PM by PIB Delhi
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया निगम (डीआईसी) के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) ने आज काठमांडू में भारतीय दूतावास में भाषिणी शिल्पी सत्र आयोजित किया। इस सत्र में भाषा से जुड़ी एआई तकनीक के जरिए कुछ नया बनाने की संभावनाओं पर चर्चा करने के लिए नेपाल के डेवलपर्स, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ और नवप्रवर्तक (इनोवेटर्स) एकजुट हुए।
डेवलपर्स, छात्रों और नवप्रवर्तकों के लिए एक आकर्षक और संवादात्मक प्लेटफॉर्म के रूप में डिज़ाइन किया गया, भाषिणी शिल्पी किसी पारंपरिक प्रौद्योगिकी सत्र से आगे बढ़कर एक ऐसा स्थान बनाता है जहां प्रतिभागी भाषा से जुड़े एआई से सीख सकते हैं, प्रयोग कर सकते हैं, समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और कुछ नया बना सकते हैं। यह सत्र आइडिया और प्रौद्योगिकी को एक साथ लाता है और प्रतिभागियों को भाषिणी के साथ विकास, समाधान तलाशने, विस्तार करने और नवाचार की यात्रा पर ले जाता है। इसके साथ ही यह उन्हें वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को समझने, विचारों का आदान-प्रदान करने और समावेशी, बहुभाषी डिजिटल समाधान बनाने की नई संभावनाओं की खोजने के लिए प्रोत्साहित करता है। प्रतिभागियों पर केंद्रीत बातचीत में भाषिणी शिल्पी का उद्देश्य ऐसे बढ़ते बिल्डरों का एक समुदाय तैयार करना है, जो भाषा प्रौद्योगिकी का उपयोग करके लोगों, भाषाओं और समुदायों के लिए कारगर समाधान बना सकें।

सत्र में लाइव प्रदर्शन, व्यावहारिक चर्चा और एक खुला प्रश्नोत्तर सत्र शामिल था, जिससे प्रतिभागियों को भाषिणी टीम के साथ सीधे बातचीत करने, प्रश्न पूछने, अपनी शंकाओं को दूर करने और भाषिणी के साथ मिलकर समाधान विकसित करने की संभावनाओं का पता लगाने का अवसर मिला। प्रतिभागियों को भाषिणी एपीआई और डेवलपर संसाधनों के बारे में बताया गया। इसके साथ ही उन्हें भाषिणी के साथ विकसित करें, भाषिणी के साथ समाधान करें, भाषिणी के साथ स्केल करें और भाषिणी के साथ नवाचार करें जैसी प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया। इसमें शुरुआत कैसे करें, चुनौतियों का समाधान कैसे करें, शुरुआती आइडिया से समाधान को बड़े स्तर (स्केल) तक कैसे ले जाएं और असल दुनिया की समस्याओं और इस्तेमाल के मामलों के लिए भाषा से जुड़े एआई का कैसे उपयोग करें, इन सभी पहलुओं पर चर्चा की गई। इस सत्र का एक मुख्य आकर्षण संवादात्मक "भाषिणी के साथ नवाचार" खंड था, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने आइडिया साझा किए और यह समझा कि भाषिणी किस तरह समस्याओं को प्रोटोटाइप और बड़े स्तर पर लागू होने वाले समाधानों में बदलने में मदद कर सकती है।

डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री अमिताभ नाग ने कहा:
"भाषा एआई तब असल में सार्थक होती है, जब लोग इसका उपयोग करके ऐसी समस्याओं का समाधान कर सकें जो मायने रखती हैं। भाषिणी शिल्पी का उद्देश्य डेवलपर्स, छात्रों और इनोवेटर्स को इस यात्रा में शामिल करना है, ताकि उन्हें प्रयोग करने, प्रश्न पूछने, आइडिया साझा करने और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों को समाधान में बदलने का अवसर मिल सके। नेपाल के साथ हमारे सहयोग का उद्देश्य मिलकर यह इकोसिस्टम बनाना और ऐसी प्रौद्योगिकी तैयार करना है, जो अलग-अलग भाषाओं और समुदायों के लिए कारगर हो।"
लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी, प्रश्नों और खुले तौर पर आइडिया साझा करने से पता चलता है कि नेपाल के प्रौद्योगिकी और नवाचार से जुड़े समुदाय में अलग-अलग भाषाई ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भाषा एआई का उपयोग करने में दिलचस्पी बढ़ रही है।
भाषिणी शिल्पी, डेवलपर्स, शिक्षाविदों और इनोवेटर्स के लिए एक-दूसरे से सीखने, आइडिया साझा करने और अधिक समावेशी डिजिटल भविष्य के लिए मिलकर समाधान तैयार करने के अवसर पैदा करके भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-नेपाल सहयोग को और सुदृढ़ करती है।
इस सत्र ने 'भाषिणी शिल्पी' की भावना को बखूबी प्रस्तुत किया: इसमें न सिर्फ़ यह दिखाया गया कि भाषा एआई क्या कर सकता है, बल्कि प्रश्न पूछने, समस्याओं को सुलझाने, आइडिया साझा करने और यह पता लगाने के लिए भी एक मंच तैयार किया गया कि हम मिलकर क्या बना सकते हैं।
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) के बारे में
डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया निगम (डीआईसी) का हिस्सा है। यह एआई आधारित बहुभाषी डिजिटल समावेशन के लिए भारत का राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म है। भाषिणी 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सपोर्ट करता है, 9 बिलियन से अधिक एआई जानकारी को प्रोसेस करता है, प्रतिदिन 24 मिलियन से ज़्यादा एआई अनुमानों को प्रोसेस करता है और 36 भारतीय टेक्स्ट भाषाओं, 23 भारतीय वॉइस भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। इस तरह, यह भाषा एआई के ज़रिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को ज़्यादा सुलभ बनाता है।
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पीके/केसी/एमके
(रिलीज़ आईडी: 2305211)
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