स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
भारतीय भेषज संहिता आयोग (आईपीसी) ने गुवाहाटी के एनआईपीईआर में औषधियों और पादप औषध विज्ञान में गुणवत्ता, सुरक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने पर एक वैज्ञानिक सम्मेलन का आयोजन किया
आईपीसी ने सात भारतीय भेषज संहिता पादप रसायन सन्दर्भ मानक और पांच वानस्पतिक संदर्भ मानक लॉन्च किए
पूर्वोत्तर में पहले वैज्ञानिक सम्मेलन में नियामक, अकादमिक और वैज्ञानिक संस्थान पादप औषध विज्ञान मानकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए एक साथ आए
पौधों से बनने वाले औषधीय उत्पादों के वैज्ञानिक मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और प्रमाण-आधारित विकास को मज़बूत करने की पहल
प्रविष्टि तिथि:
28 AUG 2026 4:15PM by PIB Delhi
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय भेषज संहिता आयोग (आईपीसी) ने 27 अगस्त 2026 को गुवाहाटी स्थित राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईपीईआर) में "भारतीय भेषज संहिता (आईपी) 2026: औषधियों, खाद्य पदार्थों और पादप औषध विज्ञान में गुणवत्ता, सुरक्षा और नवाचार को बढ़ावा देना" विषय पर एक वैज्ञानिक सम्मेलन और संवादात्मक सत्र का आयोजन किया ।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में पहली बार आयोजित इस संवादात्मक बैठक में नियामक प्राधिकरणों, शिक्षाविदों और वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों और हितधारकों को एक साथ लाया गया ताकि देश में पादप औषध विज्ञान की गुणवत्ता और मानकीकरण को मजबूत करने के लिए बेहतर प्रगति पर विचार-विमर्श किया जा सके।
इस कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण भारतीय भेषज संहिता आयोग (आईपीसी) द्वारा सात भारतीय भेषज संहिता पादप रसायन सन्दर्भ मानक (आईपीपीआरएस) और पांच भारतीय भेषज संहिता पादप रसायन सन्दर्भ मानक (आईपीबीआरएस) का शुभारंभ था, जो आयोग द्वारा इन महत्वपूर्ण संदर्भ मानकों की पहली बार शुरूआत को दर्शाता है। शुभारंभ किए गए मानक हैं: एंड्रोग्राफोलिड, कैप्साइसिन, एम्बेलिन, यूजेनॉल, मार्मेलोसिन/इम्पेरेटोरिन, स्कोपोलेटिन, अम्बेलिफेरोन, टर्मिनलिया अर्जुना, बैकोपा मोनिएरी, टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया, सेंटेला एशियाटिका और ओसिमम सैंक्टम।
पादप औषधियाँ पारंपरिक औषधीय ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं, जिससे सुरक्षित, प्रभावी और मानकीकृत पादप-आधारित औषधियों के विकास में सहायता मिलती है। इनमें औषधि खोज, किफायती स्वास्थ्य सेवा और वैश्विक औषधि क्षेत्र में भारत के बढ़ते योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है।
आईपीपीआरएस और आईपीबीआरएस के शुभारंभ ने पादप-आधारित औषधीय उत्पादों के वैज्ञानिक मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन और नियामक मूल्यांकन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इन संदर्भ मानकों से पादप-औषधीय उत्पादों के साक्ष्य-आधारित विकास, गुणवत्ता नियंत्रण और चिकित्सीय मूल्यांकन में सहायता मिलने की उम्मीद है, जिससे उनका वैज्ञानिक और नियामक आधार मजबूत होगा।
इन मानकों का शुभारंभ एम्स-गुवाहाटी के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अशोक पुराणिक ने किया, जिन्होंने इस अवसर पर सम्मेलन को संबोधित भी किया। उन्होंने इस पहल को जड़ी-बूटियों और पौधों पर आधारित औषधीय उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण को मजबूत करने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम बताया।
भारतीय भेषज संहिता आयोग के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने अपने उद्घाटन भाषण में पादप औषधियों के लिए सुदृढ़ गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने में एनआईपीईआर गुवाहाटी प्रयोगशाला के साथ सहयोग के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैज्ञानिक मानकीकरण को आगे बढ़ाने और गुणवत्ता-सुनिश्चित पादप-आधारित औषधीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे सहयोगात्मक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इस कार्यक्रम में डॉ. बी. कुमार, डीडीसी (आई), सीडीएससीओ (ईजेड), और डॉ. एथेंगबेमो एजंग, एडीसी, नागालैंड, के साथ-साथ नियामक, शैक्षणिक और वैज्ञानिक समुदायों के विशेषज्ञ और हितधारक भी उपस्थित थे।
इस बैठक ने नियामक प्राधिकरणों, एनआईपीईआर गुवाहाटी और आईपीसी के विशेषज्ञों के बीच संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया, जिसका मुख्य उद्देश्य औषधीय पौधों से प्राप्त साक्ष्य-आधारित दवाओं को बढ़ावा देना था। इस पहल से सुरक्षित, प्रभावी और किफायती पादप-आधारित चिकित्सीय विकल्पों की उपलब्धता को मजबूत करने के साथ-साथ हर्बल और फाइटोफार्मास्युटिकल दवाओं के क्षेत्र में आगे अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक प्रगति को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है।
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पीके/केसी/जेके/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2304338)
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