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डीआरआई ने उत्तर प्रदेश के जेवर में अवैध ड्रग निर्माण वाली जगह का भंडाफोड़ किया; 30 किलोग्राम ड्रग्स जब्त और दो शख्स गिरफ्तार


मादक पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला 30 किलोग्राम प्रारंभिक रसायन और साथ ही संपूर्ण उपकरण एवं मशीनें भी जब्त की गईं

प्रविष्टि तिथि: 13 AUG 2026 8:37PM by PIB Delhi

मादक पदार्थों और मनोरोगी पदार्थों के अवैध निर्माण और तस्करी पर लगातार कार्रवाई करते हुए, राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने एक और गुप्त औषधि निर्माण वाली जगह का भंडाफोड़ किया है। यह सेंटर उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के जेवर इलाके में एक आवासीय परिसर से संचालित हो रहा था।

09/10 अगस्त 2026 को, डीआरआई के एक खुफिया-आधारित अभियान के चलते लगभग 30 किलोग्राम एंफेटेमिन/ मध्यवर्ती रूप में, मादक पदार्थों के निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लगभग 30 किलोग्राम पूर्ववर्ती रसायन, और मनोरोगी पदार्थों के गुप्त निर्माण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले संपूर्ण उपकरण और मशीनें जब्त की गईं।

 

परिसर से बरामद किए गए विभिन्न प्रकार के रसायन, उपकरण और प्रतिबंधित वस्तुएं

 

परिसर की तलाशी में एक पूरी तरह से तैयार किया गया गुप्त निर्माण सेटअप मिला, जिसमें विद्युत भट्टियां, होज पाइप, वैज्ञानिक और मापन उपकरण, अभिकर्मक और मनोरोगी पदार्थों के निर्माण के लिए जरूरी अन्य उपकरण और मशीनें शामिल थे। परिसर से कई प्रकार के रसायन, कच्चा माल और अभिकर्मकों से भरे कई तरल कंटेनर भी बरामद किए गए, साथ ही अलग-अलग कंटेनरों में रखे सफेद रंग के पाउडर/ क्रिस्टलीय पदार्थ भी मिले, जिनकी फील्ड किट से जांच करने पर एंफेटेमिन की मौजूदगी का पता चला, जो नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस (एनडीपीएस) अधिनियम 1985 के अंतर्गत सूचीबद्ध एक मनोरोगी पदार्थ है।

बरामदगी, निर्माण उपकरण, एंफेटेमिन और परिसर से मिले रसायनों से संकेत मिलता है कि एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मनोरोगी पदार्थों के अवैध निर्माण के लिए एक गुप्त सुविधा का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस गुप्त सुविधा का संचालन कर रहे एक विदेशी नागरिक और उसकी भारतीय महिला सहयोगी को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया है।

शुरुआती जांच से पता चला कि आरोपी शख्स रात के समय उत्पादन उपकरण और कच्चा माल परिसर में लाते थे, लगभग एक सप्ताह तक संयंत्र स्थापित करके उसे चलाते थे, और उसके बाद उपकरण हटाकर परिसर की सफाई कर देते थे। बताया जाता है कि स्थानीय निवासियों के बीच संदेह से बचने के लिए यही चक्र दो से तीन महीने के अंतराल पर दोहराया जाता था।

ड्रग तस्करी के गुप्त धंधे के खिलाफ डीआरआई की हालिया कार्रवाई

यह अभियान मादक पदार्थों के गुप्त निर्माण इंफ्रास्ट्रक्चर और अवैध उत्पादन एवं तस्करी में सहयोग करने वाले नेटवर्क को खत्म करने पर डीआरआई के गहन प्रयासों का परिणाम है। बीते एक महीने में, डीआरआई ने तीन अन्य गुप्त निर्माण सुविधाओं का भंडाफोड़ किया—गुजरात के अंकलेश्वर में एक मेफेड्रोन निर्माण वाली जगह, जहां से मेफेड्रोन और बड़ी मात्रा में रसायन बनने से पहले के केमिकल जब्त किए गए और तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया; महाराष्ट्र के सातारा में एक अल्प्राजोलम और डायजेपाम निर्माण वाली जगह, जहां से तैयार और मध्यवर्ती मनोरोगी पदार्थ तथा लगभग 400 लीटर कच्चा माल जब्त किया गया और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया; और महाराष्ट्र के अंबरनाथ में केंद्रित एक ट्रामाडोल मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात नेटवर्क, जो नाइजीरिया को 1 लाख ट्रामाडोल निर्यात करने के लिए जुड़ा था, जिसके चलते तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

लगातार चलाए गए ये अभियान अवैध मादक पदार्थों के निर्माण के पूरे इकोसिस्टम को पहचानने और नष्ट करने पर डीआरआई के निरंतर केंद्रित रहने को प्रदर्शित करते हैं—जिसमें रासायनिक पदार्थों की खरीद, गुप्त प्रयोगशालाओं की स्थापना, वित्तपोषण, तस्करी, भंडारण और मादक पदार्थों एवं मनोरोगी पदार्थों के निर्यात के प्रयास शामिल हैं। ये अभियान मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क की ओर से निर्माण गतिविधियों को छिपाने और पकड़े जाने से बचने के लिए अपनाए जा रहे अधिक परिष्कृत तरीकों को भी उजागर करते हैं।

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पीके/केसी/एमएम


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