सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
आर्थिक बाधाओं से लेकर डिजिटल उद्यमिता तक: अमित आर्य का स्वरोजगार का सफर
प्रविष्टि तिथि:
19 AUG 2026 6:14PM by PIB Delhi
हरियाणा निवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आने वाले अमित आर्य स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार के लिए आय का एक स्थिर स्रोत बनाना चाहते थे। आर्थिक तंगी और उनके क्षेत्र में रोजगार के सीमित अवसरों ने हालांकि उनके सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दीं। व्यवसाय शुरू करने के लिए पर्याप्त धन न होने के कारण वे स्थायी आजीविका स्थापित करने में असमर्थ रहे।
इसी दौरान उनके गांव में डिजिटल और ई-गवर्नेंस सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता ने एक अवसर प्रस्तुत किया। अमित ने एक डिजिटल सेवा केंद्र (डीएससी) स्थापित करने की कल्पना की, जो ग्रामीण नागरिकों को आवश्यक डिजिटल सेवाएं प्रदान कर सके और साथ ही उनके लिए आय का एक विश्वसनीय स्रोत भी सृजित कर सके।
आकांक्षा को अवसर में बदलना
अमित के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्होंने एचबीसीकेएन द्वारा आयोजित एक जागरूकता शिविर में भाग लिया। उन्हें इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) योजना के तहत उपलब्ध वित्तीय सहायता के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने आवेदन किया और 2019 में उन्हें एक लाख रुपये का सावधि ऋण प्राप्त हुआ।

आर्थिक सहायता मिलने से अमित अपने गांव में एक डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित करने में सक्षम हुए और स्वरोजगार के अपने सपने को साकार किया। तब से यह केंद्र एक सफल उद्यम के रूप में विकसित हो चुका है, जो गांव और आसपास के समुदायों के लोगों को डिजिटल और ई-गवर्नेंस सेवाएं प्रदान करता है।
एक स्थायी आजीविका
डिजिटल सेवा केंद्र की स्थापना से अमित की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। उनकी वर्तमान वार्षिक आय लगभग 2.30 लाख रुपये है, जिससे उन्हें अधिक आर्थिक स्थिरता मिली है और वे अब अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम हैं।
इस उद्यम ने अमित को नियमित रूप से ऋण चुकाने में भी सक्षम बनाया है, जो उनकी आजीविका पहल की स्थिरता को दर्शाता है। व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधनों को जुटाने के लिए संघर्ष करने से लेकर, अब उन्होंने अपने स्वयं के उद्यम के माध्यम से आय का एक स्वतंत्र स्रोत स्थापित कर लिया है।
सशक्तिकरण की एक कहानी
अमित आर्य की कहानी यह दर्शाती है कि समय पर मिली वित्तीय सहायता किस प्रकार व्यक्तियों को आर्थिक बाधाओं को दूर करने और स्वरोजगार प्राप्त करने में मदद कर सकती है। एनबीसीएफडीसी योजना के तहत मिले एक लाख रुपये के सावधि ऋण ने उन्हें अपने विचार को एक सफल आजीविका में बदलने के लिए आवश्यक प्रारंभिक सहायता प्रदान की।
आज उनका डिजिटल सेवा केंद्र न केवल उन्हें स्थिर आय प्रदान करता है बल्कि ग्रामीण नागरिकों को उनके घर के पास ही विभिन्न डिजिटल और ई-गवर्नेंस सेवाओं तक पहुंचने में भी मदद करता है। आर्थिक तंगी से लेकर सफल स्वरोजगार तक की उनकी यात्रा इस बात का एक उदाहरण है कि संस्थागत वित्तीय सहायता तक पहुंच किस प्रकार स्थायी आजीविका के अवसर पैदा कर सकती है।
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पीके/केसी/पीसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2301319)
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