विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
टीडीबी-डीएसटी ने घाव की देखभाल के लिए उन्नत ऊतक-व्युत्पन्न जैविक ड्रेसिंग के व्यावसायीकरण के लिए गुजरात के वडोदरा स्थित ऑर्थोग्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड की सहायता की
प्रविष्टि तिथि:
19 AUG 2026 4:38PM by PIB Delhi
ऊतक (टिश्यू) अभियांत्रिकी में हुई प्रगति को गंभीर घावों के चिकित्सकीय उपचार हेतु उपयोगी समाधानों में परिवर्तित करने के उद्देश्य से, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने "उन्नत ऊतक व्युत्पन्न जैविक ड्रेसिंग का उत्पादन सेटअप" नामक परियोजना के लिए गुजरात के वडोदरा स्थित मेसर्स ऑर्थोग्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड को वित्तीय सहायता प्रदान की है। टीडीबी के सहयोग से, कंपनी नैदानिक घाव उपचार अनुप्रयोगों, जिनमें जीर्ण घाव, मधुमेह संबंधी पैर के अल्सर और जलन शामिल हैं, के लिए स्वदेशी जैविक ड्रेसिंग के निर्माण की क्षमता स्थापित करेगी।
ऑर्थोग्राफ्ट डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त मेडिकल डिवाइस स्टार्टअप है जो नैदानिक पुनर्निर्माण और कार्यशील रिपेयर के लिए ऊतक विकल्प विकसित करने में लगी हुई है। कंपनी व्यवहार्य मानव ऊतक को लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले ऊतक विकल्पों में संसाधित करने के लिए अपनी विशेष प्रौ्द्योगिकी विकसित कर रही है। साथ ही, घाव भरने की प्रक्रिया के लिए प्रासंगिक मूल ऊतक की प्रमुख जैविक और संरचनात्मक विशेषताओं को भी बनाए रखती है।
इस परियोजना का मूल आधार एक उन्नत ऊतक प्रसंस्करण पद्धति है जिसे ऊतक की गुणवत्ता और जैवसक्रिय घटकों को संरक्षित रखते हुए प्रभावी रूप से कोशिकाओं को हटाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। परिणामस्वरूप विकसित की जा रही जैविक ड्रेसिंग में बेहतर तन्यता शक्ति, जैवसक्रिय कारकों का अधिकतम प्रतिधारण और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नम घाव ड्रेसिंग के समान नमी वाष्प संचरण दर (एमवीटीआर) होती है।
इस प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण पहलू उपयुक्त जैवचिकित्सा ऊतक सामग्री को उच्च-मूल्यवान, चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक जैविक ड्रेसिंग में परिवर्तित करने का इसका दृष्टिकोण है। यह परियोजना ऊतक अभियांत्रिकी, जैवसामग्री विज्ञान और विशेषीकृत प्रसंस्करण को मिलाकर उन्नत घाव-देखभाल उत्पादों का विकास करती है, जिनका उपयोग दीर्घकालिक और कठिन उपचार वाले घावों के प्रबंधन में किया जा सकता है।
टीडीबी की सहायता से, ऑर्थोग्राफ्ट वडोदरा स्थित गुजरात सरकार के सावली टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर में अपने उत्पादन बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करेगी, जहां कंपनी ने एक बायो-इनक्यूबेशन सुविधा किराए पर ली है। यह स्थान चिकित्सा उपकरण विकास और उसके व्यावहारिक उपयोग के लिए आवश्यक जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं विकास बुनियादी ढांचे तक पहुंच प्रदान करता है। कंपनी ने परीक्षण उद्देश्यों के लिए चिकित्सा उपकरणों के निर्माण हेतु सीडीएससीओ से आवश्यक लाइसेंस भी प्राप्त कर लिए हैं। साथ ही, प्रौद्योगिकी के आगे के विकास और नैदानिक उपयोग के लिए तृतीयक देखभाल अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के साथ सहयोग की संभावनाओं का पता लगा रही है।
कंपनी ने ऊतक प्रसंस्करण और ऊतक प्रतिस्थापन में बहुआयामी विशेषज्ञता विकसित की है और वर्तमान में इसके पास दो स्वीकृत अमेरिकी पेटेंट हैं। यह आईआईटी रोपड़ सहित राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों और बहुविशेषज्ञ अस्पतालों के साथ मिलकर अपनी प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म के विकास और कार्यान्वयन की दिशा में काम कर रही है। ऑर्थोग्राफ्ट ने पहले भारत सरकार द्वारा समर्थित बहु-संस्थागत अनुसंधान एवं विकास और व्यावसायीकरण परियोजनाओं में एक उद्योग स्टार्टअप भागीदार के रूप में भाग लिया है।
इस अवसर पर टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत जैव सामग्री और ऊतक-इंजीनियरिंग उत्पाद भारत के चिकित्सा प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। ऑर्थोग्राफ्ट को टीडीबी की सहायता का उद्देश्य एक भारतीय स्टार्टअप को ऊतक प्रसंस्करण की अपनी विशेषज्ञता को व्यावसायिक रूप से निर्मित घाव-देखभाल उत्पादों में बदलने में सक्षम बनाना है। ऐसी प्रौद्योगिकियां उन्नत स्वास्थ्य देखभाल सामग्रियों में स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ बना सकती हैं। साथ ही, भारतीय नवाचारों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकती हैं।”
ऑर्थोग्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व ने टीडीबी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहायता से कंपनी को समर्पित उत्पादन क्षमता स्थापित करने और अपने स्वामित्व वाले ऊतक प्रसंस्करण प्लेटफॉर्म को चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक उत्पादों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को गति देने में मदद मिलेगी। कंपनी का लक्ष्य उन्नत ऊतक प्रतिस्थापनों का एक स्वदेशी पोर्टफोलियो तैयार करना और उच्च गुणवत्ता वाले जैविक घाव-उपचार समाधानों को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने में योगदान देना है।

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(रिलीज़ आईडी: 2301254)
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