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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऋण वितरण में मजबूत वृद्धि दर्ज की


वित्त वर्ष 2025-26 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का सकल बकाया ऋण 10.3 प्रतिशत बढकर 5.78 लाख करोड़ रुपये हुआ; औसत प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण की उपलब्धि एएनबीसी के 91.7 प्रतिशत तक पहुंची

कमजोर वर्गों को दिया गया ऋण 3.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा; संस्थागत ऋण तक समावेशी पहुंच को बढ़ावा देने में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की भूमिका हुई और मजबूत

प्रविष्टि तिथि: 18 AUG 2026 4:17PM by PIB Delhi

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) ने ऋण वितरण का विस्तार करके और प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (पीएसएल) पर अपना मजबूत ध्यान बनाये रखते हुए ग्रामीण आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत किया।

वित्त वर्ष 2024-25 में 5,24,163 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में सकल बकाया ऋण 10.3 प्रतिशत वृद्धि के साथ 5,78,349 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, भारतीय रिज़र्व बैंक के प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण ढांचे के तहत आरआरबी का प्रदर्शन वर्ष के दौरान उत्कृष्ट रहा। 75 प्रतिशत के निर्धारित समग्र पीएसएल लक्ष्य के मुकाबले औसत उपलब्धि ‘समायोजित शुद्ध बैंक ऋण’ (एएनबीसी) के 91.7 प्रतिशत तक पहुंच गई। लगभग सभी आरआरबी ने समग्र पीएसएल लक्ष्य हासिल किया, जो प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को समर्थन देने और वित्तीय समावेशन को आगे बढाने के प्रति आरआरबी के मजबूत विशेष ध्यान को दर्शाता है।

कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां आरआरबी के ऋण पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा घटक बनी रहीं, जिसमें कुल प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र का 77 प्रतिशत यानी 3.78 लाख करोड़ रुपये का बकाया ऋण शामिल है। कृषि ऋण कृषि क्षेत्र के कुल ऋण का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा था, जिसमें फसल खेती, संबद्ध कृषि गतिविधियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निवेश को समर्थन प्रदान किया।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को दिया गया ऋण 66,978 करोड़ रुपये (कुल पीएसएल का 13.6 प्रतिशत) रहा, जो ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार सृजन को समर्थन देने में आरआरबी की महत्वपूर्ण भूमिका की पुनः पुष्टि की। एमएसएमई ऋण का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सूक्ष्म उद्यमों को दिया गया था, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पहली पीढ़ी के पीढी के उद्यमियों, स्वरोजगार प्राप्त व्यक्तियों, कारीगरों और छोटी व्यावसायिक इकाइयों को वित्तपोषित करने पर आरआरबी के ध्यान को दर्शाता है। एमएसएमई ऋण में सेवा क्षेत्र का हिस्सा सबसे बड़ा था, जिसके बाद विनिर्माण उद्यमों और खादी व ग्रामोद्योग का स्थान रहा।

आरआरबी ने कमजोर वर्गों को 3.49 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया, जो वित्तीय समावेशन और संस्थागत ऋण तक न्‍lयायसंगत पहुंच के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दोहराता है। इसके अलावा आवास, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक अवसंरचना के लिए ऋण उपलब्ध कराने से समावेशी और सतत विकास को बढावा मिला। इससे मानव पूंजी निर्माण, परिवारों के लिए परिसंपत्तियों के सृजन, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने तथा स्थानीय बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहायता मिली।

कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान आरआरबी का वित्तीय प्रदर्शन ग्रामीण ऋण के निरंतर विस्तार, राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के साथ मजबूत तालमेल तथा किसानों, सूक्ष्म उद्यमों और अन्य वंचित वर्गों को निरंतर सहायता को दर्शाता है। इस प्रकार आरआरबी वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने, ग्रामीण आजीविकाओं को सुदृढ करने तथा समावेशी और संतुलित आर्थिक विकास के केंद्र सरकार के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण आधार स्तंभ बने हुए हैं।

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पीके/केसी/आईएम/एसएस


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