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राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग ने होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा अन्य चिकित्सा पद्धतियों के अभ्यास के संबंध में नियामक स्थिति स्पष्ट की

प्रविष्टि तिथि: 14 AUG 2026 8:16PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) ने होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा अन्य चिकित्सा पद्धतियों के अभ्यास से संबंधित अपनी नियामक स्थिति स्पष्ट की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लागू प्रावधानों को सही तरीके से और उनके उचित नियामक संदर्भ में समझा और प्रस्तुत किया जाए।

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (होम्योपैथी चिकित्सकों के लिए व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता संहिता) विनियम, 2022 के विनियम 36(य) के अनुसार, कोई होम्योपैथिक चिकित्सक होम्योपैथी के अलावा किसी अन्य चिकित्सा पद्धति का अभ्यास नहीं कर सकता।

हालांकि विनियम 36(य) के प्रावधान में विशेष रूप से कहा गया है कि यह प्रतिबंध किसी होम्योपैथिक चिकित्सक को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम या केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा संचालित किसी अन्य कार्यक्रम के अंतर्गत चिकित्सा सेवाएं देने से नहीं रोकता और ही इसे प्रतिबंधित करता है। बशर्ते कि संबंधित चिकित्सक ने सक्षम प्राधिकारी द्वारा मान्यता प्राप्त या निर्धारित प्रशिक्षण अथवा पाठ्यक्रम पूरा किया हो।

आयोग ने राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (होम्योपैथी स्नातक डिग्री पाठ्यक्रम – बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी -बी.एच.एम.एस.) विनियम, 2022 के विनियम 14 की उप-विनियम (7) की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। यह प्रावधान सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में होम्योपैथिक चिकित्सा स्नातकों की भूमिका को मान्यता देता है।

एनसीएच ने यह स्पष्टीकरण इसलिए जारी किया है ताकि विनियम 36(य) के प्रावधानों को सही तरीके से तथा उनके उचित नियामक संदर्भ में समझा और प्रस्तुत  किया जा सके।

विस्तृत स्पष्टीकरण के लिए यहां क्लिक करें।

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पीके/केसी/एसके


(रिलीज़ आईडी: 2299734) आगंतुक पटल : 58
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