महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
बच्चों को सुरक्षित और संरक्षित वातावरण में डे केयर के लिए पालना योजना के तहत आंगनवाड़ी सह शिशुगृह सुविधा
प्रविष्टि तिथि:
12 AUG 2026 4:03PM by PIB Delhi
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि मंत्रालय की पालन योजना के तहत 1 अप्रैल 2022 से आंगनवाड़ी सह क्रेच (शिशुगृह) संचालित हो रहे हैं। इसका उद्देश्य रोजगार और पद को संज्ञान में न रखते हुए सभी माताओं के 6 महीने से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को सुरक्षित वातावरण में डे केयर क्रेच (शिशुगृह) की सुविधा प्रदान करना है। साथ ही, पोषण संबंधी सहायता, बच्चों के स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विकास, विकास निगरानी, टीकाकरण, शिक्षा आदि जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। मिशन शक्ति के प्रमुख घटक समर्थ्य के अंतर्गत पालना एक केंद्र प्रायोजित योजना है और इसे केंद्र और राज्य सरकारों तथा विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के बीच 60:40 के वित्त पोषण अनुपात के साथ कार्यान्वित किया जाता है। पूर्वोत्तर और विशेष श्रेणी के राज्यों में यह अनुपात 90:10 का है। विधानमंडल रहित केंद्र शासित प्रदेशों के लिए, केंद्र सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्त पोषण किया जाता है। योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को व्यय विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के एकल नोडल एजेंसी एसएनए-स्पर्श तंत्र के माध्यम से निधि जारी की जाती है । अभी देश भर में कुल 4,172 आंगनवाड़ी-सह-क्रेच संचालित हैं।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने सूचित किया है कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के प्रावधानों को सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत समाहित किया गया है, जो 21.11.2025 से प्रभावी है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 67 में 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए शिशुगृह (क्रेच) सुविधाओं का प्रावधान है। संहिता के अंतर्गत, राज्य के अधीन प्रतिष्ठानों से संबंधित प्रवर्तन का दायित्व संबंधित राज्य सरकारों का है। केंद्रीय प्रतिष्ठानों में मातृत्व लाभ प्रावधानों के अनुपालन करने के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत नामित प्रवर्तन प्राधिकरण मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) संगठन है।
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पीके/केसी/एकेवी/केएस
(रिलीज़ आईडी: 2298472)
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