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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया


आज हमें श्री राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा का विमोचन करने का अवसर मिला है; मुझे इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर प्रसन्‍नता का अनुभव हो रहा है: प्रधानमंत्री

उनका जीवन लोगों की सेवा और राष्ट्र की प्रगति के प्रति समर्पित रहा है: प्रधानमंत्री

कोविंद जी के साथ मेरा दीर्घकालिक परिचय और मेरे प्रति उनका विशेष स्नेह तथा आत्मीयता मेरे लिए सबसे बड़ी संपत्ति रही है: प्रधानमंत्री

महात्मा गांधी, बाबासाहेब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने एक नए भारत के निर्माण का सपना देखा था, जहां सबसे निर्धन और सबसे वंचित लोगों को भी सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने का अवसर मिल सके: प्रधानमंत्री

कोविंद जी जैसे व्यक्तियों ने न केवल लगन और योग्यता से अपना जीवन बदला, बल्कि सदियों पुराने उस दृष्टिकोण और स्‍वप्‍न को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है: प्रधानमंत्री

राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी, वे 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर काम कर रहे हैं; यह संकल्‍प लोकतंत्र में एक नये अध्याय का शुभारंभ कर सकता है: प्रधानमंत्री

प्रविष्टि तिथि: 12 AUG 2026 12:39PM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद की आत्मकथा "ट्रायम्‍फ ऑफ इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्‍ट्रगल्‍स" का विमोचन किया। प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमें श्री राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा का विमोचन करने का अवसर मिला है और मुझे प्रसन्‍नता है कि मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बन सका।"

प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपने आत्‍मीय व्यक्तिगत संबंधों का स्‍मरण करते हुए कोविंद जी के मार्गदर्शन और वर्षों से उनके स्नेह के प्रति अपने गहरे सम्मान को रेखांकित किया। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी के साथ मेरा लंबा परिचय, उन्हें निकटता से जानने का सौभाग्य, राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और सबसे बढ़कर, मेरे प्रति उनका विशेष स्नेह और आत्मीयता, ये सब मेरे लिए सबसे बड़ी संपत्ति रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति के व्यक्तित्व और सुदृढ़ क्षमताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह साहित्यिक कृति राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों का एक चिरस्थायी प्रमाण होगी। श्री मोदी ने कहा, “मैं पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूं कि राम नाथ कोविंद जी की आत्मकथा स्वयं भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बन जाएगी।”

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के प्रति कोविंद जी के आजीवन योगदान की व्‍यापकता की सराहना करते हुए और इस बारे में अधिक विवरण न देते हुए लोगों को स्वयं इस वृत्तांत को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने कहा कि पुस्तक विमोचन में केवल एक परिचयात्मक प्रस्तुति ही होनी चाहिए और बेहतर यही है कि आप सभी पुस्तक को पढ़कर ही इसका पूरा लाभ उठाएं।

प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी के लिए इस संस्मरण के शैक्षिक महत्व का उल्‍लेख करते हुए पूर्व राष्ट्रपति के शब्दों से भावी पीढ़ियों को प्रेरणा लेने की इच्छा जताई। श्री मोदी ने कहा, “देश की नई पीढ़ी को भी उनके लेखन और अनुभवों को पढ़ना चाहिए, जिससे सभी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।”

पुस्तक के शीर्षक, "ट्रायम्‍फ ऑफ इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्‍ट्रगल्‍स" का विश्लेषण करते हुए, प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत कठिनाइयों और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक सफलता के संदर्भ में इसके दोहरे महत्व की व्याख्या की। श्री मोदी ने कहा, "जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के फलस्वरूप प्राप्त विजय भारत गणराज्य और उसके लोकतंत्र की है।"

प्रधानमंत्री ने आम मानवीय प्रवृत्तियों की तुलना पूर्व राष्ट्रपति की उदारता से करते हुए कहा कि जहां कई लोग अपनी कठिनाइयों के लिए समाज को दोषी ठहराते हैं, वहीं कोविंद जी का उदार हृदय, जो भारतीय मूल्यों में गहराई से निहित है, समाज को अपनी सफलता में समान भागीदार मानता है। श्री मोदी ने कहा, “जब हृदय उदार होता है और भारतीय मूल्य समाहित होते हैं, तो व्यक्ति समाज की कमियां ढूंढने में समय नष्‍ट नहीं करता, बल्कि उसके सकारात्मक पक्ष पर ध्यान केंद्रित करता है।”

प्रधानमंत्री ने आत्मकथा से बचपन की एक अत्‍यंत हृदयविदारक घटना का वृतांत सुनाया। इस दुखद घटना में कानपुर देहात में उनके घर में लगी आग में कोविंद जी की माताजी की जान उस वक्‍त चली गई जब वह घर के आवश्‍यक सामान को बचाने की कोशिश कर रही थीं। श्री मोदी ने कहा, “आप कल्पना कीजिए कि इतनी कम उम्र में ऐसी घटना होना और मां को खो देना कितना कष्‍टदायक रहा होगा!”

इस त्रासदी से उपजी दृढ़ता की चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे एक पड़ोसी महिला ने मां की तरह कोविंद जी के पालन-पोषण में सहायता की, जिसने सामाजिक सद्भाव के प्रति उनकी समझ को गहराई से प्रभावित किया। श्री मोदी ने कहा, "इससे उन्होंने समाज की एकता और सद्भाव की शक्ति को समझा और उन कठिनाइयों ने कोविंद जी को और भी मजबूत बनाया।"

प्रधानमंत्री ने इस त्रासदी के बाद पिता की अहम भूमिका पर बल देते हुए बताया कि कोविंद जी के पिता ने परिवार का कुशलतापूर्वक मार्गदर्शन किया और बच्चों में अच्छे संस्कार डाले। श्री मोदी ने कहा, “जिस तरह उन्होंने परिवार को संभाला और बच्चों को अच्छे संस्कार दिए, उसी वजह से कोविंद जी अपने पिता को अपना आदर्श मानते हैं।”

संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए कोविंद जी के शिक्षा के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने देश के सर्वोच्च पद तक उनकी असाधारण यात्रा पर भी प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने कड़ी मेहनत की और संसाधनों की कमी को अपनी दुर्बलता नहीं बनने दिया, जिसके परिणामस्वरूप वे उस स्‍थान तक पहुंचे जिसकी उस समय लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी।”

प्रधानमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति की अत्‍यंत विनम्रता की प्रशंसा करते हुए एक बेहद भावुक क्षण का स्‍मरण किया जब कोविंद जी ने अपने गांव परौंख लौटकर वहां की मिट्टी को प्रणाम किया और अपने पूर्व शिक्षकों के चरण स्पर्श किए। श्री मोदी ने कहा, “उनके आचरण ने भारत के नैतिक मूल्यों की ऐसी छवि विश्व के समक्ष प्रस्तुत की जिस पर प्रत्येक भारतीय गर्व कर सकता है।”

प्रधानमंत्री ने सदियों की दासता से उत्‍पन्‍न ऐतिहासिक सामाजिक-आर्थिक आघातों पर विचार करते हुए, महात्मा गांधी, बाबासाहेब अंबेडकर और ज्योतिबा फुले जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के अथक संघर्षों और दूरदर्शी सपनों को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा, “कितने महान व्यक्तित्वों ने ऐसे भारत के पुनर्निर्माण का सपना देखा था, जहां सबसे निर्धन व्यक्ति को भी सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिल सके।”

प्रधानमंत्री ने इन ऐतिहासिक आकांक्षाओं को आधुनिक उपलब्धियों से जोड़ते हुए, कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों को समतावादी समाज के सदियों पुराने सपने को अथक परिश्रम से साकार करने का श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने परिश्रम और क्षमता से न केवल अपना जीवन बदला, बल्कि सदियों पुराने उस स्‍वप्‍न को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई।”

इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित युवाओं की निरंतर आवश्यकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने ऐसी पीढ़ी का आह्वान किया जो बाधाओं से विचलित न हो और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता को बनाए रखने का साहस बनाए रखे। श्री मोदी ने कहा, “इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा।”

प्रधानमंत्री ने आत्मकथा को महत्वपूर्ण प्रेरक साधन बताते हुए सुझाव दिया कि कोविंद जी के जीवन का विस्तृत विवरण युवा शक्ति को आकार देने के लिए एक निर्णायक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगा। श्री मोदी ने कहा, "कोविंद जी की यह आत्मकथा ऐसी युवा शक्ति के निर्माण के लिए आवश्यक प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।"

प्रधानमंत्री ने कोविंद जी के राजनीतिक उदय का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि कैसे मोरारजी देसाई के साथ काम करने से उनकी राष्ट्र सेवा की अंतर्निहित इच्छा को राजनीति में एक समर्पित करियर में परिवर्तित होने का अवसर मिला। श्री मोदी ने कहा, "कोविंद जी के भीतर जो राष्ट्र सेवा की भावना थी, मोरारजी के साथ काम करके उन्हें उसके लिए एक मार्ग मिल गया।"

प्रधानमंत्री ने सेवा के निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए संसद में, राज्यपाल के रूप में और अंततः राष्ट्रपति के रूप में विभिन्न भूमिकाओं में कोविंद जी के अटूट समर्पण की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने सेवा को अपना लक्ष्य बनाकर कार्य किया और संसद में उनका कार्यकाल इसका साक्षी है।”

प्रधानमंत्री ने कोविंद जी के राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद के अथक योगदानों का उल्‍लेख करते हुए 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके निरंतर नेतृत्व की प्रशंसा की, जिसमें देश के लोकतांत्रिक ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है। श्री मोदी ने कहा, "मेरा मानना ​​है कि देश की जनता कोविंद जी की कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से बहुत कुछ सीख सकती है।"

सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हुए आत्मकथा लिखना कितना कठिन काम है, यह स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने कोविंद जी का इस महत्वपूर्ण सामाजिक योगदान के लिए आभार व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी ने यह कार्य हम सबके लिए किया है क्योंकि उनके जीवन में बहुत कुछ ऐसा है जिसमें निर्धन और वंचित वर्गों से आने वाले सभी लोग अपने जीवन की झलक देख सकते हैं।”

आत्‍मकथा में निहित व्यापक नैतिक शिक्षाओं का विस्तार से वर्णन करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि पूर्व राष्ट्रपति की कहानी किस प्रकार सबसे कठिन समय में भी शुचिता और सत्‍यनिष्‍ठा बनाए रखने की अटूट शक्ति को दर्शाती है। श्री मोदी ने कहा, “कोविंद जी ने समाज को निरंतर यह प्रेरणा दी है कि कैसे यह पवित्रता हमें विभिन्न पदों की जिम्मेदारियों को निभाते हुए राष्ट्रीय सेवा करने की शक्ति प्रदान करती है।”

पुस्तक के ऐतिहासिक महत्व की भरपूर प्रशंसा करते हुए और अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि यह साहित्यिक कृति व्यक्तिगत तथा राष्ट्रीय दोनों ही महत्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए एक आवश्यक संग्रह के रूप में कार्य करेगी। श्री मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि कोविंद जी की आत्मकथा न केवल उनके जीवन की, बल्कि हमारे लोकतंत्र की महत्वपूर्ण स्मृतियों को भी सुरक्षित रखेगी।”

 

 

 

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पीके/केसी/एसकेजे/वाईबी


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